झारखंड

Hazaribagh: सरकारी स्कूल में शर्मनाक कांड, प्राचार्य पर लगा छात्राओं संग छेड़छाड़ का गंभीर इल्जाम

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
hazaribagh school incident
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हजारीबाग। हजारीबाग के चरही थाना क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, स्कूल की 12 से अधिक छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य ने पढ़ाई के दौरान उनके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की। यह घटना 11 अप्रैल की बताई जा रही है, जब दो छात्राओं ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में और छात्राएं भी सामने आईं, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए।

 

बाल कल्याण समिति तक पहुंचा मामला


शिकायत मिलने के बाद संबंधित टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई। इसके बाद पीड़ित छात्राओं को बयान के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए चरही थाना को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

 

जांच शुरू, कार्रवाई की मांग तेज


इस मामले में स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन की ओर से थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी प्राचार्य की कार्यशैली की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

 

छात्राओं ने बताई धमकी की बात


पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि छेड़छाड़ के साथ-साथ उन्हें धमकाया भी गया था कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस खुलासे के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है।

 

पुलिस जांच में जुटी


चरही थाना पुलिस ने मामले में आवेदन मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नक्सलियों का बड़ा हमला,सारंडा में IED ब्लास्ट से इंस्पेक्टर समेत 5 जवान घायल

रांची। झारखंड  के नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों पर बड़ा हमला हुआ है। मनोहरपुर प्रखंड के छोटानागरा थाना क्षेत्र के बालिबा गांव के पास नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन के एक इंस्पेक्टर समेत पांच जवान घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।   सर्च ऑपरेशन के दौरान हुआ विस्फोट जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबल इलाके में नक्सलियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान पहले से प्लांट किए गए आईईडी में अचानक विस्फोट हो गया। इस धमाके में CRPF CoBRA Battalion 205 के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं चार अन्य जवान मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से जख्मी हुए।   नक्सलियों की सुनियोजित साजिश चाईबासा के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला नक्सलियों की सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।   घायलों को एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया घायल जवानों को तुरंत एयरलिफ्ट कर Ranchi लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। गंभीर रूप से घायल जवानों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। सभी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।   इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है और जंगल के हर हिस्से को खंगाला जा रहा है, ताकि नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाया जा सके।   पहले भी हो चुके हैं हमले गौरतलब है कि हाल के दिनों में सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे पहले भी सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।   सुरक्षा पर उठे सवाल इस हमले ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और उनके मंसूबों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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झारखंड के नये लोकायुक्त होंगे जस्टिस अमिताभ गुप्ता, 5 साल से खाली है पद

रांची। झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ गुप्ता झारखंड के नए लोकायुक्त होंगे। राज्यपाल की सहमति के बाद कागजी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। गुरुवार को ही इससे संबंधित अधिसूचना जारी हो सकती है। इसके बाद लोकायुक्त के रूप में उन्हें शपथ दिलाने संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लोकायुक्त को राज्यपाल शपथ दिलाते हैं।   1997 से न्यायिक सेवा में हैं जस्टिस गुप्ता जस्टिस अमिताभ गुप्ता 1997 में न्यायिक सेवा में आए थे और संयुक्त बिहार के समय एडीजे के रूप में योगदान दिए थे। इसके बाद वे धनबाद, दुमका में भी पदस्थापित रहे। रांची में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पशुपालन रहे जस्टितस अमिताभ गुप्ता वर्ष 2013 में झारखंड हाईकोर्ट के जज बने थे और 30 मई 2021 को वहीं से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के रूप में उन्होंने कार्य किया था। वे झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रहे जानकारी के अनुसार वह झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। 31 मई 1959 को जस्टिस अमिताभ गुप्ता का जन्म हुआ था। उन्होंने साहिबगंज के संत जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई करने के बाद हिंदू कॉलेज से स्नातक व दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। जून 2021 से खाली है पद झारखंड के लोकायुक्त का पद जून 2021 से रिक्त पड़ा है। तब जस्टिस डीएन उपाध्याय लोकायुक्त थे। कोरोना महामारी के चलते उनका निधन हो गया था, उसके बाद से ही यह पद रिक्त पड़ा है। पांच साल से लोकायुक्त का पद रिक्त रहने के कारण भ्रष्टाचार के करीब तीन हजार मामले लंबित पड़े हुए हैं।  लोकायुक्त का पद खाली रहने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई थी, जिसपर सुनवाई चलती रही। 20 अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि सुनवाई के पूर्व लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

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Jharkhand Weather News: रांची में तपिश तेज, पारा 37°C पार; 17-18 अप्रैल को लू का अलर्ट

  झारखंड में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राजधानी Ranchi में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। मौसम के इस अचानक बदलाव ने संकेत दे दिए हैं कि इस साल गर्मी जल्दी और ज्यादा असरदार हो सकती है। रांची में पारा 37.8°C के पार बुधवार को रांची का अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटों में 2.6 डिग्री की बढ़ोतरी दर्शाता है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को झुलसाना शुरू कर दिया है। दो दिन लू चलने की चेतावनी मौसम विभाग के अनुसार 17 और 18 अप्रैल को रांची सहित राज्य के 13 जिलों में लू चलने की संभावना है। इन दिनों में दोपहर के समय बाहर निकलना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर पर सीधा असर डालेंगी। उत्तर-पूर्वी इलाकों में हल्की राहत जहां एक ओर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा, वहीं 16 और 17 अप्रैल को उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में आंशिक बादल और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि रांची और आसपास के इलाकों में मौसम शुष्क ही बना रहेगा। मेदिनीनगर सबसे ज्यादा गर्म झारखंड में सबसे ज्यादा तापमान Medininagar में दर्ज किया गया, जहां पारा 42.6 डिग्री तक पहुंच गया। इसके अलावा Jamshedpur में 40.2°C और Bokaro में 38.2°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। राज्य के सभी जिलों में तापमान अब 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग ने लोगों को तेज धूप और लू से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, सिर ढककर निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।  

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