टेक न्यूज़

OnePlus 15T smartphone design leak showing dual camera module and compact flagship design
लॉन्च से पहले सामने आया OnePlus 15T का डिजाइन, दमदार बैटरी और नए कैमरा फीचर्स की पुष्टि

  आधिकारिक तस्वीरों में दिखा नया लुक स्मार्टफोन निर्माता OnePlus ने अपने आने वाले फ्लैगशिप स्मार्टफोन OnePlus 15T की पहली आधिकारिक झलक जारी कर दी है। यह फोन कंपनी के पिछले मॉडल OnePlus 13T का उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जिसे अप्रैल 2025 में लॉन्च किया गया था। लॉन्च से पहले जारी की गई तस्वीरों में फोन का डिजाइन, कैमरा लेआउट और कलर ऑप्शन साफ दिखाई दे रहे हैं। कंपनी इसे कॉम्पैक्ट साइज वाले फ्लैगशिप स्मार्टफोन के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है।   नया कैमरा डिजाइन और दो कलर ऑप्शन जारी तस्वीरों के मुताबिक OnePlus 15T के पीछे स्क्विरकल (स्क्वायर और सर्कल का मिश्रण) शेप वाला कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। इस कैमरा आइलैंड में ड्यूल रियर कैमरा सेटअप मौजूद है, जबकि एलईडी फ्लैश सेंसर के ऊपर लगाया गया है। यह डिजाइन हाल ही में आए OnePlus 13s, OnePlus 15 और OnePlus 15R के कैमरा लेआउट से मिलता-जुलता दिखाई देता है। कंपनी ने फोन को फिलहाल दो रंगों - ब्राउन और ग्रीन - में दिखाया है। ग्रीन वेरिएंट में मैट फिनिश और मैचिंग कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जबकि ब्राउन मॉडल का लुक थोड़ा गहरा और प्रीमियम दिखाई देता है।   कॉम्पैक्ट डिजाइन और फ्लैट फ्रेम डिजाइन की बात करें तो फोन में फ्लैट बैक पैनल, गोल कोने और फ्लैट फ्रेम दिया गया है, जिससे इसे पकड़ना आसान होगा। फोन का कैमरा बंप भी ज्यादा बड़ा नहीं है और हल्का सा उभरा हुआ दिखाई देता है। कंपनी के अनुसार यह फोन कॉम्पैक्ट साइज के बावजूद प्रीमियम फ्लैगशिप अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है।   6.32-इंच डिस्प्ले और बेहद पतले बेज़ल OnePlus पहले ही पुष्टि कर चुका है कि OnePlus 15T में 6.32-इंच का फ्लैट डिस्प्ले मिलेगा। इसे “स्मॉल-स्क्रीन फ्लैगशिप” के रूप में पेश किया जा रहा है। फोन में चारों तरफ बेहद पतले बेज़ल दिए गए हैं, जिससे स्क्रीन-टू-बॉडी रेशियो बेहतर होगा और फ्रंट डिजाइन ज्यादा आकर्षक दिखाई देगा।   पेरिस्कोप कैमरा और दमदार सुरक्षा फोटोग्राफी के लिए फोन में अपग्रेडेड LUMO पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलने की पुष्टि की गई है। इसके अलावा फोन की बिल्ड क्वालिटी भी काफी मजबूत बताई जा रही है। डिवाइस को IP66, IP68, IP69 और IP69K रेटिंग मिली है, जो इसे धूल और पानी से बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है।   7500mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग OnePlus 15T की सबसे बड़ी खासियत इसकी बैटरी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार फोन में 7,500mAh की “ग्लेशियर बैटरी” दी जाएगी। Li Jie के अनुसार यह बैटरी कई बड़े फ्लैगशिप स्मार्टफोनों से भी ज्यादा क्षमता वाली हो सकती है। फोन में 100W सुपर फ्लैश चार्जिंग और बायपास चार्जिंग सपोर्ट भी मिलेगा, जिससे तेज चार्जिंग और बेहतर बैटरी मैनेजमेंट संभव होगा।   जल्द हो सकता है चीन में लॉन्च फिलहाल कंपनी ने इसकी आधिकारिक लॉन्च तारीख का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि OnePlus 15T को जल्द ही चीन में पेश किया जा सकता है। लॉन्च के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि यह कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप स्मार्टफोन बाजार में कितना प्रभाव छोड़ पाता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Apple MacBook Neo 2 concept laptop with A19 Pro chip and touchscreen display upgrade
Apple ला सकता है MacBook Neo 2: A19 Pro चिप और टचस्क्रीन डिस्प्ले मिलने की संभावना

  नए MacBook Neo के अपग्रेडेड वर्जन की चर्चा टेक दिग्गज Apple जल्द ही अपने एंट्री-लेवल लैपटॉप का नया वर्जन MacBook Neo 2 लॉन्च कर सकता है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार इस लैपटॉप में कई महत्वपूर्ण हार्डवेयर अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह डिवाइस बेहतर परफॉर्मेंस और नई सुविधाओं के साथ पेश किया जा सकता है, हालांकि इसके लॉन्च में अभी समय लग सकता है।   A19 Pro चिप से मिल सकती है ज्यादा ताकत रिपोर्ट में विश्लेषक Ming-Chi Kuo के हवाले से कहा गया है कि MacBook Neo 2 में Apple A19 Pro चिप दी जा सकती है। यह वही प्रोसेसर है जिसे कंपनी ने अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max में पेश किया था। नया मॉडल मौजूदा MacBook Neo में इस्तेमाल हो रही Apple A18 Pro चिप को रिप्लेस कर सकता है, जिससे लैपटॉप की परफॉर्मेंस और बेहतर होने की उम्मीद है।   RAM भी बढ़कर 12GB हो सकती है रिपोर्ट के मुताबिक Apple इस नए मॉडल में मेमोरी को भी अपग्रेड कर सकता है। जहां मौजूदा MacBook Neo में 8GB RAM दी गई है, वहीं MacBook Neo 2 में इसे बढ़ाकर 12GB किया जा सकता है। इससे मल्टीटास्किंग और भारी कामों के दौरान लैपटॉप की स्पीड और क्षमता में सुधार देखने को मिल सकता है।   पहली बार मिल सकता है टचस्क्रीन डिस्प्ले MacBook Neo 2 में टचस्क्रीन डिस्प्ले मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि टच लेयर को IPS पैनल के अंदर ही इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे लैपटॉप की मोटाई में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही उम्मीद है कि macOS में भी टचस्क्रीन के लिए बेहतर ऑप्टिमाइजेशन किया जा सकता है।   लॉन्च में अभी लग सकता है समय विश्लेषकों के अनुसार MacBook Neo 2 के लॉन्च में अभी कम से कम एक साल का समय लग सकता है। इसलिए फिलहाल इन जानकारियों को शुरुआती अनुमान माना जा रहा है और कंपनी की योजनाओं में आगे बदलाव भी संभव है।   Apple अन्य डिवाइस में भी ला सकता है “Neo” ब्रांड एक अन्य रिपोर्ट में Mark Gurman ने संकेत दिया है कि Apple भविष्य में अपने कुछ किफायती डिवाइसों में “Neo” ब्रांडिंग का इस्तेमाल कर सकता है। संभावना है कि कंपनी Apple Watch SE सीरीज़ का नाम बदलकर “Apple Watch Neo” भी कर सकती है।   मौजूदा MacBook Neo की कीमत और फीचर्स हाल ही में लॉन्च हुए MacBook Neo में 13-इंच का Liquid Retina डिस्प्ले, A18 Pro चिप, Magic Keyboard, मल्टी-टच ट्रैकपैड और Touch ID जैसे फीचर्स दिए गए हैं। भारत में इसकी कीमत 8GB + 256GB वेरिएंट के लिए लगभग ₹69,900 और 8GB + 512GB वेरिएंट के लिए ₹79,900 रखी गई है। यह लैपटॉप Blush, Citrus, Indigo और Silver रंगों में उपलब्ध है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Realme C83 5G smartphone showing large display and massive 7000mAh battery launch in India.
Realme C83 5G भारत में लॉन्च: 7,000mAh की बड़ी बैटरी, 144Hz डिस्प्ले और Dimensity 6300 प्रोसेसर

किफायती कीमत में नया 5G स्मार्टफोन चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Realme ने भारत में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन Realme C83 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे अपनी लोकप्रिय C-सीरीज के तहत पेश किया है। यह फोन जल्द ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और कंपनी के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। फोन को दो रंग विकल्पों और तीन अलग-अलग स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7,000mAh की बड़ी बैटरी, 144Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले और MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर है। Realme C83 5G की कीमत भारत में Realme C83 5G की शुरुआती कीमत 13,499 रुपये रखी गई है। फोन तीन वेरिएंट में उपलब्ध होगा: 4GB RAM + 64GB स्टोरेज: ₹13,499 4GB RAM + 128GB स्टोरेज: ₹14,499 6GB RAM + 128GB स्टोरेज: ₹17,499 कंपनी ग्राहकों को इस स्मार्टफोन पर 6 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी दे रही है। डिस्प्ले और डिजाइन नए Realme C83 5G में 6.8 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 720×1570 पिक्सल है। डिस्प्ले में कई खास फीचर्स दिए गए हैं: 144Hz रिफ्रेश रेट 900 निट्स तक पीक ब्राइटनेस 180Hz टच सैंपलिंग रेट 16.7 मिलियन कलर सपोर्ट यह बड़ा और स्मूथ डिस्प्ले गेमिंग और वीडियो देखने का बेहतर अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। प्रोसेसर और परफॉर्मेंस फोन में ऑक्टा-कोर MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो 6nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसके साथ फोन में: ARM Mali-G57 MC2 GPU 6GB तक LPDDR4x RAM 128GB तक eMMC 5.1 स्टोरेज मिलता है, जिससे रोजमर्रा के काम और मल्टीटास्किंग आसानी से की जा सकती है। कैमरा फीचर्स फोटोग्राफी के लिए फोन में सिंगल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। 13MP रियर कैमरा (f/2.2 अपर्चर, ऑटोफोकस) 5MP फ्रंट कैमरा सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए दोनों कैमरों से 1080p/30fps तक वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है। 7,000mAh की दमदार बैटरी इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7,000mAh Titan बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। फोन में 15W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है। कनेक्टिविटी और अन्य फीचर्स Realme C83 5G में कई जरूरी कनेक्टिविटी और सेंसर भी दिए गए हैं: 5G और 4G LTE सपोर्ट USB Type-C पोर्ट 3.5mm ऑडियो जैक GPS, GLONASS, Galileo, BeiDou और QZSS नेविगेशन प्रॉक्सिमिटी सेंसर, एम्बिएंट लाइट सेंसर, एक्सेलेरोमीटर और ई-कंपास फोन का वजन लगभग 212 ग्राम है और इसका साइज 166.3 × 78.1 × 8.4mm है।

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0