झारखंड

लोहरदगा के छात्रावास में जहरीले सांप के काटने से 12 वर्षीय छात्रा की मौत, तीन अन्य छात्राएं अस्पताल में भर्ती

anjali kumari जुलाई 10, 2026 0
Lohardaga Snakebite Incident
Lohardaga Snakebite Incident

लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले में एक दर्दनाक हादसे में छात्रावास के कमरे में घुसे जहरीले सांप के काटने से 12 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राएं भी इसकी चपेट में आ गईं। सभी को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक छात्रा को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीन का इलाज जारी है।

 

रात में छात्रावास में घुसा सांप

 

जानकारी के अनुसार, घटना देर रात उस समय हुई जब छात्रावास में रहने वाली छात्राएं सो रही थीं। इसी दौरान एक जहरीला सांप कमरे में घुस आया और चार छात्राओं को डस लिया। छात्राओं की चीख-पुकार सुनकर छात्रावास कर्मी मौके पर पहुंचे और सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

 

एक छात्रा की मौत, तीन का इलाज जारी

 

अस्पताल में चिकित्सकों ने 12 वर्षीय छात्रा को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीन छात्राओं का इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी छात्राओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

प्रशासन ने शुरू की जांच

 

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी छात्रावास पहुंचे। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही छात्रावास परिसर में सांपों की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए विशेष सर्च अभियान चलाया गया और परिसर की साफ-सफाई के निर्देश दिए गए।

 

मानसून में बढ़ा खतरा

 

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान जलभराव और झाड़ियों के कारण सांप आबादी वाले क्षेत्रों और भवनों में पहुंच जाते हैं। प्रशासन ने लोगों से आसपास साफ-सफाई रखने और सांप दिखने पर स्वयं पकड़ने के बजाय वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत टेक्स 2026: झारखंड की बांस-स्टील बोतल और मग बने आकर्षण का केंद्र

रांची। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में झारखंड के बांस और स्टील से बने नवाचारपूर्ण उत्पादों ने आगंतुकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी के तीसरे दिन झारखंड पैवेलियन में बड़ी संख्या में लोगों ने बांस और स्टेनलेस स्टील से निर्मित बोतल तथा मग की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और पर्यावरण-अनुकूल विशेषताओं की सराहना की। इन उत्पादों को टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली उपयोगी पहल के रूप में देखा जा रहा है।   पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित अनजनेया बांस क्लस्टर द्वारा विकसित इन उत्पादों में पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है। बांस और स्टेनलेस स्टील से बनी बोतल गर्म या ठंडे पेय का तापमान लगभग 12 से 14 घंटे तक बनाए रखने में सक्षम है। वहीं, बांस, स्टेनलेस स्टील और फूड-ग्रेड प्लास्टिक से तैयार मग 3 से 4 घंटे तक पेय का तापमान सुरक्षित रखता है। इससे ये उत्पाद उपयोगिता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देते हैं।   ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान  भारत टेक्स 2026 झारखंड के ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान को नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। राज्य तसर सिल्क, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों, हस्तकरघा, हस्तशिल्प और बांस आधारित नवाचारों के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अनजनेया बांस क्लस्टर स्थानीय कारीगरों को रोजगार और बाजार उपलब्ध कराने के साथ निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ा रहा है।   क्लस्टर में लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग, सीएनसी राउटिंग........ क्लस्टर में लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग, सीएनसी राउटिंग और कस्टमाइज्ड डिजाइन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के सजावटी, फर्नीचर और लाइफस्टाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत टेक्स 2026 में 130 से अधिक देशों के 6,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार और लगभग 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुक भाग ले रहे हैं, जिससे झारखंड के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

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गढ़वा में SIR अभियान ने पकड़ी रफ्तार, सभी मतदाताओं तक पहुंचे फॉर्म

गढ़वा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत गढ़वा जिला प्रशासन ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में जिले के सभी पंजीकृत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) का शत-प्रतिशत वितरण पूरा कर लिया गया है।   जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा स्वयं अभियान की नियमित निगरानी कर रहे हैं। वे लगातार समीक्षा बैठकों के माध्यम से दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कार्यों की प्रगति का आकलन कर रहे हैं और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से अभियान पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं।   जिले में कुल 8 लाख 62 हजार 92 मतदाता पंजीकृत हैं। प्रशासन की ओर से सभी मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं। अब तक 5 लाख 55 हजार 677 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 644 प्रपत्रों का ऑनलाइन सबमिशन तथा 5 लाख 55 हजार 30 प्रपत्रों का बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापन किया जा चुका है।   गढ़वा विधानसभा क्षेत्र गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में कुल 4 लाख 26 हजार 661 मतदाता हैं। यहां 100 प्रतिशत प्रपत्र वितरण के साथ 2 लाख 55 हजार 11 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 392 ऑनलाइन सबमिशन और 2 लाख 54 हजार 616 प्रपत्रों का सत्यापन पूरा हो चुका है।   वहीं भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 4 लाख 35 हजार 431 मतदाता पंजीकृत हैं। यहां भी सभी मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। अब तक 3 लाख 666 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 439 ऑनलाइन आवेदन और 3 लाख 414 प्रपत्रों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।   उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मतदाताओं से क्या अपील की  उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि जब भी बीएलओ उनके घर पहुंचें, वे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं, गणना प्रपत्र सही और पूर्ण रूप से भरकर समय पर जमा करें तथा अपने मतदाता विवरण का सत्यापन अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही एक शुद्ध, विश्वसनीय और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार की जा सकती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाएगी।

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रांची। अगर आप शहर की भागदौड़ और रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ दिन दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो झारखंड आपके लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल साबित हो सकता है। खनिज संपदा और औद्योगिक पहचान के लिए प्रसिद्ध यह राज्य प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों, मनमोहक झरनों और शांत घाटियों के कारण भी देशभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां परिवार, दोस्तों या अकेले भी यादगार छुट्टियां बिताई जा सकती हैं।   पतरातु घाटी: हरियाली और घुमावदार सड़कों का अद्भुत संगम रामगढ़ जिले की पतरातु घाटी झारखंड के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। यहां की घुमावदार सड़कें, चारों ओर फैली हरियाली और पतरातु डैम का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। लॉन्ग ड्राइव, फोटोग्राफी और सनसेट देखने के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।   हुंडरू और जोन्हा फॉल्स: झरनों की मधुर आवाज में मिलेगा सुकून रांची को 'झरनों का शहर' कहा जाता है। यहां स्थित हुंडरू फॉल्स और जोन्हा फॉल्स राज्य के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। खासकर मानसून के दौरान इन झरनों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। ऊंचाई से गिरता पानी, आसपास की हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है।   बेतला नेशनल पार्क: वन्यजीव प्रेमियों के लिए खास आकर्षण लातेहार-पलामू क्षेत्र में स्थित बेतला नेशनल पार्क एडवेंचर और वाइल्डलाइफ पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन जगह है। यहां जंगल सफारी के दौरान हाथी, हिरण, बाइसन, बंदर और कई दुर्लभ पक्षियों को करीब से देखा जा सकता है। प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों का रोमांच इस जगह को खास बनाता है।   नेतरहाट: झारखंड का 'क्वीन ऑफ छोटानागपुर' लातेहार जिले का नेतरहाट झारखंड का सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन माना जाता है। ठंडी हवाएं, चीड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें, सूर्योदय और सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य यहां आने वाले हर पर्यटक का दिल जीत लेते हैं। परिवार के साथ शांत और यादगार छुट्टियां बिताने के लिए यह एक आदर्श स्थान है।   पारसनाथ पहाड़: आस्था और रोमांच का अनूठा संगम गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ झारखंड की सबसे ऊंची चोटी होने के साथ जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल भी है। घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होकर यहां पहुंचना अपने आप में रोमांचक अनुभव है। ट्रैकिंग के शौकीनों के साथ-साथ धार्मिक यात्रियों के लिए भी यह स्थान बेहद खास माना जाता है।   झारखंड के ये सभी पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और रोमांच का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। यदि आप इस बार भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ यादगार पल बिताने की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड की ये पांच शानदार जगहें आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना सकती हैं।

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