जमशेदपुर। टाटा स्टील के कर्मचारियों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राहत मिली है। कंपनी ने महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसका लाभ अप्रैल 2026 से वेतन में दिखाई देगा। सीपीआई में बढ़ोतरी का मिला फायदा यह वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर तय की गई है। हालिया तिमाही (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026) में सूचकांक बढ़कर 148.43 पहुंच गया, जो पिछली तिमाही (सितंबर से नवंबर 2025) के 147.30 के मुकाबले अधिक है। इस तरह कुल 1.13 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनएस ग्रेड कर्मचारियों की आय में बढ़ोतरी इस बदलाव का सीधा असर एनएस ग्रेड के कर्मचारियों पर पड़ेगा। उन्हें करीब 74.50 पॉइंट्स का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे उनकी मासिक आय में लगभग 223.50 रुपये की वृद्धि होगी। ओएस ग्रेड के लिए भी डीए में इजाफा वहीं ओएस ग्रेड के कर्मचारियों के लिए डीए में 1.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी तय की गई है। इसके बाद उनका कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 49.53 प्रतिशत हो गया है। अप्रैल वेतन में दिखेगा असर डीए में की गई यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 के वेतन में जोड़ी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि होगी।
जमशेदपुर। भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर शहर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। बिष्टुपुर जैन समाज के तत्वावधान में निकाली गई शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में भक्ति का माहौल बना रहा। विधायक सरयू राय ने किया स्वागत, श्रद्धालुओं की सेवा शोभायात्रा के दौरान जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। उन्होंने स्वयं फलाहार और शर्बत वितरित कर सेवा भाव का संदेश दिया और कहा कि धर्म से ऊपर मानव सेवा का महत्व है। साध्वी समूह का भी रहा सान्निध्य इस अवसर पर राजगीर से आईं साध्वी सधान्जी और साध्वी कल्याणी की उपस्थिति रही, जिन्हें श्रद्धालुओं ने नमन किया। धार्मिक माहौल के बीच प्रवचन और आशीर्वाद का भी लाभ लोगों को मिला। समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी शोभायात्रा में जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में राजेन कमानी, नकुल कमानी, हर्षद गांधी, परेश सेठ, नरेंद्र दोशी, मुकेश गांधी, मिलन वैद्य, भाविन मोदी, मनीष उड़ानी, किलोल भयाणी, राहुल भयाणी, चंद्रकांत देसाई और धीरेन मेहता समेत अन्य लोगों की सक्रिय भूमिका रही। सेवा कार्य में कई लोग रहे शामिल शोभायात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्थानीय लोगों ने भी योगदान दिया। सरयू राय के आवास के पास अशोक गोयल, सुबोध श्रीवास्तव, देव कुमार वर्मा, सन्नी सिंह, दिनेश सिंह, उदय मंडल और अमित देउड़ी सहित अन्य लोग सेवा कार्य में जुटे रहे।
जमशेदपुर। भाटिया बस्ती में मंगलवार सुबह एक बच्चे के लापता होने की खबर ने इलाके में दहशत और आक्रोश फैला दिया। परिजनों की खोजबीन के बाद बच्चा पड़ोसी रंजीत मंडल के घर से सकुशल बरामद किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरोपित परिवार ने शुरुआत में बच्चे की तलाश का दिखावा कर लोगों को भ्रमित किया। पूछताछ में परिवार की विरोधाभासी बातें सामने आईं, जिससे लोगों का शक और गहरा गया। बस्तीवासिओं का दावा बस्तीवासियों ने यह भी दावा किया कि बच्चा किसी तंत्र-मंत्र या साधना के लिए छिपाया गया था। घर के पूजा स्थल में दक्षिण दिशा की ओर स्थापित काली मां की मिट्टी की मूर्ति मिलने के बाद लोगों का संदेह और बढ़ा। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपित परिवार को 24 घंटे में बस्ती खाली करने का अल्टीमेटम दिया। प्रशासन और पुलिस मामले की जांच में जुटी हैं और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
जमशेदपुर। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। ग्रेड रिवीजन समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आज इस पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। 1 अप्रैल से लागू हो सकता है नया समझौता सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन और यूनियन के बीच लगभग सभी प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। यह नया वेतन समझौता 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है। इससे प्लांट के 7321 स्थायी कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। 20 हजार रुपये बोनस की उम्मीद अगर समझौता 31 मार्च 2026 तक पूरा हो जाता है, तो कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिल सकता है। वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर यह लाभ दिया गया था। सैलरी बढ़ोतरी 20-23 हजार तक संभव जानकारों के अनुसार इस बार वेतन वृद्धि 20,000 से 23,000 रुपये के बीच हो सकती है। पिछली बार 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी इसे चार चरणों में लागू किए जाने की संभावना है। जियो ग्रेड कर्मचारियों पर फोकस यूनियन इस बार खास तौर पर जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे में सुधार चाहती है। नए कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) में कमी को दूर करना इस समझौते की बड़ी चुनौती मानी जा रही है। अन्य प्रमुख मांगें भी शामिल गंभीर बीमारियों के लिए मेडिकल खर्च की सीमा बढ़ाना रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस में सुधार त्योहारों पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को वाहन भत्ता यूनियन का बयान टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह ने कहा कि प्रबंधन के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और जल्द ही सम्मानजनक समझौता होने की उम्मीद है।
जमशेदपुर प्लांट में बड़ी खुशखबरी झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स प्लांट के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेड रिवीजन को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को इस समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले का सीधा लाभ 7321 स्थायी कर्मचारियों को मिलेगा। समय पर समझौता हुआ तो मिलेगा 20 हजार बोनस इस समझौते की खास बात यह है कि अगर 31 मार्च 2026 तक इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाता है, तो सभी कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया था। वेतन वृद्धि 20 से 23 हजार तक पहुंचने की उम्मीद सूत्रों के मुताबिक, इस बार वेतन वृद्धि का आंकड़ा 20,000 से 23,000 रुपये के बीच जा सकता है। वर्ष 2022 में कुल 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी बढ़ोतरी को चार चरणों (65%, 15%, 10% और 10%) में लागू किए जाने की संभावना है। जियो ग्रेड कर्मचारियों के DA पर फोकस इस बार यूनियन का सबसे बड़ा फोकस जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे को सुधारने पर है। पुराने कर्मचारियों की तुलना में नए कर्मियों का डीए (महंगाई भत्ता) काफी कम है, जो लगभग 500 रुपये के आसपास है। यूनियन इस अंतर को कम करने के लिए बेसिक पे और डीए स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग कर रही है। बढ़े कर्मचारियों के कारण प्रबंधन पर दबाव पिछले समझौते के समय जहां कर्मचारियों की संख्या 5600 थी, अब यह बढ़कर 7321 हो गई है। ऐसे में प्रबंधन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। इसी वजह से प्रबंधन समझौते की अवधि 6 साल करना चाहता है, जबकि यूनियन 4 साल की परंपरा को बनाए रखने पर अड़ी है। सिर्फ सैलरी नहीं, इन सुविधाओं पर भी चर्चा इस बार समझौते में सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों पर भी चर्चा हुई है: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल लिमिट 5 लाख से बढ़ाने की मांग रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस को और बेहतर करने का प्रस्ताव त्योहारों (रामनवमी, दुर्गा पूजा) पर ड्यूटी करने वाले कर्मियों को 250 रुपये वाहन भत्ता देने की मांग यूनियन ने दिए सकारात्मक संकेत टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह के अनुसार, प्रबंधन और यूनियन के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर एक सम्मानजनक समझौता हो जाएगा। टाटा मोटर्स के कर्मचारियों के लिए यह समझौता बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज इस पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।
जमशेदपुर। झारखंड में बी.एड, एम.एड और बी.पी.एड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और कदाचार मुक्त कराने के लिए विशेष व्यवस्था कर रहे हैं। जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में इस परीक्षा के लिए कुल 9 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 6,104 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और जरूरी सुविधाएं जैसे पेयजल, बिजली और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। महत्वपूर्ण जानकारी आवेदन की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026 परीक्षा तिथि: 26 अप्रैल 2026 (रविवार) समय: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक प्रशासन की अभ्यर्थियों से अपील प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा के दिन कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचें, ताकि जांच प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। कड़े सुरक्षा इंतजामों और बेहतर सुविधाओं के साथ इस परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है ।
झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के युवा इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलकर भारत पहुंचने में सफलता हासिल की। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जैसे ही उनका जहाज पहुंचा, उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को फोन कर अपनी सलामती की खबर दी। इस खबर से परिवार ही नहीं, पूरे शहर में राहत और गर्व का माहौल है। पहली कॉल: “मां, मैं लौट आया हूं” मुंद्रा पोर्ट की सीमा में पहुंचते ही जैसे ही नेटवर्क मिला, अंश त्रिपाठी ने तुरंत अपनी मां चंदा त्रिपाठी को फोन लगाया। उन्होंने संक्षेप में कहा, “मां, मैं भारत पहुंच गया हूं और पूरी तरह सुरक्षित हूं। अभी जहाज पर थोड़ा काम है, बाद में आराम से बात करूंगा।” यह कुछ शब्द ही मां और परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत बन गए, जिनका इंतजार कई दिनों से किया जा रहा था। घर में खुशी की लहर, टली बड़ी चिंता अंश की सुरक्षित वापसी की खबर मिलते ही जमशेदपुर के पारडीह स्थित उनके घर ‘आशियाना वुडलैंड’ में जश्न जैसा माहौल बन गया। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो पिछले दिनों चिंता में डूबे थे, बेटे की आवाज सुनकर भावुक हो उठे और चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। मां की दुआओं ने बचाया मां चंदा त्रिपाठी ने बेटे की आवाज सुनते ही भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी सांसें वापस लौट आई हों। उन्होंने बताया कि बेटे की आवाज में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि उनका बेटा सुरक्षित है। पत्नी को भी था पूरा विश्वास अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में CA के पद पर कार्यरत हैं, ने इसे ईश्वर की कृपा और भारत सरकार की कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति की क्षमता और साहस पर हमेशा भरोसा था। खतरनाक हालात में दिखाई बहादुरी अंश त्रिपाठी, जो शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सेकंड इंजीनियर हैं, युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए खतरनाक परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य और सूझबूझ से अपने कर्तव्य को निभाया और सुरक्षित भारत लौट आए। देशसेवा की विरासत से मिला हौसला अंश के पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और बाद में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मैंने देश के लिए वर्दी पहनकर सेवा की, आज मेरा बेटा समुद्र के रास्ते देश के लिए ऊर्जा लेकर आ रहा है। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है।” प्रेरणादायक बनी अंश की कहानी अंश त्रिपाठी की यह कहानी सिर्फ एक सुरक्षित वापसी नहीं, बल्कि साहस, कर्तव्य और परिवार के अटूट विश्वास की मिसाल है। उनकी बहादुरी ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं।
वार्ड 18 के पार्षद अंकुर सिंह ने वार्ड 29 की पार्षद अर्चना सिंह को महज एक वोट से हराया, जीत के बाद समर्थकों में जश्न एक वोट से तय हुआ डिप्टी मेयर का चुनाव आदित्यपुर नगर निगम में उप महापौर (डिप्टी मेयर) पद के लिए हुए चुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। वार्ड संख्या 18 के पार्षद अंकुर सिंह ने वार्ड संख्या 29 की पार्षद अर्चना सिंह को मात्र एक वोट से हराकर डिप्टी मेयर पद पर जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही और नतीजों को लेकर पार्षदों और समर्थकों में काफी उत्सुकता बनी रही। अंततः जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो अंकुर सिंह को एक वोट की बढ़त मिली, जिसके साथ ही उन्होंने यह चुनाव अपने नाम कर लिया। परिणाम सामने आते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और जीत का जश्न मनाया। जीत के बाद विकास का भरोसा नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने अपनी जीत के बाद सभी पार्षदों और समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए वे सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करेंगे। अंकुर सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता शहर की बुनियादी समस्याओं को दूर करना और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके हैं अंकुर सिंह अंकुर सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत रही है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई लोयोला स्कूल, जमशेदपुर से 10वीं तक पूरी की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई गुड शेफर्ड इंटरनेशनल स्कूल, ऊटी से की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एसपी जैन स्कूल ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट से मैनेजमेंट की शिक्षा हासिल की। इसके अलावा उन्होंने पहले मुंबई से और बाद में कोविड काल के दौरान दुबई से ऑनलाइन फाइनेंस में स्पेशलाइजेशन का कोर्स भी किया। वर्तमान में वे अपने बिजनेस फर्म में डायरेक्टर हैं और एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में पार्टनर के रूप में भी काम कर रहे हैं। शहर की रैंकिंग सुधारने की योजना डिप्टी मेयर बनने के बाद अंकुर सिंह ने आदित्यपुर के विकास के लिए कई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है। उनका कहना है कि वे सबसे पहले आदित्यपुर शहर की राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग सुधारने पर काम करेंगे। इसके साथ ही शहर में जलापूर्ति की समस्या को दूर करने, बेहतर ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने और आदित्यपुर को अन्य राज्यों के विकसित शहरों की तरह पहचान दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कम उम्र में माता-पिता को खोया अंकुर सिंह के जीवन में व्यक्तिगत चुनौतियां भी रही हैं। जब वे 18 वर्ष के थे, तब वर्ष 2017 में उनकी मां का असामयिक निधन हो गया। इसके चार साल बाद 2021 में कोरोना संक्रमण के कारण उनके पिता प्रवीण सिंह का भी निधन हो गया। परिवार में उनकी एक छोटी बहन है और दोनों ने मिलकर कठिन परिस्थितियों का सामना किया। परिवार का राजनीति से भी जुड़ाव अंकुर सिंह के बड़े पापा अरविंद सिंह ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा उनके परिवार का सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी खास योगदान रहा है। ओल्ड हाउसिंग कॉलोनी में उनके घर के पास आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा अपने भव्य और अलग-अलग थीम वाले पंडालों के लिए पूरे कोल्हान क्षेत्र में चर्चित रहती है।
युद्ध के साये में निभाया देश का बड़ा दायित्व झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले सेकंड इंजीनियर Ansh Tripathi ने साहस और कर्तव्य की मिसाल पेश करते हुए खाड़ी क्षेत्र के तनावपूर्ण हालात के बीच खतरनाक Strait of Hormuz को पार किया। अंश Shipping Corporation of India के जहाज Shivalik LNG Carrier पर तैनात हैं और लगभग 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत लौट रहे हैं। जहाज सोमवार 16 मार्च को Mundra Port (गुजरात) पहुंचने वाला है। अंश की सुरक्षित वापसी की खबर से उनके परिवार, दोस्तों और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है। 26 नवंबर से शुरू हुआ था मिशन अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को जहाज ‘शिवालिक’ पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मिशन इतना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। जहाज को यूएई, कतर और सऊदी अरब से LPG लेकर भारत लौटना था। 13 मार्च का दिन सबसे कठिन था, क्योंकि इसी दिन जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना था। उस समय क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण हर पल खतरे की आशंका बनी हुई थी। जब जहाज ने सुरक्षित रूप से इस खतरनाक रास्ते को पार कर लिया, तब जाकर परिवार और देश के लोगों ने राहत की सांस ली। पिता की आंखों में छलक पड़े आंसू अंश के पिता Mithilesh Kumar Tripathi, जो Uranium Corporation of India Limited से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं, ने भावुक होकर बताया कि पिछले कई दिन उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें हर पल यह डर सता रहा था कि कहीं युद्ध की स्थिति में उनका बेटा किसी खतरे का शिकार न हो जाए। लेकिन अब जब यह खबर मिली कि जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर चुका है, तो ऐसा लग रहा है जैसे सीने से भारी बोझ उतर गया हो। मां की दुआओं ने बचाया बेटा अंश की मां Chanda Tripathi ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वे लगातार भगवान से बेटे की सलामती की प्रार्थना कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जब भी मीडिया में समुद्री तनाव की खबरें देखती थीं तो दिल घबरा जाता था। अब जब बेटे के सुरक्षित होने की खबर मिली है, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। पत्नी और बेटे को इंतजार उस पल का अंश की पत्नी Chanda Mishra Tripathi, जो Tata Steel में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, पिछले कई दिनों से लगातार चिंता में थीं। उनका दो वर्षीय बेटा तनय अभी छोटा है, लेकिन घर के माहौल को देखकर वह भी पिता की कमी महसूस कर रहा था। अब परिवार उस पल का इंतजार कर रहा है जब अंश घर लौटेंगे और सब उनसे मिल सकेंगे। रिश्तेदारों और परिचितों का लगा तांता अंश के घर पर इस समय रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लगा हुआ है। फोन लगातार बज रहे हैं और हर कोई उनकी कुशलता के बारे में जानकारी ले रहा है। जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाला यह परिवार अब गर्व और खुशी दोनों महसूस कर रहा है। अंश त्रिपाठी का करियर स्कूली शिक्षा: Motilal Nehru Public School (2004) और Atomic Energy Central School Narwapahar (2008) उच्च शिक्षा: Birla Institute of Technology Mesra से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में Cochin Shipyard Limited से मरीन इंजीनियरिंग करियर: दिसंबर 2014 में Shipping Corporation of India में शामिल हुए साहस की मिसाल बना यह मिशन युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालात के बीच खतरनाक समुद्री मार्ग से होकर देश के लिए ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करना आसान नहीं था। अंश त्रिपाठी की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात बन गई है।
जमशेदपुर। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच झारखंड के जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने साहस और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज ‘शिवालिक’ तैनात अंश त्रिपाठी 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित भारत लौट रहे हैं। सोमवार 16 मार्च को उनका जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है। उनकी सुरक्षित वापसी की खबर से परिवार और शहर में खुशी का माहौल है। दरअसल, अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को ‘शिवालिक’ जहाज पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ा। 13 मार्च को जहाज ने इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित पार किया, जिसके बाद परिवार और परिचितों ने राहत की सांस ली। परिवार ने दुआओं में बिताए कई दिन जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश त्रिपाठी के परिवार के लिए पिछले कुछ दिन बेहद चिंताजनक रहे। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) जादूगोड़ा से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं, ने बताया कि बीते एक सप्ताह से परिवार की नींद उड़ गई थी। जैसे ही यह खबर मिली कि जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर गया है, मानो सीने से भारी बोझ उतर गया। अंश की मां चंदा त्रिपाठी ने कहा कि हर पल अनहोनी का डर बना हुआ था। मीडिया में खतरे की खबरें सुनकर दिल घबराने लगता था, लेकिन अब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर से घर में खुशी लौट आई है। पत्नी और बेटे को भी था बेसब्री से इंतजार अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, कई दिनों से पति की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रही थीं। उनका दो वर्षीय बेटा तनय भी पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। परिवार के मुताबिक, जहाज के सुरक्षित पहुंचने की खबर मिलते ही घर में रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लग गया और लगातार फोन कॉल आने लगे। अंश त्रिपाठी का करियर अंश त्रिपाठी ने अपनी स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा व जादूगोड़ा माइंस से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीआईटी से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, केरल से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दिसंबर 2014 में उन्होंने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जॉइन किया था।
जमशेदपुर। गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अदालत ने जमशेदपुर के छह आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट जारी होने के बाद पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपियों पर पहले से ही 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित है। हत्या के 26 दिन बाद भी मुख्य शूटर और साजिशकर्ता पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन आरोपियों के खिलाफ जारी हुआ वारंट अदालत द्वारा जिन आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है, उनमें बागबेड़ा थाना क्षेत्र के अंकित वर्मा, आशुतोष सिंह, विशाल सिंह, आकाश कुमार प्रसाद और यशराज सिंह शामिल हैं। इसके अलावा मानगो के ओलीडीह निवासी जितेंद्र कुमार साहू का नाम भी इस सूची में शामिल है। जमशेदपुर में लगातार दबिश सूत्रों के अनुसार, Uttarakhand Special Task Force और Dehradun Police की टीम लगातार Jamshedpur में छापेमारी कर रही है। टीम ने बागबेड़ा, जुगसलाई और मानगो इलाके में कई बार दबिश दी है, लेकिन अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके हैं। अब तक दो मददगार गिरफ्तार इस हत्याकांड में पुलिस अब तक दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बागबेड़ा थाना क्षेत्र के गाराबासा निवासी राजकुमार सिंह और ग्रेटर नोएडा से मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर हत्या में आरोपियों की मदद करने का आरोप है। 13 फरवरी को हुई थी हत्या बताया जाता है कि 13 फरवरी को Dehradun के सिल्वर मॉल के पास गैंगस्टर विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी। जांच में जमशेदपुर कनेक्शन सामने आने के बाद से पुलिस की टीमें झारखंड में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर के भालूबासा इलाके के रहने वाले दो सगे भाई आर्यन मुखी और ईशुनाथ मुखी आर्थिक तंगी के कारण अपने बॉक्सिंग करियर को छोड़ने की स्थिति में पहुंच गए हैं। दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए झारखंड को चार पदक दिलाए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उनका खेल भविष्य अधर में लटक गया है। राष्ट्रीय स्तर पर जीत चुके हैं चार पदक करीब 16 वर्षीय आर्यन मुखी ने वर्ष 2025 में Junior National Boxing Championship और School National Boxing Championship में कांस्य पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। वहीं उनके छोटे भाई ईशुनाथ मुखी ने Open Sub-Junior National Boxing Championship और National Junior Boxing Championship में कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह दोनों भाइयों ने मिलकर झारखंड को चार राष्ट्रीय पदक दिलाए हैं। मजदूरी से चलता है परिवार दोनों खिलाड़ियों का परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। उनके पिता मंगलनाथ मुखी ठेका मजदूरी करते हैं और इसी कमाई से सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण होता है। मां सुनीता देवी गृहिणी हैं। सीमित आय के कारण परिवार के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता है। प्रैक्टिस के लिए भी नहीं हैं संसाधन प्रतिभा होने के बावजूद दोनों भाइयों के पास बॉक्सिंग के लिए जरूरी किट और उपकरण नहीं हैं। कई बार उन्हें दोस्तों से किट उधार लेकर या कोच की मदद से अभ्यास करना पड़ता है। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी उन्हें अक्सर उधार लेना पड़ता है। कोच की निगरानी में करते हैं अभ्यास दोनों भाई Sitaramdera Community Center में कोच सूरज की निगरानी में नियमित अभ्यास करते हैं। कोच का कहना है कि दोनों खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली हैं और यदि उन्हें सही प्रशिक्षण व संसाधन मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं। सहयोग की उम्मीद आर्यन और ईशुनाथ का सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतें। लेकिन आर्थिक संकट और सहयोग की कमी के कारण उनका सपना टूटता हुआ नजर आ रहा है। दोनों भाइयों का कहना है कि यदि उन्हें सरकारी या सामाजिक स्तर पर आर्थिक मदद मिल जाए, तो वे अपने खेल को आगे बढ़ा सकते हैं। फिलहाल परिवार की स्थिति को देखते हुए वे बॉक्सिंग छोड़कर काम करने के बारे में सोच रहे हैं, ताकि घर की आर्थिक मदद कर सकें।
पीजी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया तेज झारखंड के जमशेदपुर स्थित कोल्हान क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। कॉलेज प्रबंधन ने विभिन्न विभागों में 38 नई पीजी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है और आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो अगले शैक्षणिक सत्र से कॉलेज में पीजी सीटों की कुल संख्या 51 से बढ़कर लगभग 89 हो सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में होगा इजाफा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, पीजी सीटों में वृद्धि होने से मेडिकल शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही एमजीएम अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। पीजी छात्रों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाएं बेहतर होंगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। रिसर्च और मेडिकल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा पीजी सीटों में बढ़ोतरी से मेडिकल कॉलेज में रिसर्च गतिविधियों और शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है। ज्यादा पीजी छात्र होने से अस्पताल में इलाज के साथ-साथ शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के मेडिकल छात्रों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और झारखंड में ही बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। कोल्हान क्षेत्र के लिए अहम पहल MGM मेडिकल कॉलेज कोल्हान क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पीजी सीटों की संख्या बढ़ने से न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के मरीजों को भी बेहतर और विशेषज्ञ इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड में शानदार प्रदर्शन झारखंड के जमशेदपुर के सोनारी निवासी 33 वर्षीय अनंत राणा ने दुनिया की सबसे कठिन ट्राइथलॉन प्रतियोगिताओं में से एक ‘फुल आयरनमैन’ का खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया है। टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन से जुड़े अनंत राणा ने न्यूजीलैंड के ताउपो शहर में 3 से 8 मार्च के बीच आयोजित ‘फुल आयरनमैन न्यूजीलैंड’ प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को तैराकी, साइकिलिंग और मैराथन दौड़ की तीन बेहद कठिन चुनौतियों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना होता है। अनंत राणा ने इन तीनों चरणों को कुल 11 घंटे 50 मिनट में पूरा कर यह उपलब्धि हासिल की। तय समय से काफी पहले पूरा किया कठिन कोर्स फुल आयरनमैन बनने के लिए प्रतियोगिता में कुल 17 घंटे की समय सीमा निर्धारित होती है, जिसके भीतर सभी तीन इवेंट पूरे करना जरूरी होता है। अनंत राणा ने इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को समय सीमा से काफी पहले पूरा कर अपनी फिटनेस और धैर्य का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ताउपो की ठंडी झील में 3.8 किलोमीटर तैराकी केवल 1 घंटा 28 मिनट में पूरी की। इसके बाद 180 किलोमीटर साइकिलिंग का सफर उन्होंने 6 घंटे 19 मिनट में तय किया। अंतिम चरण में उन्होंने 42 किलोमीटर की मैराथन दौड़ को 3 घंटे 46 मिनट में पूरा कर फुल आयरनमैन का खिताब अपने नाम कर लिया। हर चरण के बीच उन्होंने थोड़े समय के लिए रिकवरी ली, जिससे वह अगले इवेंट के लिए पूरी ऊर्जा के साथ तैयार रह सके। कड़ी ट्रेनिंग और अनुशासन से मिली सफलता इस कठिन प्रतियोगिता के लिए अनंत राणा ने लंबे समय तक कड़ी मेहनत की। वे रोजाना करीब पांच से छह घंटे तक नियमित अभ्यास करते थे। तैराकी की तैयारी उन्होंने जमशेदपुर के डिमना लेक और जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल में की। वहीं साइकिलिंग और दौड़ की ट्रेनिंग के लिए शहर के अलग-अलग लंबे रूट पर अभ्यास किया। इसके अलावा अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए उन्होंने सप्ताह में एक दिन जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी की। लगातार अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास की बदौलत उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता में सफलता हासिल की। परिवार के सहयोग को दिया सफलता का श्रेय अनंत राणा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार को भी दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी साक्षी ने ट्रेनिंग के दौरान परिवार की जिम्मेदारियां संभालकर उनका पूरा साथ दिया। दो छोटे बच्चों की देखभाल और घर की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने अनंत को तैयारी के लिए पूरा समय दिया। इसी सहयोग के कारण वह अपनी ट्रेनिंग पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सके। अनंत राणा की इस उपलब्धि से जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में खुशी की लहर है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज