Bada Mangal के अवसर पर आज 12 मई को भक्त पूरे श्रद्धा भाव से Hanuman की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवारों को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है और हिंदू धर्म में इनका विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवारों में हनुमान जी की पूजा करने से मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। भक्त इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। दूसरे बड़े मंगल का शुभ मुहूर्त आज दूसरे बड़े मंगल पर पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:08 बजे से 4:50 बजे तक विशेष पूजा मुहूर्त: सुबह 9:07 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक शाम पूजा मुहूर्त: शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक मान्यता है कि इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजा Hanuman की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और फूल, अक्षत, सिंदूर तथा नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके साथ तुलसी दल और पान का बीड़ा भी चढ़ाया जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाकर Hanuman Chalisa का पाठ करें और हनुमान मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व Bada Mangal को Hanuman की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। इस दिन कई भक्त मंदिरों में जाकर चोला चढ़ाते हैं, लाल ध्वजा अर्पित करते हैं और प्रसाद वितरण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से बजरंगबली भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
19 अप्रैल को बन रहा खास संयोग, ग्रहों की अनुकूल स्थिति से मिलेगा हर कार्य में लाभ Akshaya Tritiya का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को ‘स्वयंसिद्ध’ या ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी ऐसा शुभ समय जिसमें किसी भी कार्य के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती। मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल अक्षय यानी कभी खत्म न होने वाला होता है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। क्या है ‘अबूझ मुहूर्त’ का मतलब? ‘अबूझ मुहूर्त’ का अर्थ है ऐसा समय जिसे दोबारा सोचने या किसी ज्योतिषी से पूछने की आवश्यकता न हो। अक्षय तृतीया पर पूरे दिन ग्रहों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने जैसे सभी मांगलिक कार्य बिना किसी हिचक के किए जा सकते हैं। ग्रहों की स्थिति क्यों मानी जाती है खास? ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च और शक्तिशाली अवस्था में होते हैं। सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक होता है जब ये दोनों ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति के निर्णय और प्रयास सकारात्मक परिणाम देते हैं। यही कारण है कि इस दिन ग्रह दोष भी प्रभावहीन माने जाते हैं। पौराणिक मान्यता भी बनाती है इसे विशेष धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। यह तथ्य इस तिथि की पवित्रता और शक्ति को दर्शाता है। इस दिन ब्रह्मांड से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है, जो हर कार्य को सफल बनाने में सहायक माना जाता है। किन कार्यों के लिए सबसे शुभ है यह दिन? अक्षय तृतीया को जीवन के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है: विवाह और सगाई गृह प्रवेश नया व्यवसाय या निवेश मुंडन और अन्य धार्मिक संस्कार सोना-चांदी या संपत्ति की खरीद सफलता के लिए अपनाएं ये सरल उपाय सुबह की शुरुआत: स्नान कर अपने इष्ट देव का ध्यान करें और नए कार्य का संकल्प लें शुभ खरीदारी: सोना या चांदी खरीदना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, जल या वस्त्र दान करें सौम्य व्यवहार: वाणी और आचरण में मधुरता रखें ईमानदारी से प्रयास: इस दिन शुरू किया गया काम लंबे समय तक फल देता है आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों लाभ अक्षय तृतीया सिर्फ भौतिक सफलता ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन का भी प्रतीक है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि सही समय पर सही निर्णय और सच्चे मन से किया गया कार्य जीवन में स्थायी सफलता दिला सकता है।
हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे सप्त चिरंजीवियों में शामिल हैं, यानी आज भी जीवित माने जाते हैं। कब है परशुराम जयंती 2026? साल 2026 में परशुराम जयंती 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन अक्षय तृतीया का पावन पर्व भी पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। तिथि और समय तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल (शाम का श्रेष्ठ समय): 06:49 PM से 08:12 PM मध्याह्न काल: पूरे दिन अक्षय तृतीया के कारण दान-पुण्य के लिए शुभ मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। परशुराम जयंती का महत्व यह दिन शक्ति, साहस और धर्म के पालन का प्रतीक है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर: जीवन में सुख-समृद्धि आती है साहस और आत्मबल बढ़ता है पापों का नाश होता है दीर्घायु और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है अक्षय तृतीया के साथ होने के कारण इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है। कैसे करें पूजा? सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें घर या मंदिर में भगवान परशुराम और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें पीले पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित करें शाम को घी का दीपक जलाकर मंत्र या चालीसा का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें
हिंदू धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत श्रद्धा के साथ रखा जाता है। यह दिन भगवान श्री कृष्ण की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। कब है वैशाख मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026? हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि: आरंभ: 9 अप्रैल 2026, रात 9:19 बजे समापन: 10 अप्रैल 2026, सुबह 11:15 बजे निशिता काल (मध्यरात्रि पूजा) को ध्यान में रखते हुए यह व्रत 9 अप्रैल 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। क्या है शुभ मुहूर्त? पूजा और व्रत के लिए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:26 बजे तक अमृत काल: सुबह 6:07 बजे से 7:54 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:53 बजे तक इन मुहूर्तों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। व्रत और पूजा का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार: भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है जीवन में मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है पूजन के दौरान क्या करें? इस दिन भक्त: श्रीकृष्ण का अभिषेक करें माखन-मिश्री का भोग लगाएं “ॐ कृष्णाय नमः” और “हरे कृष्ण महामंत्र” का जाप करें आरती “आरती कुंजबिहारी की” का पाठ करें
हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हनुमान जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त साल 2026 में हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि आरंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे उदया तिथि के अनुसार पर्व: 2 अप्रैल 2026 शुभ मुहूर्त: 2 अप्रैल को सूर्योदय से लेकर सुबह 07:41 बजे तक पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा सामग्री हनुमान जी की कृपा पाने के लिए पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व है: लाल कपड़ा और चौकी चमेली का तेल, सिंदूर, जनेऊ लाल फूल, चंदन, अक्षत बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना, केला घी का दीपक, धूप, कपूर, गंगाजल तुलसी दल (भोग में अनिवार्य) पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ या लाल वस्त्र पहनें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराकर चमेली तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर फूल, फल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं, साथ में तुलसी दल जरूर रखें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती कर सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें। प्रमुख मंत्र ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय रामदूताय स्वाहा ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय रामदूताय स्वाहा इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। क्या है मान्यता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और भक्ति भाव से पूजा कर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हिंदू धर्म में Akshaya Tritiya का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। इस पावन दिन पर विशेष रूप से Vishnu और Lakshmi की पूजा की जाती है। साथ ही सोना खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे घर में सुख-समृद्धि और धन वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। अक्षय तृतीया 2026 कब है साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन को सनातन परंपरा में अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बिना विशेष मुहूर्त देखे भी की जा सकती है। पूजा का शुभ मुहूर्त अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ समय: 19 अप्रैल 2026 सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि होती है। सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त पहला शुभ समय: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे तक दूसरा शुभ समय: 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे से 07:27 बजे तक चौघड़िया के अनुसार सोना खरीदने का शुभ समय सुबह: 10:49 बजे से 12:20 बजे तक दोपहर: 01:58 बजे से 03:35 बजे तक शाम: 06:49 बजे से 10:57 बजे तक उषाकाल (20 अप्रैल): 04:28 बजे से 05:51 बजे तक अक्षय तृतीया पर धन वृद्धि के उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। घर में दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन किए गए शुभ कार्यों का फल जीवन भर बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
Chaitra Navratri हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। नवरात्र के करीब आते ही भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि महाअष्टमी और राम नवमी किस दिन पड़ेंगी। कब है महाअष्टमी 2026? इस साल महाअष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां के आठवें स्वरूप Mahagauri को समर्पित होता है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सुबह कन्याओं को भोजन कराने और उनका आशीर्वाद लेने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कब है राम नवमी 2026? राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन Rama के जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं और नवरात्र व्रत का पारण करते हैं। अष्टमी-नवमी पर क्या करें अष्टमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें, क्योंकि उन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है। अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ के बीच के संधि काल में दीपक जलाकर मां Chamunda का ध्यान करना शुभ माना जाता है। नवमी के दिन घर में छोटा हवन करना शुभ माना जाता है, इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इन बातों का रखें ध्यान अष्टमी और नवमी के दिन घर में झगड़ा या किसी का अपमान करने से बचें। इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा से दूर रहें और सात्विक भोजन करें। राम नवमी की पूजा में तुलसी चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नवरात्र के दौरान मां दुर्गा को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। इन दिनों ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।