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Oracle Layoffs Trigger H-1B Debate

Oracle में बड़े पैमाने पर छंटनी का विवाद: H-1B वीजा और सस्ते श्रम को लेकर उठे सवाल

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Oracle office building with employees leaving amid layoffs and controversy over H-1B visa hiring practices
Oracle Layoffs and H-1B Visa Controversy

दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल Oracle एक बड़े विवाद में घिर गई है। हाल ही में कंपनी द्वारा लगभग 30,000 कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकालने की खबर ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि यह छंटनी ऐसे समय में की गई है, जब कंपनी का मुनाफा तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारियों को सुबह 6 बजे एक ईमेल के जरिए नौकरी से हटाए जाने की सूचना दी गई। ईमेल में औपचारिक धन्यवाद के शब्द तो थे, लेकिन उसी समय कर्मचारियों का सिस्टम एक्सेस-ईमेल, फाइल्स और इंटरनल टूल्स-तुरंत बंद कर दिया गया।

मुनाफा बढ़ा, फिर भी 30,000 की छंटनी

कंपनी का हालिया वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है। तिमाही राजस्व लगभग 17.2 अरब डॉलर तक पहुंचा, जो पिछले साल से 22% अधिक है। वहीं, नेट इनकम में करीब 95% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कंपनी लाभ में है, तो इतनी बड़ी छंटनी क्यों?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लागत कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जहां उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों की जगह अपेक्षाकृत कम वेतन वाले कर्मचारियों को लाने की कोशिश की जा रही है।

H-1B वीजा को लेकर विवाद

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा H-1B visa को लेकर हो रही है। आरोप हैं कि कंपनी ने घरेलू कर्मचारियों को हटाकर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

डेटा के अनुसार:

  • एक स्थानीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की औसत सैलरी लगभग $106,000 बताई जाती है
  • जबकि H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी को करीब $87,000 दिए जाते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ वेतन लागत कम करने का मामला नहीं है, बल्कि “वर्कफोर्स कंट्रोल” का भी हिस्सा है, क्योंकि विदेशी कर्मचारियों का वीजा कंपनी पर निर्भर होता है।

वायरल पोस्ट से बढ़ा विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर Peter Girnus नाम के एक व्यक्ति का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने बहस को और तेज कर दिया है।

AI डेटा सेंटर के लिए फंड जुटाने की तैयारी?

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि यह छंटनी कंपनी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। बताया जा रहा है कि Oracle 8 से 10 अरब डॉलर का कैश फ्लो फ्री कर AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में निवेश करना चाहती है।

कंपनी के चेयरमैन Larry Ellison AI सेक्टर में तेजी से विस्तार करना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना है, जिसमें OpenAI जैसे पार्टनर्स की भी भूमिका हो सकती है।

सिर्फ Oracle नहीं, इंडस्ट्री ट्रेंड?

यह मामला सिर्फ Oracle तक सीमित नहीं है। Amazon जैसी अन्य बड़ी टेक कंपनियों ने भी हाल के महीनों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की है, जबकि साथ ही H-1B वीजा के लिए आवेदन जारी रखे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि टेक इंडस्ट्री में एक नया मॉडल उभर रहा है-
“रोल को बनाए रखो, सैलरी को कम करो”
यानी काम वही रहेगा, लेकिन कम लागत वाले कर्मचारियों के जरिए।

नैतिकता बनाम मुनाफा

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है-क्या कंपनियां मुनाफे के लिए कर्मचारियों की सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारियों से समझौता कर रही हैं?

जहां एक ओर निकाले गए कर्मचारी असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नए कर्मचारियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने करेंसी नोट प्रेस की 3 यूनिट में 534 वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती का विज्ञापन 6 अप्रैल को जारी किया गया है। फीस जमा करने और फॉर्म में करेक्शन की आखिरी तारीख 1 जुलाई तय की गई है।   कोटिवार पदों का ब्योरा: सामान्य        292 ओबीसी     215 एससी     142 ईडब्ल्यूएस     61 एसटी     12 टोटल     722 शैक्षणिक योग्यता : माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की 12वीं या सरकार द्वारा उसके समकक्ष अन्य परीक्षा पास की हो। वे ही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने पीईटी - 2025 एग्जाम पास की हो। उम्मीदवारों को नॉर्मलाइज्ड स्कोर के बेसिस पर मेन एग्जाम में भाग लेने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। उम्र सीमा : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी। शारीरिक योग्यता : पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई : 167.6 सेमी सामान्य वर्ग की महिलाओं की न्यूनतम ऊंचाई : 152 सेमी पुरुषों का सीना : न्यूनतम 80 सेमी (बिना फुलाए) और 85 सेंटीमीटर फुलाने पर हो। महिलाओं का वजन 45 किलो तक होना चाहिए। चयन प्रक्रिया : मेन्स रिटन एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन परीक्षा प्रणाली : अवधि : 2 घंटा प्रश्नों का प्रकार : एमसीक्यू निगेटिव मार्किंग : एक चौथाई अंक पार्ट्स    सब्जेक्ट    क्वेश्चन नंबर पार्ट - 1     हिस्ट्री ऑफ इंडिया एंड इंडियन नेशनल मूवमेंट जियोग्राफी ऑफ इंडिया एंड द वर्ल्ड इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलपमेंट ऑफ इंडिया इंडियन पॉलिटी एंड इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन जनरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी एनवायरोमेंटल इकोलॉजी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट करेंट इवेंट्स ऑफ नेशनल एंड इंटरनेशनल इम्पॉर्टेंस डाटा इंटरप्रिटेशन इम्पोर्टेंट लीगल प्रोविजन्स एंड पॉलिसिज रिलेटेड टू एक्ससाइज इन यूपी टोटल मार्क्स 65 पार्ट - 2    कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी - कॉन्सेप्ट्स, डेवलपमेंट एंड इन्नोवेशन्स    15 पार्ट - 3    जनरल इंफॉर्मेशन रिलेटेड टू द स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश    20 टोटल        100 फीस : सभी कैटेगरी के लिए : 25 रुपए   ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं। होमपेज पर “Live Advertisement” सेक्शन में संबंधित विज्ञापन पर क्लिक करें। PET-2025 रजिस्ट्रेशन नंबर से लॉगिन करें। आवेदन फॉर्म में जरूरी जानकारी भरें। फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म सब्मिट करके इसका प्रिंटआउट निकाल लें।

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Job seekers applying for top government jobs in India, including army, railways, and banks.

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NIC भर्ती नोटिफिकेशन 2026 की आधिकारिक वेबसाइट स्क्रीन
नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर में नौकरी का सुनहरा मौका, 243 पदों पर आवेदन शुरू

नई दिल्ली,एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग और टेक्निकल बैकग्राउंड के युवाओं के लिए बड़ी खबर है। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने Scientist-B के 243 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। यह भर्ती भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत की जा रही है। खास बात यह है कि इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन GATE स्कोर के आधार पर होगा, जिससे यह अवसर मेधावी अभ्यर्थियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 24 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।   किन पदों पर होगी भर्ती? जारी जानकारी के अनुसार, भर्ती तीन प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में की जाएगी। इनमें कंप्यूटर साइंस एवं आईटी के 168 पद, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन के 25 पद, और डेटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 50 पद शामिल हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका है, जो देश के ई-गवर्नेंस और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स में काम करना चाहते हैं।   आवेदन और चयन प्रक्रिया इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों के पास GATE 2024, 2025 या 2026 में से किसी एक वर्ष का वैध स्कोर होना जरूरी है। मान्य GATE पेपर में CS (Computer Science), EC (Electronics & Communication) और DA (Data Science & AI) शामिल हैं। उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग GATE स्कोर के आधार पर की जाएगी। इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और पर्सनल इंटरव्यू/इंटरैक्शन की प्रक्रिया होगी। पात्रता की कट-ऑफ डेट 31 मार्च 2026 तय की गई है।   कितनी मिलेगी सैलरी? Scientist-B पद ग्रुप-ए गजटेड कैटेगरी में आता है। चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-10 का वेतन मिलेगा, जो ₹56,100 से ₹1,77,500 तक है। इसके अलावा केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य भत्ते और सुविधाएं भी मिलेंगी। हालांकि, पदों की संख्या जरूरत के अनुसार बदली भी जा सकती है।

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