हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के डेमोटांड़ के पास निर्मल सिंह ढाबा के आगे हुई। हादसे का शिकार हुआ परिवार शादी समारोह से लौट रहा था, तभी रास्ते में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मृतकों की पहचान चंदन कुमार और उनकी मां विद्या देवी के रूप में हुई है। वहीं चंदन कुमार की पत्नी अंकिता देवी और उनके पिता महावीर प्रसाद गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को पहले शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, पूरा परिवार पटना में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। रविवार रात समारोह खत्म होने के बाद वे अपने घर रांची के बीआईटी क्षेत्र लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में यह हादसा हो गया, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कार की रफ्तार काफी तेज थी और संभव है कि चालक को झपकी आ गई हो। इसी कारण वाहन सड़क किनारे खड़े एक हाईवा से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना की सूचना परिजनों को दे दी गई है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानी की अहमियत को उजागर करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जामतारा। जामतारा के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में बॉलीवुड अभिनेता चंकी पांडे ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। देर रात तक चले इस आयोजन में उन्होंने गीत, संगीत और संवादों के जरिए लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। 51 गरीब कन्याओं का हुआ विवाह इस विशेष कार्यक्रम में 51 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया। गाजे-बाजे के साथ बारात निकली और समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। मेहंदी, संगीत और अन्य पारंपरिक रस्मों के साथ पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंग दिया गया। चंकी पांडे के प्रदर्शन पर झूमे दर्शक गांधी मैदान दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। जैसे ही चंकी पांडे मंच पर आए, माहौल उत्साह से भर गया। उन्होंने अपनी फिल्मों के मशहूर डायलॉग और गाने प्रस्तुत किए। खासकर जब उन्होंने लोकप्रिय गीत “ओ लाल दुपट्टे वाली” गाया, तो दर्शक झूम उठे। उन्होंने जामताड़ा की तारीफ करते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें बेहद खुशी महसूस हो रही है। नवविवाहित जोड़ों को मिला आशीर्वाद और उपहार कार्यक्रम के दौरान सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया गया। प्रत्येक जोड़े को 5100 रुपये नगद, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी सामान उपहार स्वरूप प्रदान किए गए। इस आयोजन में लोगों ने रिश्तों की जिम्मेदारी निभाते हुए पिता और भाई की भूमिका भी निभाई। सांस्कृतिक एकता का संदेश यह आयोजन सिर्फ विवाह समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। विभिन्न विभागों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने समाज में सहयोग और समर्पण की भावना को मजबूत किया।
रांची। झारखंड में जल्द ही इंटर और स्नातक स्तरीय रिक्त पदों पर नियुक्तियां होंगी। कार्मिक विभाग ने झारखंड सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2026 और झारखंड इंटरमीडिएट स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2026 के आयोजन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस संबंध में विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी विभागों से रिक्त पदों की सूची मांगी गई है। कार्मिक विभाग ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि दोनों परीक्षाओं के आयोजन की प्रक्रिया प्रारंभ की जानी है। इसके लिए सभी विभागों से रिक्त पदों की सूचना जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि समय पर परीक्षा का विज्ञापन प्रकाशित किया जा सके। 3 माह में आ सकती है वैकेंसी विभागों से अधियाचना समय पर मिलने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को वैकेंसी जारी करने में कम से कम तीन माह का समय लग सकता है। आयोग पूरी तैयारी के बाद ही विज्ञापन जारी करता है। इसके तहत परीक्षा आयोजन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाती है, परीक्षा एजेंसी का चयन होता है और फिर परीक्षा तिथि घोषित की जाती है।
गिरिडीह। गिरिडीह सदर प्रखंड के बजटो-कुम्हरगढ़िया गांव में फूड पॉइजनिंग का गंभीर मामला सामने आया है। यहां गोलगप्पा और छोला खाने के बाद एक 6 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चे और अन्य लोग बीमार पड़ गए। मृतक की पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है। ठेले पर खाये थे गोलगप्पे और छोले जानकारी के अनुसार गांव में एक ठेला विक्रेता गोलगप्पा और छोला बेचने आया था, जिसे बच्चों सहित कई लोगों ने खाया। रात तक सभी सामान्य थे, लेकिन रविवार सुबह अचानक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही डीसी रामनिवास यादव सहित तमाम अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन हालत गंभीर होने पर सभी को सदर अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों की टीम द्वारा सभी का इलाज किया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही डीसी रामनिवास यादव, एसडीएम श्रीकांत यशवंत बिस्पुते, सिविल सर्जन बच्चा सिंह और एसडीपीओ जीतवाहन उरांव समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने तत्काल गांव में मेडिकल टीम और एंबुलेंस भेजी है, ताकि अन्य प्रभावित लोगों को भी अस्पताल पहुंचाया जा सके। अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी सतर्कता के साथ इलाज करने का निर्देश दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद खुलासा, जांच के आदेश डीसी रामनिवास यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चाट-छोला खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि सभी बीमारों का इलाज जारी है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। वहीं, सिविल सर्जन बच्चा सिंह ने फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है। कहा कि मृतक बच्चे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। ये बच्चे हुए बीमार बीमारों में शिवम कुमार, दिवाकर कुमार, मनिता कुमारी, अनुराधा कुमारी, प्रिंस कुमार, सुजीत कुमार, रानी कुमारी, रिया कुमारी, प्रतीक कुमार, मधु कुमारी, जागृति देवी, रिंकी देवी, बलराम प्रसाद वर्मा और रेखा देवी सहित अन्य शामिल हैं। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। 18 बच्चों व अन्य को लाया गया अस्पताल वहीं एसडीएम श्रीकांत यशवंत विस्पुते ने कहा कि शाम लगभग 7 बजे प्रशासन को सूचना मिली। जिसके बाद प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने समन्वय बनाकर बीमार 18 बच्चों एवं अन्य लोगों को अस्पताल पहुंचाया। जहां सभी का इलाज चल रहा है।