हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वांछित टीपीसी उग्रवादी और देह व्यापार गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उग्रवादी दुर्गा बेदिया नौ मामलों में वांछित था, जबकि देह व्यापार के आरोप में एक होटल मालिक सहित चार लोगों को जेल भेजा गया है। गिद्दी थाना क्षेत्र से लंबे समय से फरार चल रहे टीपीसी उग्रवादी संगठन के सदस्य दुर्गा बेदिया उर्फ रामकुमार बेदिया को गिरफ्तार किया गया। एसपी को मिली थी गुप्त सूचना एसपी अमन कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि दुर्गा बेदिया गिद्दी थाना क्षेत्र के मिश्रण मिश्रा इन मोड़ के पास पहुंच रहा है। इस सूचना के आधार पर एक टीम गठित कर उसे पकड़ा गया। लंबे समय से था फरार पुलिस के अनुसार, दुर्गा बेदिया कई समय से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे थे। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कुल नौ मामले दर्ज हैं। हजारीबाग पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है, क्योंकि वह अपने दस्ते को फिर से सक्रिय करने की योजना बना रहा था। होटल यमुना में चल रहा था देह व्यापार दूसरी ओर, कोर्रा थाना क्षेत्र से देह व्यापार के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हजारीबाग कोर्रा निवासी होटल संचालक रामेश्वर प्रसाद, कोडरमा निवासी धर्मेंद्र चौधरी और सोनू कुमार, तथा हजारीबाग लोहसिंघना निवासी आसिफ अजहर शामिल हैं। एसपी अमन कुमार को सिंदूर चौक के निकट स्थित यमुना पैलेस होटल में अवैध देह व्यापार की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के अनुसार, होटल मालिक और संचालक दलालों से सांठगांठ कर विभिन्न क्षेत्रों से युवतियों को बुलाकर यह धंधा चला रहे थे। होटल में छापेमारी के दारान मिले आपत्तिजनक सामान इस सूचना पर एक टीम गठित कर होटल यमुना में छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान होटल से तीन युवकों को पकड़ा गया और कमरों से आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए गए। होटल मालिक और तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
रांची। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा में 95 प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले हजारीबाग जिले के 59 हाई स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। इनसे एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है। मैट्रिक के रिजल्ट में हजारीबाग 14वें नंबर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि इस बार रिजल्ट में हजारीबाग 14वें स्थान पर रहा। जबकि पिछले साल यह सातवें स्थान पर था। जिन स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और पीएमश्री स्कूल देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी व ढौठवा आदि शामिल हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त है। इस बार गणित, अंग्रेजी और विज्ञान में बड़ी संख्या में बच्चे फेल हो गए हैं, जिसके कारण इन स्कूलों का रिजल्ट गिरा है।
हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 12 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद भारी हंगामा हो गया। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग कार्रवाई की मांग को लेकर जुट गए। ऑक्सीजन नहीं मिलने से दो मरीजों की मौत का आरोप परिजनों का आरोप है कि दो मरीजों की मौत समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण हुई। उन्होंने बताया कि कई बार डॉक्टरों और कर्मचारियों से गुहार लगाने के बावजूद इलाज शुरू नहीं किया गया। मरीजों की हालत बिगड़ती रही, लेकिन आवश्यक सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रसव के दौरान महिला की गई जान कटकमसांडी प्रखंड की रहने वाली शोभा कुमारी की मौत प्रसव के दौरान हो गई। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने खून की कमी बताते हुए रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी। रक्त चढ़ाने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि डॉक्टर और नर्स को सूचना देने के बाद भी कोई देखने नहीं आया, जिससे महिला की मौत हो गई। हालांकि नवजात बच्चा सुरक्षित बताया जा रहा है। अस्पताल पहुंचे विधायक प्रदीप प्रसाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग सदर विधायक Pradeep Prasad अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के नाम पर भारी लापरवाही हो रही है और आए दिन मरीजों की मौत हो रही है। विधायक ने उपायुक्त को पूरे मामले की जानकारी देते हुए चेतावनी दी कि यदि अस्पताल की व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे खुद हस्तक्षेप करेंगे, चाहे इसके लिए उनकी विधायकी ही क्यों न चली जाए। पहले भी उठ चुके हैं सवाल गुरुवार को थैलेसीमिया पीड़ित महिला सरिता देवी और शुक्रवार सुबह पवन कुमार अग्रवाल की मौत को लेकर भी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे थे। दोनों मामलों में समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
हजारीबाग। हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जिले के निजी स्कूलों की कथित मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस मामले में हजारीबाग उपायुक्त को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और जांच की मांग की है। स्कूलों पर कमीशनखोरी का आरोप विधायक ने आरोप लगाया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को बच्चों की किताबें, ड्रेस और जूते केवल तय दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। उनके अनुसार, स्कूल प्रबंधन और कुछ दुकानदारों के बीच साठगांठ के जरिए कमीशनखोरी की जा रही है। इससे सामानों की कीमतें मनमाने ढंग से वसूली जा रही हैं और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। री-एडमिशन शुल्क पर भी सवाल प्रदीप प्रसाद ने ‘री-एडमिशन फीस’ के नाम पर ली जा रही राशि पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हर साल छात्रों से दोबारा प्रवेश शुल्क लेना गलत है और इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। विधायक की प्रमुख मांगें विधायक ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही निजी स्कूलों को निर्देश दिया जाए कि वे किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने की अनिवार्यता खत्म करें। अभिभावकों को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। अभिभावकों में बढ़ी उम्मीद विधायक के इस कदम से जिले के हजारों अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है। लंबे समय से निजी स्कूलों की फीस, ड्रेस और किताबों की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पूरे जिले में वांछित अपराधियों, वारंटियों और फरार आरोपियों के खिलाफ एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने 39 अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। 30 विशेष टीमों का गठन अभियान को सफल बनाने के लिए जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षक और पुलिस निरीक्षकों की निगरानी में कुल 30 विशेष टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों में थाना प्रभारियों के साथ रिजर्व गार्ड के अनुभवी पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जिलेभर में कार्रवाई की। 104 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी पुलिस टीमों ने रातभर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चिन्हित 104 ठिकानों पर छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया। अभियान के दौरान कई लंबित वारंटों का भी निष्पादन किया गया और फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का सख्त संदेश हजारीबाग पुलिस अधीक्षक ने अभियान को सफल बताते हुए कहा कि जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा और जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। लोगों से सहयोग की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराध की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग से अपराध पर और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है। अपराधियों में बढ़ी बेचैनी लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई से जिले के अपराधियों में डर का माहौल है। पुलिस का मानना है कि ऐसे विशेष अभियानों से अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
हजारीबाग। हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित प्राचीन मेगालिथ स्थल को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। कला एवं पर्यटन विभाग ने इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने के लिए पहल तेज कर दी है। राज्य सरकार इसे विश्व स्तर के पर्यटन और विरासत स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। पर्यटन विभाग ने किया निरीक्षण कला एवं पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ मेगालिथ क्षेत्र का दौरा किया और विकास कार्यों को लेकर आवश्यक निर्देश दिए। जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने स्थल की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी ली। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है। खगोलीय महत्व वाला अनोखा स्थल बड़कागांव प्रखंड के पकरी बरवाडीह में स्थित यह मेगालिथ लगभग 3000 से 4000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह स्थल आदिवासी समुदाय की प्राचीन खगोलीय समझ का अद्भुत उदाहरण है। हर साल 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें पत्थरों के बीच से सीधी गुजरती हैं, जिसे इक्विनॉक्स कहा जाता है। यह घटना दुनिया के बेहद कम स्थानों पर देखने को मिलती है। इंग्लैंड के ऐतिहासिक स्थलों की तर्ज पर होगा विकास सरकार इस स्थल को इंग्लैंड के प्रसिद्ध न्यूग्रेंज और स्टोनहेंज जैसी विश्व प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक धरोहरों की तर्ज पर विकसित करना चाहती है। अधिकारियों का मानना है कि सही संरक्षण और विकास के बाद यह स्थल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल हो सकता है। पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा इस ऐतिहासिक स्थल की खोज वर्ष 2000 में शोधकर्ता शुभाशीष दास ने की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया, तो हजारीबाग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल सकती है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण स्थित महाराजगंज बाजार में बुधवार देर शाम बड़ी चोरी की घटना सामने आई। सोने के व्यापारी अलखदेव पोद्दार अपनी दुकान बंद कर रहे थे, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनकी बाइक की डिक्की से करीब 20 लाख रुपये मूल्य के जेवरात चोरी कर लिए और फरार हो गए। शटर बंद करते समय दिया वारदात को अंजाम जानकारी के अनुसार, व्यापारी ने कुछ कीमती जेवर दुकान बंद करने के दौरान अपनी बाइक की डिक्की में रख दिए थे। जैसे ही वह दुकान का शटर बंद कर ताला लगाने लगे, तभी काले रंग की अपाचे बाइक पर सवार दो-तीन युवक मौके पर पहुंचे। उन्होंने तेजी से डिक्की खोली और जेवर लेकर इटखोरी की ओर फरार हो गए। बाजार में मची अफरा-तफरी घटना के बाद व्यापारी ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर जुट गए। देखते ही देखते पूरे बाजार में हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय व्यापारियों में दहशत फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। पुलिस जांच और छापेमारी शुरू सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और बदमाशों के भागने के रास्ते की जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की तलाश में छापेमारी भी की जा रही है। सुनियोजित चोरी की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस को शक है कि यह घटना पहले से रची गई साजिश का हिस्सा हो सकती है, क्योंकि बदमाशों ने बेहद सटीक तरीके से वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।
हजारीबाग। हजारीबाग में मंगलवार 28 अप्रैल को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक शर्मनाक घटना घटी है। यहां मंत्री इरफान अंसारी के सामने ही उनके समर्थकों ने एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर उसकी पिटाई कर दी। हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई है। आरोप है कि यह हंगामा स्वास्थ्य मंत्री के समर्थकों द्वारा किया गया, जब पत्रकारों ने मंत्री से जनहित से जुड़ा एक सवाल पूछा। यह है पूरा मामला मंगलवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। वे सोमवार को पौता जंगल से बरामद हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शवों के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने आए थे। मंत्री ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन जैसे ही वह अस्पताल से बाहर निकलने लगे, पत्रकारों ने उनसे चतरा विमान हादसे के पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सवाल किया। सवाल पूछना पड़ा भारी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चतरा हादसे पर सवाल सुनते ही मंत्री के समर्थक उग्र हो गए। जवाब देने के बजाय समर्थकों ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। यह पूरी घटना कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें समर्थकों का आक्रामक रवैया साफ नजर आ रहा है। इस मारपीट में न्यूज 18 के पत्रकार आशीष कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनके सिर में चोट लगी है। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। घटना के बाद बड़ी संख्या में हजारीबाग प्रेस क्लब और श्रमजीवी जर्नलिस्ट यूनियन से जुड़े पत्रकार वहां पहुंचे और घटना का विरोध किया। इधर, पत्रकार की बेरहमी से की गई पिटाई की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा और कायराना प्रहार बताया जा रहा है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र गिरी एवं रांची जिला अध्यक्ष जावेद अख्तर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे पूरे पत्रकार समाज में भारी रोष है। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी गुर्गों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर से कठोर सजा दी जाए। साथ ही पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। पत्रकारों की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जोरदार विरोध किया जाएगा।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के डेमोटांड़ के पास निर्मल सिंह ढाबा के आगे हुई। हादसे का शिकार हुआ परिवार शादी समारोह से लौट रहा था, तभी रास्ते में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मृतकों की पहचान चंदन कुमार और उनकी मां विद्या देवी के रूप में हुई है। वहीं चंदन कुमार की पत्नी अंकिता देवी और उनके पिता महावीर प्रसाद गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को पहले शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया गया। पटना से लौटते वक्त हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, पूरा परिवार पटना में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। रविवार रात समारोह खत्म होने के बाद वे अपने घर रांची के बीआईटी क्षेत्र लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में यह हादसा हो गया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तेज रफ्तार और झपकी बनी हादसे की वजह स्थानीय लोगों के मुताबिक, कार की रफ्तार काफी तेज थी और संभव है कि चालक को झपकी आ गई हो। इसी कारण वाहन सड़क किनारे खड़े एक हाईवा से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना परिजनों को दे दी गई है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानी की अहमियत को उजागर करता है।
चाईबासा। झारखंड में कोषागार (ट्रेजरी) से अवैध निकासी के मामलों की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। इस बार मामला चाईबासा से जुड़ा है, जहां पुलिस विभाग के खातों से करीब 45 लाख रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। घटना सामने आते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, यह गड़बड़ी आंतरिक ऑडिट के दौरान पकड़ी गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुलिस विभाग के नाम पर फर्जी तरीके से अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर रकम निकाली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। विशेष जांच टीम का गठन पूरे मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें कोषागार, ऑडिट और पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल हैं। रांची मुख्यालय से भी ऑडिट टीम को जांच में लगाया गया है, जो पिछले महीनों के वाउचर, चेकबुक और ऑनलाइन लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है। एक सिपाही हिरासत में, जांच तेज मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गोइलकेरा से एक सिपाही को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि उसी के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन हुए। हालांकि, अभी तक पूरी राशि और जिम्मेदार व्यक्तियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि बिना उचित सत्यापन के कैसे निकाली गई। प्रशासन ने सभी बड़े भुगतानों पर अस्थायी रोक लगा दी है और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
हजारीबाग। झारखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट भी गहराता जा रहा है। हजारीबाग और रामगढ़ जिलों में लगातार हो रही बिजली कटौती से आम जनजीवन प्रभावित है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उठे अहम मुद्दे सांसद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अधिकारियों ने माना कि बिजली आपूर्ति में तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कमियों के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हजारीबाग को करीब 130 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जो उपलब्ध तो है, लेकिन वितरण प्रणाली में खामियों के कारण लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही। अंडरग्राउंड केबलिंग सबसे बड़ी चुनौती बैठक में यह भी सामने आया कि क्षेत्र में वर्षों से अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य अधूरा पड़ा है। इसी वजह से बार-बार बिजली बाधित होती है। इसके अलावा, क्षेत्र की Damodar Valley Corporation (DVC) पर अत्यधिक निर्भरता भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जैसे ही यह निर्भरता कम होगी, बिजली कटौती में भी कमी आने की उम्मीद है। विभागीय लापरवाही पर जताई चिंता सांसद ने विभागीय लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, इसलिए विभाग को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जल्द समाधान का आश्वासन मनीष जायसवाल ने लोगों को भरोसा दिलाया कि समस्या के समाधान के लिए तेजी से काम किया जा रहा है और जल्द ही हालात बेहतर होंगे। लोगों से अपील प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक बिजली खपत से बचें, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और संकट की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में बड़कागांव थाना क्षेत्र के 13 माइल पुल के पास हुए हाइवा अगजनी मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से इलाके में पुलिस की सक्रियता और सतर्कता साफ नजर आई है। एसआईटी गठन के बाद तेज हुई कार्रवाई घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। गुप्त सूचना के आधार पर चंदौल गांव स्थित हथिया पत्थर जंगल में छापेमारी की गई, जहां से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद एजाज, मोहम्मद अफताब, मोहम्मद सलामत अंसारी और तुसार सिन्हा शामिल हैं। हथियार और आपत्तिजनक सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन पिस्टल, 11 जिंदा गोलियां, मोबाइल फोन और धमकी भरे पर्चे बरामद किए हैं। इन पर्चों में घटना की जिम्मेदारी कथित तौर पर राहुल दुबे गैंग द्वारा ली गई थी, जिससे मामले की साजिश का खुलासा हुआ। कोल माइनिंग क्षेत्र में दहशत फैलाने की साजिश पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पेट्रोल छिड़ककर हाइवा में आग लगाई थी। उनका मकसद कोल माइनिंग क्षेत्र में दहशत फैलाना था। पुलिस के अनुसार, यह संगठित अपराध का हिस्सा हो सकता है। आरोपियों का आपराधिक इतिहास गिरफ्तार आरोपियों में से मोहम्मद सलामत अंसारी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि अन्य आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस अब पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच में जुट गई है। पुलिस की तत्परता से मिली सफलता पुलिस अधिकारियों ने बताया कि त्वरित कार्रवाई और सटीक सूचना के कारण यह सफलता संभव हो पाई। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
हजारीबाग। झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग वनभूमि घोटाला मामले से जुड़े आरोपी आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। एसीबी और बचाव पक्ष ने रखी दलीलें सुनवाई के दौरान ACB ने अदालत में कहा कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो आरोपी की भूमिका को संदिग्ध बनाते हैं। एसीबी ने यह भी तर्क दिया कि मामले की गहराई से जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि विनय चौबे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उनके वकीलों ने कहा कि अब तक कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया है, जो आरोपों को साबित कर सके। जमानत की मांग और सहयोग का आश्वासन बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरोपी को हिरासत में रखने का कोई ठोस आधार नहीं है और उन्हें राहत दी जानी चाहिए। ACB केस से जुड़ा मामला यह मामला एसीबी हजारीबाग द्वारा दर्ज कांड संख्या 11/2025 से संबंधित है, जिसमें वनभूमि से जुड़े कथित घोटाले और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की जा रही है। फैसले पर टिकी निगाहें सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट जमानत मंजूर करता है या जांच को प्राथमिकता देते हुए याचिका खारिज करता है।
हजारीबाग। जिले में अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाते हुए एक ही दिन में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नए एसपी अमन कुमार के नेतृत्व में यह विशेष कार्रवाई फरार अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ की गई, जिससे अपराध जगत में हड़कंप मच गया है। छापेमारी के लिए बनाई गईं कई टीमें पुलिस ने 20-21 अप्रैल को जिलेभर में व्यापक अभियान चलाया। इसके लिए 69 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिनमें 253 पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे। इन टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में करीब 200 संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान फरार आरोपियों की धरपकड़ के साथ-साथ कई मामलों में वारंट का निष्पादन भी किया गया। मनचलों पर भी कड़ी कार्रवाई इसके अलावा 21-22 अप्रैल की रात अड्डेबाजी और मनचलों के खिलाफ भी अलग से अभियान चलाया गया। इस दौरान 50 टीमों ने 122 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें 69 लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें पीआर बांड पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। 118 मामलों का निष्पादन अभियान के दौरान पुलिस ने कुल 118 मामलों का निष्पादन किया, जिसमें वारंट, रिकॉल, जमानत और आत्मसमर्पण से जुड़े मामले शामिल हैं। साथ ही 11 इश्तिहार और कुर्की की कार्रवाई भी पूरी की गई। अभियान जारी रखने की चेतावनी एसपी अमन कुमार ने साफ कहा है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों या अपराधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को जिले में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे अपराधियों में डर का माहौल बना है।
हजारीबाग। जिले में शिक्षकों ने दो महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया। ट्रेजरी घोटाले के बाद मार्च से सैलरी बंद होने के कारण शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक अपने-अपने स्कूल पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। समय पर वेतन की मांग तेज शिक्षक संगठनों का कहना है कि मार्च और अप्रैल जैसे महीनों में खर्च अधिक होता है, ऐसे में वेतन नहीं मिलने से उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने प्रशासन से जल्द वेतन भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रेजरी घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है। सहायक आचार्यों की स्थिति और खराब शिक्षकों के अनुसार, सहायक आचार्यों की नियुक्ति हुए करीब 9 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनका वेतन शुरू नहीं हुआ है। इससे नए नियुक्त शिक्षक भी आर्थिक रूप से परेशान हैं। संगठनों ने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी शिक्षक नेताओं ने कहा कि यदि जल्द वेतन जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल विरोध के पहले चरण में काला बिल्ला लगाकर प्रदर्शन किया गया है। प्रशासन को दी गई जानकारी इस पूरे मामले की जानकारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है। शिक्षकों को उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलेगा, अन्यथा आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकता है।
हजारीबाग। हजारीबाग से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक दलित महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसे उसके छोटे बच्चे के साथ करीब 38 घंटे तक थाने में रोके रखा गया। इस दौरान उसके साथ मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना की गई। पीड़िता के अनुसार, बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे हिरासत में रखा गया और लगातार दबाव बनाया गया। सांसद मनीष जायसवाल ने लिया संज्ञान मामला सामने आते ही हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सांसद ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। स्थानीय लोगों में गुस्सा और डर का माहौल इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि थाने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की घटनाएं होंगी, तो आम जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर से उठ जाएगा। पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस तरह के आरोप व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि पीड़िता को न्याय कब और कैसे मिलता है।
हजारीबाग। हजारीबाग के चरही थाना क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, स्कूल की 12 से अधिक छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य ने पढ़ाई के दौरान उनके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की। यह घटना 11 अप्रैल की बताई जा रही है, जब दो छात्राओं ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में और छात्राएं भी सामने आईं, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए। बाल कल्याण समिति तक पहुंचा मामला शिकायत मिलने के बाद संबंधित टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई। इसके बाद पीड़ित छात्राओं को बयान के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए चरही थाना को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। जांच शुरू, कार्रवाई की मांग तेज इस मामले में स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन की ओर से थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी प्राचार्य की कार्यशैली की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। छात्राओं ने बताई धमकी की बात पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि छेड़छाड़ के साथ-साथ उन्हें धमकाया भी गया था कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस खुलासे के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। पुलिस जांच में जुटी चरही थाना पुलिस ने मामले में आवेदन मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हजारीबाग। हजारीबाग में बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला प्रशासन को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध संपत्ति अर्जन के आरोपों की पुष्टि हुई है। हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों और सूचनाओं के आधार पर विधि-सम्मत कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जांच में क्या क्या आया सामने? जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा बिहार के गया जिले में संपत्ति खरीदी गई थी। यह संपत्ति रणधीर कुमार सिंह से खरीदी गई, जबकि क्रेता के रूप में ट्रेजरी घोटाले के कथित मास्टरमाइंड शंभू कुमार की पत्नी काजल कुमारी और सोनी देवी के नाम दर्ज हैं। लगभग 7.84 डिसमिल भूमि के लिए लाखों रुपये का भुगतान बैंक खातों के माध्यम से किया गया, जिससे वित्तीय लेनदेन पर संदेह गहरा गया है। इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि शंभू कुमार ने एक इनोवा वाहन 22 अक्टूबर 2022 को रांची स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी से खरीदा था, जिसका भुगतान भारतीय स्टेट बैंक, हजारीबाग शाखा में उनके संचालित खाते से किया गया था। साथ ही खास महाल भूमि से जुड़े एक अन्य मामले में आरोप है कि बिना विधिवत लीज प्रक्रिया पूरी किए 9 डिसमिल क्षेत्र में G+2 भवन का निर्माण किया गया। वित्तीय अभिलेखों के अनुसार वित्तीय अभिलेखों के अनुसार, स्टेट बैंक से ₹8 लाख और ₹7 लाख की राशि लीजधारक के खाते में ट्रांसफर की गई थी। इसके बाद प्रशासन ने अनियमितता को देखते हुए भूमि को पुनः अधिग्रहित (रिज्यूम) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि संबंधित संपत्तियां अवैध स्रोतों या अनियमित वित्तीय लेनदेन से अर्जित की गई हो सकती हैं। मामले में दर्ज प्राथमिकी संख्या-3226 के तहत विस्तृत जांच जारी है और न्यायालय में विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। करीब 15.41 करोड़ रुपये के गबन मामले में पुलिस ने तीन सिपाहियों—शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने वित्तीय अनियमितताओं में अपनी भूमिका स्वीकार की है। डेटा विश्लेषण से खुला मामला इस पूरे मामले का पर्दाफाश वित्त विभाग की ओर से किए गए डेटा विश्लेषण के दौरान हुआ। संदिग्ध लेन-देन सामने आने के बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। जांच में पाया गया कि अस्थायी पे-आईडी बनाकर सरकारी खजाने से रकम निकाली गई और उसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। 8 साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह घोटाला लंबे समय से चल रहा था और करीब आठ वर्षों तक अवैध निकासी होती रही। इतने लंबे समय तक अनियमितताओं का पता नहीं चलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। 21 बैंक खाते फ्रीज, 1.60 करोड़ सुरक्षित कार्रवाई के तहत 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इन खातों में मौजूद लगभग 1.60 करोड़ रुपये की राशि को सुरक्षित कर लिया गया है। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी की शिकायत पर लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सिस्टम की भूमिका पर उठे सवाल यह मामला केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जिस तरह से वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा, उसने पूरे ट्रेजरी सिस्टम की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोकारो में भी सामने आ चुका है समान मामला गौरतलब है कि हाल ही में बोकारो में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहां वेतन मद से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी का मामला उजागर हुआ था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राज्य की वित्तीय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है।
बड़कागांव। हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र में हुए चर्चित नंदनी ज्वेलर्स लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने कुल सात शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक देसी पिस्टल, 13 जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की गई है। गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल पुलिस के अनुसार, 8 अप्रैल 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर जानकारी मिली कि बड़कागांव-हजारीबाग मुख्य मार्ग पर कुछ अपराधी हथियारों के साथ बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। इसके बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने टीपी-06 के पास झाड़ियों में छिपे तीन संदिग्धों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। तीन आरोपियों से हुआ बड़े गिरोह का खुलासा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विनोद कुमार भुइयां, प्रिंस यादव और तेजु कुमार भोक्ता के रूप में हुई है, जो चतरा जिले के निवासी हैं। पूछताछ में तीनों ने कबूल किया कि वे राहगीरों को निशाना बनाकर लूट की योजना बना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने फरवरी 2026 में हुई नंदनी ज्वेलर्स लूट की वारदात में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की। दुकान की रेकी से लेकर लूट तक की पूरी साजिश आरोपियों ने खुलासा किया कि इस वारदात की पूरी योजना स्थानीय संदीप कुमार सोनी ने तैयार की थी, जिसने दुकान की रेकी की थी। इसके बाद गिरोह ने हथियार के बल पर ज्वेलरी शॉप मालिक पर गोलीबारी कर गहनों से भरा बैग लूट लिया और बाइक से फरार हो गए। पूरे नेटवर्क पर पुलिस की नजर जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में राहुल कुमार सिंह उर्फ पद्धी, साकिन्दर कुमार गंजू, रामधनी ठठेरा, संदीप कुमार सोनी और विशाल शांताराम भी शामिल थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि लूटे गए जेवर को गलाकर दूसरे राज्यों में बेचा जाता था। पुलिस अब इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
हजारीबाग। हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मुख्य मार्ग के पास टीपी-05 के आसपास छापेमारी की। इस दौरान संदिग्ध स्थिति में मौजूद तीन युवकों को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में जब पुलिस ने सख्ती दिखाई और गिरोह का खुलासा हो गया। हथियार के बल पर लूट की थी योजना जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी राहगीरों को निशाना बनाकर हथियार के दम पर लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने उनके पास से एक देशी पिस्टल, 13 जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और एक अपाची मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। पुरानी ज्वेलरी लूट से जुड़ा कनेक्शन पूछताछ में आरोपियों ने बड़कागांव क्षेत्र में पहले हुई ज्वेलरी दुकान लूट की घटना में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि वारदात से पहले इलाके की अच्छी तरह रेकी की गई थी और पूरी योजना बनाकर लूट को अंजाम दिया गया था। इससे पुलिस को पुराने मामलों की जांच में भी अहम सुराग मिले हैं। गिरोह के सभी सदस्य गिरफ्त में इस मामले में पुलिस ने कुल 7 अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता, सहयोगी और वाहन उपलब्ध कराने वाले लोग शामिल हैं। सभी के खिलाफ बड़कागांव थाना कांड संख्या 54/26 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नेटवर्क की जांच जारी फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह के नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि लूटे गए गहनों को दूसरे राज्यों में बेचने का कोई संबंध है या नहीं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।