देवघर। देवघर की रहने वाली श्रेया केसरी ने ISC 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्ट्स स्ट्रीम में 98.5% अंक हासिल कर झारखंड में टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। श्रेया ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया और राज्य का नाम रोशन किया।
श्रेया ने बताया कि उन्हें बचपन से ही आर्ट्स विषयों में गहरी रुचि थी। उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी 97% अंक प्राप्त किए थे, जिसके बाद उन्होंने आर्ट्स स्ट्रीम को चुना। उनका मानना है कि सफलता के लिए विषय नहीं, बल्कि मेहनत और समर्पण मायने रखता है। आगे चलकर वह लॉ की पढ़ाई करना चाहती हैं और उनका सपना सुप्रीम कोर्ट की जज बनने का है।
श्रेया ने अन्य छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि अक्सर यह धारणा होती है कि केवल साइंस स्ट्रीम में ही बेहतर करियर बन सकता है, लेकिन यह सोच गलत है। उन्होंने कहा कि आर्ट्स और साइंस दोनों में समान अवसर हैं। जरूरी यह है कि छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनें और पूरी लगन से पढ़ाई करें।
श्रेया की मां नीतू केसरी ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी श्रेया पर पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं डाला। उन्होंने हमेशा उसे अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने की आजादी दी। उनका मानना है कि बच्चों को समझना और उनका मार्गदर्शन करना जरूरी है, न कि उन पर अनावश्यक दबाव डालना।
श्रेया की सफलता न केवल छात्रों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही दिशा, मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर की छात्रा शांभवी तिवारी ने ICSE-ISC 2026 परीक्षा में इतिहास रचते हुए 100 प्रतिशत अंक हासिल कर नेशनल टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है। Council for the Indian School Certificate Examinations (CISCE) द्वारा जारी परिणामों में झारखंड के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। कोल्हान क्षेत्र का दबदबा इस बार कोल्हान क्षेत्र, खासकर जमशेदपुर और चाईबासा के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया। ICSE 10वीं में चितेश सरकार, वेदांग वत्सल, अहान राय और प्रज्ञा सिंह ने 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर संयुक्त रूप से टॉप किया। वहीं धनबाद की अंशिका मोदी और कोशिकी दत्ता ने भी 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। डॉक्टर बनने का सपना शांभवी तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। फिलहाल वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं। रांची के स्कूलों का भी शानदार प्रदर्शन राजधानी रांची के स्कूलों ने भी बेहतरीन परिणाम दिए। लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल की प्रभलीन कौर ने 98.8 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि अन्य छात्रों ने भी 97 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। संत थॉमस स्कूल की अंशिका गुप्ता ने 99 प्रतिशत अंक लाकर सिटी टॉपर का खिताब जीता। डिजिटल माध्यम से मिला रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, लेकिन छात्रों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से अपने परिणाम देखे। कई स्कूलों ने भी अपने स्तर पर रिजल्ट उपलब्ध कराया। ICSE-ISC 2026 के नतीजों ने साबित कर दिया कि झारखंड के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
रांची। रांची सहित पूरे झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ली है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और बांग्लादेश के पास बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। गुरुवार दोपहर रांची, रामगढ़, चतरा, लातेहार और पलामू में तेज रफ्तार से हवाएं चलीं। कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए, जबकि रांची में काले बादल छाने से दिन में ही अंधेरा छा गया। ठनका गिरने से तीन लोगों की मौत इस मौसमीय बदलाव के बीच हादसे भी सामने आए हैं। गिरिडीह जिले के तिसरी में ठनका गिरने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि लोहरदगा के भंडरा में एक महिला की जान चली गई। इससे लोगों में डर का माहौल भी देखा गया। कई जिलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि रांची में सुबह 4:30 बजे से गरज के साथ बारिश शुरू हुई और दिनभर रुक-रुक कर होती रही। कांके में 12.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं खूंटी में सबसे अधिक 34.5 मिमी और बेरमो में 30 मिमी बारिश हुई। धनबाद और बोकारो में 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। हजारीबाग, बरही और नवाडीह में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है। जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 4.2 डिग्री गिरकर 37.5 डिग्री पहुंच गया, जबकि रांची का तापमान 38.6 डिग्री दर्ज किया गया। अगले तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी मौसम विभाग ने रांची सहित 12 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री तक गिरावट आएगी। किसानों के लिए फायदेमंद प्री-मानसून बारिश विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्री-मानसून वर्षा खेतों के लिए फायदेमंद है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की गहरी जुताई कर वर्षा जल को जमीन में समाहित होने दें, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। हालांकि, अल नीनो के प्रभाव के कारण इस साल मानसून में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में किसानों को अभी से जल संरक्षण की तैयारी करने की जरूरत है।
रांची। आगामी जनगणना 2027 को लेकर रांची नगर निगम (RMC) ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जनगणना की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। पहले चरण में मकानों का सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) किया जाएगा, जिसके तहत घरों से संबंधित बुनियादी जानकारियां एकत्रित की जाएंगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। नागरिकों की सुविधा के लिए 1 मई से 15 मई 2026 तक स्वगणना (Self Enumeration) की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस अवधि के दौरान इच्छुक नागरिक ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी। सावधान: कोई दस्तावेज या ओटीपी नहीं मांगा जाएगा प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार का कोई भौतिक दस्तावेज या ओटीपी (OTP) नहीं मांगा जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के फर्जी कॉल, मैसेज या संदिग्ध गतिविधियों से सावधान रहें। यदि कोई जनगणना के नाम पर ओटीपी मांगता है, तो उसे साझा न करें। ग्रामीण और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था डिजिटल माध्यम के अलावा, निगम ने उन क्षेत्रों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी या नेटवर्क की समस्या है। ऐसे ग्रामीण और नेटवर्क विहीन इलाकों में शिक्षकों की टीम तैनात की जाएगी। ये शिक्षक घर-घर जाकर जनगणना का कार्य पूरा करेंगे और सही आंकड़े सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम ने नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में पूर्ण सहयोग करने की अपील की है ताकि डेटा पूरी तरह सटीक रहे।