देवघर। देवघर के सदर अस्पताल में इन दिनों गंदगी और कचरे का अंबार मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। अस्पताल परिसर में कई दिनों से कचरा जमा रहने के कारण तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे मरीजों को इलाज के साथ-साथ अस्वच्छ माहौल का भी सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उन्हें गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम पर लापरवाही का आरोप अस्पताल परिसर के बाहर पार्किंग स्टैंड के पास रखे नगर निगम के कचरा डब्बों में लंबे समय से कूड़ा जमा है। समय पर कचरा नहीं उठाए जाने के कारण वहां बदबू और गंदगी का माहौल बना हुआ है। मरीजों और उनके परिजनों ने नगर निगम और जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से सफाई और कचरा उठाव होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल के मुख्य द्वार के पास फैली गंदगी से अस्पताल की छवि खराब हो रही है। कई परिजनों ने अस्पताल के अंदर की साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। खासकर मेटरनिटी वार्ड में पर्याप्त बेड की कमी और साफ-सफाई की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी जताई गई। अस्पताल प्रबंधन ने मानी समस्या मामले पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक Dr. Sushma Verma ने माना कि गंदगी के कारण मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। डॉ. सुषमा वर्मा के अनुसार नगर निगम से संपर्क कर समस्या की जानकारी दी गई है और जल्द ही अस्पताल परिसर से कचरा हटाने का आश्वासन मिला है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि जल्द सफाई व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
देवघर। विश्व प्रसिद्ध देवघर श्रावणी मेला 31 जुलाई से शुरू होगा। इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में पर्यटन मंत्री सुदिव्य सोनू ने देवघर सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में देवघर और दुमका जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने सभी विभागों से तैयारियों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के सफल आयोजन के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। लाखों श्रद्धालुओं आयेंगे बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि इस वर्ष श्रावणी मेला 31 जुलाई से प्रारंभ होगा। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण के लिए पहुंचेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन को पहले से ही व्यापक तैयारी करनी होगी। मंत्री ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष की कमियों और अनुभवों का विश्लेषण कर इस बार बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर जोर पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मेले में आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ठहरने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में सुगम और व्यवस्थित दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। मंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। फुटओवर ब्रिज परियोजना पर भी चर्चा बैठक में खजुरिया क्षेत्र में प्रस्तावित फुटओवर ब्रिज परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिसमें कुछ आवश्यक संशोधन किए जाने हैं। स्थानीय प्रशासन को इसकी जांच कर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य श्रावणी मेले को बेहतर प्रबंधन, मजबूत सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ सफलतापूर्वक संपन्न कराना है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम अनुभव मिल सके।
देवघर। देवघर की रहने वाली श्रेया केसरी ने ISC 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्ट्स स्ट्रीम में 98.5% अंक हासिल कर झारखंड में टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। श्रेया ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया और राज्य का नाम रोशन किया। बचपन से आर्ट्स में रही रुचि श्रेया ने बताया कि उन्हें बचपन से ही आर्ट्स विषयों में गहरी रुचि थी। उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी 97% अंक प्राप्त किए थे, जिसके बाद उन्होंने आर्ट्स स्ट्रीम को चुना। उनका मानना है कि सफलता के लिए विषय नहीं, बल्कि मेहनत और समर्पण मायने रखता है। आगे चलकर वह लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं और उनका सपना सुप्रीम कोर्ट की जज बनने का है। छात्रों को दिया प्रेरणादायक संदेश श्रेया ने अन्य छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि अक्सर यह धारणा होती है कि केवल साइंस स्ट्रीम में ही बेहतर करियर बन सकता है, लेकिन यह सोच गलत है। उन्होंने कहा कि आर्ट्स और साइंस दोनों में समान अवसर हैं। जरूरी यह है कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनें और पूरी लगन से पढ़ाई करें। माता-पिता का मिला पूरा सहयोग श्रेया की मां नीतू केसरी ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी श्रेया पर पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं डाला। उन्होंने हमेशा उसे अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने की आजादी दी। उनका मानना है कि बच्चों को समझना और उनका मार्गदर्शन करना जरूरी है, न कि उन पर अनावश्यक दबाव डालना। श्रेया की सफलता न केवल छात्रों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही दिशा, मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
देवघर। देवघर जिले में अवैध हथियारों की संभावित सप्लाई को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी और झारखंड एटीएस ने गुरुवार को संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर दोनों एजेंसियों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से शहर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि क्षेत्र में हथियार तस्करी से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसी सूचना के बाद रणनीति बनाकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। दो स्थानों से संदिग्धों को हिरासत में लिया गया छापेमारी के दौरान टीम ने सबसे पहले नंदन पहाड़ के पास स्थित नंदी नगर मोहल्ले में दबिश दी, जहां से एक युवक को हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि वह अपने ननिहाल में ठहरा हुआ था। इसके बाद टीम ने भुरभुरा मोड़ के पास दूसरी कार्रवाई करते हुए एक और संदिग्ध युवक को पकड़ा। दोनों को तत्काल नगर थाना लाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अब तक की कार्रवाई में किसी प्रकार का हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। बिहार के आरा से जुड़ रहे हैं तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नंदी नगर से पकड़ा गया युवक मूल रूप से बिहार के आरा जिले का रहने वाला है। उसके पिता देवघर के एक निजी स्कूल में वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं। परिवार कुंडा थाना क्षेत्र के चितोलोढ़िया इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कुछ दिनों से अपने मामा के घर पर रह रहा था। एजेंसियां इस कड़ी को गंभीरता से लेते हुए बिहार कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। फिलहाल दोनों संदिग्धों से नगर थाना में एनआईए और एटीएस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ कर रहे हैं। अभी किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रांची। झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम में मंगलवार सुबह एक अनोखी घटना ने श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल बना दिया। सुबह करीब 9:30 बजे बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती मंदिर को जोड़ने वाला पवित्र गठबंधन धागा अचानक टूट गया। इस घटना से कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में हल्की अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। तुरंत संभाला गया धागा, फिर सामान्य हुई स्थिति धागा टूटते ही मंदिर की छत पर तैनात भंडारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत संभाल लिया। बाद में काफी प्रयास के बाद धागे को दोबारा बांध दिया गया, जिससे स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई और श्रद्धालुओं का दर्शन-पूजन जारी रहा। प्रसाद के रूप में धागा पाने की लगी होड़ धागे का एक हिस्सा नीचे गिर गया था, जिसे प्रसाद के रूप में पाने के लिए श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों के बीच होड़ मच गई। कई लोग इसे अपने साथ ले जाने के लिए उत्साहित नजर आए। धागा पाने वाले श्रद्धालु खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। पुरोहितों और श्रद्धालुओं की अलग-अलग मान्यताएं इस घटना को लेकर मंदिर के पुरोहितों में अलग-अलग मत सामने आए हैं। कुछ इसे पारंपरिक दृष्टि से शुभ संकेत नहीं मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे भगवान का आशीर्वाद बता रहे हैं। वहीं कई श्रद्धालुओं ने इसे ईश्वरीय संकेत मानते हुए अपनी आस्था व्यक्त की। आस्था से जुड़ी हर घटना बनती है खास बाबा धाम में घटने वाली ऐसी घटनाएं श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करती हैं। चाहे इसे संयोग माना जाए या आध्यात्मिक संकेत, लेकिन Lord Shiva और माता पार्वती के प्रति लोगों की आस्था इस घटना के बाद और गहरी होती नजर आई।
देवघर। झारखंड के देवघर स्थित सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जांच की उचित व्यवस्था नहीं मिलने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कई जिलों के मरीजों का केंद्र, फिर भी सुविधाओं का अभाव देवघर का सदर अस्पताल न केवल जिले, बल्कि Dumka, Godda, Pakur, Sahibganj और Jamtara जैसे आसपास के जिलों के मरीजों के लिए भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। इसके बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। बंद पड़ी विशेष चिकित्सा व्यवस्था साल 2025 में गंभीर मरीजों के लिए शुरू की गई विशेष चिकित्सा सलाह सेवा कुछ ही महीनों में ठप हो गई। शुरुआत में मरीजों को इसका लाभ मिला, लेकिन बाद में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सेवा देना बंद कर दिया, जिससे यह व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेवा भी अधूरी अस्पताल में CSR फंड से शुरू की गई एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें भी अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो सकी हैं। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में जांच सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें निजी केंद्रों में महंगे दाम पर जांच करानी पड़ती है, जो गरीबों के लिए मुश्किल है। प्रशासन ने दी सफाई अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों को डेली वेजेस पर नियुक्त किया गया था, जिसके कारण उन्होंने काम जारी रखने से इनकार कर दिया। वहीं, जांच मशीनों के संचालन में कुछ कागजी प्रक्रियाएं बाकी हैं, जिन्हें जल्द पूरा कर सेवा शुरू करने का दावा किया गया है। सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है, तो देवघर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र में ही मरीजों को बुनियादी जांच सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।
देवघर। देवघर सदर अस्पताल को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अस्पताल में अब नई डिजिटल 500 एमए एक्स-रे मशीन और हाई-एंड कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड मशीन की शुरुआत की गई है। इन सुविधाओं का उद्घाटन उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने किया। यह पहल सीएसआर (CSR) फंड के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है। जटिल जांच अब अस्पताल में ही संभव नई मशीनों के लगने से मरीजों को अब गंभीर और जटिल जांच के लिए निजी अस्पतालों या बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हृदय, पेट और नसों से जुड़ी बीमारियों की जांच अब देवघर सदर अस्पताल में ही आसानी से हो सकेगी। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी। आम लोगों को मिलेगी राहत पहले ऐसी जांच के लिए मरीजों को निजी लैब या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जहां खर्च काफी अधिक होता था। अब सरकारी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और इलाज अधिक सुलभ हो जाएगा। संथाल परगना के मरीजों को भी लाभ देवघर सदर अस्पताल सिर्फ जिले ही नहीं बल्कि पूरे संथाल परगना क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ा चिकित्सा केंद्र है। इसमें पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, दुमका और जामताड़ा जैसे जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। नई सुविधाओं से इन सभी जिलों के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सेवा मिलेगी। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था होगी मजबूत अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की आधुनिक सुविधाओं के जुड़ने से सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा। प्रशासन ने मशीनों के सही संचालन और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए हैं।
देवघर: झारखंड के जंगलों में इन दिनों महुआ चुनने की परंपरा पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। देवघर जिले के डिगरिया पहाड़ की चोटी पर स्थित जंगलों में लगी भीषण आग ने एक बार फिर वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महुआ इकट्ठा करने के लिए लगाई गई छोटी सी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। डिगरिया पहाड़ पर दो दिनों से सुलग रही आग देवघर के बाबूडीह गांव की ओर स्थित डिगरिया पहाड़ी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सोमवार को दिन में वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया था, लेकिन शाम होते-होते आग ने फिर से तेजी पकड़ ली और पूरे इलाके में फैल गई। शाम होते ही तेज हुई आग की रफ्तार स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन में आग पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन शाम के समय तेज हवा और सूखी झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलने लगी। कुछ ही देर में जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। स्थिति गंभीर होते ही वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। महुआ चुनने के लिए लगाई जाती है आग ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बार-बार आग लगने की सबसे बड़ी वजह महुआ चुनने का तरीका है। कई लोग पेड़ों के नीचे गिरी सूखी पत्तियों को साफ करने के लिए आग लगा देते हैं, ताकि महुआ आसानी से दिख सके। लेकिन यही तरीका जंगल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है और छोटी चिंगारी बड़े हादसे में बदल जा रही है। चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू वन विभाग की टीम और पशु रक्षकों ने मिलकर करीब चार घंटे तक लगातार प्रयास किया। कठिन पहाड़ी इलाका और ऊंचाई के कारण आग बुझाने में काफी परेशानी आई, लेकिन स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक तरीकों की मदद से देर रात तक आग पर नियंत्रण पा लिया गया। पर्यावरण और वन्यजीवों पर गहरा असर इस आग से जंगल की वनस्पतियों, औषधीय जड़ी-बूटियों और दुर्लभ पौधों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही कई छोटे वन्यजीव और पक्षी भी इसकी चपेट में आकर मारे गए। इस तरह की घटनाएं पर्यावरण संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। जागरूकता अभियान चला रहा वन विभाग वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। नुक्कड़ नाटक, ग्राम सभाएं और हाट-बाजारों में प्रचार के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि जंगल में आग न लगाएं। विभाग का कहना है कि स्थानीय सहयोग के बिना इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल है। अधिकारियों की अपील वन विभाग के सब बीट ऑफिसर राजीव रंजन ने बताया कि टीम ने कड़ी मेहनत से आग पर नियंत्रण पाया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि महुआ चुनने के लिए आग का इस्तेमाल न करें। इसके बजाय महुआ इकट्ठा करने के लिए जाल, पुरानी साड़ी या धोती का उपयोग करें। सतर्कता ही है समाधान डिगरिया पहाड़ की यह घटना साफ संकेत देती है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी आपदा बन सकती है। जरूरत है कि लोग जागरूक हों और जंगलों की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सके।
देवघर। भारतीय क्रिकेटर करण शर्मा शुक्रवार सुबह झारखंड के देवघर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम मंदिर में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और देश की तरक्की व शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर में दर्शन कराया गया। दर्शन के बाद करण शर्मा ने स्थानीय युवा क्रिकेटरों से बातचीत करते हुए उन्हें मेहनत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसलिए खिलाड़ियों को लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। करण शर्मा ने देश की प्रगति व शांति के लिए प्रार्थना की करण शर्मा ने कहा कि बाबा भोलेनाथ के दर्शन बहुत अच्छे तरीके से हुए और उन्होंने देश की प्रगति व शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर को लेकर कहा कि भगवान की कृपा से जो सोचा था, वह पूरा हुआ और आगे भी वही कृपा बनी रहे, यही कामना है। लेग स्पिन गेंदबाजी के लिए मशहूर 38 वर्षीय करण शर्मा दाएं हाथ के लेग स्पिनर हैं और अपनी गुगली व लेग ब्रेक गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। मूल रूप से Meerut (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले करण शर्मा भारत की राष्ट्रीय टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल करियर करण शर्मा ने 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था और अपने पहले टेस्ट में चार विकेट लिए थे। इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए दो वनडे और एक टी-20 मैच भी खेला है। Indian Premier League में उन्होंने लगभग 90 मैचों में 83 विकेट लिए हैं। आईपीएल में वे Mumbai Indians, Chennai Super Kings, Royal Challengers Bangalore और Sunrisers Hyderabad जैसी टीमों के लिए खेल चुके हैं और तीन बार आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली टीमों का हिस्सा भी रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में भी शानदार प्रदर्शन घरेलू क्रिकेट में करण शर्मा ने प्रथम श्रेणी के 97 मैचों में 270 विकेट, लिस्ट-ए के 123 मैचों में 153 विकेट और टी-20 के 191 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। साल 2012-13 में रणजी ट्रॉफी के तीन मैचों में 21 विकेट लेने के बाद उन्हें Board of Control for Cricket in India की ओर से बेस्ट अंडर-25 क्रिकेटर का पुरस्कार भी मिला था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।