हेल्थ टिप्स

Person taking a short walk after a meal to help manage blood sugar and improve digestion.
हाई ब्लड शुगर से हैं परेशान? खाना खाने के बाद सिर्फ 10 मिनट टहलने से मिल सकता है बड़ा फायदा, डॉक्टर ने बताया कैसे

आजकल बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं में से एक है खाना खाने के बाद हल्की सैर करना। कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आशीष मेहरोत्रा के अनुसार, भोजन के बाद 10 से 20 मिनट तक टहलना ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। खाना खाने के बाद शरीर में क्या होता है? भोजन करने के बाद शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है, जो खून में पहुंचता है। यदि भोजन में कार्बोहाइड्रेट या मीठी चीजें अधिक हों तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और वे ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करने लगती हैं। इससे खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर कम होने लगती है और ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। खाना खाने के बाद टहलने के फायदे 1. ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को रोकता है भोजन के बाद होने वाले शुगर स्पाइक को कम करने में मदद मिलती है, जो डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। 2. इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार नियमित वॉक करने से शरीर इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देता है, जिससे ग्लूकोज आसानी से कोशिकाओं तक पहुंच पाता है। 3. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत खाने के बाद टहलने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है और पेट फूलना, भारीपन तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। 4. वजन नियंत्रित रखने में मददगार हल्की शारीरिक गतिविधि कैलोरी बर्न करने में मदद करती है, जिससे मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। 5. हार्ट और मेटाबॉलिज्म को फायदा ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आदतें खाना खाने के बाद 10-20 मिनट तक टहलें। ज्यादा मीठा और ओवरईटिंग से बचें। भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। प्रोटीन, हेल्दी फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला संतुलित आहार लें। नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें। यदि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के बाद की छोटी-सी सैर लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर पाचन और अच्छी नींद जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पहुंचा सकती है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Fresh watermelon slices highlighting heart health benefits and hydration properties in summer diet
दिल को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है तरबूज, नई रिसर्च में सामने आए कई बड़े फायदे

गर्मियों का पसंदीदा फल सिर्फ स्वाद ही नहीं, दिल की सेहत भी सुधार सकता है गर्मियों में तरबूज खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। पानी से भरपूर और मीठा स्वाद वाला यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। अब हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि तरबूज का नियमित सेवन हृदय रोगों के खतरे को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में मौजूद कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ रक्तचाप और रक्त संचार को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। दिल की सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है तरबूज? हालिया अध्ययनों के अनुसार तरबूज में एल-सिट्रुलीन (L-Citrulline) नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। यह तत्व शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे रक्त वाहिकाएं बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं और रक्त प्रवाह सुचारु बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल-सिट्रुलीन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों की कठोरता कम करने में भी मददगार हो सकता है। यही कारण है कि तरबूज को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल माना जा रहा है। पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से तरबूज का सेवन करते हैं, उनके शरीर में कई आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर पाई जाती है। इनमें शामिल हैं: फाइबर पोटैशियम मैग्नीशियम विटामिन C विटामिन A लाइकोपीन कैरोटेनॉयड्स ये सभी पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरीर को रखता है हाइड्रेटेड तरबूज का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है। पर्याप्त हाइड्रेशन हृदय, किडनी और पाचन तंत्र के बेहतर कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। तरबूज खाने के अन्य फायदे विशेषज्ञों के अनुसार तरबूज का सेवन कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी दे सकता है: रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने में सहायक मांसपेशियों के दर्द में राहत पाचन तंत्र को बेहतर बनाना त्वचा की सेहत सुधारना सूजन कम करने में मदद 100 ग्राम तरबूज में क्या-क्या होता है? 100 ग्राम ताजे तरबूज में लगभग: कैलोरी: 30 पानी: 91.4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 7.55 ग्राम प्रोटीन: 0.61 ग्राम फाइबर: 0.4 ग्राम शुगर: 6.2 ग्राम फैट: 0.2 ग्राम डाइट में ऐसे करें शामिल अगर आप तरबूज के फायदे बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे सिर्फ फल के रूप में खाने के अलावा कई अन्य तरीकों से भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं: फ्रूट स्मूदी में मिलाकर फेटा चीज और पुदीने के साथ सलाद में ग्रीक योगर्ट के साथ फ्रूट स्क्यूअर्स बनाकर तरबूज पॉप्सिकल तैयार करके ठंडा गजपाचो सूप बनाकर संतुलित आहार भी है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज दिल की सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन केवल एक फल खाने से हृदय रोगों का खतरा पूरी तरह कम नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Woman craving chocolate during periods due to hormonal changes and nutritional needs
पीरियड्स में चॉकलेट की क्रेविंग क्यों होती है? जानिए शरीर क्या संकेत देता है

पीरियड्स के दौरान या उससे पहले अचानक चॉकलेट, चिप्स, नमकीन स्नैक्स या मीठी चीजें खाने की इच्छा होना महिलाओं में बेहद सामान्य बात है। अक्सर इसे सिर्फ मूड स्विंग या भावनात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे शरीर की वास्तविक पोषण संबंधी जरूरतें और हार्मोनल परिवर्तन भी जिम्मेदार होते हैं। रेनबो हॉस्पिटल के रोजवॉक की सीनियर कंसल्टेंट-OBGY और इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. वैशाली शर्मा के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान होने वाली फूड क्रेविंग्स शरीर का एक प्राकृतिक संकेत हैं। ये हार्मोन, ब्रेन केमिस्ट्री, पोषण की जरूरतों और भावनात्मक बदलावों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम होती हैं। पीरियड्स के दौरान क्यों बढ़ती है क्रेविंग? मासिक धर्म चक्र के ल्यूटियल फेज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में तेजी से बदलाव आता है। इसका असर मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन नामक केमिकल पर पड़ता है, जो मूड और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करता है। जब सेरोटोनिन का स्तर कम होता है, तब शरीर शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग करता है। यही कारण है कि इस दौरान मीठा, चॉकलेट और कंफर्ट फूड्स खाने की इच्छा बढ़ जाती है। चॉकलेट की क्रेविंग का क्या मतलब है? चॉकलेट, विशेष रूप से डार्क चॉकलेट, मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत होती है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने, मूड को संतुलित रखने और थकान कम करने में मदद करता है। पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं में मैग्नीशियम का स्तर कम हो सकता है, जिससे चॉकलेट खाने की इच्छा बढ़ती है। इसके अलावा चॉकलेट खाने से डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे "फील-गुड" हार्मोन रिलीज होते हैं, जो तनाव, चिड़चिड़ापन और थकान को कम करने में मदद करते हैं। नमकीन चीजें खाने की इच्छा क्यों होती है? कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान चिप्स, अचार, फ्राइज या अन्य नमकीन स्नैक्स खाने का मन करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में फ्लूइड बैलेंस और इलेक्ट्रोलाइट्स के बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि अत्यधिक नमक का सेवन ब्लोटिंग और वॉटर रिटेंशन को बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रोसेस्ड स्नैक्स की बजाय रोस्टेड नट्स, बीज और घर के बने हेल्दी स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। मीठा और कार्बोहाइड्रेट की क्रेविंग क्यों होती है? पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को केक, पेस्ट्री, ब्रेड, पास्ता या अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने का मन करता है। ये खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाकर अस्थायी रूप से ऊर्जा और बेहतर मूड का एहसास कराते हैं। लेकिन यह असर ज्यादा देर तक नहीं रहता और बाद में थकान व चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसलिए ओट्स, साबुत अनाज, फल और शकरकंद जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट बेहतर विकल्प माने जाते हैं। रेड मीट या आयरन युक्त भोजन की इच्छा क्यों होती है? जिन महिलाओं को ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनमें आयरन की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग कर सकता है। पालक, दालें, फलियां, खजूर, चुकंदर और लीन मीट जैसे खाद्य पदार्थ आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। इमोशनल ईटिंग और वास्तविक जरूरत में फर्क समझना जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि हर क्रेविंग सिर्फ पोषण की कमी का संकेत नहीं होती। तनाव, चिंता, मूड स्विंग और भावनात्मक बदलाव भी खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। अपनी पसंदीदा चीजें सीमित मात्रा में खाना गलत नहीं है, लेकिन अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। क्रेविंग कम करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें। नियमित व्यायाम करें। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें। भोजन छोड़ने की आदत से बचें। अधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन कम करें। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभार होने वाली क्रेविंग सामान्य है। लेकिन यदि अत्यधिक खाने की इच्छा, गंभीर मूड स्विंग, अत्यधिक थकान, चक्कर या भारी ब्लीडिंग जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Healthy early dinner setup with vegetables and balanced meal supporting better metabolic and circadian health
बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए रात का खाना कब खाना चाहिए? विशेषज्ञ ने बताया सही समय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर देर रात खाना खाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर का समय हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, नींद और लंबी उम्र पर बड़ा असर डाल सकता है। हाल ही में longevity और regenerative medicine विशेषज्ञ Dr Saranya Wyles ने बताया कि शाम को जल्दी खाना खाना शरीर की प्राकृतिक circadian rhythm के साथ बेहतर तालमेल बनाता है और इससे overall health को फायदा मिल सकता है। शाम 6 बजे से पहले डिनर को माना बेहतर Mayo Clinic में cellular ageing और regenerative medicine विशेषज्ञ डॉ. सारन्या वायल्स का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ नियमित समय पर डिनर करने को प्राथमिकता देती हैं। उनके अनुसार, आदर्श रूप से शाम का खाना 6 बजे से पहले खा लेना चाहिए। वहीं रविवार को उनके घर में डिनर का समय और जल्दी, यानी करीब 4:30 बजे रखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी खाना खाने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी यानी circadian rhythm सही तरीके से काम करती है, जिससे digestion और metabolic health बेहतर बनी रहती है। क्या है Circadian Rhythm? Circadian rhythm शरीर की 24 घंटे चलने वाली जैविक प्रक्रिया है, जो सूरज की रोशनी और दिन-रात के चक्र से प्रभावित होती है। यही प्रक्रिया तय करती है कि शरीर में कौन-से हार्मोन कब रिलीज होंगे, नींद कैसी होगी और ऊर्जा का स्तर कैसा रहेगा। Nutritionist और hormone विशेषज्ञ Hannah Alderson के अनुसार cortisol hormone, जिसे stress hormone भी कहा जाता है, सुबह सबसे अधिक सक्रिय होता है और दिनभर धीरे-धीरे कम होता जाता है। ऐसे में देर रात भारी भोजन करना शरीर को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि उस समय शरीर आराम की तैयारी कर रहा होता है, न कि digestion की। देर रात खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक? विशेषज्ञों के मुताबिक: देर रात भारी भोजन करने से digestion प्रभावित हो सकता है नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है इंसुलिन sensitivity कम हो सकती है शरीर का metabolic balance बिगड़ सकता है हालांकि बहुत ज्यादा भूखे पेट सोना भी नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है। हेल्दी डिनर के लिए अपनाती हैं ‘Modular Dinner’ तरीका डॉ. सारन्या वायल्स ने अपने व्यस्त शेड्यूल में healthy eating बनाए रखने के लिए “Modular Dinner” strategy अपनाई हुई है। इसका मतलब है कि सप्ताहांत में खाने की बेसिक तैयारी कर ली जाए और फिर सप्ताह के दिनों में कुछ ही मिनटों में भोजन तैयार किया जा सके। इसके तहत वह पहले से तैयार रखती हैं: कटे हुए गाजर, खीरा, टमाटर और सेलरी स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत क्विनोआ जैसे whole grains उनका कहना है कि slow cooker का इस्तेमाल समय बचाने में काफी मदद करता है। रंग-बिरंगे भोजन को देती हैं प्राथमिकता एक dermatologist और longevity expert होने के नाते डॉ. वायल्स खाने में रंगों की विविधता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार अलग-अलग रंगों वाली सब्जियां और फल शरीर को phytonutrients प्रदान करते हैं, जो कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद करते हैं। वह खास तौर पर इन खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देती हैं: बैंगनी शकरकंद ब्रोकली कद्दू हरी पत्तेदार सब्जियां Gut Health पर भी ध्यान जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी metabolic health के लिए gut health भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए डॉ. वायल्स प्रोबायोटिक और fermented foods को डाइट में शामिल करती हैं, जैसे: दही Kimchi Sauerkraut इसके अलावा Omega-3 से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे: Salmon Sardines Avocado और olive oil, turmeric, salt और pepper जैसे मसालों और healthy dressings को भी वह जरूरी मानती हैं। क्या कहती है यह रिसर्च? विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सख्त नियमों से ज्यादा जरूरी है consistency यानी नियमितता। समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार जीवनशैली अपनाना metabolic health को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Dark chocolate pieces kept beside a bedside lamp symbolizing better sleep and stress relief at night
रात में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद? बेहतर नींद और तनाव कम करने में मिल सकती है मदद

सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu with yellow flowers and lamps on Apara Ekadashi 2026
अपरा एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा अपार पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और जरूरी नियम

आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Healthy morning habits like hydration, exercise and planning help reduce stress and boost daily energy
सुबह की ये 5 आदतें बदल सकती हैं आपका दिन, कम होगा स्ट्रेस और बढ़ेगी एनर्जी

भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई चाहता है कि उसका दिन आसान, संतुलित और तनाव मुक्त बीते। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दिन की शुरुआत जिस तरह होती है, वही पूरे दिन के मूड और प्रोडक्टिविटी को तय करती है। अगर सुबह सही आदतों के साथ शुरू हो, तो न सिर्फ काम आसान हो जाते हैं, बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बनी रहती है। यहां जानिए ऐसी 5 आसान सुबह की आदतें, जो आपकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल सकती हैं। 1. दिन की शुरुआत पॉजिटिव सोच से करें सुबह उठते ही कुछ पल शांति से बिताएं और सकारात्मक विचारों के साथ दिन की शुरुआत करें। भगवान का स्मरण या कृतज्ञता व्यक्त करना मन को स्थिर करता है इससे दिनभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है 2. खाली पेट एक गिलास पानी जरूर पिएं रातभर सोने के बाद शरीर को हाइड्रेशन की जरूरत होती है। सुबह गुनगुना या सामान्य पानी पीना शरीर को डिटॉक्स करता है पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है शरीर में ताजगी लाता है 3. ताजी हवा और हल्की धूप लें सुबह उठकर कुछ समय खुले वातावरण में बिताना बेहद फायदेमंद होता है। खिड़की खोलकर या बाहर जाकर फ्रेश एयर लें हल्की धूप शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देती है दिमाग फ्रेश रहता है और आलस दूर होता है 4. हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें सुबह शरीर को एक्टिव करना जरूरी है। लाइट स्ट्रेचिंग या 10–15 मिनट की वॉक करें इससे शरीर की जकड़न दूर होती है पूरे दिन के लिए एनर्जी मिलती है 5. दिन की प्लानिंग करें सुबह का समय दिमाग के लिए सबसे शांत और साफ होता है। दिनभर के कामों की प्राथमिकता तय करें जरूरी मीटिंग्स और टास्क पहले प्लान करें इससे भागदौड़ कम होती है और स्ट्रेस घटता है

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Person doing yoga and pilates alongside gym workout for balanced fitness routine
सिर्फ वेट ट्रेनिंग नहीं, योग और पिलाटेस भी उतने ही जरूरी–लॉन्ग लाइफ और फिटनेस के लिए संतुलित रूटीन का मंत्र

  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में फिट रहने के लिए लोग जिम और वेट ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ भारी वजन उठाना ही पर्याप्त नहीं है। Yoga और Pilates जैसे लो-इम्पैक्ट वर्कआउट्स भी उतने ही अहम हैं, खासकर अगर आप लंबी और स्वस्थ जिंदगी चाहते हैं। फिटनेस का सही फॉर्मूला: बैलेंस जरूरी लॉन्गेविटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक संतुलित फिटनेस रूटीन में तीन प्रमुख हिस्से होने चाहिए: कार्डियो (जैसे दौड़ना, तैराकी) स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट्स, बॉडीवेट एक्सरसाइज) स्ट्रेचिंग और माइंडफुलनेस (योग और पिलाटेस) विशेषज्ञ Vicente Mera का मानना है कि शरीर को पूरी तरह फिट रखने के लिए इन तीनों का संयोजन जरूरी है। 2:2:1 रूटीन: हफ्ते का स्मार्ट प्लान स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट David de la Fuente Franco एक आसान फॉर्मूला सुझाते हैं: 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग 2 दिन कार्डियो 1 दिन योग या स्ट्रेचिंग यह संतुलन शरीर को ओवरलोड किए बिना बेहतर रिजल्ट देता है। योग और पिलाटेस क्यों हैं जरूरी फिटनेस ट्रेनर Cristina Merino के अनुसार, योग और पिलाटेस: बैलेंस और स्टेबिलिटी सुधारते हैं बॉडी अवेयरनेस बढ़ाते हैं सही तकनीक और फॉर्म बनाए रखने में मदद करते हैं इससे वेट ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और परफॉर्मेंस बेहतर होती है। लॉन्गेविटी के लिए योग का योगदान विशेषज्ञ Nigma Talib बताती हैं कि हफ्ते में दो बार 90 मिनट का योग: शरीर में सूजन (inflammation) को 20% तक कम कर सकता है ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है मानसिक स्वास्थ्य और सेल्फ-अवेयरनेस को मजबूत बनाता है स्ट्रेचिंग: बेहतर वर्कआउट का आधार ओस्टियोपैथ Francisco Moreno के अनुसार, नियमित स्ट्रेचिंग: मसल्स को लचीला और मजबूत बनाती है चोट का जोखिम कम करती है ब्लड सर्कुलेशन और रिकवरी बेहतर करती है रोजमर्रा के दर्द और जकड़न को कम करती है

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Healthy shiny hair with natural foods rich in vitamins like nuts, fruits and vegetables for hair growth
बालों को घना और हेल्दी बनाने के लिए जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स

अगर आपके बाल पतले हो रहे हैं, झड़ रहे हैं या बेजान दिखते हैं, तो सिर्फ शैंपू बदलने से काम नहीं चलेगा। असली खेल न्यूट्रिशन (पोषण) का है-जो बालों की जड़ों (follicles) को मजबूत बनाता है। आइए जानते हैं वो जरूरी पोषक तत्व जो बालों को नेचुरली घना और मजबूत बनाते हैं  1. बायोटिन (Vitamin B7) बालों की ग्रोथ का सुपरस्टार केराटिन (hair protein) बनाने में मदद बालों को टूटने से बचाता है कहां से लें? अंडा, बादाम, अखरोट, सैल्मन, शकरकंद टिप: ज्यादातर लोगों को सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती 2. विटामिन D बालों की जड़ों को एक्टिव करता है कमी होने पर बालों की ग्रोथ धीमी हेयर लॉस से जुड़ा हुआ कहां से लें? धूप, फोर्टिफाइड दूध, फैटी फिश 3. आयरन (Iron) बालों की “पावर सप्लाई” ऑक्सीजन को जड़ों तक पहुंचाता है कमी से बाल पतले और झड़ने लगते हैं कहां से लें? मीट, पालक, दाल, कद्दू के बीज टिप: आयरन + विटामिन C साथ लेने से ज्यादा फायदा 4. जिंक (Zinc) हेयर रिपेयर एक्सपर्ट बालों को रिपेयर करता है डैंड्रफ और हेयर फॉल रोकने में मदद कहां से लें? ऑयस्टर, बीफ, चना, काजू 5. विटामिन E बालों की शाइन और मजबूती स्कैल्प को डैमेज से बचाता है बालों को स्मूद और चमकदार बनाता है कहां से लें? बादाम, सूरजमुखी के बीज, एवोकाडो 6. ओमेगा-3 फैटी एसिड ड्राई और बेजान बालों के लिए जरूरी स्कैल्प को हाइड्रेट करता है इंफ्लेमेशन कम करता है कहां से लें? सैल्मन, चिया सीड्स, फ्लैक्ससीड, अखरोट 7. विटामिन A स्कैल्प का नैचुरल कंडीशनर सेबम (oil) बनाता है स्कैल्प को ड्राई होने से बचाता है कहां से लें? गाजर, शकरकंद, पालक ध्यान रखें: ज्यादा मात्रा में नुकसान भी कर सकता है 8. विटामिन C सपोर्टिंग हीरो आयरन को absorb करने में मदद कोलेजन बनाकर बाल मजबूत करता है कहां से लें? संतरा, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च याद रखने वाली बात कोई एक विटामिन जादू नहीं करेगा Balanced diet ही असली solution है सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
ABC juice glass and ABC achar jar made with apple beetroot carrot displayed side by side
ABC Juice vs ABC Achar: क्या है ज्यादा हेल्दी?

Apple, Beetroot और Carrot का कॉम्बिनेशन यानी ABC आजकल हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल वही है - जूस बेहतर या अचार? आइए आसान भाषा में समझते हैं  1. ABC Juice क्या है? ABC Juice ताजे सेब, चुकंदर और गाजर को ब्लेंड करके बनाया जाता है। फायदे: विटामिन A, B, C से भरपूर बॉडी को हाइड्रेट करता है स्किन ग्लो बढ़ाता है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद सुबह खाली पेट पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है ध्यान दें: इसमें नैचुरल शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज वालों को सीमित मात्रा में लेना चाहिए 2. ABC Achar क्या है? ABC Achar वही तीन चीजों से बनता है, लेकिन इसमें नमक, तेल, मसाले और सिरका मिलाकर तैयार किया जाता है। फायदे: प्रोबायोटिक्स (अच्छे बैक्टीरिया) मिलते हैं डाइजेशन बेहतर करता है खाने का स्वाद बढ़ाता है नुकसान: ज्यादा नमक और तेल → BP और पानी रुकने की समस्या ज्यादा खाने से हेल्थ पर असर 3. मुख्य अंतर पहलू ABC Juice ABC Achar पोषण विटामिन और मिनरल्स ज्यादा प्रोबायोटिक्स ज्यादा असर डिटॉक्स और एनर्जी डाइजेशन सुधार सेवन समय सुबह खाली पेट खाने के साथ रिस्क शुगर कंट्रोल जरूरी नमक-तेल कंट्रोल जरूरी 4. कैसे और कब लें? ABC Juice: सुबह खाली पेट (1 ग्लास) ABC Achar: लंच/डिनर के साथ (1 छोटा चम्मच) दोनों का ओवरयूज नुकसानदायक हो सकता है 5. कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आपका लक्ष्य है: डिटॉक्स, ग्लोइंग स्किन, ब्लड हेल्थ तो ABC Juice बेहतर अगर आप चाहते हैं: अच्छा डाइजेशन और गट हेल्थ तो ABC Achar बेहतर  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0