झारखंड

Hazaribagh RTE 2026: 279 Kids to Join Private Schools

हजारीबाग में RTE एडमिशन प्रक्रिया पूरी: 500 से ज्यादा आवेदन, 279 बच्चों को मिलेगा निजी स्कूलों में पढ़ने का मौका

surbhi मार्च 17, 2026 0
Hazaribagh RTE admission process with children and school registration forms
Hazaribagh RTE 2026 Admission Update

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में नामांकन के लिए इस साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। निर्धारित समय सीमा खत्म होने तक 500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब शिक्षा विभाग द्वारा जांच (स्क्रूटनी) के बाद 279 बच्चों का चयन कर संबंधित स्कूलों को सूची भेजी जाएगी।

 

14 मार्च को खत्म हुई आवेदन की डेडलाइन

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 14 मार्च तय की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आवेदन किया।

जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह लगातार नामांकन प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

 

23 निजी स्कूलों में होगा नामांकन

जिले के कुल 23 निजी स्कूलों में RTE के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अवसर मिलेगा। चयनित बच्चों को एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में प्रवेश दिया जाएगा।

 

इन स्कूलों में सबसे ज्यादा आवेदन

इस बार कुछ स्कूलों में आवेदन की संख्या काफी ज्यादा रही। खासकर:

  • बरकट्ठा का डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो
  • चौपारण का सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा
  • शहरी क्षेत्र का नेशनल पब्लिक स्कूल
  • इचाक का चैंपियन बेसिक अकैडमी

इन सभी स्कूलों में 20-20 सीटों पर नामांकन किया जाएगा।

 

कहीं ज्यादा तो कहीं कम सीटें

जहां कई स्कूलों में अधिक सीटें निर्धारित हैं, वहीं कुछ स्कूलों में सीटें सीमित हैं। उदाहरण के तौर पर डाडी प्रखंड के डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए में केवल 5 बच्चों का ही नामांकन होगा।

इसके अलावा शहर के प्रमुख स्कूलों जैसे दिल्ली पब्लिक स्कूल, संत पॉल स्कूल, संत स्टेफन स्कूल, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और अन्य संस्थानों में भी अलग-अलग कक्षाओं के लिए सीटें तय की गई हैं।

 

स्क्रूटनी के बाद जारी होगी फाइनल सूची

अब शिक्षा विभाग सभी आवेदनों की गहन जांच करेगा। इसके बाद योग्य 279 बच्चों की सूची तैयार कर संबंधित स्कूलों को भेजी जाएगी, ताकि समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो सके।

 

हर सीट पर होगा RTE के तहत एडमिशन

जिला शिक्षा अधीक्षक आकाश कुमार ने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा के भीतर सभी सीटों पर RTE के तहत नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभाग हर स्तर पर गंभीरता से काम कर रहा है।

 

गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का बड़ा अवसर

RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा मिलती है। हजारीबाग में इस योजना के जरिए सैकड़ों बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्जवल भविष्य का मौका मिलने जा रहा है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची। UPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को रांची में आयोजित की जाएगी। परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और प्रमंडलीय अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस संबंध में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त Manoj Kumar की अध्यक्षता में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।   अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारियों की जानकारी बैठक में आयुक्त के सचिव अलोक कुमार ने परीक्षा कार्य में प्रतिनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान प्रत्येक केंद्र पर प्रशासनिक निगरानी रखी जाएगी और सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।   मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश आयुक्त मनोज कुमार ने सभी केंद्र अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।   दो पालियों में आयोजित होगी परीक्षा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित होगी। पहला पेपर सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक लिया जाएगा। रांची के 36 परीक्षा केंद्रों पर कुल 16,531 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे।   परीक्षा अवधि में अधिकारी रहेंगे अलर्ट आयुक्त ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के एक दिन पहले से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक सभी अधिकारी अलर्ट मोड में रहेंगे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है।

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