अमेरिका-चीन संबंध

Donald Trump and Xi Jinping walking through Zhongnanhai Garden while admiring blooming roses in Beijing.
चीन के गुलाबों के मुरीद हुए ट्रंप, जिनपिंग के साथ गार्डन में टहलते दिखे अमेरिकी राष्ट्रपति

Donald Trump के चीन दौरे का एक खास वीडियो सामने आया है, जिसमें वह चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ बीजिंग के मशहूर झोंगनानहाई गार्डन में घूमते नजर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। गुलाब देखकर प्रभावित हुए ट्रंप गार्डन में टहलते वक्त ट्रंप वहां लगे खूबसूरत गुलाबों को देखकर काफी प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा कि उन्होंने इतने सुंदर गुलाब पहले कभी नहीं देखे। इस पर शी जिनपिंग ने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि वह ट्रंप को इन गुलाबों के बीज भेजेंगे। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो न्यूज एजेंसी PTI ने जारी किया है। कई अहम मुद्दों पर हुई बातचीत चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों से लेकर वैश्विक मुद्दों तक पर विस्तृत चर्चा हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कई नए साझा समझौतों पर भी सहमति जताई है। बताया गया है कि दोनों नेताओं ने गुरुवार को दो अलग-अलग दौर की बैठकें कीं, जिनमें व्यापार, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ में किया लंच बैठकों के अलावा ट्रंप और शी जिनपिंग ने साथ में लंच भी किया। दोनों नेताओं के बीच दिखी गर्मजोशी को हाल के महीनों में अमेरिका-चीन संबंधों में आई नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। तीन दिवसीय दौरे का आखिरी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा समाप्त कर लौटेंगे। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, टैरिफ और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव बना हुआ था। ऐसे में इस मुलाकात को वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Donald Trump and Nvidia CEO Jensen Huang arriving in China for high-level trade and technology talks
ट्रंप चीन पहुंचे Nvidia CEO जेंसन हुआंग के साथ, शी जिनपिंग से ‘ओपन मार्केट’ की मांग पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन की बहुप्रतीक्षित यात्रा पर पहुंचे, जहां उनके साथ टेक दिग्गज कंपनी Jensen Huang समेत कई बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट नेता भी मौजूद रहे। इस दौरे का मकसद चीन-अमेरिका व्यापार संबंधों को नए सिरे से मजबूत करना और बीजिंग में अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की मांग रखना बताया जा रहा है। व्यापार और कूटनीति एक साथ, ट्रंप का ‘ओपन चाइना’ एजेंडा ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से अपील करेंगे कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार को “अधिक खुला” बनाए। उन्होंने इसे अमेरिकी व्यापार जगत के लिए बड़ा अवसर बताया और कहा कि यह उनकी प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इस यात्रा को अमेरिका-चीन के बीच नाजुक व्यापार संघर्ष को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। टेक कंपनियों के सीईओ भी डेलिगेशन में शामिल इस बार ट्रंप अपने साथ केवल राजनीतिक प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट नेताओं को भी लेकर गए हैं। इनमें विशेष रूप से Nvidia के सीईओ जेंसन हुआंग शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हुआंग को अंतिम समय में इस यात्रा में शामिल किया गया, क्योंकि Nvidia चीन में अपने एडवांस AI चिप्स की बिक्री के लिए नियामक मंजूरी पाने की कोशिश कर रही है। टेक इंडस्ट्री के अन्य प्रमुख अधिकारी भी इस डेलिगेशन का हिस्सा हैं, जो चीन में व्यापारिक अवसरों को फिर से खोलने की उम्मीद कर रहे हैं। व्यापार समझौते और वैश्विक तनाव एक साथ यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है। पिछले साल हुए अस्थायी व्यापार समझौते को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के अधिकारी लगातार बातचीत कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ईरान संकट और ताइवान मुद्दे को भी चीन के साथ वार्ता में शामिल कर रहा है, जिससे यह दौरा और अधिक जटिल हो गया है। ईरान और ताइवान मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मध्य पूर्व में तनाव कम करने में मदद करे। वहीं दूसरी ओर, ताइवान को लेकर बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका की सैन्य बिक्री और समर्थन का विरोध करता रहा है। व्यापार संतुलन और सेमीकंडक्टर नीति पर फोकस वार्ता में सबसे अहम मुद्दों में से एक सेमीकंडक्टर और AI चिप्स का व्यापार है। अमेरिका चीन को उच्च तकनीक वाले चिप्स की बिक्री पर प्रतिबंध में ढील चाहता है, जबकि चीन अमेरिकी कृषि और ऊर्जा उत्पादों के बड़े आयात की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बातचीत वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन पर बड़ा असर डाल सकती है। ट्रंप की कूटनीति पर वैश्विक नजरें ट्रंप इस यात्रा के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नए व्यापारिक समझौते और निवेश की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चीन अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है, जिससे बातचीत और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि बीजिंग में होने वाली यह बैठक अमेरिका-चीन रिश्तों को नई दिशा देती है या तनाव को और बढ़ाती है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump and Xi Jinping during a high-level meeting amid US-China geopolitical tensions
चीन दौरे पर ट्रंप, लेकिन इस बार शी जिनपिंग मजबूत स्थिति में! ईरान, ताइवान और ट्रेड बने बड़े मुद्दे

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump 13 से 15 मई तक चीन दौरे पर रहने वाले हैं। यह दौरा अमेरिका-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। करीब एक दशक बाद कोई मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति चीन जा रहा है। इससे पहले ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2017 में चीन का दौरा किया था। हालांकि ट्रंप कई बार चीन के खिलाफ सख्त बयान दे चुके हैं, लेकिन उन्होंने हाल के दिनों में चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की खुलकर तारीफ भी की है। पिछले सप्ताह ट्रंप ने शी जिनपिंग को “अच्छा और समझदार व्यक्ति” बताया था और कहा था कि दोनों के रिश्ते काफी अच्छे हैं। लेकिन इस दोस्ताना बयानबाजी के पीछे कई बड़े वैश्विक दबाव छिपे हुए हैं। खासकर ईरान संकट, ताइवान विवाद और ट्रेड वॉर इस मुलाकात को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं। ईरान संकट बना ट्रंप की बड़ी चुनौती ट्रंप के चीन दौरे पर सबसे बड़ा असर ईरान संकट का माना जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से चीन पर दबाव बना रहा है कि वह तेहरान को समझाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और संघर्ष कम करने में मदद करे। हालांकि अब तक वॉशिंगटन को इसमें खास सफलता नहीं मिली है। अमेरिका की कोशिशों के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है और इसका असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी पड़ रहा है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि शी जिनपिंग भी इस संकट का समाधान चाहते हैं। लेकिन दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। ईरान के वरिष्ठ नेता अली अकबर वेलायती ने कहा कि अमेरिका यह न सोचे कि मौजूदा हालात का फायदा उठाकर वह बीजिंग में बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल कर लेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय अमेरिका को चीन की जरूरत ज्यादा है, क्योंकि चीन ईरान का बड़ा आर्थिक साझेदार है और वह बड़ी मात्रा में ईरानी तेल खरीदता है। ताइवान मुद्दे पर चीन बना सकता है दबाव विश्लेषकों का कहना है कि अगर चीन ईरान मुद्दे पर अमेरिका की मदद करता है तो बदले में वह ताइवान को लेकर रियायत मांग सकता है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका-ताइवान संबंधों पर लगातार आपत्ति जताता रहा है। ऐसे में बीजिंग ट्रंप की मौजूदा कूटनीतिक मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। यह बैठक इस बात की भी परीक्षा मानी जा रही है कि ट्रंप चीन से सहयोग पाने के लिए कितनी दूर तक समझौता करने को तैयार हैं। ट्रेड वॉर और रेयर अर्थ पर भी होगी बड़ी बातचीत अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर भी इस मुलाकात का अहम मुद्दा रहेगा। पिछले साल दोनों देशों के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया था। अमेरिका ने चीनी सामानों पर 145 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिए थे, जिसके जवाब में चीन ने रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर सख्ती बढ़ा दी थी। इन मिनरल्स का इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी और रक्षा उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। चीन की इस रणनीति से कई अमेरिकी फैक्ट्रियों पर असर पड़ा था। अब दोनों देश रिश्तों को कुछ हद तक स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि चीन ज्यादा अमेरिकी कृषि और ऊर्जा उत्पाद खरीदे, जबकि चीन अमेरिकी तकनीक तक पहुंच और एक्सपोर्ट प्रतिबंधों में राहत चाहता है। बोइंग डील पर भी टिकी नजरें रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन और अमेरिका के बीच बड़ी एविएशन डील की भी संभावना है। चीन करीब 500 Boeing 737 Max विमान खरीदने पर विचार कर रहा है। अगर यह समझौता होता है तो यह 2017 के बाद बोइंग के लिए चीन का सबसे बड़ा ऑर्डर होगा। क्या ट्रंप को मिलेगा कूटनीतिक फायदा? ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब आलोचक उनकी विदेश नीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और ईरान जैसे देशों ने अमेरिका को कई मुद्दों पर रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि बीजिंग में होने वाली ट्रंप-शी मुलाकात वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा समीकरणों को किस दिशा में ले जाती है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Donald Trump and Xi Jinping meeting in Beijing amid Iran war and rising US-China tensions
ईरान युद्ध के बीच चीन जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग से होगी अहम मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump इस महीने चीन के दौरे पर जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से होगी। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि ट्रंप 13 मई से 15 मई तक चीन में रहेंगे। बीजिंग में होगी अहम बैठक जानकारी के मुताबिक, Donald Trump बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे। गुरुवार को उनका औपचारिक स्वागत और द्विपक्षीय बैठक होगी। यात्रा शुक्रवार को समाप्त होगी। व्हाइट हाउस की चीफ डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी Anna Kelly ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना है। ईरान युद्ध समेत कई मुद्दों पर चर्चा अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप और Xi Jinping के बीच कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें: Iran से जुड़ा तनाव और युद्ध ताइवान मुद्दा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) परमाणु हथियार नियंत्रण महत्वपूर्ण खनिज समझौते जैसे विषय शामिल हैं। युद्ध के कारण टली थी यात्रा यह दौरा पहले साल की शुरुआत में प्रस्तावित था, लेकिन Iran और अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस दौरे के जरिए चीन के साथ संवाद बढ़ाकर वैश्विक तनाव कम करने की कोशिश कर सकते हैं। चीन की टेक्नोलॉजी पर अमेरिका सख्त ट्रंप के चीन दौरे से पहले अमेरिका में चीनी टेक्नोलॉजी कंपनियों को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अमेरिका ने ईरान से कथित संबंधों के आरोप में कई चीनी कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने चार कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया, जिनमें तीन चीन की हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराकर पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को मदद पहुंचाई। तेल खरीद को लेकर भी बढ़ा विवाद अमेरिका ने हाल ही में ईरान से कच्चा तेल खरीदने के आरोप में कुछ चीनी रिफाइनरियों पर भी प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद चीन ने अपनी कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करने का संकेत दिया। Ministry of Foreign Affairs of the People's Republic of China ने कहा कि वह एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है और चीनी कंपनियों तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा। क्यों अहम मानी जा रही है यह यात्रा? विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दौरा सिर्फ अमेरिका-चीन संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी पड़ सकता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा हालात लगातार दबाव में हैं।  

surbhi मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0