रांची। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में महिला बंदी से जुड़े मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। आरोप है कि जेल प्रशासन ने बिना किसी औपचारिक जांच टीम के गठन के ही महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट प्राइवेट लैब में करा दिया। इसे लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब जेल प्रशासन को महिला बंदी के गर्भवती होने की आशंका हुई, तब जेल डॉक्टरों की टीम के माध्यम से आनन-फानन में जांच कराई गई। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील स्थिति में बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए प्राइवेट लैब में टेस्ट क्यों कराया गया। उस समय न तो कोई अधिकृत जांच टीम बनाई गई थी और न ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई। बताया गया कि पीड़िता ने शुरुआत में प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया था। बाद में उसे समझाने के बाद ब्लड सैंपल लिया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद जेल प्रबंधन ने अब सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जांच कराने का आग्रह किया है। पत्र में महिला बंदी का ब्लड सैंपल लेने को कहा गया है। डीसी ने दिए जांच के आदेश रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने एडीएम (विधि-व्यवस्था) और एसडीएम स्तर के अफसरों यह को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रक्रिया का पालन नहीं, प्राइवेट लैब में जांच महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट जिस लैब में कराया गया, उसका इस्तेमाल आमतौर पर जेल प्रशासन तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों में करता है। जेल सूत्रों के अनुसार, जब किसी कैदी की अचानक तबीयत बिगड़ती है या तुरंत मेडिकल रिपोर्ट की जरूरत होती है, तब इसी तरह की लैब से जांच कराई जाती है, ताकि प्राथमिक स्थिति का आकलन किया जा सके। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ऐसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में महिला बंदी की जांच के लिए पहले सिविल सर्जन को आग्रह पत्र भेजना जरूरी माना जाता है। आरोप है कि इस मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जेल के डॉक्टरों ने सीधे सैंपल लेकर उसे प्राइवेट लैब भेज दिया और जांच रिपोर्ट में महिला बंदी को गर्भवती नहीं बताया गया।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
रांची। राजधानी रांची में बस चालक से रंगदारी मांगने और फायरिंग करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अरगोड़ा चौक के पास हुई इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस का खोखा और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद बस चालकों और परिवहन कारोबारियों में डर का माहौल बन गया है। बस चालक पर तानी पिस्तौल, विरोध करने पर की फायरिंग वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, ‘जीवन ज्योति’ नाम की बस रांची से नालंदा जा रही थी। नो-एंट्री लागू होने के कारण बस अरगोड़ा चौक से पहले रुकी हुई थी। इसी दौरान तीन युवक बस के पास पहुंचे। इनमें से दो आरोपी बस में चढ़ गए और चालक की कनपटी पर हथियार सटाकर रंगदारी मांगने लगे। जब चालक ने विरोध किया तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। हालांकि चालक बाल-बाल बच गया और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। गोली चलने से आसपास अफरा-तफरी मच गई। पुलिस की तत्परता से आरोपी गिरफ्तार घटना के समय अरगोड़ा चौक पर मौजूद पुलिस गश्ती दल और ट्रैफिक पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन एक आरोपी को हथियार के साथ मौके पर ही पकड़ लिया गया। बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई, जिसमें फरार दो अन्य आरोपी और हथियार उपलब्ध कराने वाला एक व्यक्ति भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुंदन कुमार सोनी, अभिजीत कुमार उर्फ अन्नो सिंह, नितिन पांडेय उर्फ अमन और गोलू राम उर्फ गोलू बाल्मोकी के रूप में हुई है। इनमें कुछ आरोपी बिहार के गया और नवादा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। मामले में अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
रांची। झारखंड के चाईबासा में पुलिस ने मोबाइल चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए एक सक्रिय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बुलेट बाइक का इस्तेमाल कर रात के समय गांवों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने की उम्मीद जगी है। स्पेशल टीम बनाकर की गई कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर) बहामन टुटी के नेतृत्व में टीम ने मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गितिलिपी मोड़ के पास छापेमारी कर बुलेट बाइक पर सवार तीन संदिग्ध युवकों को पकड़ लिया। आरोपियों के पास से मोबाइल बरामद गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन निषाद, सुरेंद्र सुंडी उर्फ साहिल सुंडी और हिमांशु पिंगुवा उर्फ डीमेन के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से सात एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जो चोरी के बताए जा रहे हैं। पूछताछ में कबूला अपराध पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि झींकपानी थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर और इचापुर गांवों में रात के समय घरों में घुसकर मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमन निषाद का आपराधिक इतिहास रहा है और वह 25 मार्च 2026 को ही जेल से रिहा हुआ था। वहीं, हिमांशु पिंगुवा का भी पहले से आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिससे गिरोह की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आगे की कार्रवाई जारी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के महुलिया मोड़ पर गुरुवार शाम एक सड़क हादसे के बाद हालात बेकाबू हो गए। ट्रैक्टर की चपेट में आने से दो लोगों की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग जुट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस पर पथराव, 25 से अधिक जवान घायल सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इसी दौरान कुछ लोगों ने अचानक पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई जवानों को गंभीर चोटें आई हैं। लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग से हालात काबू स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को पहले हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। लेकिन जब भीड़ और उग्र हो गई, तो लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभलने पर पुलिस ने हवाई फायरिंग की, जिसके बाद भगदड़ मच गई और भीड़ तितर-बितर हो गई। 80 नामजद, 400 अज्ञात के खिलाफ केस घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 80 लोगों को नामजद और 400 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही घटनास्थल से 24 बाइक जब्त की गई हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। एसपी ने संभाला मोर्चा, हालात सामान्य घटना की जानकारी मिलते ही एसपी अमन कुमार मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि वीडियो फुटेज के आधार पर जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
रांची। रांची के कांके रोड स्थित नेहा ज्वेलर्स में चोरों ने बेहद शातिर तरीके से चोरी की वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने दुकान की छत और उसके नीचे लगी लोहे की जाली को काटकर अंदर प्रवेश किया और लाखों के गहने लेकर फरार हो गए। चोरी का यह तरीका पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है। सुबह दुकान खुलते ही खुला राज दुकान मालिक संजय प्रसाद जब रोज की तरह गुरुवार सुबह दुकान खोलने पहुंचे, तो शुरुआत में सब सामान्य लगा। लेकिन जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा, डिस्प्ले में रखे सोने-चांदी के गहने गायब मिले। जांच करने पर पता चला कि छत और जाली काटकर चोर अंदर घुसे थे। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। तिजोरी नहीं खोल सके चोर दुकानदार के अनुसार, अधिकतर कीमती सोने के गहने स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखे गए थे। चोरों ने तिजोरी खोलने की भी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। ऐसे में डिस्प्ले में रखे गहनों को ही निशाना बनाया गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 15 लाख रुपये से अधिक के गहनों की चोरी हुई है। पुलिस, एफएसएल और डॉग स्क्वायड जांच में जुटे घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब आसपास के इलाकों में भी जांच कर रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
हजारीबाग। हजारीबाग के चरही थाना क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, स्कूल की 12 से अधिक छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य ने पढ़ाई के दौरान उनके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की। यह घटना 11 अप्रैल की बताई जा रही है, जब दो छात्राओं ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में और छात्राएं भी सामने आईं, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए। बाल कल्याण समिति तक पहुंचा मामला शिकायत मिलने के बाद संबंधित टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच शुरू की गई। इसके बाद पीड़ित छात्राओं को बयान के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए चरही थाना को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। जांच शुरू, कार्रवाई की मांग तेज इस मामले में स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन की ओर से थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी प्राचार्य की कार्यशैली की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। छात्राओं ने बताई धमकी की बात पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि छेड़छाड़ के साथ-साथ उन्हें धमकाया भी गया था कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस खुलासे के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। पुलिस जांच में जुटी चरही थाना पुलिस ने मामले में आवेदन मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
धनबाद। धनबाद में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए, जब तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक के पास देर रात कोयला कारोबारी के वाहन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस हमले में कोयला कारोबारी मनीष सिंह समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है। घात लगाकर बैठे थे हमलावर मिली जानकारी के अनुसार, अपराधी पहले से ही शक्ति चौक के पास घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही मनीष सिंह अपने वाहन से वहां पहुंचे, बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमले से बचने के लिए चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को तेज रफ्तार में भगाया और किसी तरह मुख्य सड़क की ओर निकल गया। कई लोगों के घायल होने की आशंका फायरिंग के दौरान वाहन में सवार मनीष सिंह और अन्य लोगों को गोली लगने की बात सामने आई है। हालांकि घायलों की स्थिति और संख्या को लेकर पुलिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी तेतुलमारी थाना प्रभारी विवेक कुमार ने बताया कि मनीष सिंह की पत्नी शिवानी सिंह की शिकायत पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। संदिग्ध वाहन भी बरामद इसी बीच बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के किसान चौक के पास पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन बरामद हुआ है, जिस पर फायरिंग के निशान पाए गए हैं। हालांकि वाहन में कोई मौजूद नहीं था। जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर धनबाद में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। राजधानी रांची में बर्थडे पार्टी के नाम पर बुलाकर एक युवती के साथ रेप के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मुख्य आरोपी दानिश को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने 25 वर्षीय पीड़िता की सहेली ओली विश्वकर्मा और फहाद को भी गिरफ्तार किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार अभी और भी गिरफ्तारी हो सकती है। पीड़िता जमशेदपुर की रहने वाली है और रांची में रहकर एमडीएस की तैयारी कर रही है। उसने पुलिस को दिए फर्द बयान में आरोप लगाया है कि पार्टी के दौरान उसे नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया गया। गोकुल वाटिका स्थित फ्लैट में घटी घटना पीड़िता के मुताबिक, 9 अप्रैल को वह अपनी सहेली ओली विश्वकर्मा के बुलावे पर गोकुल वाटिका स्थित फ्लैट में जन्मदिन पार्टी में शामिल होने गई थी। उसे बताया गया था कि पार्टी में कई लड़कियां भी आएंगी, लेकिन वहां पहुंचने पर उसने देखा कि कुछ युवक पहले से मौजूद थे। उसने असहजता जताई, लेकिन भरोसा दिलाने पर वहीं रुक गई। रात करीब 8 बजे केक काटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। आरोप है, कि इसी दौरान दानिश नामक युवक ने उसे पिज्जा दिया, जिसे खाने के बाद उसे नशा जैसा महसूस हुआ और आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह किसी तरह कमरे में आराम करने गई, जहां दानिश ने दरवाजा अंदर से बंद कर उसकी हालत का फायदा उठाते हुए दुष्कर्म किया। सुबह होश आने पर युवती ने खुद को खून से लथपथ पाया और वह गंभीर हालत में थी। अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती उसने घटना की जानकारी अपने दोस्त को दी, जिसने उसे हॉस्टल पहुंचाया। हालत बिगड़ने पर 11 अप्रैल को उसे ऑर्किड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सहेली के कहने पर पुलिस को सूचना दी गई। लालपुर थाना पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर पीड़िता का फर्द बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की।
बाजार से घर लौट रहे युवक की गोली मारकर हत्या बिहार के Muzaffarpur जिले में अपराधियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बेखौफ बदमाशों ने एक युवक को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना रामपुर हरि थाना क्षेत्र के कोइली भराव गांव की है। मृतक की पहचान वार्ड संख्या-2 निवासी दिनेश राय के 35 वर्षीय पुत्र रणधीर कुमार के रूप में हुई है। युवक की हत्या के बाद परिवार में कोहराम मच गया और गांव में भय का माहौल बन गया। रास्ते में घेरकर मारी तीन गोलियां मिली जानकारी के अनुसार रणधीर कुमार बाजार से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए हथियारबंद अपराधियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। इसके बाद बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और रणधीर कुमार को तीन गोलियां मार दीं। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से आराम से फरार हो गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवक को इलाज के लिए Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH) लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही रामपुर हरि थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के इलाकों में सुराग तलाश रही है और अपराधियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में Alay Vats ने बताया कि बाजार से घर लौट रहे युवक को अपराधियों ने गोली मार दी। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों को जल्द पकड़ने की कोशिश की जा रही है। पूर्व विधायक ने उठाए कानून व्यवस्था पर सवाल घटना की जानकारी मिलते ही मीनापुर विधानसभा क्षेत्र से राजद के पूर्व विधायक Munna Yadav भी SKMCH पहुंचे और मृतक के परिजनों को सांत्वना दी। इस दौरान उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में जिले में यह आठवीं हत्या की घटना है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इलाके में बढ़ी दहशत पूर्व विधायक ने कहा कि लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं के कारण जिले में अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है और आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।