जमशेदपुर। बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन (DD) बार के बाहर हुए चर्चित हत्याकांड के बाद झारखंड सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। साथ ही क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जमशेदपुर के छह थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है।
राज्य सरकार ने बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अपराध पर नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार कैंप कर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रशासन ने संभावित विरोध-प्रदर्शन और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बिष्टुपुर, साकची, जुगसलाई, सोनारी, सीतारामडेरा और गोलमुरी थाना क्षेत्रों में BNSS की धारा 163 लागू की है। इसके तहत बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक रहेगी। अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब DD बार के बाहर चाकूबाजी में घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद शहर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। मामले में पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। इससे पहले चार पुलिसकर्मियों को भी कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन राज्य के सभी जिलों में अभी तक समान रूप से बारिश नहीं हो रही है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 2 और 3 जुलाई के दौरान बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में मौसम तेजी से बदल सकता है और भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। 2 जुलाई को इन 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने 2 जुलाई को राज्य के पांच जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इनमें शामिल हैं— लातेहार लोहरदगा गुमला सिमडेगा पश्चिमी सिंहभूम इन जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं राज्य के अन्य जिलों में गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 3 से 6 जुलाई तक भी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 3 और 4 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने की संभावना बनी रहेगी। 5 जुलाई को राजधानी रांची सहित कई जिलों में फिर से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जिन जिलों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है, उनमें शामिल हैं— रांची खूंटी लोहरदगा गुमला पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां सिमडेगा इसके अलावा अन्य जिलों में बादल छाए रहने, तेज हवा चलने और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। 6 जुलाई को भी रांची समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। रांची में बढ़ा तापमान, जल्द मिलेगी राहत पिछले 24 घंटों के दौरान राजधानी रांची के अधिकतम तापमान में 3.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं मेदिनीनगर के तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। रामगढ़ और बहरागोड़ा में अच्छी बारिश बुधवार को राज्य के कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं— रामगढ़ – 60.5 मिमी कोडरमा – 20 मिमी जमशेदपुर – 4 मिमी चाईबासा – 2 मिमी लोहरदगा – 2 मिमी गुमला – 1 मिमी सरायकेला – 1 मिमी सबसे अधिक वर्षा बहरागोड़ा में दर्ज की गई, जहां पिछले 24 घंटों में 84.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। अब भी सामान्य से काफी कम बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 1 जुलाई तक झारखंड में कुल 99.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 197.8 मिमी होनी चाहिए थी। इस तरह राज्य में अब तक करीब 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, दुमका ऐसा जिला है जहां सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं राजधानी रांची में अभी भी सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे अधिक वर्षा की कमी गढ़वा और साहिबगंज जिलों में दर्ज की गई है। लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। गरज-चमक और वज्रपात के समय खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। भारी बारिश की संभावना वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की भी अपील की गई है।
देवघर। देवघर जिले के सोनारायठाड़ी थाना क्षेत्र के उपर नवाडीह गांव में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि घर की बड़ी बहू शबाना खातून ने अपने प्रेमी इरशाद अंसारी के साथ मिलकर सास और नाबालिग देवर की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी, हथौड़ा और खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं। मामले का खुलासा देवघर के एसडीपीओ कुलदीप कुमार ने प्रेस वार्ता में किया। शादी के बाद भी जारी था प्रेम संबंध पुलिस के अनुसार, 19 वर्षीय शबाना खातून की शादी करीब तीन महीने पहले उपर नवाडीह निवासी शाहिल अहमद से हुई थी, जो फिलहाल बाहर रहकर काम करता है। शादी से पहले ही शबाना का अपने रिश्तेदार इरशाद अंसारी से प्रेम संबंध था, जो विवाह के बाद भी जारी रहा। इरशाद का ससुराल में आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान शबाना की सास और देवर को दोनों के संबंधों की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद दोनों आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची। मोबाइल पर निर्देश देता रहा प्रेमी जांच में यह भी सामने आया कि घटना की रात इरशाद लगातार मोबाइल फोन पर शबाना के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार, वह कॉल पर वारदात को अंजाम देने के लिए निर्देश देता रहा, जबकि शबाना ने घर में कुल्हाड़ी और हथौड़े से हमला कर सास और देवर की हत्या कर दी। घटना के बाद गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटनास्थल से खून के नमूने, हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य साक्ष्य जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की चाकू से गोदकर हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मंगलवार देर रात टीएमएच से शव को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 3 बजे पोस्टमार्टम किया गया। हालांकि, प्रशासन द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। घटना के बाद शहर के कई प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धालभूम के एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, एमजीएम और मानगो थाना क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, घेराव और हथियार लेकर चलने पर रोक लगा दी गई है। सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, बार परिसर सील पुलिस जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि घायल हिमांशु सड़क पर बैठा हुआ है, जबकि उसका साथी पास में पड़ा हुआ है। घटना के बाद प्रशासन ने डबल डाउन बार को सील कर दिया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। परिजनों का आक्रोश, एनकाउंटर की मांग मृतक के पिता ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे की नृशंस हत्या की गई है और अपराधियों का एनकाउंटर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमांशु सामाजिक कार्यों से जुड़े थे और उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। पिता ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि जब तक मुख्य आरोपी पकड़े या मारे नहीं जाते, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी परिजनों से मुलाकात कर सरकार से त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवार को नौकरी देने की मांग की है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।