मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:22 बजे बीएसई सेंसेक्स 448.92 अंकों की बढ़त के साथ 75,057.90 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 139.11 अंक चढ़कर 23,551.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। हालांकि, बाजार खुलने के कुछ समय बाद मुनाफावसूली के चलते बढ़त सीमित हो गई। 10:01 बजे तक सेंसेक्स 83 अंक और निफ्टी 52 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अदाणी समूह और बैंकिंग-ऑटो शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 25 से अधिक शेयरों में तेजी देखने को मिली। खासकर अदाणी समूह के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर बीएसई पर 5.3 प्रतिशत तक उछलकर 2,634 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा एनटीपीसी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। आईटी शेयरों पर दबाव, वैश्विक संकेतों से उम्मीद दूसरी ओर आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और चीन के बीच होने वाली शिखर वार्ता से निवेशकों में उम्मीद बढ़ी है। माना जा रहा है कि व्यापार और तकनीकी मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत वैश्विक बाजारों को स्थिरता दे सकती है। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 4,703 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,869 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
तेहरान/वाशिंगटन, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की खबरों के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई, जिसके चलते घरेलू बाजार लाल निशान में खुला। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में नजर आए। सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा टूटा बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 212 अंकों की गिरावट के साथ 77,631 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी 93 अंक टूटकर 24,233 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में कोल इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में बिकवाली देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में हालात बिगड़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं WTI क्रूड भी करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दबाव एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई भी कमजोर बंद हुआ। हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स में भी दबाव देखा गया। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। S&P 500, Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average सभी लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों में बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच गिरावट के साथ बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 114 अंक यानी 0.14 प्रतिशत गिरकर 77,844.52 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी मामूली 4.30 अंक टूटकर 24,326.65 के स्तर पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 671 अंकों का उतार-चढ़ाव दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 78,384.70 का उच्चतम और 77,713.21 का न्यूनतम स्तर छुआ। इससे बाजार में निवेशकों की बेचैनी साफ नजर आई। बुधवार को आई बड़ी तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिली। इन शेयरों में रही गिरावट गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाइटन, सन फार्मा और आईटीसी शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। वहीं दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इन शेयरों में निवेशकों ने खरीदारी दिखाई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी वजह एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को ही 5,834.90 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही विदेशी निकासी ने बाजार की धारणा कमजोर कर दी है। वैश्विक संकेतों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त में रहे, जबकि यूरोपीय बाजार कमजोर दिखे। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबारी दिन के अंत में BSE Sensex 609.45 अंकों की मजबूती के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 181.95 अंक चढ़कर 24,177.65 के स्तर के पार पहुंच गया। हरियाली के साथ बंद हुआ बाजार दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार को सहारा दिया। खासकर बड़े और दिग्गज शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। किन वजहों से आई तेजी विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी की उम्मीद और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों और मजबूत आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को सपोर्ट किया। सेक्टोरल प्रदर्शन रहा मजबूत बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे बाजार की तेजी को और बल मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार में उत्साह बना रहा। निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।
मुंबई, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध ने बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। इसी बीच इस सप्ताह की शुरुआत में ही शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex करीब 1,000 अंकों की गिरावट के साथ 72,850 के आसपास पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी लगभग 200 अंक फिसलकर 22,600 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। किन सेक्टर पर असर आज ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनाते हुए मुनाफावसूली की। गिरावट की बड़ी वजहे गिरावट की पहली वजह वैश्विक तनाव है, खासकर ईरान-इजराइल तनाव, जिसने सप्लाई चेन को प्रभावित किया। दूसरी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, जो बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तीसरा कारण विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। एशियाई बाजारों में असर जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भारी गिरावट रही, जबकि हांगकांग में हल्की तेजी और चीन में स्थिर कारोबार देखा गया। पिछले सत्र में अमेरिकी बाजार भी दबाव में बंद हुए, जिससे भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। लगातार दूसरे सत्र में गिरावट से बाजार में सतर्कता बढ़ गई है और फिलहाल निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 885.32 अंक चढ़कर 74,953.77 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 307.65 अंक की बढ़त के साथ 23,220.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। रुपये में गिरावट शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 93.96 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में सतर्क आशावाद बना हुआ है। निवेशक फिलहाल भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक घटनाओं का असर मिडिल ईस्ट में तनाव, खासकर इज़राइल और ईरान के बीच जारी टकराव और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। हालांकि संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ सहारा दिया है। एशियाई बाजारों में तेजी एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान, सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल और सोने-चांदी का हाल ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे वैश्विक बाजारों को राहत मिली। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई—24 कैरेट सोना 3.37% उछलकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.82% बढ़कर 2,34,542 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 950 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि Nifty 50 लगभग 300 अंक गिरकर 23,600 के नीचे पहुंच गया। सुबह करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 946 अंक (1.2%) गिरकर 75,918 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 296 अंक टूटकर 23,571 के स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1.5% तक गिर गए। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में देखने को मिला। 1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। Brent Crude Oil का भाव करीब 9% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं West Texas Intermediate का दाम भी लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे ऑयल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 2. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। उन्होंने बुधवार को करीब 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि मार्च महीने में अब तक करीब 39,100 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 4,965 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन इससे बाजार को ज्यादा सहारा नहीं मिल सका। 3. कमज़ोर ग्लोबल संकेत गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी कमज़ोरी रही। Dow Jones Industrial Average करीब 0.61% गिरकर बंद हुआ, जबकि S&P 500 में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे भारतीय बाजार पर भी दबाव बढ़ा। 4. ग्लोबल ट्रेड को लेकर चिंता अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ नई “अनफेयर ट्रेड” जांच शुरू की है। माना जा रहा है कि यह कदम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की टैरिफ नीति को फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में उठाया गया है। इससे वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। 5. रुपये में कमज़ोरी भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 92.34 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ सकती है। 6. इंडिया VIX में उछाल बाजार का ‘डर का पैमाना’ माने जाने वाला India VIX करीब 6% बढ़कर 22.32 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और घबराहट बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।