Nothing के स्मार्टफोन और ऑडियो प्रोडक्ट्स खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान कंपनी अपने स्मार्टफोन्स, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच, हेडफोन और चार्जर्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है। यह सेल 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस के साथ कई प्रोडक्ट्स कम कीमत पर उपलब्ध हैं।
सेल के दौरान Nothing Phone (4a) की शुरुआती कीमत 32,999 रुपये रखी गई है। पात्र बैंक कार्ड से EMI ट्रांजैक्शन करने पर ग्राहकों को 4,000 रुपये का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन के एक्सचेंज पर 3,000 रुपये तक का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है।
फोन में Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर, 50MP OIS प्राइमरी कैमरा, 50MP पेरिस्कोप कैमरा, 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Nothing OS 4.1 और AI आधारित फीचर्स दिए गए हैं।
Nothing Phone (4a) Pro की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये है। इस मॉडल पर पात्र बैंक कार्ड से EMI खरीदने पर 5,000 रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा, जबकि एक्सचेंज करने पर 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा।
फोन में Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Glyph Matrix डिजाइन, 140x तक जूम सपोर्ट वाला कैमरा सिस्टम और मेटल यूनिबॉडी डिजाइन जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं।
स्मार्टफोन के अलावा Nothing के ऑडियो प्रोडक्ट्स पर भी आकर्षक कीमतें मिल रही हैं।
वहीं Nothing Headphone (1) की कीमत 3 से 5 जुलाई तक ₹16,999 रहेगी। इसके बाद 6 से 9 जुलाई के बीच इसकी कीमत बढ़कर ₹17,999 हो जाएगी।
Nothing के सब-ब्रांड CMF के कई प्रोडक्ट्स भी सेल में डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं।
सेल के दौरान चार्जर्स पर भी विशेष ऑफर दिए जा रहे हैं।
अगर आप Nothing या CMF के किसी नए डिवाइस की खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस का लाभ उठाकर अच्छी बचत कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Nothing के स्मार्टफोन और ऑडियो प्रोडक्ट्स खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान कंपनी अपने स्मार्टफोन्स, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच, हेडफोन और चार्जर्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है। यह सेल 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक चलेगी, जिसमें बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस के साथ कई प्रोडक्ट्स कम कीमत पर उपलब्ध हैं। Nothing Phone (4a) पर मिल रहा शानदार ऑफर सेल के दौरान Nothing Phone (4a) की शुरुआती कीमत 32,999 रुपये रखी गई है। पात्र बैंक कार्ड से EMI ट्रांजैक्शन करने पर ग्राहकों को 4,000 रुपये का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन के एक्सचेंज पर 3,000 रुपये तक का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है। फोन में Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर, 50MP OIS प्राइमरी कैमरा, 50MP पेरिस्कोप कैमरा, 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Nothing OS 4.1 और AI आधारित फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Phone (4a) Pro पर भी बड़ा डिस्काउंट Nothing Phone (4a) Pro की शुरुआती कीमत 41,999 रुपये है। इस मॉडल पर पात्र बैंक कार्ड से EMI खरीदने पर 5,000 रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलेगा, जबकि एक्सचेंज करने पर 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। फोन में Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला 1.5K AMOLED डिस्प्ले, Glyph Matrix डिजाइन, 140x तक जूम सपोर्ट वाला कैमरा सिस्टम और मेटल यूनिबॉडी डिजाइन जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए गए हैं। Nothing Earbuds और Headphone पर भी ऑफर्स स्मार्टफोन के अलावा Nothing के ऑडियो प्रोडक्ट्स पर भी आकर्षक कीमतें मिल रही हैं। Nothing Ear (a) – ₹4,999 Nothing Ear – ₹7,999 Nothing Ear (Open) – ₹9,999 वहीं Nothing Headphone (1) की कीमत 3 से 5 जुलाई तक ₹16,999 रहेगी। इसके बाद 6 से 9 जुलाई के बीच इसकी कीमत बढ़कर ₹17,999 हो जाएगी। CMF के प्रोडक्ट्स भी हुए सस्ते Nothing के सब-ब्रांड CMF के कई प्रोडक्ट्स भी सेल में डिस्काउंट पर उपलब्ध हैं। CMF Buds 2A – ₹1,699 CMF Buds 2+ – शुरुआती दिनों में ₹2,399, बाद में ₹2,499 CMF Buds Pro 2 – ₹3,399 CMF Headphone Pro – ₹5,999 CMF Watch Pro 2 – शुरुआती तीन दिनों तक ₹3,999, बाद में ₹4,199 CMF Watch 3 Pro – ₹5,999 चार्जर्स पर भी मिल रही है बचत सेल के दौरान चार्जर्स पर भी विशेष ऑफर दिए जा रहे हैं। CMF 33W Charger – ₹899 CMF 65W Charger – ₹2,499 Nothing 45W Charger – ₹2,299 अगर आप Nothing या CMF के किसी नए डिवाइस की खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो Flipkart GOAT Sale 2026 के दौरान बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज बोनस का लाभ उठाकर अच्छी बचत कर सकते हैं।
नई दिल्ली: ज्यादातर स्मार्टफोन यूजर्स वॉल्यूम बटन का इस्तेमाल केवल आवाज कम या ज्यादा करने के लिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एंड्रॉयड स्मार्टफोन के ये छोटे-से बटन कई ऐसे काम भी कर सकते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बना देते हैं। फोटो क्लिक करने से लेकर कैमरा जूम कंट्रोल करने, कॉल को साइलेंट करने, अलार्म स्नूज करने और फोन को फोर्स रीस्टार्ट करने तक, वॉल्यूम बटन कई ऐसे उपयोगी फीचर्स देते हैं जिनका फायदा अधिकांश यूजर्स नहीं उठा पाते। हालांकि इनमें से कुछ फीचर फोन के ब्रांड और एंड्रॉयड वर्जन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। 1. फोटो और वीडियो आसानी से करें शूट कैमरा ऐप खुला होने पर वॉल्यूम बटन शटर बटन की तरह काम करता है। इससे फोटो क्लिक करना आसान हो जाता है, खासकर सेल्फी लेते समय। कई स्मार्टफोन्स, जैसे Samsung Galaxy, में वॉल्यूम बटन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू की जा सकती है। 2. कैमरा जूम करें कंट्रोल Google Pixel, Samsung Galaxy और कुछ अन्य एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन से कैमरा जूम इन और जूम आउट किया जा सकता है। वहीं Open Camera जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए ऑटोफोकस और एक्सपोज़र भी कंट्रोल किए जा सकते हैं। 3. लॉक स्क्रीन से तुरंत कैमरा खोलें कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में डबल प्रेस वॉल्यूम बटन फीचर मिलता है। इसे ऑन करने के बाद लॉक स्क्रीन से ही कैमरा तुरंत खोला जा सकता है। Redmi जैसे कई ब्रांड यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं। 4. इनकमिंग कॉल को तुरंत साइलेंट करें अगर किसी मीटिंग या जरूरी काम के दौरान फोन बजने लगे तो कॉल रिजेक्ट किए बिना सिर्फ वॉल्यूम बटन दबाकर उसकी रिंगटोन को साइलेंट किया जा सकता है। 5. अलार्म को स्नूज करें सुबह अलार्म बजने पर स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकांश एंड्रॉयड फोनों में वॉल्यूम बटन दबाते ही अलार्म स्नूज हो जाता है। 6. पसंदीदा ऐप तुरंत खोलें Accessibility Shortcut की मदद से दोनों वॉल्यूम बटन एक साथ दबाकर अपनी पसंदीदा ऐप, जैसे WhatsApp, UPI ऐप या अन्य जरूरी एप्लिकेशन तुरंत खोली जा सकती है। 7. एक्सेसिबिलिटी फीचर्स तुरंत ऑन करें वॉल्यूम बटन होल्ड करके TalkBack, Magnification और अन्य एक्सेसिबिलिटी फीचर्स बिना सेटिंग्स में जाए सक्रिय किए जा सकते हैं। यह फीचर विशेष रूप से जरूरतमंद यूजर्स के लिए काफी उपयोगी है। 8. फोन हैंग हो जाए तो करें फोर्स रीस्टार्ट यदि फोन पूरी तरह फ्रीज हो जाए, तो कई एंड्रॉयड डिवाइसों में पावर बटन और वॉल्यूम डाउन बटन को लगभग 7 सेकंड तक एक साथ दबाकर फोन को फोर्स रीस्टार्ट किया जा सकता है। 9. Button Mapper ऐप से बटन को बनाएं स्मार्ट अगर आपके फोन में ये सभी फीचर्स मौजूद नहीं हैं, तो Button Mapper जैसे ऐप की मदद से वॉल्यूम बटन को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है। इससे स्क्रीनशॉट लेना, टॉर्च ऑन करना, कैमरा खोलना या दूसरी ऐप लॉन्च करना जैसे कई काम एक बटन से किए जा सकते हैं। 10. जेब से फोन निकाले बिना बदलें गाने कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन की मदद से म्यूजिक ट्रैक बदले जा सकते हैं। जिन फोनों में यह सुविधा नहीं है, वहां Skip Track जैसे फीचर्स या ऐप्स के जरिए वॉल्यूम बटन को म्यूजिक कंट्रोल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें इनमें से सभी फीचर्स हर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। कई सुविधाएं फोन के ब्रांड, मॉडल, एंड्रॉयड वर्जन और सॉफ्टवेयर इंटरफेस पर निर्भर करती हैं। इसलिए अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर उपलब्ध विकल्पों को जरूर जांचें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर फिलहाल इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस फीचर से साइबर धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के खतरे को कैसे रोका जाएगा। सरकार को किस बात की चिंता? सरकार का मानना है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर की जगह केवल Username के जरिए संपर्क कर सकेंगे, तो जालसाज सरकारी संस्थानों, कंपनियों या प्रसिद्ध लोगों जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग सकते हैं। इसी कारण सरकार ने फीचर की सुरक्षा और गोपनीयता व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा शुरू की है। WhatsApp ने दी सफाई WhatsApp ने कहा है कि Username फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) होगा। यूजरनेम सार्वजनिक रूप से सर्च नहीं किए जा सकेंगे और मशहूर हस्तियों, सरकारी संस्थानों व बड़े ब्रांड्स के नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि उनकी नकल न हो सके। कंपनी ने यह भी कहा कि संदिग्ध गतिविधियों और बार-बार फर्जी यूजरनेम बनाने की कोशिशों को ब्लॉक किया जाएगा।