जमशेदपुर। जमशेदपुर की चर्चित महिला अपराधी प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ को अदालत से बड़ी राहत मिली है। जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के बाद उसे जमानत दे दी। इस फैसले के बाद वह जेल से बाहर आ सकेगी। तड़ीपार आदेश तोड़ने पर हुई थी गिरफ्तारी प्रिया सिंह को पहले सीसीए (क्रिमिनल लॉ) के तहत जिला बदर यानी तड़ीपार किया गया था। इसके बावजूद वह अवैध रूप से शहर में प्रवेश कर रही थी। बीते 10 मार्च को सोनारी थाना पुलिस और सशस्त्र बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वाला बस्ती में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे घाघीडीह सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। जमानत के लिए दिए गए अहम तर्क बचाव पक्ष के अधिवक्ता आनंद झा ने कोर्ट में जमानत के लिए कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि तड़ीपार उल्लंघन के मामले में अधिकतम सजा पांच साल से कम है और आरोपी पहले ही करीब दो महीने जेल में बिता चुकी है। इसके अलावा मानवीय आधार पर यह भी बताया गया कि प्रिया सिंह का छोटा बच्चा बीमार है। कोर्ट में बच्चे के इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अपराध जगत में है पहचान सोनारी क्षेत्र की रहने वाली प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ पर रंगदारी, मारपीट और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े सात से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना में थी।
जमशेदपुर। जमशेदपुर की छात्रा शांभवी तिवारी ने ICSE-ISC 2026 परीक्षा में इतिहास रचते हुए 100 प्रतिशत अंक हासिल कर नेशनल टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है। Council for the Indian School Certificate Examinations (CISCE) द्वारा जारी परिणामों में झारखंड के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। कोल्हान क्षेत्र का दबदबा इस बार कोल्हान क्षेत्र, खासकर जमशेदपुर और चाईबासा के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया। ICSE 10वीं में चितेश सरकार, वेदांग वत्सल, अहान राय और प्रज्ञा सिंह ने 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर संयुक्त रूप से टॉप किया। वहीं धनबाद की अंशिका मोदी और कोशिकी दत्ता ने भी 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। डॉक्टर बनने का सपना शांभवी तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। फिलहाल वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही हैं और भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं। रांची के स्कूलों का भी शानदार प्रदर्शन राजधानी रांची के स्कूलों ने भी बेहतरीन परिणाम दिए। लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल की प्रभलीन कौर ने 98.8 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि अन्य छात्रों ने भी 97 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। संत थॉमस स्कूल की अंशिका गुप्ता ने 99 प्रतिशत अंक लाकर सिटी टॉपर का खिताब जीता। डिजिटल माध्यम से मिला रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, लेकिन छात्रों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से अपने परिणाम देखे। कई स्कूलों ने भी अपने स्तर पर रिजल्ट उपलब्ध कराया। ICSE-ISC 2026 के नतीजों ने साबित कर दिया कि झारखंड के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग कोषागार से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। करीब 15.41 करोड़ रुपये के गबन मामले में पुलिस ने तीन सिपाहियों—शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने वित्तीय अनियमितताओं में अपनी भूमिका स्वीकार की है। डेटा विश्लेषण से खुला मामला इस पूरे मामले का पर्दाफाश वित्त विभाग की ओर से किए गए डेटा विश्लेषण के दौरान हुआ। संदिग्ध लेन-देन सामने आने के बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। जांच में पाया गया कि अस्थायी पे-आईडी बनाकर सरकारी खजाने से रकम निकाली गई और उसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। 8 साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह घोटाला लंबे समय से चल रहा था और करीब आठ वर्षों तक अवैध निकासी होती रही। इतने लंबे समय तक अनियमितताओं का पता नहीं चलना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। 21 बैंक खाते फ्रीज, 1.60 करोड़ सुरक्षित कार्रवाई के तहत 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इन खातों में मौजूद लगभग 1.60 करोड़ रुपये की राशि को सुरक्षित कर लिया गया है। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी की शिकायत पर लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सिस्टम की भूमिका पर उठे सवाल यह मामला केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जिस तरह से वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा चलता रहा, उसने पूरे ट्रेजरी सिस्टम की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोकारो में भी सामने आ चुका है समान मामला गौरतलब है कि हाल ही में बोकारो में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहां वेतन मद से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी का मामला उजागर हुआ था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राज्य की वित्तीय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर चिंता बढ़ा दी है।
जमशेदपुर। शहर में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग को लेकर समय सीमा का मुद्दा उठने लगा है। जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद और भाजपा नेता अनिल मोदी ने बिष्टुपुर स्थित जी टाउन ओपन जिम और मैदान के संचालन समय को बढ़ाने की मांग की है। व्यावसायिक क्षेत्र के लोगों को हो रही दिक्कत अनिल मोदी का कहना है कि जुगसलाई क्षेत्र के अधिकांश लोग व्यवसाय से जुड़े हैं, जिनका काम देर शाम तक चलता है। ऐसे में मौजूदा समय सीमा के कारण वे जिम और मैदान की सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते। नौकरीपेशा और विद्यार्थियों के लिए भी कम समय उन्होंने बताया कि दिनभर काम करने के बाद लोग शाम के समय ही व्यायाम या टहलने के लिए समय निकाल पाते हैं। सीमित समयावधि के चलते नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को इस सुविधा का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र पार्षद ने कहा कि जी टाउन ओपन जिम और मैदान केवल व्यायाम का स्थान नहीं है, बल्कि यह शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य, मानसिक सुकून और सामाजिक मेलजोल का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां प्रतिदिन युवा, महिलाएं और बुजुर्ग विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। रात्रि 10 बजे तक समय बढ़ाने की मांग अनिल मोदी ने टाटा प्रबंधन से अपील करते हुए कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस सुविधा की समय सीमा बढ़ाकर रात 10 बजे तक की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। स्वास्थ्य जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा उन्होंने यह भी कहा कि समय सीमा बढ़ाने से शहर में फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और यह एक सकारात्मक पहल साबित होगी।
जमशेदपुर। जमशेदपुर स्थित Tata Steel अब अपने ब्लास्ट फर्नेस से निकलने वाले स्लैग को बेकार नहीं जाने देगी। कंपनी की अनुषंगी इकाई आईबीएमडी इस वेस्ट मटेरियल को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदलने पर तेजी से काम कर रही है। अब यही स्लैग रेत और गिट्टी का विकल्प बनकर सड़क और भवन निर्माण में इस्तेमाल होगा। मानगो फ्लाईओवर में पहले से हो रहा इस्तेमाल इस तकनीक का उपयोग जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका है। मानगो फ्लाईओवर निर्माण में हर महीने लगभग 2000 टन स्लैग आधारित एग्रीगेट की सप्लाई की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य औद्योगिक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर निर्माण क्षेत्र में स्थायी समाधान देना है। लागत घटेगी, पर्यावरण को मिलेगा फायदा कंपनी के अनुसार, स्लैग आधारित सामग्री के उपयोग से निर्माण लागत में करीब 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। साथ ही इससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी घटेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। एक टन स्टील उत्पादन के साथ बड़ी मात्रा में स्लैग और कार्बन उत्सर्जन होता है, जिसे अब रिसाइकिल किया जा रहा है। ईंट, पेवर ब्लॉक और गिट्टी का विकल्प तैयार टाटा स्टील स्लैग से सड़क निर्माण के लिए एग्रीगेट, फ्लाई ऐश ईंट, पेवर ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री विकसित कर रही है। ये उत्पाद पारंपरिक ईंट और गिट्टी का विकल्प बन रहे हैं और निर्माण उद्योग में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सीमेंट कंपनियों को भी हो रही सप्लाई कंपनी हर साल एसीसी, डालमिया और न्युवोको जैसी बड़ी सीमेंट कंपनियों को लगभग 8 मिलियन टन स्लैग की आपूर्ति कर रही है। वहीं कुल उत्पादन का करीब 18 मिलियन टन स्लैग विभिन्न बाय-प्रोडक्ट्स के रूप में उपयोग किया जा रहा है। भविष्य की योजनाएं और विस्तार कंपनी आईएसआई सर्टिफिकेशन के बाद इन उत्पादों को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारने की तैयारी में है। इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर लगातार काम चल रहा है। साथ ही खड़गपुर में नया प्लांट लगाने की योजना है, जहां से जीजीबीएस तैयार कर पूर्वोत्तर राज्यों तक भेजा जाएगा। रेलवे नेटवर्क में भी इस सामग्री के उपयोग को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर इसका उपयोग संभव हो सकेगा।
जमशेदपुर। जमशेदपुर स्थित National Metallurgical Laboratory (NML) में ‘अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (RLA-2026)’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 150 वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल हुए। चर्चा का मुख्य फोकस मशीनों की सुरक्षा, उनकी आयु बढ़ाने और औद्योगिक ढांचे को सुरक्षित रखने पर रहा। पुराने औद्योगिक ढांचे को लेकर जताई चिंता NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने बताया कि देश के पेट्रोकेमिकल, ताप विद्युत और खनन क्षेत्रों का 60 से 70 प्रतिशत ढांचा अपनी तय उम्र से अधिक समय से उपयोग में है। उन्होंने कहा कि इससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में “Remaining Life Assessment (RLA)” तकनीक के जरिए मशीनों की स्थिति का सटीक आकलन कर उन्हें सुरक्षित रूप से लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। रक्षा क्षेत्र में भी RLA तकनीक की अहमियत मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि RLA तकनीक अब केवल औद्योगिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुकी है। उन्होंने बताया कि मिसाइल, लड़ाकू विमान और अन्य रक्षा प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनकी उम्र बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। AI के इस्तेमाल से तकनीक होगी और सटीक सेमिनार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि AI की मदद से RLA प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही सुझाव दिया गया कि इस तकनीक को इलेक्ट्रिकल सिस्टम तक भी विस्तारित किया जाए ताकि पूरे औद्योगिक ढांचे की बेहतर निगरानी हो सके। बड़ी कंपनियों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी इस आयोजन में Tata Steel, ONGC, BPCL, IOCL, NTPC और IIT Kharagpur सहित कई प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया। सभी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुरक्षा और तकनीकी सुधारों पर सुझाव दिए। NML के योगदान की सराहना वैज्ञानिकों ने NML के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने ऊर्जा, तेल-गैस और अंतरिक्ष क्षेत्रों में मशीनों की मजबूती और सुरक्षा के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे आयोजन देश के औद्योगिक और रक्षा ढांचे को और मजबूत बनाने में मददगार साबित होंगे।
जमशेदपुर। टाटा स्टील के कर्मचारियों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राहत मिली है। कंपनी ने महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसका लाभ अप्रैल 2026 से वेतन में दिखाई देगा। सीपीआई में बढ़ोतरी का मिला फायदा यह वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर तय की गई है। हालिया तिमाही (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026) में सूचकांक बढ़कर 148.43 पहुंच गया, जो पिछली तिमाही (सितंबर से नवंबर 2025) के 147.30 के मुकाबले अधिक है। इस तरह कुल 1.13 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एनएस ग्रेड कर्मचारियों की आय में बढ़ोतरी इस बदलाव का सीधा असर एनएस ग्रेड के कर्मचारियों पर पड़ेगा। उन्हें करीब 74.50 पॉइंट्स का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे उनकी मासिक आय में लगभग 223.50 रुपये की वृद्धि होगी। ओएस ग्रेड के लिए भी डीए में इजाफा वहीं ओएस ग्रेड के कर्मचारियों के लिए डीए में 1.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी तय की गई है। इसके बाद उनका कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 49.53 प्रतिशत हो गया है। अप्रैल वेतन में दिखेगा असर डीए में की गई यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 के वेतन में जोड़ी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि होगी।
जमशेदपुर प्लांट में बड़ी खुशखबरी झारखंड के जमशेदपुर स्थित टाटा मोटर्स प्लांट के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। ग्रेड रिवीजन को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गुरुवार को इस समझौते पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले का सीधा लाभ 7321 स्थायी कर्मचारियों को मिलेगा। समय पर समझौता हुआ तो मिलेगा 20 हजार बोनस इस समझौते की खास बात यह है कि अगर 31 मार्च 2026 तक इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाता है, तो सभी कर्मचारियों को 20,000 रुपये का एकमुश्त बोनस मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2022 में भी समय पर समझौता होने पर कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया था। वेतन वृद्धि 20 से 23 हजार तक पहुंचने की उम्मीद सूत्रों के मुताबिक, इस बार वेतन वृद्धि का आंकड़ा 20,000 से 23,000 रुपये के बीच जा सकता है। वर्ष 2022 में कुल 17,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार भी बढ़ोतरी को चार चरणों (65%, 15%, 10% और 10%) में लागू किए जाने की संभावना है। जियो ग्रेड कर्मचारियों के DA पर फोकस इस बार यूनियन का सबसे बड़ा फोकस जियो ग्रेड कर्मचारियों के वेतन ढांचे को सुधारने पर है। पुराने कर्मचारियों की तुलना में नए कर्मियों का डीए (महंगाई भत्ता) काफी कम है, जो लगभग 500 रुपये के आसपास है। यूनियन इस अंतर को कम करने के लिए बेसिक पे और डीए स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग कर रही है। बढ़े कर्मचारियों के कारण प्रबंधन पर दबाव पिछले समझौते के समय जहां कर्मचारियों की संख्या 5600 थी, अब यह बढ़कर 7321 हो गई है। ऐसे में प्रबंधन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। इसी वजह से प्रबंधन समझौते की अवधि 6 साल करना चाहता है, जबकि यूनियन 4 साल की परंपरा को बनाए रखने पर अड़ी है। सिर्फ सैलरी नहीं, इन सुविधाओं पर भी चर्चा इस बार समझौते में सिर्फ वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मांगों पर भी चर्चा हुई है: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल लिमिट 5 लाख से बढ़ाने की मांग रिटायरमेंट के बाद मेडिकल इंश्योरेंस को और बेहतर करने का प्रस्ताव त्योहारों (रामनवमी, दुर्गा पूजा) पर ड्यूटी करने वाले कर्मियों को 250 रुपये वाहन भत्ता देने की मांग यूनियन ने दिए सकारात्मक संकेत टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह के अनुसार, प्रबंधन और यूनियन के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर एक सम्मानजनक समझौता हो जाएगा। टाटा मोटर्स के कर्मचारियों के लिए यह समझौता बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज इस पर अंतिम मुहर लगती है या नहीं।
जमशेदपुर। झारखंड में बी.एड, एम.एड और बी.पी.एड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और कदाचार मुक्त कराने के लिए विशेष व्यवस्था कर रहे हैं। जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में इस परीक्षा के लिए कुल 9 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 6,104 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और जरूरी सुविधाएं जैसे पेयजल, बिजली और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। महत्वपूर्ण जानकारी आवेदन की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2026 परीक्षा तिथि: 26 अप्रैल 2026 (रविवार) समय: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक प्रशासन की अभ्यर्थियों से अपील प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें और परीक्षा के दिन कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचें, ताकि जांच प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। कड़े सुरक्षा इंतजामों और बेहतर सुविधाओं के साथ इस परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है ।
झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के युवा इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलकर भारत पहुंचने में सफलता हासिल की। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जैसे ही उनका जहाज पहुंचा, उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को फोन कर अपनी सलामती की खबर दी। इस खबर से परिवार ही नहीं, पूरे शहर में राहत और गर्व का माहौल है। पहली कॉल: “मां, मैं लौट आया हूं” मुंद्रा पोर्ट की सीमा में पहुंचते ही जैसे ही नेटवर्क मिला, अंश त्रिपाठी ने तुरंत अपनी मां चंदा त्रिपाठी को फोन लगाया। उन्होंने संक्षेप में कहा, “मां, मैं भारत पहुंच गया हूं और पूरी तरह सुरक्षित हूं। अभी जहाज पर थोड़ा काम है, बाद में आराम से बात करूंगा।” यह कुछ शब्द ही मां और परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत बन गए, जिनका इंतजार कई दिनों से किया जा रहा था। घर में खुशी की लहर, टली बड़ी चिंता अंश की सुरक्षित वापसी की खबर मिलते ही जमशेदपुर के पारडीह स्थित उनके घर ‘आशियाना वुडलैंड’ में जश्न जैसा माहौल बन गया। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो पिछले दिनों चिंता में डूबे थे, बेटे की आवाज सुनकर भावुक हो उठे और चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। मां की दुआओं ने बचाया मां चंदा त्रिपाठी ने बेटे की आवाज सुनते ही भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी सांसें वापस लौट आई हों। उन्होंने बताया कि बेटे की आवाज में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि उनका बेटा सुरक्षित है। पत्नी को भी था पूरा विश्वास अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में CA के पद पर कार्यरत हैं, ने इसे ईश्वर की कृपा और भारत सरकार की कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति की क्षमता और साहस पर हमेशा भरोसा था। खतरनाक हालात में दिखाई बहादुरी अंश त्रिपाठी, जो शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सेकंड इंजीनियर हैं, युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए खतरनाक परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य और सूझबूझ से अपने कर्तव्य को निभाया और सुरक्षित भारत लौट आए। देशसेवा की विरासत से मिला हौसला अंश के पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और बाद में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मैंने देश के लिए वर्दी पहनकर सेवा की, आज मेरा बेटा समुद्र के रास्ते देश के लिए ऊर्जा लेकर आ रहा है। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है।” प्रेरणादायक बनी अंश की कहानी अंश त्रिपाठी की यह कहानी सिर्फ एक सुरक्षित वापसी नहीं, बल्कि साहस, कर्तव्य और परिवार के अटूट विश्वास की मिसाल है। उनकी बहादुरी ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं।
जमशेदपुर। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच झारखंड के जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने साहस और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज ‘शिवालिक’ तैनात अंश त्रिपाठी 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित भारत लौट रहे हैं। सोमवार 16 मार्च को उनका जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है। उनकी सुरक्षित वापसी की खबर से परिवार और शहर में खुशी का माहौल है। दरअसल, अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को ‘शिवालिक’ जहाज पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ा। 13 मार्च को जहाज ने इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित पार किया, जिसके बाद परिवार और परिचितों ने राहत की सांस ली। परिवार ने दुआओं में बिताए कई दिन जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश त्रिपाठी के परिवार के लिए पिछले कुछ दिन बेहद चिंताजनक रहे। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) जादूगोड़ा से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं, ने बताया कि बीते एक सप्ताह से परिवार की नींद उड़ गई थी। जैसे ही यह खबर मिली कि जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर गया है, मानो सीने से भारी बोझ उतर गया। अंश की मां चंदा त्रिपाठी ने कहा कि हर पल अनहोनी का डर बना हुआ था। मीडिया में खतरे की खबरें सुनकर दिल घबराने लगता था, लेकिन अब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर से घर में खुशी लौट आई है। पत्नी और बेटे को भी था बेसब्री से इंतजार अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, कई दिनों से पति की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रही थीं। उनका दो वर्षीय बेटा तनय भी पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। परिवार के मुताबिक, जहाज के सुरक्षित पहुंचने की खबर मिलते ही घर में रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लग गया और लगातार फोन कॉल आने लगे। अंश त्रिपाठी का करियर अंश त्रिपाठी ने अपनी स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा व जादूगोड़ा माइंस से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीआईटी से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, केरल से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दिसंबर 2014 में उन्होंने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जॉइन किया था।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर के भालूबासा इलाके के रहने वाले दो सगे भाई आर्यन मुखी और ईशुनाथ मुखी आर्थिक तंगी के कारण अपने बॉक्सिंग करियर को छोड़ने की स्थिति में पहुंच गए हैं। दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए झारखंड को चार पदक दिलाए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उनका खेल भविष्य अधर में लटक गया है। राष्ट्रीय स्तर पर जीत चुके हैं चार पदक करीब 16 वर्षीय आर्यन मुखी ने वर्ष 2025 में Junior National Boxing Championship और School National Boxing Championship में कांस्य पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। वहीं उनके छोटे भाई ईशुनाथ मुखी ने Open Sub-Junior National Boxing Championship और National Junior Boxing Championship में कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह दोनों भाइयों ने मिलकर झारखंड को चार राष्ट्रीय पदक दिलाए हैं। मजदूरी से चलता है परिवार दोनों खिलाड़ियों का परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। उनके पिता मंगलनाथ मुखी ठेका मजदूरी करते हैं और इसी कमाई से सात सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण होता है। मां सुनीता देवी गृहिणी हैं। सीमित आय के कारण परिवार के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता है। प्रैक्टिस के लिए भी नहीं हैं संसाधन प्रतिभा होने के बावजूद दोनों भाइयों के पास बॉक्सिंग के लिए जरूरी किट और उपकरण नहीं हैं। कई बार उन्हें दोस्तों से किट उधार लेकर या कोच की मदद से अभ्यास करना पड़ता है। प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी उन्हें अक्सर उधार लेना पड़ता है। कोच की निगरानी में करते हैं अभ्यास दोनों भाई Sitaramdera Community Center में कोच सूरज की निगरानी में नियमित अभ्यास करते हैं। कोच का कहना है कि दोनों खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली हैं और यदि उन्हें सही प्रशिक्षण व संसाधन मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश के लिए पदक जीत सकते हैं। सहयोग की उम्मीद आर्यन और ईशुनाथ का सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतें। लेकिन आर्थिक संकट और सहयोग की कमी के कारण उनका सपना टूटता हुआ नजर आ रहा है। दोनों भाइयों का कहना है कि यदि उन्हें सरकारी या सामाजिक स्तर पर आर्थिक मदद मिल जाए, तो वे अपने खेल को आगे बढ़ा सकते हैं। फिलहाल परिवार की स्थिति को देखते हुए वे बॉक्सिंग छोड़कर काम करने के बारे में सोच रहे हैं, ताकि घर की आर्थिक मदद कर सकें।
पीजी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया तेज झारखंड के जमशेदपुर स्थित कोल्हान क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। कॉलेज प्रबंधन ने विभिन्न विभागों में 38 नई पीजी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है और आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो अगले शैक्षणिक सत्र से कॉलेज में पीजी सीटों की कुल संख्या 51 से बढ़कर लगभग 89 हो सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में होगा इजाफा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, पीजी सीटों में वृद्धि होने से मेडिकल शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही एमजीएम अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। पीजी छात्रों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाएं बेहतर होंगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। रिसर्च और मेडिकल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा पीजी सीटों में बढ़ोतरी से मेडिकल कॉलेज में रिसर्च गतिविधियों और शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है। ज्यादा पीजी छात्र होने से अस्पताल में इलाज के साथ-साथ शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के मेडिकल छात्रों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और झारखंड में ही बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। कोल्हान क्षेत्र के लिए अहम पहल MGM मेडिकल कॉलेज कोल्हान क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां पीजी सीटों की संख्या बढ़ने से न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के मरीजों को भी बेहतर और विशेषज्ञ इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।