गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल घायलों से मिलने उनके गांव पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी ली।
जानकारी के अनुसार, यह घटना रंका प्रखंड के विश्रामपुर क्षेत्र स्थित बरवाही गांव की है। यहां मंडल डैम के विस्थापितों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास योजना के तहत प्रशासनिक टीम स्थल निरीक्षण करने पहुंची थी। निरीक्षण के लिए उपायुक्त दिनेश यादव और पुलिस अधीक्षक अमन कुमार का काफिला गांव में पहुंचा था।
बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने प्रशासनिक वाहनों के काफिले को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटी ने इस पूरे मामले को प्रशासन की “बर्बर कार्रवाई” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग किया, जिससे कई आदिवासी ग्रामीण घायल हो गए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद JMM जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाही गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और पूरी घटना की जानकारी ली।
इस टीम में पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रौशन कुमार पाठक, सचिव शरीफ अंसारी, युवा अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष फरीद खान, मनोज तिवारी, सुनील गौत्तम, बीरेंद्र साव और धर्मेंद्र कुमार दुबे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने घटना में घायल महिला मरियम तिर्की से भी मुलाकात की और उनसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
धनबाद। धनबाद जिले के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित केशलपुर में अवैध कोयला खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव की मुखिया प्रेमलता कुमारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अवैध खनन स्थलों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने उन मुहानों को बंद करने की कोशिश की, जहां बोरे में बड़ी मात्रा में कोयला जमा किया गया था। बमबाजी से फैली दहशत ग्रामीणों के विरोध से बौखलाए अवैध कोयला कारोबारियों ने इलाके में दहशत फैलाने के लिए बमबाजी की। इस घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। गुस्साए ग्रामीणों ने कथित तौर पर मजदूरों को ढोने वाली एक ऑटो में तोड़फोड़ भी की। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भू-धंसान और हादसे का डर ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कोयला खनन से उनके गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लगातार जमीन के नीचे से कोयला निकाले जाने के कारण भू-धंसान का खतरा बढ़ रहा है। लोगों ने आशंका जताई कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सोनारडीह के टंडाबाड़ी जैसी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की। पुलिस और ग्रामीणों के बीच बहस अवैध खनन बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीण रामकनाली ओपी पहुंचे, जहां पुलिस जवानों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस हुई। कुछ समय तक ओपी परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही। बाद में सूचना मिलने पर ओपी प्रभारी Alisha Kumari मौके पर पहुंचीं और लोगों को शांत कराया। शिकायत के बाद कार्रवाई ग्रामीणों की लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन ने मामले की जांच और निगरानी बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
रांची। आने वाले चुनाव में मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मैप्ड इलेक्टर लिस्ट प्रकाशित करने का फैसला लिया है। अगर आपका नाम पुरानी मतदाता सूची से नई सूची में सही तरीके से मैप नहीं हुआ है, तो आने वाले चुनाव में दिक्कत हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मेप्ड इलेक्टोरल लिस्ट प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराये यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत जारी की जाएगी। इस दौरान जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से अब तक मैप नहीं हो पाया है, वे अपने संबंधित बूथ पर जाकर सूची में नाम जांच सकेंगे और मौके पर मौजूद बीएलओ की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे। सूची सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी। भविष्य में हो सकती है परेशानी ऐसे मतदाता, जिनका नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से वर्तमान सूची में सही तरीके से मैप नहीं हो पाया है, उन्हें भविष्य में मतदान के दौरान परेशानी हो सकती है। इसी को देखते हुए यह विशेष व्यवस्था की जा रही है। मतदाता अपने संबंधित मतदान केंद्र पर पहुंच कर सूची में अपना नाम जांच सकेंगे। मौके पर मौजूद बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ जरूरी जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया पूरी कराने में भी मदद करेंगे। नाम जुड़वाने के लिए ये हैं विकल्प 1. एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा : बीएलओ द्वारा दिया गया फॉर्म सही जानकारी के साथ भरकर जमा करना होगा। पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। यदि 2003 की सूची में नाम नहीं मिलता है, तो मतदाता को अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें आधार, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण, स्कूल सर्टिफिकेट या अन्य स्वीकृत दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। 2. माता-पिता के 2003 रिकॉर्ड का उपयोग : अगर खुद का नाम 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन माता या पिता का नाम उस सूची में है तो उनके पुराने वोटर रिकॉर्ड का अंश लगाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ऐसे मामलों में माता-पिता के लिए अलग दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। 3. दावेदारी का मौका मिलेगा : जिनका डेटा मैप नहीं होगा, उन्हें निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से नोटिस दिया जा सकता है। इसके बाद दस्तावेज देकर दावा पेश कर सकते हैं। 4. दावा-आपत्ति अवधि में आवेदन कर सकते हैं : ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद नाम जोड़ने, सुधार कराने या आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाता है। क्यों जरूरी है यह जांच मतदाता सूची में नाम सही तरीके से मैप नहीं होने पर भविष्य में वोट डालने, नाम सत्यापन या चुनाव संबंधी अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है। इसलिए जिला प्रशासन ने अपील की है कि लोग इस विशेष अभियान का लाभ उठाकर समय रहते अपना नाम सत्यापित करा लें। क्या करें मतदाता • 23 मई को अपने मतदान केंद्र पर जाएं • सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सूची जांचें • यदि नाम यूएन-मैप्ड इलेक्टोरल लिस्ट में नहीं मिले तो तुरंत बीएलओ से संपर्क करें • जरूरी जानकारी व दस्तावेज देकर मैपिंग पूरी कराएं • आधार कार्ड व मतदाता पहचान पत्र लेकर जाएं सभी सातों विस के बूथों पर रहेगी व्यवस्था उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर रांची जिले के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों - तमाड़ विधानसभा क्षेत्र, सिल्ली विधानसभा क्षेत्र, खिजरी विधानसभा क्षेत्र, रांची विधानसभा क्षेत्र, हटिया विधानसभा क्षेत्र, कांके विधानसभा क्षेत्र और मांडर विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर यह व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों तथा बीएलओ को मतदान केंद्रों पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है। साथ ही शिक्षा और समाज कल्याण विभाग को भी अपने अधीन कार्यरत बीएलओ एवं पर्यवेक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वांछित टीपीसी उग्रवादी और देह व्यापार गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उग्रवादी दुर्गा बेदिया नौ मामलों में वांछित था, जबकि देह व्यापार के आरोप में एक होटल मालिक सहित चार लोगों को जेल भेजा गया है। गिद्दी थाना क्षेत्र से लंबे समय से फरार चल रहे टीपीसी उग्रवादी संगठन के सदस्य दुर्गा बेदिया उर्फ रामकुमार बेदिया को गिरफ्तार किया गया। एसपी को मिली थी गुप्त सूचना एसपी अमन कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि दुर्गा बेदिया गिद्दी थाना क्षेत्र के मिश्रण मिश्रा इन मोड़ के पास पहुंच रहा है। इस सूचना के आधार पर एक टीम गठित कर उसे पकड़ा गया। लंबे समय से था फरार पुलिस के अनुसार, दुर्गा बेदिया कई समय से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे थे। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कुल नौ मामले दर्ज हैं। हजारीबाग पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है, क्योंकि वह अपने दस्ते को फिर से सक्रिय करने की योजना बना रहा था। होटल यमुना में चल रहा था देह व्यापार दूसरी ओर, कोर्रा थाना क्षेत्र से देह व्यापार के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हजारीबाग कोर्रा निवासी होटल संचालक रामेश्वर प्रसाद, कोडरमा निवासी धर्मेंद्र चौधरी और सोनू कुमार, तथा हजारीबाग लोहसिंघना निवासी आसिफ अजहर शामिल हैं। एसपी अमन कुमार को सिंदूर चौक के निकट स्थित यमुना पैलेस होटल में अवैध देह व्यापार की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के अनुसार, होटल मालिक और संचालक दलालों से सांठगांठ कर विभिन्न क्षेत्रों से युवतियों को बुलाकर यह धंधा चला रहे थे। होटल में छापेमारी के दारान मिले आपत्तिजनक सामान इस सूचना पर एक टीम गठित कर होटल यमुना में छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान होटल से तीन युवकों को पकड़ा गया और कमरों से आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए गए। होटल मालिक और तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।