नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास रहने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में लगने या कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजमार्गयात्रा ऐप में नया स्थानीय टोल पास फीचर शुरू किया है। इसकी मदद से पात्र लोग घर बैठे अपने मोबाइल फोन से ही स्थानीय टोल पास बनवा सकेंगे। इस नई डिजिटल सुविधा में फास्टैग, डिजिलॉकर, वाहन पोर्टल और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से स्वतः सत्यापन किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान, तेज और पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। कौन बनवा सकता है स्थानीय टोल पास? यह सुविधा उन वाहन मालिकों के लिए है, जिनका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में स्थित है। स्थानीय टोल पास बनने के बाद वाहन चालक एक महीने तक उसी टोल प्लाजा से असीमित बार आवागमन कर सकेंगे। फिलहाल इस सुविधा की शुरुआत दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा से की गई है। आने वाले समय में इसे देशभर के अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू किया जाएगा। अब नहीं होगी कागजी कार्रवाई पहले स्थानीय टोल पास बनवाने के लिए लोगों को टोल प्लाजा पर जाकर आवेदन करना पड़ता था और कई दस्तावेज जमा करने होते थे। अब नई व्यवस्था में आपकी अनुमति मिलने के बाद ऐप स्वयं आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करेगा। डिजिलॉकर के माध्यम से पते का सत्यापन होगा। वाहन पोर्टल से वाहन का विवरण प्राप्त किया जाएगा। फास्टैग की वैधता स्वतः जांची जाएगी। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) यह पुष्टि करेगी कि आपका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर की सीमा के भीतर है या नहीं। इससे पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित हो जाएगी। राजमार्गयात्रा ऐप से स्थानीय टोल पास कैसे बनाएं? यदि आप इस सुविधा के पात्र हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। चरण 1 गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से राजमार्गयात्रा ऐप डाउनलोड करें। चरण 2 मोबाइल नंबर और ओटीपी की सहायता से लॉग इन करें। चरण 3 मुख्य पृष्ठ पर स्थानीय पास विकल्प चुनें। चरण 4 अपने वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज करें। चरण 5 ऐप वाहन पोर्टल के माध्यम से आपके वाहन का विवरण और फास्टैग की स्थिति स्वतः सत्यापित करेगा। चरण 6 डिजिलॉकर के माध्यम से अपने पते का स्वतः सत्यापन पूरा करें। चरण 7 भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) यह जांच करेगी कि आपका घर संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में है या नहीं। चरण 8 पात्रता की पुष्टि होने के बाद यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से निर्धारित मासिक शुल्क का भुगतान करें। चरण 9 भुगतान सफल होते ही आपका डिजिटल स्थानीय टोल पास जारी हो जाएगा और वह सीधे आपके फास्टैग से जुड़ जाएगा। राजमार्गयात्रा ऐप में आया 'मार्गमित्र' कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक एनएचएआई ने राजमार्गयात्रा ऐप में 'मार्गमित्र' नाम का नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सहायक भी जोड़ा है। यह सुविधा 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करती है और यात्रियों को कई सेवाओं में तत्काल सहायता प्रदान करती है। मार्गमित्र के माध्यम से आप— फास्टैग रिचार्ज फास्टैग केवाईसी धनवापसी (रिफंड) की स्थिति स्थानीय टोल पास से जुड़ी जानकारी राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े सवालों के जवाब एक ही मंच पर प्राप्त कर सकते हैं। इस नई सुविधा के प्रमुख लाभ टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कागजरहित। डिजिलॉकर, वाहन पोर्टल और फास्टैग के माध्यम से स्वतः सत्यापन। घर बैठे कुछ ही मिनटों में पास जारी। एक महीने तक पात्र टोल प्लाजा पर असीमित आवागमन। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायक से तुरंत सहायता।
Apple ने Siri को पूरी तरह बदला, AI चैटबॉट्स को देगी टक्कर Apple ने iOS 27 के साथ अपनी वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नया रूप दिया है। अब "Siri AI" पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, समझदार और उपयोगी हो गई है। कंपनी का दावा है कि नई Siri न सिर्फ सवालों के जवाब देगी, बल्कि आपकी ईमेल, मैसेज, फोटो, फाइल्स और अन्य ऐप्स की जानकारी समझकर व्यक्तिगत सहायता भी प्रदान करेगी। Apple के अनुसार, Siri AI अब ChatGPT और Claude जैसे लोकप्रिय AI चैटबॉट्स को टक्कर देने में सक्षम होगी। आपकी निजी जानकारी को समझेगी Siri नई Siri की सबसे बड़ी खासियत "पर्सनल कॉन्टेक्स्ट अंडरस्टैंडिंग" है। अब Siri आपकी अनुमति के साथ: ईमेल खोज सकेगी मैसेज पढ़कर जानकारी निकाल सकेगी फोटो और वीडियो ढूंढ सकेगी नोट्स और दस्तावेज़ खोज सकेगी कैलेंडर और रिमाइंडर से जानकारी ले सकेगी उदाहरण के लिए आप पूछ सकते हैं: पिछले सप्ताह भाई ने कौन-सी फिल्म देखने को कहा था? मेरी फ्लाइट का कन्फर्मेशन नंबर क्या है? कल मुझे कौन-कौन से काम करने हैं? पिछले महीने मकान मालिक ने जो लीज भेजी थी, उसे ढूंढो। इंटरनेट से भी देगी जवाब Siri अब केवल फोन के डेटा तक सीमित नहीं रहेगी। यह वेब सर्च करके ताजा जानकारी भी उपलब्ध करा सकेगी। इससे उपयोगकर्ता: यात्रा की योजना बना सकेंगे रेसिपी खोज सकेंगे खेल स्कोर जान सकेंगे होमवर्क और रिसर्च में मदद ले सकेंगे DIY और गार्डनिंग टिप्स प्राप्त कर सकेंगे स्क्रीन पर क्या है, यह भी समझेगी Siri नई "ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस" सुविधा Siri को स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट समझने की क्षमता देती है। अब आप किसी फोटो, चार्ट, डॉक्यूमेंट या वेबसाइट को देखते हुए पूछ सकते हैं: यह फोटो कहां की है? इस दस्तावेज़ का सारांश बताओ। यह ग्राफ क्या दिखा रहा है? इस मेन्यू का अनुवाद करो। Siri स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पढ़कर उसी संदर्भ में जवाब दे सकेगी। ऐप्स में आपके लिए काम भी करेगी नई "App Actions" तकनीक Siri को ऐप्स के भीतर कार्य करने की क्षमता देती है। अब Siri से कहा जा सकता है: इस ईमेल का जवाब लिखो। आज की सभी तस्वीरें किसी दोस्त को भेज दो। मंगलवार शाम 3 बजे की मीटिंग कैलेंडर में जोड़ो। दोपहर 2 बजे की मीटिंग गुरुवार पर शिफ्ट कर दो। यह सुविधा Apple और थर्ड-पार्टी ऐप्स दोनों में काम करेगी। नया इंटरफेस और अलग Siri ऐप iOS 27 में Siri का नया इंटरफेस दिया गया है। Dynamic Island से एक्सेस टाइप और वॉइस दोनों विकल्प फोटो और डॉक्यूमेंट अपलोड करने की सुविधा बातचीत का इतिहास देखने के लिए अलग Siri ऐप पुराने चैट सर्च और पिन करने का विकल्प अब उपयोगकर्ता Siri के साथ लंबी बातचीत भी जारी रख सकेंगे। अब हर जगह कर सकेंगे AI लेखन iOS 27 में "Write with Siri" फीचर भी शामिल किया गया है। इसकी मदद से Siri: ईमेल ड्राफ्ट कर सकती है टेक्स्ट को प्रोफेशनल बना सकती है पैराग्राफ तैयार कर सकती है व्याकरण और स्पेलिंग सुधार सकती है टोन बदल सकती है यह सुविधा लगभग हर उस जगह उपलब्ध होगी जहां उपयोगकर्ता टाइपिंग करते हैं। Apple और Google की साझेदारी से तैयार हुए AI मॉडल Apple ने बताया है कि iOS 27 में इस्तेमाल किए जा रहे नए AI मॉडल उसके अपने Foundation Models हैं, जिन्हें विकसित करने में Google की Gemini तकनीक से भी मदद ली गई है। यह AI सिस्टम Spotlight Index और App Toolbox के साथ मिलकर काम करता है, जिससे Siri को अलग-अलग ऐप्स और डेटा स्रोतों तक पहुंच मिलती है। नई Siri आवाज को भी कर सकेंगे कस्टमाइज iPhone 17 Pro और iPhone Air जैसे नए डिवाइसों पर Siri की आवाज को कस्टमाइज करने का विकल्प मिलेगा। यूजर: बोलने की गति बदल सकेंगे आवाज की अभिव्यक्ति नियंत्रित कर सकेंगे बेहतर डिक्टेशन और वॉइस रिकग्निशन का लाभ उठा सकेंगे प्राइवेसी पर Apple का बड़ा दावा Apple का कहना है कि Siri AI का अधिकांश काम डिवाइस पर ही होगा। जहां क्लाउड प्रोसेसिंग की जरूरत होगी, वहां Private Cloud Compute तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार उपयोगकर्ताओं का डेटा Apple या किसी तीसरे पक्ष के लिए उपलब्ध नहीं होगा। किन डिवाइसों में मिलेगी Siri AI? नई Siri AI केवल उन डिवाइसों में उपलब्ध होगी जो Apple Intelligence को सपोर्ट करते हैं। इनमें शामिल हैं: iPhone 15 Pro और उसके बाद के मॉडल iPadOS 27 सपोर्टेड iPad macOS Golden Gate वाले Mac visionOS 27 डिवाइस watchOS 27 समर्थित Apple Watch किन देशों में नहीं मिलेगी सुविधा? Apple ने स्पष्ट किया है कि लॉन्च के समय Siri AI: यूरोपीय संघ (EU) में iPhone और iPad पर उपलब्ध नहीं होगी चीन में उपलब्ध नहीं होगी हालांकि Mac उपयोगकर्ताओं को EU में यह सुविधा मिलेगी। निष्कर्ष iOS 27 के साथ Apple ने Siri को केवल वॉइस असिस्टेंट से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण AI सहायक में बदल दिया है। व्यक्तिगत जानकारी समझने, ऐप्स में काम करने, वेब सर्च करने और कंटेंट लिखने जैसी क्षमताओं के साथ Siri अब Apple इकोसिस्टम का सबसे बड़ा AI अपग्रेड मानी जा रही है।
सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी Meta अब एक नए AI-पावर्ड वियरेबल डिवाइस पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एक ऐसे स्मार्ट AI पेंडेंट की टेस्टिंग की तैयारी कर रही है जिसे यूजर्स गले में पहन सकेंगे या अपनी शर्ट पर क्लिप कर सकेंगे। यह डिवाइस केवल एक एक्सेसरी नहीं होगा, बल्कि बातचीत को सुनने, रिकॉर्ड करने और उसे व्यवस्थित करने में सक्षम AI असिस्टेंट की तरह काम करेगा। Meta का नया AI पेंडेंट क्या करेगा? लीक हुए एक इंटरनल मेमो के अनुसार, Meta अगले एक साल के भीतर इस डिवाइस की टेस्टिंग शुरू कर सकती है। बताया जा रहा है कि यह तकनीक उस AI पेंडेंट पर आधारित होगी जिसे Limitless AI ने विकसित किया था। Limitless का डिवाइस यूजर्स की बातचीत को रिकॉर्ड और प्रोसेस कर सकता था। इसे दो तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता था: गले में पेंडेंट की तरह पहनकर शर्ट या कपड़ों पर क्लिप लगाकर इसके जरिए AI असिस्टेंट आसपास की बातचीत को कैप्चर करता था और बाद में उसे व्यवस्थित जानकारी के रूप में उपलब्ध कराता था। Meta ने क्यों खरीदी थी Limitless? 2025 के आखिर में Meta ने Limitless का अधिग्रहण किया था। कंपनी का मानना था कि इस तकनीक की मदद से AI आधारित हार्डवेयर जैसे: स्मार्ट ग्लासेज स्मार्ट वॉच AI असिस्टेंट डिवाइस को तेजी से विकसित किया जा सकेगा। Meta लंबे समय से AI को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है और यह पेंडेंट उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बातचीत रिकॉर्ड करने पर उठ सकते हैं सवाल AI पेंडेंट का सबसे चर्चित फीचर इसकी बातचीत रिकॉर्ड करने की क्षमता है। हालांकि यही फीचर इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे डिवाइस को लेकर तीन प्रमुख चिंताएं सामने आती हैं: प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा बातचीत रिकॉर्ड होने की पारदर्शिता संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पिछले कुछ AI वियरेबल डिवाइस भी इन्हीं कारणों से बड़े पैमाने पर लोकप्रिय नहीं हो सके थे। AI वियरेबल्स पर बढ़ रहा है दांव AI हार्डवेयर को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Meta के अलावा OpenAI सहित कई बड़ी टेक कंपनियां ऐसे उपकरण विकसित कर रही हैं जो स्मार्टफोन के बाद अगली बड़ी तकनीकी क्रांति बन सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि भविष्य में AI सिर्फ मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे पहनने वाले डिवाइसों के जरिए लोगों के साथ लगातार जुड़ा रहेगा। "Wearables for Work" भी ला सकती है Meta रिपोर्ट्स के अनुसार Meta केवल AI पेंडेंट तक सीमित नहीं रहने वाली। कंपनी अपने AI-संचालित स्मार्ट ग्लासेज पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रही है। इसके अलावा Meta "Wearables for Work" नाम से एक नई सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है, जो विशेष रूप से: कॉर्पोरेट यूजर्स ऑफिस कर्मचारियों एंटरप्राइज ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। क्या बदल सकता है AI का भविष्य? यदि Meta का यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो AI असिस्टेंट को इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। स्मार्टफोन निकालने की जरूरत के बिना यूजर्स सीधे अपने पहनने वाले डिवाइस के जरिए नोट्स, बातचीत और जानकारी को मैनेज कर सकेंगे। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि Meta प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान किस तरह करती है।
भारत में AI तकनीक को नया आयाम देते हुए Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के लिए Personal Intelligence फीचर रोलआउट कर दिया है। यह फीचर यूजर्स को पहले से ज्यादा पर्सनल और कॉन्टेक्स्ट-बेस्ड जवाब देने में सक्षम बनाता है। पहले यह सुविधा केवल अमेरिका में पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब भारत में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया गया है। क्या है Personal Intelligence फीचर? Personal Intelligence एक ऐसा AI सिस्टम है, जो अलग-अलग ऐप्स से जानकारी लेकर उसे जोड़कर जवाब देता है। यह फीचर यूजर्स को इन ऐप्स से कनेक्ट करने की सुविधा देता है: Gmail Google Photos YouTube Search इससे Gemini यूजर के सवालों का जवाब देते समय कई सोर्स से डेटा लेकर ज्यादा सटीक और पर्सनल जानकारी देता है। कैसे काम करता है यह फीचर? मान लीजिए आप जयपुर ट्रिप प्लान कर रहे हैं– Gemini Gmail से आपकी बुकिंग डिटेल्स निकाल सकता है Photos से सेव किए गए स्क्रीनशॉट या नोट्स दिखा सकता है YouTube हिस्ट्री के आधार पर जगहों की सिफारिश कर सकता है यानि अब एक ही जवाब में पूरी जानकारी मिल सकती है, बिना अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत के। यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी पर जोर Google के अनुसार: यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा यूजर खुद तय करेगा कि कौन-से ऐप्स कनेक्ट करने हैं डेटा का उपयोग सिर्फ जवाब देने के लिए होगा, AI ट्रेनिंग के लिए नहीं यूजर कभी भी इस फीचर को बंद कर सकता है अभी भी डेवलपमेंट स्टेज में कंपनी ने यह भी माना है कि यह फीचर अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी गलत या जरूरत से ज्यादा पर्सनल जवाब मिल सकते हैं AI कॉन्टेक्स्ट को गलत समझ सकता है हालांकि यूजर्स फीडबैक देकर इसे सुधारने में मदद कर सकते हैं। क्यों है यह बड़ा अपडेट? यह फीचर AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां: AI सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि संदर्भ समझता है यूजर के डेटा को जोड़कर बेहतर सुझाव देता है डिजिटल असिस्टेंट ज्यादा “पर्सनल” बनता है Gemini का Personal Intelligence फीचर भारत में AI उपयोग के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर्स प्राइवेसी और सुविधा के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।
टेक दिग्गज Meta Platforms ने अपने प्लेटफॉर्म्स Facebook और Instagram पर एक नया AI Support Assistant रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अकाउंट से जुड़ी समस्याओं, कंटेंट मॉडरेशन और सिक्योरिटी मामलों में तुरंत सहायता देना है। 5 सेकंड में जवाब, 24x7 सपोर्ट Meta के अनुसार, यह AI असिस्टेंट यूजर्स के सवालों का जवाब 5 सेकंड से भी कम समय में दे सकता है और 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। इसे मोबाइल (Android, iOS) और डेस्कटॉप-दोनों प्लेटफॉर्म्स पर हेल्प सेंटर में इंटीग्रेट किया गया है। क्या-क्या कर सकेगा AI Assistant? Meta AI Support Assistant यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण काम कर सकता है: स्कैम या फर्जी अकाउंट रिपोर्ट करना कंटेंट हटाए जाने की वजह समझाना पोस्ट हटने पर अपील में मदद पासवर्ड बदलना और प्राइवेसी सेटिंग्स मैनेज करना प्रोफाइल एडिट करना फिलहाल ये फीचर्स Facebook पर पूरी तरह सक्रिय हैं, जबकि Instagram पर भी जल्द इन्हें लागू किया जाएगा। स्कैम और फर्जीवाड़े पर सख्ती Meta ने बताया कि उसके नए AI सिस्टम अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। रोजाना लगभग 5,000 स्कैम प्रयासों को पहचानने में सक्षम सेलिब्रिटी इम्पर्सोनेशन (नकली अकाउंट) में 80% तक कमी आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान में दोगुनी क्षमता मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट यह AI असिस्टेंट उन भाषाओं में काम कर सकता है, जिन्हें दुनिया के 98% इंटरनेट यूजर्स इस्तेमाल करते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर यूजर्स को बेहतर और तेज सहायता मिलेगी। AI के साथ मानव निगरानी भी जरूरी Meta ने साफ किया है कि भले ही AI को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है, लेकिन संवेदनशील और जटिल मामलों में मानव हस्तक्षेप जारी रहेगा। कंपनी का मानना है कि AI बड़े स्तर पर काम को तेज कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में इंसानी समझ जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।