टेक दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ब्राउज़र Google Chrome में यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए दो नए फीचर्स पेश किए हैं। इस अपडेट के साथ अब Chrome यूजर्स को Vertical Tabs और बेहतर Reading Mode का विकल्प मिलेगा, जो खासतौर पर मल्टीटास्किंग और पढ़ने के अनुभव को आसान बनाएगा।
Vertical Tabs से आसान होगी मल्टीटास्किंग
Chrome में अब पारंपरिक ऊपर की बजाय साइड में टैब्स देखने का विकल्प मिलेगा। इस नए Vertical Tabs फीचर को यूजर्स ब्राउज़र विंडो पर राइट-क्लिक करके “Show Tabs Vertically” चुनकर एक्टिवेट कर सकते हैं।
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर्स अब टैब्स के पूरे नाम आसानी से देख पाएंगे, खासकर तब जब कई टैब्स एक साथ खुले हों। इससे टैब मैनेजमेंट आसान होगा और काम की स्पीड भी बढ़ेगी। यह फीचर Microsoft Edge और Mozilla Firefox जैसे ब्राउज़र्स की तरह काम करता है।
Reading Mode हुआ और बेहतर
Chrome के Reading Mode को भी अपग्रेड किया गया है। अब यूजर्स किसी भी वेबपेज को “Open in reading mode” विकल्प से फुल-पेज रीडिंग इंटरफेस में बदल सकते हैं। यह फीचर वेबपेज से सभी डिस्ट्रैक्शन हटाकर केवल टेक्स्ट पर फोकस करता है, जिससे आर्टिकल पढ़ना ज्यादा आसान और आरामदायक हो जाता है।
लगातार अपडेट से Chrome हो रहा स्मार्ट
हाल के महीनों में Google Chrome में कई नए फीचर्स जोड़ रहा है। हाल ही में भारत में Gemini साइड पैनल और Split View जैसे फीचर्स भी पेश किए गए थे। इन अपडेट्स का मकसद यूजर्स को ज्यादा स्मार्ट और प्रोडक्टिव ब्राउज़िंग अनुभव देना है।
कुल मिलाकर, Chrome का यह नया अपडेट खासतौर पर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो एक साथ कई टैब्स के साथ काम करते हैं या लंबे आर्टिकल पढ़ना पसंद करते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube ने यूजर्स के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए दो नए स्मार्ट फीचर्स ‘Auto Speed’ और ‘On-the-Go’ की टेस्टिंग शुरू कर दी है। ये फीचर्स फिलहाल YouTube Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं और Android व iOS प्लेटफॉर्म पर सीमित समय के लिए ट्रायल में दिए गए हैं। Auto Speed: खुद बदलेगी वीडियो की स्पीड ‘Auto Speed’ फीचर उन यूजर्स के लिए खास है जो कम समय में ज्यादा कंटेंट देखना चाहते हैं। इस फीचर की मदद से वीडियो की प्लेबैक स्पीड अपने आप कंटेंट के अनुसार बढ़ या घट जाती है। इससे बार-बार मैन्युअली स्पीड बदलने की जरूरत खत्म हो जाती है और वीडियो समझना भी आसान हो जाता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए: वीडियो के प्लेबैक स्पीड ऑप्शन में जाएं वहां ‘Auto Speed’ विकल्प चुनें हालांकि, यह फीचर सभी वीडियो पर काम नहीं करेगा-जहां सपोर्ट नहीं होगा, वहां यह ऑटोमैटिकली बंद हो जाएगा। On-the-Go: चलते-फिरते बिना डिस्ट्रैक्शन के कंटेंट दूसरा फीचर ‘On-the-Go’ खासतौर पर उन यूजर्स के लिए है जो चलते-फिरते वीडियो या पॉडकास्ट सुनते हैं। यह फीचर स्क्रीन को मिनिमल बना देता है, जिससे कमेंट्स और अन्य विजुअल एलिमेंट्स हट जाते हैं और यूजर केवल कंटेंट पर ध्यान दे पाता है। इसे एक्टिव करने के तरीके: सेटिंग्स में जाकर ‘Premium Controls’ से मैन्युअली ऑन करें या फोन के मूवमेंट डिटेक्ट होने पर (लगभग 60 सेकंड) यह अपने आप एक्टिव हो सकता है कब तक मिलेगा ट्रायल? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों फीचर्स 27 अप्रैल 2026 तक ट्रायल के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद कंपनी तय करेगी कि इन्हें स्थायी रूप से जारी किया जाए या नहीं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए Anthropic ने अपना अब तक का सबसे एडवांस मॉडल Claude Mythos Preview पेश किया है। लेकिन इसकी ताकत ही इसकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है-इसी वजह से कंपनी ने इसे आम यूजर्स के लिए फिलहाल लॉन्च नहीं करने का फैसला लिया है। इतना ताकतवर कि खुद कंपनी भी सतर्क Anthropic के CEO Dario Amodei के मुताबिक, Claude Mythos इतनी क्षमता रखता है कि यह हजारों “zero-day vulnerabilities” यानी ऐसी सुरक्षा खामियां ढूंढ सकता है, जिन्हें अब तक इंसान नहीं पकड़ पाए थे। यह मॉडल वेब ब्राउज़र, ऑपरेटिंग सिस्टम और सर्वर सॉफ्टवेयर में गंभीर कमजोरियां पहचान सकता है, जिससे हैकिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। OpenBSD और Linux में मिली बड़ी खामियां Claude Mythos ने एक 27 साल पुरानी कमजोरी OpenBSD में खोजी, जो अपनी सुरक्षा के लिए जानी जाती है। इसके अलावा Linux kernel में भी कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिनसे किसी सिस्टम पर पूरा नियंत्रण हासिल किया जा सकता था। 40+ कंपनियों के साथ मिलकर होगा इस्तेमाल इस AI को सीधे जनता के लिए जारी करने की बजाय Anthropic ने इसे एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। Project Glasswing के जरिए कंपनी Apple, Google, Microsoft और Amazon Web Services समेत 40 से ज्यादा टेक कंपनियों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करेगी। $100 मिलियन का बड़ा निवेश Anthropic ने इस प्रोजेक्ट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक के मॉडल यूसेज क्रेडिट देने की घोषणा की है, ताकि कंपनियां बड़े स्तर पर सुरक्षा सुधार कर सकें। क्यों नहीं किया जा रहा पब्लिक रिलीज? कंपनी का मानना है कि इतनी शक्तिशाली AI को बिना सुरक्षा उपायों के सार्वजनिक करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर गलत हाथों में पहुंचा, तो यह साइबर हमलों को और खतरनाक बना सकता है। AI का नया दौर, नई चुनौतियां Claude Mythos यह दिखाता है कि AI अब सिर्फ टेक्स्ट या कोड तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, Anthropic का कहना है कि अगर इस तकनीक का सही इस्तेमाल किया गया, तो यह इंटरनेट को पहले से ज्यादा सुरक्षित बना सकता है। Claude Mythos AI के भविष्य की झलक है-जहां तकनीक बेहद शक्तिशाली है, लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि AI दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाएगा या जोखिम बढ़ाएगा।
देश में मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दूरसंचार नियामक Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश देने की तैयारी कर ली है कि वे सिर्फ कॉलिंग और एसएमएस सुविधाओं वाले सस्ते मोबाइल प्लान लॉन्च करें। यह कदम उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आ सकता है, जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत नहीं होती, लेकिन फिर भी उन्हें महंगे डेटा प्लान खरीदने पड़ते हैं। TRAI ने अपने नए मसौदा नियम “टेलीकॉम उपभोक्ता संरक्षण (13वां संशोधन) विनियमन, 2026” में यह प्रस्ताव रखा है कि हर टेलीकॉम कंपनी को कम से कम एक ऐसा प्लान पेश करना अनिवार्य होगा, जिसमें केवल वॉयस कॉल और एसएमएस की सुविधा हो। साथ ही, इसकी कीमत मौजूदा डेटा-युक्त प्लान्स से काफी कम होनी चाहिए। दरअसल, TRAI ने पाया कि पहले भी कंपनियों को ऐसे प्लान लाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अपेक्षा के अनुरूप कीमतें कम नहीं कीं। डेटा सुविधा हटाने के बावजूद प्लान्स की कीमतें लगभग समान रखी गईं, जिससे उपभोक्ताओं को कोई खास फायदा नहीं मिला। इसी वजह से नियामक अब सख्ती के मूड में है और इस बार स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की तैयारी कर रहा है। नए प्रस्ताव के तहत, कंपनियों को हर वैलिडिटी कैटेगरी (जैसे 28 दिन, 56 दिन, 84 दिन आदि) में डेटा वाले प्लान के साथ-साथ केवल कॉल और एसएमएस वाला अलग प्लान देना होगा। इससे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की आजादी मिलेगी और अनावश्यक सेवाओं के लिए भुगतान करने की मजबूरी खत्म होगी। TRAI का मानना है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और टेलीकॉम सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के उन यूजर्स को इससे सीधा फायदा होगा, जो इंटरनेट का सीमित या बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते। इस प्रस्ताव पर TRAI ने सभी संबंधित पक्षों से 28 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा, जिससे देशभर के मोबाइल यूजर्स के लिए सस्ते और जरूरत आधारित प्लान्स का रास्ता साफ हो सकता है।