झारखंड

CBSE: 10वीं परीक्षा में रांची की प्रण्या प्रिया बनी स्टेट टोपर

Anjali Kumari अप्रैल 16, 2026 0
cbse class 10 topper
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रांची। रांची की होनहार छात्रा प्रण्या प्रिया ने CBSE 10वीं परीक्षा 2026 में 99.6% अंक हासिल कर झारखंड में टॉप किया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि ने पूरे राज्य का नाम रोशन कर दिया है। प्रण्या DPS (Delhi Public School) रांची की छात्रा हैं। स्कूल का इस वर्ष का रिजल्ट 100% रहा, जो संस्थान की गुणवत्ता को दर्शाता है। प्रण्या ने न केवल स्कूल में पहला स्थान हासिल किया, बल्कि राज्य के टॉपर्स में भी अपनी जगह बनाई। प्रण्या एक शिक्षित परिवार से आती हैं। उनके पिता रिम्स में चिकित्सक हैं, जबकि उनकी मां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी, जिसका सकारात्मक प्रभाव प्रण्या की सफलता में साफ दिखाई देता है। उनके माता-पिता का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी पर भरोसा किया और उसे स्वतंत्रता दी, जिसका प्रण्या ने सही उपयोग किया।

 

बिना दबाव के पढ़ाई, यही सफलता की कुंजी


प्रण्या प्रिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी टॉपर बनने के दबाव में पढ़ाई नहीं की। उनका फोकस हमेशा नियमित पढ़ाई और कॉन्सेप्ट को समझने पर रहा।उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि समझ के साथ करना चाहिए। उनका मानना है कि अगर छात्र रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ें और चीजों को गहराई से समझें, तो सफलता निश्चित है।

 

मोबाइल का सही उपयोग बना सहायक


प्रण्या ने बताया कि उन्होंने मोबाइल का उपयोग केवल पढ़ाई से जुड़े कंटेंट देखने और कभी-कभी मनोरंजन के लिए किया। उन्होंने अपने जूनियर्स को भी सलाह दी कि तकनीक का सही उपयोग करें और उससे दूर रहने के बजाय उसे सीखने का माध्यम बनाएं।

 

डॉक्टर बनने का सपना


प्रण्या का सपना अपने पिता की तरह डॉक्टर बनना है। वे आगे चलकर मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।

 

बनीं प्रेरणा का स्रोत


प्रण्या प्रिया की सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है। उनके दादा-दादी समेत पूरे परिवार ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड के चतरा में बन रहा विशाल संकटमोचन धाम, रांची में निकली रथ यात्रा

रांची। झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत सिमरिया प्रखंड के पिरी में पूर्वी भारत के सबसे बड़े ‘उदधिक्रमण संकटमोचन हनुमान धाम’ का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। करीब 8 एकड़ क्षेत्र में आकार ले रहे इस भव्य धाम में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों के साथ 108 फीट ऊंची हनुमान जी की विराट प्रतिमा स्थापित की जानी है। इसी धाम के प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी रांची में ‘संकटमोचन रथ यात्रा’ निकाली गई। रथ यात्रा सुबह 7.30 बजे अरगोड़ा स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुई और कडरू, चुटिया होते हुए हिनू चौक स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। इस शोभायात्रा में शहर के कई डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षाविद और व्यवसायी भी शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान कडरू स्थित हज हाउस के पास सांप्रदायिक सौहार्द्र का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को माला पहनाकर, चुनरी और अंगवस्त्र भेंट कर तथा अल्पाहार की व्यवस्था कर आपसी भाईचारे और एकता का सशक्त संदेश दिया गया।  इसके बाद रथ कडरू हनुमान मंदिर पहुंचा, जहां मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। कडरू से रथ चुटिया स्थित राम मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां समिति की ओर से पानी, ठंडे पेय, फल और मिठाइयों से स्वागत किया गया। दिनभर चली इस यात्रा का समापन महावीर मंडल न्यास में हुआ, जहां रथ में शामिल श्रद्धालुओं का लस्सी और फल से सत्कार किया गया। निर्माणाधीन संकटमोचन धाम को एक समग्र आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में फैल रहे इस धाम में एक एकड़ क्षेत्र में अशोक वाटिका विकसित की जा रही है, जहां 108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होगी। इसके साथ ही 20 हजार वर्ग फीट के विशाल प्लेटफॉर्म पर राम दरबार, शिव परिवार और संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। परिसर में दशरथ कुंड, सीता रसोई, महर्षि वशिष्ठ आश्रम, महर्षि विश्वामित्र आश्रम और माता शबरी आश्रम जैसे पौराणिक स्थलों की स्थापना की जा रही है, जबकि 20 हजार वर्ग फीट का महर्षि वाल्मीकि सभागार भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा यहां सनातन साहित्य के लिए एक विशाल पुस्तकालय भी प्रस्तावित है। रथ यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा संकल्पित मिट्टी और अक्षत एकत्र किए जा रहे हैं, जिन्हें धाम की नींव में स्थापित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य के लोगों की आस्था इस निर्माण से सीधे जुड़ सकेगी और यह धाम भविष्य में धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

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चतरा के प्रतापपुर जंगल में आग का कहर, हाईटेंशन तारों के पास बढ़ा खतरा

चतरा। चतरा के प्रतापपुर वन क्षेत्र में गुरुवार को अचानक भीषण आग लगने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भरही-केवलिया मुख्य सड़क के किनारे झाड़ियों से शुरू हुई आग देखते ही देखते जंगल के बड़े हिस्से में फैल गई। आसमान में उठता काला धुआं और दूर तक दिखाई देती लपटों ने हालात की गंभीरता को साफ कर दिया।   तेज हवा से बेकाबू हुई आग स्थानीय लोगों के अनुसार, आग पहले झाड़ियों में लगी थी, लेकिन तेज हवा के कारण इसने जल्द ही विकराल रूप ले लिया। भरही-केवलिया मार्ग के आसपास का क्षेत्र धधकती भट्टी जैसा नजर आने लगा। आग लगातार जंगल के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ रही है, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।   बिजली तारों पर मंडराया खतरा आग की लपटें पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली तारों तक पहुंच गई हैं। इससे बड़ा हादसा होने की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों में डर का माहौल है कि यदि तार टूटकर गिरते हैं, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।   वन संपदा और जीव-जंतुओं को नुकसान इस आग से जंगल की बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। साथ ही कई छोटे जीव-जंतु और पक्षी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। पर्यावरण को भी भारी क्षति होने की संभावना जताई जा रही है।   आग बुझाने में जुटा वन विभाग घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। Ajay Kumar के अनुसार, आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन तेज हवा के कारण राहत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।   कारणों की जांच जारी फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जा रही है।

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धनबाद में अपराधियों का तांडव, कोयला कारोबारी पर किया जानलेवा हमला, कई लोग घायल

धनबाद। धनबाद में अपराधियों के हौसले एक बार फिर बुलंद नजर आए, जब तेतुलमारी थाना क्षेत्र के शक्ति चौक के पास देर रात कोयला कारोबारी के वाहन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस हमले में कोयला कारोबारी मनीष सिंह समेत कई लोगों के घायल होने की सूचना है।   घात लगाकर बैठे थे हमलावर मिली जानकारी के अनुसार, अपराधी पहले से ही शक्ति चौक के पास घात लगाकर बैठे थे। जैसे ही मनीष सिंह अपने वाहन से वहां पहुंचे, बदमाशों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमले से बचने के लिए चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन को तेज रफ्तार में भगाया और किसी तरह मुख्य सड़क की ओर निकल गया।   कई लोगों के घायल होने की आशंका फायरिंग के दौरान वाहन में सवार मनीष सिंह और अन्य लोगों को गोली लगने की बात सामने आई है। हालांकि घायलों की स्थिति और संख्या को लेकर पुलिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।   पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी तेतुलमारी थाना प्रभारी विवेक कुमार ने बताया कि मनीष सिंह की पत्नी शिवानी सिंह की शिकायत पर अज्ञात अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।   संदिग्ध वाहन भी बरामद इसी बीच बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के किसान चौक के पास पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन बरामद हुआ है, जिस पर फायरिंग के निशान पाए गए हैं। हालांकि वाहन में कोई मौजूद नहीं था।   जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर धनबाद में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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