मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल दिखा, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ नजर आया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1300 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 22,250 के नीचे फिसल गया। सुबह करीब 9:39 बजे सेंसेक्स 1,394.38 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,739.94 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 407.75 अंक यानी करीब 1.80 प्रतिशत टूटकर 22,271.65 के स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को बाजार में जो तेजी देखने को मिली थी, वह गुरुवार सुबह खुलते ही पूरी तरह गायब हो गई। वैश्विक तनाव और कमजोर सेंटीमेंट से दबाव बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। खासकर ईरान-अमेरिका तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती बेचैनी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। बैंकिंग और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव गुरुवार की गिरावट में बैंकिंग और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। इन सेक्टरों के दिग्गज शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार का मूड और कमजोर हो गया। इसके अलावा कई बड़े लार्जकैप और ब्लूचिप शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
मुंबई,एजेंसियां। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद शानदार रही। बुधवार को घरेलू बाजार जोरदार बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 1,186.77 अंक यानी 1.65 प्रतिशत उछलकर 73,134.32 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 348.00 अंक की मजबूती के साथ 22,679.40 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर कारोबार के दौरान बाजार में मजबूत खरीदारी का माहौल बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों में आई तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे भारतीय बाजारों में भी राहत की लहर देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 73,964.58 तक पहुंच गया था, जो दिन की बड़ी तेजी को दर्शाता है। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इटरनल जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। वहीं एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और भारती एयरटेल के शेयरों में कुछ कमजोरी देखी गई। वैश्विक बाजारों का भी भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई कंपोजिट और हैंग सेंग मजबूती के साथ बंद हुए। वहीं, यूरोपीय बाजारों और अमेरिकी वॉल स्ट्रीट में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता बढ़ी है और अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव में और कमी आती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
मुंबई, एजेंसियां। शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 280.95 अंक टूटकर 23,025.50 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुख जोखिम से बचने वाला बना हुआ है। रुपया भी दबाव में शेयर बाजार की कमजोरी के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखा। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे गिरकर 94.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले संकेत हैं। गिरावट की बड़ी वजहें विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना बाजार पर दबाव डाल रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 106.8 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे मुद्रास्फीति, आयात लागत और कॉर्पोरेट मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किन शेयरों पर सबसे ज्यादा असर सेंसेक्स की 30 कंपनियों में बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, एटर्नल और इंटरग्लोब एविएशन प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे। वहीं टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट बढ़त में रहे। वैश्विक संकेत भी कमजोर एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी कमजोर रहे, जबकि शंघाई और हांगकांग के बाजार हल्की मजबूती में थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। एफआईआई बनाम डीआईआई बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5,429.78 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल अस्थिरता और दबाव का माहौल बना हुआ है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 885.32 अंक चढ़कर 74,953.77 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 307.65 अंक की बढ़त के साथ 23,220.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। रुपये में गिरावट शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 93.96 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में सतर्क आशावाद बना हुआ है। निवेशक फिलहाल भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक घटनाओं का असर मिडिल ईस्ट में तनाव, खासकर इज़राइल और ईरान के बीच जारी टकराव और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। हालांकि संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ सहारा दिया है। एशियाई बाजारों में तेजी एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान, सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल और सोने-चांदी का हाल ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे वैश्विक बाजारों को राहत मिली। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई—24 कैरेट सोना 3.37% उछलकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.82% बढ़कर 2,34,542 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। हफ्ते की शुरुआत में आई भारी गिरावट के बाद बाजार ने आज मजबूत वापसी की है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1500 अंकों से ज्यादा उछलकर 74,200 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से अधिक चढ़कर 22,850 के स्तर के ऊपर कारोबार करता दिखा। सोमवार की गिरावट के बाद तेज रिकवरी सोमवार को बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 1800 अंकों से ज्यादा टूटकर बंद हुआ था और निफ्टी भी 600 अंकों से अधिक लुढ़क गया था। हालांकि, आज निवेशकों का भरोसा लौटने के साथ बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी शुरुआती कारोबार में Shriram Finance, Eicher Motors, Asian Paints और IndiGo के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा HDFC Bank के शेयरों में भी रिकवरी देखने को मिली। हर सेक्टर में दिखी हरियाली आज के कारोबार में ऑटो, बैंकिंग, फार्मा, एनर्जी और पीएसयू बैंक जैसे लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। ज्यादातर सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार की मजबूती साफ नजर आई। तेजी की बड़ी वजहें बाजार में तेजी की मुख्य वजह वैश्विक संकेत रहे। डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित हमले को टालने के बयान से वैश्विक तनाव कम हुआ है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है। निवेशकों के लिए संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक हालात स्थिर रहने और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहने पर बाजार में आगे भी तेजी बनी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty भी लगभग 480 अंक गिरकर 22,634 पर आ गया। वहीं, भारतीय रुपया Indian Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। विशेषज्ञों ने बताया विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तनाव खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अल्टीमेटम ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है। निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा—एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को आंशिक सुधार दिखाया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों को राहत मिली और बाजार में खरीदारी का माहौल बना। सुबह कारोबार के दौरान Nifty50 करीब 1.05% बढ़कर 23,243 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि BSE Sensex 1% से ज्यादा चढ़कर 74,958 के आसपास कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड, जो गुरुवार को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे यूरोपीय देशों और जापान द्वारा समुद्री मार्गों की सुरक्षा के प्रयास और अमेरिका द्वारा सप्लाई बढ़ाने के संकेत अहम माने जा रहे हैं। सभी सेक्टरों में दिखी तेजी शुक्रवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली और सभी 16 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूती रही, जहां क्रमशः 0.8% और 1.3% की बढ़त दर्ज की गई। PSU बैंक और मेटल शेयरों में उछाल पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों में जोरदार वापसी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3.2% की तेजी आई, जबकि State Bank of India के शेयर करीब 3% चढ़े। मेटल सेक्टर में भी तेजी रही और इसमें करीब 2.2% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं Tata Steel के शेयर लगभग 4% उछले, जिसका कारण ब्रोकरेज द्वारा टारगेट प्राइस बढ़ाना बताया जा रहा है। IT और अन्य सेक्टरों में भी सुधार आईटी सेक्टर में भी 1.7% की बढ़त देखी गई, जो गुरुवार की गिरावट के बाद रिकवरी का संकेत है। हालांकि, HDFC Bank के शेयरों पर दबाव बना रहा और इसमें और गिरावट दर्ज की गई। रुपया कमजोर, निवेशकों में सतर्कता इस बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल फिलहाल मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। IPO की हलचल भी तेज इसी बीच SBI Funds Management ने IPO के लिए आवेदन किया है, जिसमें State Bank of India और Amundi अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। यह कदम बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। आगे कैसा रहेगा बाजार? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी जारी रह सकती है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। गुरुवार को भारी गिरावट के बाद आज बाजार हरे निशान में खुला। Nifty50 23,200 के ऊपर खुला, जबकि BSE Sensex में 700 अंकों से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में तेजी सुबह 9:16 बजे के आसपास निफ्टी 23,229 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो करीब 227 अंक यानी लगभग 1% की बढ़त है। वहीं सेंसेक्स 74,945 के स्तर पर पहुंच गया, जिसमें करीब 738 अंकों की तेजी दर्ज की गई। यह उछाल गुरुवार की 3% से ज्यादा गिरावट के बाद निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। बाजार में ‘उम्मीद बनाम डर’ का माहौल बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। एक तरफ वैश्विक तनाव और महंगाई की चिंता है, तो दूसरी तरफ राहत की उम्मीद भी दिख रही है। हाल के बयानों से संकेत मिला है कि पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है। इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ा है। किन सेक्टरों में दिखी मजबूती आज के कारोबार में खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार की गिरावट के बाद इन सेक्टरों में ‘बाउंस बैक’ की संभावना पहले से ही थी, जो अब दिखने लगी है। वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों में भी आज तेजी का माहौल रहा, जिससे भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बाजारों में सुधार ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मजबूत डॉलर के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी गुरुवार को विदेशी निवेशकों (FII) ने करीब 7,558 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,864 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभाला। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो बाजार में और सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, शुक्रवार की शुरुआत ने यह संकेत जरूर दिया है कि गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की ताकत मौजूद है, लेकिन आगे का रास्ता अभी भी वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को शेयर बाजार लाल निशान पर खुला। वहीं पिछले दिन बुधवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 633.29 अंक उछलकर 76,704.13 अंक पर बंद हुआ था, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 196.65 अंक की बढ़त के साथ 23,777.80 पर बंद हुआ था।पश्चिम एशिया तनाव से गुरुवार को बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स करीब 2000 अंक तक गिरा। हालांकि खुद को संभालते हुए शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1640.47 अंक या 2.14% गिरकर 75,063.66 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 496.35 अंक या 2.09% गिरकर 23,281.45 अंक पर आ गया।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने हरे निशान के साथ कारोबार की शुरुआत की, हालांकि शुरुआती मिनटों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। इससे पहले सोमवार को बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई थी, जहां सेंसेक्स करीब 939 अंक चढ़कर 75,502 के स्तर पर बंद हुआ था और निफ्टी 23,400 के पार पहुंच गया था। शुरुआती कारोबार में हल्का उतार-चढ़ाव मंगलवार सुबह सेंसेक्स में करीब 144 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,358 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 50 अंक फिसलकर 23,358 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, रुपये में भी कमजोरी दिखी और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे गिरकर 92.40 पर आ गया। वैश्विक बाजारों से मिला समर्थन अंतरराष्ट्रीय संकेत बाजार के लिए सकारात्मक रहे। अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद हुए, खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी देखने को मिली। एशियाई बाजारों में भी बढ़त का रुख रहा—जापान, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांकों में उछाल दर्ज किया गया। कच्चे तेल की कीमत बनी चिंता विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण सप्लाई पर असर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। एफपीआई की बिकवाली, डीआईआई का सहारा विदेशी निवेशकों ने बाजार में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर बाजार को संभाला। यही कारण रहा कि बाजार ने मजबूती बनाए रखी।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में आई गिरावट के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की और दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 938.93 अंक यानी 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,502.85 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 257.70 अंक या 1.11 प्रतिशत चढ़कर 23,408.80 अंक पर पहुंच गया। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,805.27 का उच्चतम स्तर और 73,949.76 का निचला स्तर छुआ। बाजार में आई इस तेजी का मुख्य कारण बैंकिंग और ब्लू-चिप शेयरों में हुई मजबूत खरीदारी रही। इन कंपनियों के शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 4.22 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, आईटीसी, टाटा स्टील और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, सन फार्मा, पावर ग्रिड और भारती एयरटेल के शेयरों में कमजोरी रही और ये दिन के कारोबार में पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताई बाजार में तेजी की वजह बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में हुई भारी बिकवाली के बाद निवेशकों ने मूल्य-आधारित खरीदारी शुरू की, जिससे बाजार में तेजी आई। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू क्षेत्रों जैसे ऑटो, बैंकिंग और एफएमसीजी सेक्टर में निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रमों पर रहेगी, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों पर, क्योंकि इसका असर वैश्विक आपूर्ति शृंखला और बाजार की दिशा पर पड़ सकता है। वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख सोमवार को एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 और चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं यूरोपीय बाजारों में ज्यादातर गिरावट का रुख देखने को मिला। कच्चे तेल और रुपये की स्थिति वैश्विक तेल बाजार में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का भाव 1.41 प्रतिशत बढ़कर 104.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे गिरकर 92.40 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार सोमवार को सपाट खुला। वहीं पिछले दिन शुक्रवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1470.50 अंक गिरकर 74,563.92 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 488.05 अंक गिरकर 23,151.10 अंक पर बंद हुआ था।आज हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ खुला। बाजार में उठापटक की स्थिति देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 24.79 अंक चढ़कर 74,588.71 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 29.20 अंक या 23,180.30 अंक पर आ गया।
मुंबई, एजेंसियां। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखने को मिला है। 27 फरवरी से ही वैश्विक बाजारों का सेंटीमेंट कमजोर होना शुरू हो गया था और इसके बाद निवेशकों में भारी घबराहट देखने को मिली। इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा, जहां प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। भारतीय बाजार में 9% से ज्यादा की गिरावट BSE Sensex और Nifty 50 में 26 फरवरी के बाद से 9 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। सेंसेक्स 82,248 अंकों से गिरकर करीब 74,563 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 25,496 अंकों से घटकर लगभग 23,151 अंक पर पहुंच गया। शुक्रवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स करीब 1,470 अंक टूट गया। अमेरिकी बाजार भी दबाव में वैश्विक असर से अमेरिकी शेयर बाजार भी अछूते नहीं रहे ।नैस्डेक में लगभग 3.38%, S&P 500 में करीब 4% और Dow Jones Industrial Average में लगभग 6% तक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी है। भारतीय निवेशकों को भारी नुकसान भारतीय बाजार में गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक 26 फरवरी के बाद से बीएसई का मार्केट कैप करीब 39 लाख करोड़ रुपये घट गया है। यानी इतने बड़े पैमाने पर निवेशकों की संपत्ति कम हो गई है। कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का असर विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 88% तेल आयात करता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये में कमजोरी और महंगाई बढ़ने की आशंका भी बाजार में गिरावट की बड़ी वजह बन रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।