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Stock Market: हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 609 अंक चढ़ा, निफ्टी 24150 के पार

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
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मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबारी दिन के अंत में BSE Sensex 609.45 अंकों की मजबूती के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 181.95 अंक चढ़कर 24,177.65 के स्तर के पार पहुंच गया।

 

हरियाली के साथ बंद हुआ बाजार


दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार को सहारा दिया। खासकर बड़े और दिग्गज शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।

 

किन वजहों से आई तेजी


विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी की उम्मीद और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों और मजबूत आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को सपोर्ट किया।

 

सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मजबूत


बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की तेजी को और बल मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार में उत्साह बना रहा।

 

निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर


हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ट्रंप की सख्ती से कच्चे तेल में लगी आग, ब्रेंट क्रूड $120 के पार, वैश्विक बाजार में हड़कंप

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है और ब्रेंट क्रूड ऑयल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस अचानक बढ़ोतरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का कड़ा रुख बताया जा रहा है, जिन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और समुद्री नाकाबंदी फिलहाल जारी रहेगी। ईरान पर सख्ती और बढ़ता तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों पर परमाणु समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक Strait of Hormuz पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी जारी रहेगी। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यह रणनीति सैन्य कार्रवाई की तुलना में अधिक प्रभावी है, क्योंकि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो आगे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है दुनिया के लिए अहम? स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल परिवहन मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। जब इस मार्ग में बाधा आती है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है और तेल की उपलब्धता घट जाती है। परिणामस्वरूप कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है, जिसका असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल इस स्थिति को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री Jeffrey Sachs ने कहा है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल यह उम्मीद लगाए बैठा है कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। आम जनता पर सीधा असर तेल कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, खाद्य वस्तुएं और अन्य जरूरी सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो महंगाई एक बार फिर आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।  

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Bandhan Bank Share: मुनाफे और डिविडेंड के दम पर शेयर में जोरदार उछाल, एक महीने में 40% से ज्यादा की तेजी

शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां Bandhan Bank निवेशकों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया। बैंक के मजबूत तिमाही नतीजों और डिविडेंड के ऐलान के बाद इसके शेयर में तेज उछाल आया और यह 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया। एक दिन में 12% से ज्यादा की छलांग मंगलवार को 178.30 रुपये पर बंद हुआ बंधन बैंक का शेयर बुधवार को तेजी के साथ खुला और कुछ ही घंटों में 200 रुपये के पार निकल गया। दोपहर तक यह करीब 13% की तेजी के साथ 201.60 रुपये पर कारोबार करता दिखा, जबकि इंट्रा-डे में 201.80 रुपये का नया 52-वीक हाई भी बनाया। एक महीने में 40% से ज्यादा रिटर्न इस शेयर ने हाल के दिनों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। एक महीने पहले कीमत: 141.35 रुपये मौजूदा कीमत: लगभग 201.60 रुपये कुल उछाल: करीब 43% अगर किसी निवेशक ने एक महीने पहले 1 लाख रुपये लगाए होते, तो उसकी वैल्यू आज लगभग 1.43 लाख रुपये हो चुकी होती। तिमाही नतीजों ने भरी रफ्तार बंधन बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया: शुद्ध मुनाफा: 68% बढ़कर 534 करोड़ रुपये नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): 1.4% बढ़कर 2,795.4 करोड़ रुपये इन मजबूत आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और शेयर में तेजी को गति दी। डिविडेंड का ऐलान भी बना वजह बैंक ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले शेयर पर 1.50 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने का ऐलान किया है, जिसने निवेशकों के लिए इस स्टॉक को और आकर्षक बना दिया। लॉन्ग टर्म में प्रदर्शन मिला-जुला हालांकि शॉर्ट टर्म में यह शेयर शानदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन लंबी अवधि में रिटर्न उतने मजबूत नहीं रहे: 6 महीने: 17% की बढ़त 1 साल: करीब 20% रिटर्न 5 साल: लगभग 40% गिरावट यह तेजी इस बात का संकेत है कि मजबूत फंडामेंटल्स और निवेशकों का भरोसा किसी भी स्टॉक को तेजी से ऊपर ले जा सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेश से पहले पूरी जांच जरूरी है।  

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देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी Reliance Industries एक बार फिर निवेशकों के रडार पर है। हाल के महीनों में शेयर अपने उच्चतम स्तर से करीब 15% नीचे आने के बाद अब इसमें जोरदार उछाल की उम्मीद जताई जा रही है। कई ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के लिए अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। ग्लोबल ब्रोकरेज का भरोसा, ₹1,910 तक जा सकता है शेयर Goldman Sachs ने रिलायंस पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए इसका टारगेट प्राइस ₹1,910 तय किया है। यह मौजूदा स्तर से काफी ऊपर है और निवेशकों के लिए मजबूत अपसाइड की ओर इशारा करता है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल (O2C) बिजनेस पर जो दबाव पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात के कारण था, वह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इससे कंपनी की परफॉर्मेंस में सुधार की उम्मीद है। जियो IPO बनेगा सबसे बड़ा ट्रिगर Nomura ने रिलायंस के शेयर के लिए ₹1,640 का टारगेट दिया है और कहा है कि Jio Platforms का संभावित IPO निकट भविष्य में सबसे बड़ा कैटालिस्ट साबित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस अगले महीने जियो के IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल कर सकती है। इससे न सिर्फ कंपनी की वैल्यूएशन बढ़ेगी, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर में भी नई ऊर्जा देखने को मिल सकती है। अन्य ब्रोकरेज भी बुलिश CLSA: ₹1,800 का टारगेट, ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग Morgan Stanley: ₹1,803 का टारगेट JPMorgan Chase: ₹1,675 का टारगेट, ‘ओवरवेट’ रेटिंग इन सभी अनुमानों से साफ है कि बड़े निवेशक रिलायंस के भविष्य को लेकर आशावादी हैं। अभी कहां है शेयर? रिलायंस का शेयर फिलहाल करीब ₹1,364 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि इसका 52 हफ्ते का हाई ₹1,611 रहा है। मौजूदा स्तर से ब्रोकरेज टारगेट तक पहुंचने में अच्छा खासा रिटर्न मिलने की संभावना जताई जा रही है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि O2C बिजनेस में सुधार और जियो IPO जैसे बड़े ट्रिगर आने वाले समय में रिलायंस के शेयर को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले बाजार जोखिम और अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करना जरूरी है।  

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