राष्ट्रीय

विधवा से शादी के बाद ‘सजा’, समाज ने दंपत्ति को किया अलग

Anjali Kumari अप्रैल 29, 2026 0
Widow remarriage
Widow remarriage

भोपाल, एजेंसियां। सागर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को विधवा महिला से शादी करना भारी पड़ गया। समाज के कुछ लोगों ने दंपत्ति का बहिष्कार कर दिया, क्योंकि उन्होंने शादी के बाद पूरे गांव को भोज नहीं कराया।

 

कल्याणी योजना के तहत हुई थी शादी


पीड़ित राजेंद्र पटेल ने करीब आठ महीने पहले एक विधवा महिला से शादी की थी। यह विवाह सरकार की कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत हुआ था। राजेंद्र ने महिला को अपनाने के साथ उसकी पहली शादी से हुई बच्ची को भी अपना नाम और सहारा दिया।

 

भोज न कराने पर मिला सामाजिक दंड


राजेंद्र का आरोप है कि गांव के कथित मुखियाओं ने उन पर ‘कच्चा भोजन’ और ‘पक्का भोजन’ के नाम पर पूरे गांव को दावत देने का दबाव बनाया। जब उन्होंने इस मांग को अस्वीकार कर दिया, तो पंचायतनुमा फैसले के तहत उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। उनके परिवार का ‘हुक्का-पानी’ बंद कर दिया गया।

 

बच्ची तक को किया अलग-थलग


इस बहिष्कार का असर मासूम बच्ची पर भी पड़ा है। उसे गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलने तक नहीं दिया जा रहा। परिवार को किसी भी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने से रोका जा रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

 

प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार


मामले से परेशान होकर दंपत्ति कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत दी। उन्होंने मांग की है कि उन्हें प्रताड़ित करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

 

समाज पर उठे सवाल


यह घटना समाज में अब भी मौजूद कुरीतियों और भेदभाव को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार विधवा विवाह को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी मानसिकता आज भी लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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1 मई से बदलेंगे ये 5 नियम, जानें आप पर क्या पड़ेगा असर?

नई दिल्ली, एजेंसियां। हर महीने की पहली तारीख कुछ नए बदलाव लेकर आती है, और इस बार 1 मई में भी इससे अलग नहीं है। इस दिन से कई महत्वपूर्ण नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब, खर्च और दिनचर्या पर पड़ेगा। आइए इन पांच बड़े बदलावों को विस्तार से समझते हैं।   एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव   हर महीने की तरह इस बार भी 1 मई को गैस कंपनियां एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी करेंगी। अगर कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका असर सीधे घर के बजट पर पड़ेगा, साथ ही होटल और रेस्टोरेंट का खर्च भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, सरकार एलपीजी डिलीवरी के लिए OTP आधारित सिस्टम लागू करने पर भी विचार कर रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।   क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव   बैंकिंग सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिलेगा। भारतीय स्टेट बैंक ने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। अब लेट पेमेंट चार्ज में बदलाव होगा—100 से 500 रुपये तक के बकाया पर 100 रुपये चार्ज लगेगा, जबकि 500 से 1000 रुपये के बकाया पर 500 रुपये तक शुल्क देना पड़ सकता है। साथ ही, कुछ कार्ड्स पर वार्षिक फीस की शर्तों में भी बदलाव किया गया है।   CNG और PNG के दाम में संशोधन   एलपीजी की तरह ही CNG और PNG के दाम भी हर महीने की पहली तारीख को अपडेट होते हैं। यदि कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर वाहन चालकों और घरेलू गैस उपयोगकर्ताओं दोनों पर पड़ेगा। इससे ट्रांसपोर्ट और घरेलू खर्च बढ़ने की संभावना है।   मई महीने में बैंक छुट्टियां   मई में कई बैंक अवकाश भी रहेंगे। हर रविवार के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहेंगे। इसके साथ ही लेबर डे (1 मई) और कुछ अन्य त्योहारों के कारण भी छुट्टियां रहेंगी। हालांकि, ये छुट्टियां राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में बैंक जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर जांच लें। अच्छी बात यह है कि ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं हमेशा की तरह चालू रहेंगी।   ऑनलाइन गेमिंग के नए नियम लागू   सरकार 1 मई से Online Gaming Rules 2026 लागू करने जा रही है। इसके तहत ऑनलाइन गेम्स को तीन कैटेगरी मनी गेम्स, सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स में बांटा जाएगा। इन सभी के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा और लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए एक नई अथॉरिटी भी बनाई जाएगी।

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बंगाल चुनाव Phase 2: मतदान के बीच हिंसा, EVM में गड़बड़ी और कई इलाकों में बवाल

सुबह से ही कई जिलों में तनावपूर्ण माहौल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के दौरान बुधवार सुबह से ही कई इलाकों में हिंसा, तोड़फोड़ और EVM में गड़बड़ी की खबरें सामने आईं। नदिया, हावड़ा, शांतिपुर और भांगर जैसे क्षेत्रों में मतदान के शुरुआती घंटों में ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। यह चुनाव राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विवाद के बीच हो रहा है, जिसने पहले से ही राजनीतिक तापमान बढ़ा रखा है। चापड़ा में BJP एजेंट पर हमले का आरोप नदिया जिले के चापड़ा में बीजेपी ने आरोप लगाया कि उसके पोलिंग एजेंट मोशारेफ मीर पर तृणमूल समर्थकों ने हमला किया। बताया गया कि उन्हें लोहे की रॉड से पीटा गया, जिससे वह घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। बीजेपी उम्मीदवार सैकत सरकार ने घटना के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हावड़ा में EVM खराब, मतदान प्रभावित हावड़ा के एक मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी की शिकायत मिली। इसके कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने जल्द ही समस्या का समाधान कर मतदान दोबारा शुरू करा दिया। EVM को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच पहले से ही तीखी बहस चलती रही है। एंटाली में प्रियंका तिबरेवाल की अधिकारियों से बहस कोलकाता के एंटाली विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका तिबरेवाल की मतदान केंद्र पर चुनाव अधिकारियों और सुरक्षा बलों से तीखी बहस हो गई। उनके पोलिंग एजेंट को बूथ से बाहर निकाले जाने पर विवाद बढ़ गया। प्रियंका ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र के भीतर पक्षपातपूर्ण गतिविधियां हो रही थीं। शांतिपुर और भांगर में भी तनाव शांतिपुर में बीजेपी के चुनावी कैंप में तोड़फोड़ की खबर आई। वहीं, दक्षिण 24 परगना के भांगर में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के पोलिंग एजेंट को बूथ में प्रवेश से रोके जाने का आरोप लगा। इन घटनाओं ने कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों पर लगाए गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाहरी पर्यवेक्षक और केंद्रीय बल मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा, "वोट मतदाता डालेंगे, सुरक्षा बल नहीं। इस तरह चुनाव नहीं कराए जा सकते।" 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 92.88 प्रतिशत मतदान हुआ था। दूसरे और अंतिम चरण के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। राज्य की राजनीति में इस बार ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच सीधी और बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।  

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