दमिश्क, एजेंसियां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ऐतिहासिक सीरिया दौरे के दौरान राजधानी दमिश्क में हुए दो बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धमाके उस समय हुए जब मैक्रों सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ राष्ट्रपति भवन में अहम बैठक कर रहे थे। सीरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, विस्फोटों में कम से कम चार लोग घायल हुए हैं, जबकि किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मैक्रों पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। होटल के पास हुए धमाके, जांच जारी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों दमिश्क के फोर सीजन्स होटल में ठहरे हुए हैं। दोनों धमाके होटल के नजदीक हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि एक विस्फोटक कूड़ेदान में और दूसरा सड़क किनारे खड़ी कार में लगाया गया था। धमाकों के बाद घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता देखा गया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक वाहन आग की लपटों में घिरा नजर आया। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। मैक्रों का दौरा क्यों है अहम? यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के सत्ता संभालने के बाद किसी बड़े यूरोपीय देश के प्रमुख की यह पहली सीरिया यात्रा है। मैक्रों ने सीरिया पर लगे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत दिलाने की पहल में भी अहम भूमिका निभाई है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग और विदेशी निवेश से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि धमाकों की घटना नई सीरियाई सरकार के लिए बड़ा सुरक्षा झटका है। वर्षों के गृहयुद्ध से तबाह सीरिया अभी भी अलग-अलग उग्रवादी गुटों की हिंसा से जूझ रहा है। सरकार देश में स्थिरता बहाल करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय विश्वास हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ताजा धमाकों ने सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
1497 – 170 सदस्यीय दल के साथ समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने के लिए वास्को डी गामा यूरोप से रवाना हुए थे। 1693 – न्यूयॉर्क पुलिस की वर्दी को मंजूरी दी गई। 1716 - ग्रेट नॉर्दर्न वॉर: डायनेक्लिन का युद्ध पीटर टेर्डेंकॉल्ड के नीचे एक डेनिश-नॉर्वेजियाई बल फंस गया और इस तरह से उसने स्वीडिश बल को हराया। 1758 - फ्रांसीसी सेनाओं पर फोर्ट टीकेंडरोगा, न्यूयॉर्क में ब्रिटिश और औपनिवेशिक हमले किये गये। 1777 - वर्मोंट ने नए संविधान का परिचय दिया, जिससे वह गुलामी को खत्म करने वाला पहला अमेरिकी राज्य बना। 1791 - संगीतकार जोसेफ हेडन को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में संगीत की मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया। 1792 - फ्रांस ने प्रशिया पर युद्ध की घोषणा की। 1809 - फिनिश युद्ध में स्वीडिश द्वीपसमूह फ्लीट ने रूसियों को पोर्कला के नौसैनिक युद्ध में पराजित किया। 1833 – रूस और तुर्की ने सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किये। 1858 - ग्वालियर के क़िले के पतन के बाद लॉर्ड केनिंग ने सांति की घोषणा की थी। 1889 – अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल का प्रकाशन शुरू हुआ। 1914 - पश्चिम बंगाल में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री और वामपंथी राजनीति के आधार रहे ज्योति बसु का जन्म हुआ। 1918 - भारतीय संविधान में सुधार के लिए मांटेग्यु चेम्सफोर्ड रपट प्रकाशित की गई। 1930 - किंग जॉर्ज वी ने लंदन में इंडिया हाउस की स्थापना की। 1932 – अमेरिकी शेयर सूचकांक डाऊ जोंस ग्रेट डिप्रेशन के निचले स्तर 41 अंक पर पहुंच गया था। 1948 – अमेरिकी वायुसेना में महिलाओं की भर्ती शुरू हुई। 1954 - सतलुज नदी पर निर्मित भाखड़ा नांगल पनबिजली परियोजना पर बनी सबसे बड़ी नहर का प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उद्घाटन किया था। 1955 - बुरखा विश्वविद्यालय थाईलैंड के चोनबरी प्रांत में स्थापित किया गया। 1975 - में म्यांमार के बगाँ में आए भूकंप में हज़ारों मंदिर ध्वस्त हो गए तथा भारी जानमाल की छति हुई। 1992 – थॉमस क्लेस्टिल आस्ट्रिया के राष्ट्रपति बने। 1994 - शिमाकी मुकाई जापान की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री बनी। 1997 – उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य को संगठन में शामिल होने का आमंत्रण दिया। 1999 - पापुआ न्यु गिनी (प्रशान्त महासागरीय देश) प्रधानमंत्री बिल स्कोट का इस्तीफ़ा। 2001 – बांग्लादेश के बल्लेबाज मोहम्मद अशरफुल ने 17 साल की उम्र में श्रीलंका के खिलाफ शतक जड़ा। वह बांग्लादेश के सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। 2002 - दक्षिण अफ़्रीका में अश्वेत क्रिकेटरों के लिए कोटा प्रणाली समाप्त। 2003 - सूडान में हुए विमान हादसे में 115 ( या 116 )लोग मारे गये। 2003 – ईरान में सिर से जुड़ी दो बहनें लालेह और लादन बिजानी को अलग करने के लिए किया गया ऑपरेशन असफल हो जाने की वजह से मौत हुई। 2005 - जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर समूह-8 के देशों में सहमति बनी। 2008 - पेरिस की सरकार ने बांग्लादेश की विवादाग्रस्त लेखिका तस्लीमा नसरीन को मानद नागरिकता देने का प्रस्ताव किया। 2012- असम में भयावह बाढ़ ने विश्व प्रसिद्ध काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के 13 गैंडों समेत 500 से अधिक वन्य प्राणियों को लील लिया। 2012 – अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में कार बम धमाके से 14 नागरिकों की मौत हुई। 2013 – मिस्त्र की राजधानी काहिरा में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों पर सेना की गोलीबारी में 42 लोगों मरे। 2014 – जर्मनी फुटबाल टीम के मिरोस्लाव क्लोस ने विश्वकप में सर्वाधिक 16 गोलों का विश्व रिकार्ड बनाया। 2019 - डीआरडीओ की ओर से विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड की तरफ से निर्मित नाग मिसाइल का परीक्षण सेना के अधिकारियों ने राजस्थान के पोखरण में किया । 2019 - किरियाकोस मित्सोताकिस ग्रीस के नए प्रधान मंत्री बने । 2019 - भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजमार्ग परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एनआईआईएफ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 2019 - राहुल द्रविड़ को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। 2020 - कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय नागरिकों को विदेश से वापस लाने के प्रयासों के तहत 5 मई, 2020 को शुरू किया गया ऑपरेशन समुद्र सेतु का समापन हुआ। 2021 - भारत और गाम्बिया ने कार्मिक प्रशासन और शासन सुधार में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 2021 - हैती के राष्ट्रपति की हत्या में शामिल संदिग्ध हमलावर सुरक्षाबलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए। 2021 - ढाका के नजदीक जूस फैक्टरी में आग लगने से 52 की मौत हुई। 2022 - उत्तराखंड के रामनगर में पंजाब के पर्यटकों की कार नदी के तेज बहाव में बहने से कार में सवार दस लोगों में नौ की मौत हुई एक घायल। 2022 - पवित्र अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई बाढ़ की चपेट में आने से 15 श्रद्धालुओं की मौत हुई , 40 से अधिक लापता और 48 लोग घायल हुए। 2022 - सऊदी अरब ने भारत से 79 हजार से अधिक व्यक्तियों को हज करने की अनुमति दी। 2022 - तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में हुई सड़क दुर्घटना में 6 लोगों की मौत हुई। 2023 - भारतीय कृषि के समग्र विकास के लिए दो दिवसीय चिंतन शिविर का सार्थक आयोजन हुआ। 2023 - DPIIT ने “एक्सप्लोरिंग द इंडिया टॉय स्टोरी” पर गोलमेज संवाद का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 2023 - सूडानी सेना द्वारा सूडान के ओमदुरमान जिले पर हवाई हमले में कम से कम 22 की मौत हुई। 2023 - प्रधानमंत्री मार्क रूटे के नेतृत्व वाली डच सरकार गिरी। 2023 - हरियाणा के जींद में रोडवेज बस और क्रूजर की टक्कर से 8 लोगों की मौत ल 9 घायल हुए। 2024 - प्रधानमंत्री मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने मास्को पहुंचे। 2024 - वैज्ञानिकों ने खगोलीय पिंडों से खगोल भौतिकी जेट की गतिशीलता पर प्लाज्मा संरचना के प्रभाव का पता लगाया। 2025 - बिहार में सरकारी नौकरी में डोमिसाइल पॉलिसी लागू हुई , सिर्फ राज्य की महिलाओं को 35% आरक्षण मिलेगा। 8 जुलाई को जन्मे व्यक्ति 1898 - पी०एस० कुमारस्वामी राजा - तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री। 1912 - बाबू बनारसी दास - भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 1914 – पश्चिम बंगाल में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री और वामपंथी राजनीति के आधार रहे ज्योति बसु का जन्म हुआ। 1932 - गुलाम हसन सोफी कश्मीर, भारत के पारंपरिक संगीत के गायक और हारमोनियम वादक थे। 1937 - गिरिराज किशोर - हिन्दी के प्रसिद्ध उपन्यासकार, सशक्त कथाकार, नाटककार और आलोचक। 1939 - गंगा प्रसाद - सिक्किम के राज्यपाल व पहले मेघालय के राज्यपाल रह चुके। 1946 - बिपलब चटर्जी बंगाली एवं हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता। 1949 - गेगांग अपांग - लगभग 22 वर्षों तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे । 1949 - डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी वाईएसआर नाम से लोकप्रिय, वर्ष 2004 से 2009 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। 1958 - नीतु सिंह, हिन्दी चलचित्र अभिनेत्री, (काला पत्थर) (दीवार)। 1972 - सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान। 1980 - चेतन आनंद - भारत के प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाडी। 1991 - अनीता कुंडू - भारत की प्रसिद्ध पर्वतारोही। 8 जुलाई को हुए निधन 1880 – फ़्रांसीसी दार्शनिक व फ़्रिनॉलजी अर्थात खोपड़ी के ज्ञान की आधार रखने वाले वैज्ञानिक पियर पॉल ब्रोका का निधन हुआ। वे वर्ष 1824 में फ़्रांस में जन्मे थे। 1994 – उत्तरी कोरिया के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और कम्युनिष्ट पार्टी के महासचिव किम ईल सुंग का निधन हुआ। 2007 - चन्द्रशेखर सिंह - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री। 2018 - मुंडक्कल मैथ्यू जेकब - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। 2019 - भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व गोलकीपर ए यू सेलेस्टिन का लंबी बीमारी के बाद निधन। 2020 - शोले में सूरमा भोपाली का किरदार निभाने वाले कॉमेडियन जगदीप का मुंबई में निधन। 2021 - वीरभद्र सिंह - हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। 2022 - जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (67) का चुनावी कार्यक्रम के दौरान गोली मारे जाने के बाद निधन हुआ। 2022 - अंगोला के पूर्व राष्ट्रपति जोस एडुआर्डो डॉस सैंटोस (79) का निधन हुआ। 2022 - अमेरिकी अभिनेता टोनी सिरिको (79) का निधन हुआ। 2025 - केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता, दाऊलाल वैष्णव (81) का निधन हुआ। 8 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री विमलनाथ जी मोक्ष कल्याक (जैन , आषाढ़ कृष्ण अष्टमी)। बाबू श्री बनारसी दास जयन्ती। श्री पी०एस० कुमारस्वामी राजा जयन्ती। श्री सौरव चंडीदास गांगुली (क्रिकेटर) जन्म दिवस। श्री गेगांग अपांग जन्म दिवस। श्री ज्योतिंद्र नाथ बसु जयन्ती। श्री चन्द्रशेखर सिंह स्मृति दिवस। डॉक्टर श्री येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी जयन्ती / रयुतु दिनोत्सवम (आंध्र प्रदेश में किसान दिवस)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।