झारखंड

चतरा में एसपी आवास के पास गोलीकांड, निजी सुरक्षा गार्ड की हत्या; जांच तेज

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
चतरा में एसपी आवास के पास निजी गार्ड की गोली मारकर हत्या
Chatra SP Residence Guard Murder Case

चतरा, एजेंसियां। झारखंड के चतरा जिले में एसपी आवास के पास दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया। इस वारदात में एक निजी सुरक्षा गार्ड की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना दो निजी सुरक्षा गार्डों के बीच हुए विवाद के बाद हुई।

 

मामूली विवाद के बाद चली गोली

 

पुलिस के अनुसार, घटना चतरा एसपी आवास के पास हुई। शुरुआती जांच में पता चला है कि निजी सुरक्षा गार्डों के बीच खैनी मांगने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद आरोपी गार्ड ने अपनी सर्विस राइफल से साथी गार्ड पर गोली चला दी। गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

 

मृतक और आरोपी दोनों थे निजी सुरक्षा गार्ड

 

जांच में सामने आया है कि दोनों गार्ड एक ही निर्माण कंपनी से जुड़े थे। मृतक की पहचान अतुल सिंह के रूप में बताई गई है, जबकि आरोपी गार्ड को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हथियार को भी कब्जे में लिया है।

 

पुलिस कर रही कई पहलुओं से जांच

 

घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और घटना के दौरान मौजूद अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।

 

घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

 

एसपी आवास जैसे संवेदनशील स्थान के पास गोली चलने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

झारखंड

View more
झारखंड में हीमोफीलिया मरीजों के लिए फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की कमी
झारखंड में हीमोफीलिया मरीजों पर दवा संकट, कई जिलों में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 का स्टॉक खत्म

रांची। झारखंड में हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज इन दिनों जरूरी दवाओं की कमी से गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। रांची सदर अस्पताल सहित चतरा, पलामू, हजारीबाग, रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम, गढ़वा, गोड्डा, धनबाद और सिमडेगा समेत कई जिलों के हीमोफीलिया डे-केयर केंद्रों में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 का स्टॉक खत्म होने से नियमित उपचार प्रभावित हो रहा है।   फैक्टर की कमी से बढ़ी मरीजों की चिंता   हीमोफीलिया सोसाइटी, रांची के सचिव संतोष कुमार जायसवाल ने बताया कि पिछले दो से तीन महीनों से राज्य के कई सरकारी अस्पतालों में फैक्टर-8 की उपलब्धता नहीं है, जबकि अब कई जिलों में फैक्टर-9 का भी स्टॉक समाप्त हो चुका है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।   समय पर उपचार नहीं मिलने से बढ़ सकता है खतरा   विशेषज्ञों के अनुसार हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर में खून का थक्का बनने की क्षमता प्रभावित होती है। फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की कमी होने पर मामूली चोट भी गंभीर रक्तस्राव का कारण बन सकती है। समय पर दवा नहीं मिलने से जोड़ों में सूजन, दर्द और स्थायी विकलांगता का खतरा भी बढ़ सकता है।   बच्चों की पढ़ाई और जीवन पर भी असर   डॉक्टरों का कहना है कि लगातार उपचार बाधित होने से बच्चों में बार-बार रक्तस्राव की समस्या बढ़ती है, जिससे उनकी पढ़ाई, दैनिक गतिविधियों और जीवन की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।   रांची सदर अस्पताल ने दिया राहत का भरोसा   रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने स्वीकार किया कि कुछ समय से फैक्टर की कमी थी, लेकिन अब फैक्टर की नई खेप अस्पताल पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि अन्य आवश्यक दवाएं भी जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी और भविष्य में दवा की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाएगी।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
NEET विवाद पर रिम्स जेडीए ने जताया विरोध और निष्पक्ष जांच की मांग

NEET विवाद पर RIMS JDA का समर्थन, निष्पक्ष परीक्षा की मांग; प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की निंदा

Kokar Murder

रांची में घर मेंघु सकर युवक की बेरहमी से हत्या, परिचितों पर पुलिस का शक

झारखंड में एयर एंबुलेंस सेवा को कैबिनेट की मंजूरी

झारखंड में गंभीर मरीजों के लिए हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सेवा को मंजूरी, कैबिनेट ने लिया बड़ा फैसला

झारखंड के 1000 सरकारी स्कूलों में AI आधारित क्लासरूम
झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला, 1000 सरकारी स्कूलों में शुरू होगी AI आधारित पढ़ाई

रांची। झारखंड सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 1000 सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में AI आधारित वर्चुअल क्लासरूम शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए करीब ₹176.07 करोड़ की योजना को स्वीकृति दी गई है।   स्कूलों में डिजिटल स्टूडियो से होगी पढ़ाई   कैबिनेट के फैसले के अनुसार, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) मुख्यालय और राज्य के पांचों प्रमंडलों के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में डिजिटल स्टूडियो स्थापित किए जाएंगे। इन स्टूडियो के माध्यम से विशेषज्ञ शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से छात्रों को पढ़ा सकेंगे।   ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को मिलेगा फायदा   सरकार का उद्देश्य है कि दूरदराज के इलाकों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से छात्रों को आधुनिक विषयों और नई तकनीकी जानकारी से जोड़ा जाएगा।   कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्तावों को दी मंजूरी   बैठक में शिक्षा क्षेत्र के अलावा नए डिग्री कॉलेजों, आदर्श विद्यालय योजना को आगे बढ़ाने और विश्वविद्यालयों से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद झारखंड में हलचल

JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा, CID छापेमारी के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव

JPSC controversy

JPSC विवाद के बीच CID की कार्रवाई तेज, परीक्षा गड़बड़ी मामले में जांच जारी

Jharkhand weather

झारखंड में मानसून सक्रिय, इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; वज्रपात की भी चेतावनी

चतरा में एसपी आवास के पास निजी गार्ड की गोली मारकर हत्या
चतरा में एसपी आवास के पास गोलीकांड, निजी सुरक्षा गार्ड की हत्या; जांच तेज

चतरा, एजेंसियां। झारखंड के चतरा जिले में एसपी आवास के पास दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना से हड़कंप मच गया। इस वारदात में एक निजी सुरक्षा गार्ड की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना दो निजी सुरक्षा गार्डों के बीच हुए विवाद के बाद हुई।   मामूली विवाद के बाद चली गोली   पुलिस के अनुसार, घटना चतरा एसपी आवास के पास हुई। शुरुआती जांच में पता चला है कि निजी सुरक्षा गार्डों के बीच खैनी मांगने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद आरोपी गार्ड ने अपनी सर्विस राइफल से साथी गार्ड पर गोली चला दी। गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।   मृतक और आरोपी दोनों थे निजी सुरक्षा गार्ड   जांच में सामने आया है कि दोनों गार्ड एक ही निर्माण कंपनी से जुड़े थे। मृतक की पहचान अतुल सिंह के रूप में बताई गई है, जबकि आरोपी गार्ड को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल हथियार को भी कब्जे में लिया है।   पुलिस कर रही कई पहलुओं से जांच   घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और घटना के दौरान मौजूद अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।   घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   एसपी आवास जैसे संवेदनशील स्थान के पास गोली चलने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ranjan kumar tiwari जुलाई 22, 2026 0
चतरा में शिक्षक की संदिग्ध मौत पर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन

चतरा में शिक्षक की संदिग्ध मौत, NH-22 पर मिला शव; ग्रामीणों ने सड़क जाम कर जताया विरोध

6 महीने से नहीं भेजा बिल, फिर अचानक थमा दिया 6 लाख का बकाया,

सिस्टम की 'शॉक थेरेपी': 6 महीने से नहीं भेजा बिल, फिर अचानक थमा दिया 6 लाख का बकाया, जामताड़ा डीसी के दरबार में पहुंचा मामला

JPSC Controversy

जेपीएससी विवाद पर गरजे सीएम हेमंत सोरेन, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

0 Comments

Top week

CBI investigation into the NEET-UG paper leak case involving a doctor from Latur
राष्ट्रीय

NEET-UG पेपर लीक मामला: CBI का बड़ा दावा, लातूर के डॉक्टर ने 5 लाख लेकर परीक्षा से पहले दिखाया केमिस्ट्री का पेपर

kalpana जुलाई 17, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?