झारखंड

Jharkhand Weather Alert: Rain and Wind Till May 12

झारखंड में 12 मई तक बदला रहेगा मौसम का मिजाज, बारिश और तेज हवा को लेकर येलो अलर्ट जारी

surbhi मई 7, 2026 0
Jharkhand weather update cloudy skies rain thunder yellow alert issued with strong winds till 12 May
Jharkhand Weather Alert Rain and Wind Forecast

Jharkhand में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। बीते कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में हुई बारिश के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। अब मौसम विभाग ने 12 मई तक राज्यभर में बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवा चलने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य के अलग-अलग जिलों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।

सिमडेगा में सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान सबसे ज्यादा बारिश Simdega में दर्ज की गई। यहां 34.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। वहीं Gumla में भी हल्की बारिश दर्ज की गई।

हालांकि बारिश के बावजूद कई जिलों में तापमान में बढ़ोतरी देखी गई।

  • Ranchi का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहा
  • Medininagar में 36.2 डिग्री सेल्सियस
  • Jamshedpur में 34.8 डिग्री सेल्सियस
  • Bokaro में 34.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया

7 और 8 मई को कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक 7 और 8 मई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। हालांकि Garhwa, Chatra, Palamu और Latehar को छोड़कर बाकी इलाकों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बारिश होने की संभावना है।

इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। राजधानी रांची और आसपास के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

12 मई तक बादलों का असर

मौसम विभाग ने बताया है कि 12 मई तक राज्य के लगभग सभी जिलों में बादल छाए रहेंगे।

  • 9 और 10 मई को कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है
  • 11 मई को उत्तर-पश्चिमी जिलों को छोड़कर बाकी हिस्सों में बारिश के आसार हैं
  • 12 मई को भी कई इलाकों में हल्की बारिश जारी रह सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव के कारण लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन तेज हवा और गरज के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बड़कागांव का मेगालिथ बनेगा अंतरराष्ट्रीय पहचान का केंद्र

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित प्राचीन मेगालिथ स्थल को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। कला एवं पर्यटन विभाग ने इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने के लिए पहल तेज कर दी है। राज्य सरकार इसे विश्व स्तर के पर्यटन और विरासत स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है।   पर्यटन विभाग ने किया निरीक्षण   कला एवं पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ मेगालिथ क्षेत्र का दौरा किया और विकास कार्यों को लेकर आवश्यक निर्देश दिए। जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने स्थल की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी ली। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है।   खगोलीय महत्व वाला अनोखा स्थल   बड़कागांव प्रखंड के पकरी बरवाडीह में स्थित यह मेगालिथ लगभग 3000 से 4000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह स्थल आदिवासी समुदाय की प्राचीन खगोलीय समझ का अद्भुत उदाहरण है। हर साल 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें पत्थरों के बीच से सीधी गुजरती हैं, जिसे इक्विनॉक्स कहा जाता है। यह घटना दुनिया के बेहद कम स्थानों पर देखने को मिलती है।   इंग्लैंड के ऐतिहासिक स्थलों की तर्ज पर होगा विकास   सरकार इस स्थल को इंग्लैंड के प्रसिद्ध न्यूग्रेंज और स्टोनहेंज जैसी विश्व प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक धरोहरों की तर्ज पर विकसित करना चाहती है। अधिकारियों का मानना है कि सही संरक्षण और विकास के बाद यह स्थल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल हो सकता है।   पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा   इस ऐतिहासिक स्थल की खोज वर्ष 2000 में शोधकर्ता शुभाशीष दास ने की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया, तो हजारीबाग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल सकती है।

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रांची। प्रेमचंद महतो इंटर कॉलेज  मेसरा , रांची ने इस वर्ष वार्षिक इंटरमीडिएट परीक्षा में एक बार फिर शानदार सफलता हासिल की है। कॉलेज के विद्यार्थियों ने कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत उत्तीर्णता का रिकॉर्ड कायम किया।   कौन कौन रहे टॉपर? • कला संकाय में नासरीन परवीन ने 451/500 अंक (90.2 %) के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सिद्दी कुमारी ने 435/500 अंक (87%) के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। सौरव पांडेय ने 411/500 (82.2%) अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान पाया। • विज्ञान संकाय में कृष्णा कुमार ने 408/500 (81.6%),सौरव पांडेय 411/500 (81.2%) और नजिरा परवीन ने 433/500 (86.6%) अंकों के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। • वाणिज्य संकाय में आयुष राज ने 350/500 (70%) अंक प्राप्त कर कॉलेज का नाम रोशन किया। देव कुमार राज और अक्षत कुमार ने भी क्रमशः 339/500 (67.8 %) और अक्षत कुमार 314/500 (62.8 %) अंक हासिल किए। • कॉलेज प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रखंड की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया है, जिससे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और मजबूत हुई है।

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रांची। झारखंड के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Jharkhand Academic Council (JAC) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है। लंबे इंतजार के बाद आए इस परिणाम ने छात्रों और अभिभावकों की उत्सुकता को शांत कर दिया है। खास बात यह है कि साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ घोषित किया गया है।   रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, जिससे कई छात्रों को शुरुआत में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बोर्ड ने वैकल्पिक तरीकों से भी रिजल्ट देखने की सुविधा दी है, जिससे छात्र आसानी से अपने अंक देख सकते हैं।   ऑनलाइन ऐसे करें रिजल्ट चेक   JAC 12th Result 2026 ऐसे करें चेक •    सबसे पहले jacresults.com वेबसाइट पर जाएं. •    होमपेज पर JAC 12th Result 2026 लिंक पर क्लिक करें. •    अब अपना रोल कोड और रोल नंबर दर्ज करें. •    सबमिट बटन पर क्लिक करें. •    आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिख जाएगा. •    इसे डाउनलोड करें और प्रिंट निकाल लें. SMS से भी मिलेगा रिजल्ट अगर वेबसाइट स्लो या डाउन हो, तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल में टाइप करें: RESULT JAC12 Roll Code Roll Number और इसे 56263 पर भेज दें। कुछ ही समय में रिजल्ट मोबाइल पर मिल जाएगा।   DigiLocker पर मार्कशीट उपलब्ध छात्र DigiLocker के माध्यम से भी अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन कर रोल डिटेल्स दर्ज करनी होगी। यह मार्कशीट आधिकारिक और भविष्य में उपयोग के लिए मान्य होती है।   छात्रों के लिए अहम सलाह बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपनी मार्कशीट में दर्ज सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें। किसी भी त्रुटि की स्थिति में तुरंत संबंधित स्कूल या बोर्ड कार्यालय से संपर्क करें।

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