गुवाहाटी, 4 मई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि राज्य में एक बार फिर Bharatiya Janata Party (BJP) की सरकार बन सकती है। रुझानों में पार्टी ने तीन-चौथाई का आंकड़ा पार करते हुए करीब 95 सीटों पर बढ़त बना ली है, जो स्पष्ट जनादेश की ओर इशारा करता है। BJP की ऐतिहासिक बढ़त 126 सीटों वाली असम विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 64 है, लेकिन शुरुआती रुझानों में BJP इससे काफी आगे निकलती दिख रही है। BJP: 90+ सीटों पर बढ़त (कुछ रुझानों में 95 तक) Indian National Congress (कांग्रेस): 25-30 सीटों के आसपास अन्य दल: सीमित बढ़त इन आंकड़ों से साफ है कि BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर बढ़ रही है। ‘हिमंता फैक्टर’ फिर काम करता दिख रहा मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जलुकबाड़ी सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने इस चुनाव में आक्रामक प्रचार किया था और अब रुझानों में उसका असर दिख रहा है। अहम सीटों का हाल जोरहाट: BJP के हितेंद्र नाथ गोस्वामी आगे, कांग्रेस के Gaurav Gogoi पीछे सिस्सीबर्गांव, तिंगखोंग, गोलाघाट: BJP उम्मीदवार बढ़त में पक्केबेटबारी: कांग्रेस को बढ़त दलगांव: All India United Democratic Front के मजिबुर रहमान आगे बिन्नाकांडी: AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल बढ़त में घंटे-दर-घंटे मजबूत होती बढ़त पहले घंटे में BJP 67 सीटों पर आगे 10 बजे के आसपास बढ़त 80+ सीटों तक पहुंची ताजा रुझानों में BJP 90 से ज्यादा सीटों पर बढ़त के साथ तीन-चौथाई आंकड़े के पार यह ट्रेंड दिखाता है कि जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ रही है, BJP की स्थिति और मजबूत होती जा रही है। कांग्रेस का दावा बरकरार कांग्रेस नेता Pawan Khera ने दावा किया है कि उनकी पार्टी पांचों राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करेगी। हालांकि असम के रुझान फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। जश्न की तैयारी शुरू दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में शुरुआती रुझानों के बीच जश्न की तैयारी शुरू हो गई है। कार्यकर्ताओं के लिए मिठाइयां और खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है, जिससे पार्टी खेमे में उत्साह साफ नजर आ रहा है। सुरक्षा और मतगणना राज्य के 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती जारी है। पहले पोस्टल बैलेट और फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है।
चेन्नई/पुडुचेरी, 4 मई: दक्षिण भारत के सबसे अहम चुनावों में शामिल तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों ने बड़ा सियासी उलटफेर कर दिया है। अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने पहली ही बार में शानदार प्रदर्शन करते हुए रुझानों में बढ़त बना ली है। 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है और अब तक सामने आए रुझानों में मुकाबला त्रिकोणीय होते-होते अब TVK के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। रुझानों में TVK नंबर-1 अब तक करीब 130 सीटों के रुझानों के अनुसार: TVK: 50 सीटों पर बढ़त AIADMK: 47 सीटों पर आगे DMK: 23 सीटों पर बढ़त इन आंकड़ों ने यह संकेत दे दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शुरुआत में AIADMK, फिर बदली तस्वीर मतगणना के शुरुआती घंटों में तस्वीर कुछ अलग थी। पहले 10 सीटों के रुझानों में AIADMK आगे दिखी 40 सीटों के रुझानों में TVK ने तेजी से बढ़त बनानी शुरू की 60 सीटों तक आते-आते AIADMK (23) और TVK (20) के बीच कांटे की टक्कर 100+ सीटों के रुझानों के बाद TVK ने बढ़त लेकर बाकी दलों को पीछे छोड़ दिया इससे साफ है कि जैसे-जैसे EVM के वोट खुल रहे हैं, रुझान TVK के पक्ष में मजबूत होते जा रहे हैं। विजय फैक्टर बना गेम चेंजर Vijay की लोकप्रियता इस चुनाव में सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है। पहली बार चुनाव मैदान में उतरी उनकी पार्टी को शहरी और युवा मतदाताओं का खासा समर्थन मिलता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK ने पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई है, जिससे DMK और AIADMK दोनों को नुकसान हुआ है। DMK का दावा, लेकिन रुझान अलग DMK के नेताओं ने पहले ही पूर्ण बहुमत का दावा किया था और 130-140 सीटें जीतने की बात कही थी, लेकिन शुरुआती रुझान उनके दावे के उलट नजर आ रहे हैं। फिलहाल पार्टी तीसरे नंबर पर चल रही है, जो उसके लिए चिंता का विषय हो सकता है। पुडुचेरी में NDA की बढ़त बरकरार पुडुचेरी की 30 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 16 है। यहां शुरुआती रुझानों में NDA गठबंधन बढ़त बनाए हुए है: All India N.R. Congress (AINRC): 2 सीटों पर आगे कांग्रेस: 1 सीट पर बढ़त यहां पहले से NDA की सरकार है और शुरुआती संकेत उसी की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं। मतदान और मतगणना की स्थिति तमिलनाडु में 23 अप्रैल को 85.10% मतदान दर्ज कुल 4.87 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही पुडुचेरी में 89.87% मतदान हुआ तमिलनाडु के 62 और पुडुचेरी के 6 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती जारी मतगणना तीन-स्तरीय सुरक्षा के बीच हो रही है और पहले पोस्टल बैलेट, फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है। क्या बदल जाएगी तमिलनाडु की राजनीति? तमिलनाडु की राजनीति दशकों से DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस बार Tamilaga Vettri Kazhagam की एंट्री ने पूरा समीकरण बदल दिया है। अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है, जहां एक नई पार्टी पहली बार में ही सत्ता के करीब पहुंच जाए।
तिरुवनंतपुरम, 4 मई: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह शुरू होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी है। शुरुआती रुझानों में United Democratic Front (UDF) बढ़त बनाता नजर आ रहा है, जिससे Indian National Congress (कांग्रेस) खेमे में उत्साह है। रुझानों में UDF को बढ़त अब तक सामने आए शुरुआती रुझानों के अनुसार: UDF 60 से अधिक सीटों पर आगे Left Democratic Front (LDF) 50 से ज्यादा सीटों पर बढ़त ये आंकड़े फिलहाल डाक मतपत्रों की गिनती पर आधारित हैं, जो कुल वोटों का लगभग 1.36% है। शशि थरूर का बयान कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने कहा कि मतगणना के शुरुआती डेढ़ घंटे में ही रुझान स्पष्ट रूप से UDF के पक्ष में दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि LDF के कई मजबूत और लोकप्रिय नेता भी पीछे चल रहे हैं, जो राज्य में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। थरूर ने कहा, “केरल की जनता बधाई की हकदार है, क्योंकि उसने बदलाव का मन बना लिया है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम नतीजों से पहले कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा। “सरकार बदलना सबसे जरूरी” Shashi Tharoor ने जोर देते हुए कहा कि सबसे जरूरी है कि राज्य में सरकार बदले और नीतियों में सुधार हो। उन्होंने कहा कि: केरल की आर्थिक स्थिति को सुधारने की जरूरत है निवेश को बढ़ावा देना होगा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे क्या कहते हैं संकेत? शुरुआती रुझानों से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना बन रही है। हालांकि, अंतिम नतीजों के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि आगे की गिनती में तस्वीर बदल भी सकती है।
गुवाहाटी, 4 मई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने बढ़त बना ली है। 126 सीटों पर हुए इस चुनाव के नतीजे आज यह तय करेंगे कि राज्य में सत्ता किसके हाथ में जाएगी। 9:45 बजे तक रुझान ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 58 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं, जिनमें: BJP 36 सीटों पर आगे Indian National Congress (कांग्रेस) 10 सीटों पर बढ़त Bodoland People's Front (BPF) 5 सीटों पर आगे Asom Gana Parishad (AGP) 3 सीटों पर बढ़त Assam Jatiya Parishad (AJP) 3 सीटों पर आगे All India United Democratic Front (AIUDF) 1 सीट पर बढ़त रुझानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि NDA गठबंधन राज्य में मजबूत स्थिति में है। तेजी से बढ़ी BJP की बढ़त मतगणना के शुरुआती घंटों में BJP की बढ़त लगातार बढ़ती गई: 9:15 बजे तक BJP 8 सीटों पर आगे थी 9:30 बजे तक बढ़त 19 सीटों तक पहुंची 9:45 बजे तक BJP 36 सीटों पर आगे हो गई नेताओं के बयान केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने दावा किया है कि NDA गठबंधन लगभग 100 सीटों के आसपास पहुंच सकता है और सरकार बनाएगा। वहीं मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने ‘साइलेंट वोटर’ पर भरोसा जताते हुए परिणाम बदलने की उम्मीद जताई है। मतदान और उम्मीदवार 9 अप्रैल को मतदान हुआ था 85% से अधिक मतदान दर्ज किया गया कुल 2.5 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में इनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल प्रमुख मुद्दे इस बार चुनाव में CAA-NRC, बांग्लादेशी घुसपैठ, बाढ़, रोजगार, विकास और चाय बागान मजदूरों की स्थिति जैसे मुद्दे हावी रहे। सुरक्षा और मतगणना 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच पहले पोस्टल बैलेट और फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है। CAPF और राज्य पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
चेन्नई/पुडुचेरी, 4 मई: तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई। शुरुआती रुझानों में तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां एक तरफ DMK, दूसरी ओर AIADMK और तीसरी ओर अभिनेता Vijay की पार्टी TVK ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। तमिलनाडु में शुरुआती रुझान 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। शुरुआती रुझानों में: AIADMK करीब 20 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है TVK लगभग 18 सीटों पर आगे चल रही है DMK को 9 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है हालांकि शुरुआती चरण में आए अन्य रुझानों में तस्वीर बदलती भी नजर आई, जहां कभी DMK तो कभी AIADMK बढ़त बनाते दिखे। इससे साफ है कि मुकाबला बेहद करीबी है और अंतिम नतीजों तक स्थिति में बड़ा बदलाव संभव है। विजय की पार्टी का प्रभाव पहली बार चुनाव मैदान में उतरी TVK ने शुरुआती रुझानों में ही मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। Vijay की लोकप्रियता का असर वोटिंग पैटर्न में साफ नजर आ रहा है, जिससे पारंपरिक दलों की गणित प्रभावित हो सकती है। पुडुचेरी में NDA को बढ़त 30 सीटों वाले पुडुचेरी विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है। शुरुआती रुझानों में: AINRC को 2 सीटों पर बढ़त कांग्रेस 1 सीट पर आगे NDA गठबंधन कुल मिलाकर बढ़त की स्थिति में यहां पहले से NDA समर्थित सरकार है और रुझान उसी की वापसी के संकेत दे रहे हैं। वोटिंग और मतगणना की अहम जानकारी तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 85.10% वोटिंग दर्ज हुई कुल 4.87 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हुआ और 89.87% मतदान दर्ज किया गया राज्य के 62 काउंटिंग सेंटरों और पुडुचेरी के 6 केंद्रों पर मतगणना जारी है क्या कहते हैं राजनीतिक संकेत? DMK नेताओं का दावा है कि पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएगी, जबकि AIADMK और NDA भी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। TVK की एंट्री ने चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है, जिससे किसी भी दल के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद Raghav Chadha के हालिया बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता Anurag Dhanda ने साफ शब्दों में कहा कि चड्ढा अब Arvind Kejriwal के ‘सिपाही’ नहीं रहे हैं। ‘निडरता हमारी पहचान, डरने वाले नहीं लड़ सकते’ अनुराग ढांडा ने चड्ढा के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि AAP के कार्यकर्ता निडर होकर जनता के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने कहा, “जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?” यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को स्पष्ट तौर पर दर्शाता है। संसद में भूमिका पर उठे सवाल ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में सीमित समय मिलने के बावजूद Raghav Chadha ने गंभीर मुद्दों के बजाय गैर-जरूरी विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के अहम मुद्दों की बजाय ‘छोटे मुद्दों’ पर समय खर्च किया गया। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर चुप्पी का आरोप AAP नेता ने यह भी दावा किया कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस मुद्दे पर चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता अधिकार से जुड़े मुद्दे पर भी उनकी निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए गए। वॉकआउट के दौरान भी नहीं दिखी एकजुटता ढांडा ने आरोप लगाया कि जब पार्टी ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में मौजूद रहे। इसे उन्होंने पार्टी लाइन से अलग रुख बताया और कहा कि पिछले कुछ समय से चड्ढा का व्यवहार बदलता नजर आ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना AAP के एक अन्य नेता Saurabh Bhardwaj ने भी चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि वे संसद में ‘सॉफ्ट पीआर’ कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चड्ढा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि AAP के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, जिसका असर पार्टी की रणनीति और छवि दोनों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राज्यसभा से विदाई ले रहे हैं, लेकिन यह विदाई उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। 79 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और मुखर बने रहने वाले दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दिया है कि वे न तो “टायर्ड” हैं और न ही “रिटायर्ड”। मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में रणनीतिकार और अहम सिपहसालार की भूमिका निभाते रहे हैं। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनकी अगली राजनीतिक भूमिका क्या होगी। क्या खत्म होगी सक्रिय राजनीति? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के लिए सक्रिय राजनीति के विकल्प भले सीमित नजर आ रहे हों, लेकिन उनकी उपयोगिता अभी भी खत्म नहीं हुई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह पहले से सक्रिय हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर उनकी भूमिका कम हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें एक रणनीतिक सलाहकार या विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘सनातन’ पर स्पष्ट रुख दिग्विजय सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो ‘हिंदुत्व’ की राजनीति का विरोध करते हुए खुद को सनातन परंपरा का समर्थक बताते हैं। वे कई बार भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को ‘सच्चे हिंदुत्व’ पर खुली बहस की चुनौती दे चुके हैं। उनका मानना है कि ‘सर्वधर्म समभाव’ ही सनातन धर्म की मूल भावना है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा से सियासी संदेश 2017-18 की उनकी प्रसिद्ध नर्मदा परिक्रमा को उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है। करीब 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा ने न केवल उन्हें जनता से जोड़ा, बल्कि 2018 के मध्य प्रदेश चुनावों में कांग्रेस की वापसी का आधार भी बनी। कांग्रेस में अब भी मजबूत पकड़ कांग्रेस के भीतर दिग्विजय सिंह को आज भी एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि वे साधु-संतों और धार्मिक वर्गों से संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं-जो कांग्रेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में उनका नाम सामने आना भी उनकी प्रासंगिकता को दर्शाता है, हालांकि अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी मिली। आगे क्या? राज्यसभा से विदाई के बावजूद दिग्विजय सिंह की सक्रियता कम होने के संकेत नहीं हैं। उनके अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और वैचारिक स्पष्टता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में कांग्रेस की रणनीति और वैचारिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो अहम बिल लाए जा सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। क्या होगा बड़ा बदलाव? सरकार महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्तों में बदलाव करना चाहती है। अभी यह कानून नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना है सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने पर विचार कर रही है इससे प्रक्रिया तेज होगी और 2029 से पहले आरक्षण लागू किया जा सकेगा दो बिल लाने की तैयारी सरकार इस सत्र में दो अलग-अलग बिल ला सकती है: नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन परिसीमन कानून में बदलाव इन बिलों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, इसलिए सरकार विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने में लगी है। राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर कई दलों के नेताओं के साथ बैठक की है, जिनमें- वाईएसआर कांग्रेस, सपा, एनसीपी (एसपी), आरजेडी, AIMIM, बीजेडी और शिवसेना (UBT) शामिल हैं। हालांकि, कांग्रेस के साथ अभी चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं। आरक्षण का फॉर्मूला क्या होगा? कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित SC/ST वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा OBC महिलाओं के लिए अलग प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है इसी मॉडल को राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है। 2023 में पास हुआ था कानून, लेकिन लागू नहीं हुआ महिला आरक्षण बिल 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” नाम दिया गया। लोकसभा में लगभग सर्वसम्मति से पास राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है फिर भी, यह अभी लागू नहीं हुआ है क्योंकि इसकी प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ी है। इतिहास: कब शुरू हुई महिला आरक्षण की मांग 1931: पहली बार महिला आरक्षण पर चर्चा 1974: स्थानीय निकायों में आरक्षण की सिफारिश 1993: पंचायत और नगर निकायों में 33% आरक्षण लागू कई राज्यों में अब 50% तक आरक्षण लागू
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आज विराम लगने जा रहा है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आज 20 मार्च 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। नवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में गुरमीत सिंह नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे। राजभवन में सुबह 10 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में पांच नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। पांच सीटें थीं खाली, आज भरेंगी उत्तराखंड कैबिनेट में कुल 12 पद होते हैं, जिनमें से फिलहाल केवल 7 मंत्री ही कार्यरत हैं। यानी पांच पद लंबे समय से खाली चल रहे थे। इन रिक्तियों की वजहों में 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास का निधन 2025 में विवाद के बाद प्रेम चंद्र अग्रवाल का इस्तीफा जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन कारणों से मंत्रिमंडल अधूरा था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। ये हो सकते हैं नए मंत्री सूत्रों के मुताबिक, जिन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें शामिल हैं: मदन कौशिक प्रदीप बत्रा भरत चौधरी राम सिंह खेड़ा खजान दास हालांकि, आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही होगी। चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश विशेषज्ञ मानते हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल विस्तार बेहद अहम है। इससे क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन को भी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पिछले दो वर्षों में कई बार कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं हुईं, लेकिन हर बार यह टलता रहा। ऐसे में आज का दिन राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नाशिक: कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi को सावरकर मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। नाशिक की अदालत ने इस मामले की पूरी कार्यवाही आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी है, जिसके बाद अब इस केस में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी के बयान को लेकर दर्ज किया गया था, जो उन्होंने अपनी Bharat Jodo Yatra के दौरान दिया था। अदालत के इस फैसले के साथ ही यह मामला पूरी तरह खत्म हो गया है। क्या था मामला नवंबर 2022 में राहुल गांधी महाराष्ट्र के वाशिम और अकोला जिलों में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहुंचे थे। 17 नवंबर 2022 को अकोला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी Vinayak Damodar Savarkar से जुड़े कुछ दस्तावेज दिखाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी के इसी बयान को आधार बनाकर नाशिक के सामाजिक कार्यकर्ता Devendra Bhutada ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचा और इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं। राहुल गांधी ने क्या कहा था कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखे गए एक पत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि उन्होंने डर के कारण अंग्रेजों से माफी मांगी थी और बाद में पेंशन भी ली थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। अदालत ने किया अंतिम निपटारा राहुल गांधी के वकीलों के अनुसार, नाशिक के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले का अंतिम निपटारा करते हुए पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी है। इससे पहले जुलाई 2025 में अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में जमानत दी थी, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद यह केस पूरी तरह बंद हो गया है। कांग्रेस ने बताया बड़ी राहत नाशिक कोर्ट के इस फैसले के बाद Rahul Gandhi एक बड़े कानूनी विवाद से मुक्त हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने इसे बड़ी राहत बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले से मामले पर अब पूरी तरह विराम लग गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।