AI Boom

South Korea’s stock market surges on AI and semiconductor growth, overtaking India in global rankings
AI बूम का असर: भारत नहीं, दक्षिण कोरिया बना दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार

भारत को पीछे छोड़ दक्षिण कोरिया ने बनाई नई पहचान वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को एक और झटका लगा है। कुछ दिन पहले ताइवान के भारत से आगे निकलने के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी भारतीय बाजार को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने का दर्जा हासिल कर लिया है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई जबरदस्त तेजी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का शानदार प्रदर्शन माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों ने निवेशकों का भरोसा जीतते हुए बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा दक्षिण कोरिया का बाजार ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्य घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की तुलना में दोगुने से भी अधिक आकार की है, लेकिन शेयर बाजार मूल्यांकन के मामले में दक्षिण कोरिया फिलहाल आगे निकल गया है। AI और चिप कंपनियों ने बदली तस्वीर दक्षिण कोरिया की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों का रहा है। दोनों कंपनियां AI डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण इन कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल आया है। इस तेजी ने दक्षिण कोरिया के प्रमुख शेयर सूचकांक Kospi को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया को भी मिला फायदा AI क्रांति का लाभ केवल दक्षिण कोरिया को ही नहीं मिला है। हाल ही में ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर वैश्विक शेयर बाजार रैंकिंग में आगे निकल गया था। ताइवान की सफलता के पीछे Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) जैसी चिप निर्माण दिग्गज कंपनी का बड़ा योगदान रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि AI से जुड़ी वैश्विक दौड़ में सेमीकंडक्टर उद्योग वाले देशों को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है। घरेलू सुधारों ने भी निभाई भूमिका AI सेक्टर की मजबूती के अलावा दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुधारों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। राष्ट्रपति Lee Jae Myung द्वारा शुरू किए गए सुधारों को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। इससे विदेशी निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिला है। भारत क्यों पिछड़ रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये में कमजोरी बढ़ती तेल कीमतें महंगाई का दबाव कॉर्पोरेट आय वृद्धि में सुस्ती रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 26 अरब डॉलर की निकासी की है। इसके अलावा भारत में अभी ऐसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां अपेक्षाकृत कम हैं जो सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर या वैश्विक चिप सप्लाई चेन से जुड़ी हों। फिर भी मजबूत है भारत की दीर्घकालिक कहानी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता बरकरार है। भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और घरेलू खपत (Consumption Story) इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। युवाओं की बड़ी आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को फिर मजबूती दे सकते हैं। AI युग में निवेशकों की नई पसंद 2026 में वैश्विक निवेशकों का फोकस उन देशों पर अधिक दिखाई दे रहा है जो AI तकनीक, डेटा सेंटर और चिप निर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान इस ट्रेंड के सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं, जबकि भारत फिलहाल अल्पकालिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर भारत भी भविष्य में इस दौड़ में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।  

surbhi जून 2, 2026 0
SoftBank and KIOXIA surpass Toyota in market value amid growing investor focus on AI technology
26 साल बाद जापान में बड़ा उलटफेर: टोयोटा से छिना नंबर-1 का ताज, सॉफ्टबैंक और KIOXIA निकले आगे

जापान के कॉर्पोरेट जगत में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों में शामिल Toyota Motor Corporation अब जापान की सबसे वैल्यूएबल कंपनी नहीं रही। करीब 26 वर्षों बाद कंपनी को मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में शीर्ष स्थान गंवाना पड़ा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते SoftBank Group और KIOXIA Holdings Corporation ने टोयोटा को पीछे छोड़ दिया है। सॉफ्टबैंक बनी जापान की सबसे वैल्यूएबल कंपनी सोमवार के कारोबार में सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में करीब 14 प्रतिशत की तेज उछाल देखने को मिली। इस तेजी के साथ कंपनी का मार्केट कैप लगभग 304 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे वह जापान की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई। सॉफ्टबैंक के चेयरमैन Masayoshi Son लगातार AI और नई तकनीकों में बड़े निवेश कर रहे हैं। कंपनी का जुड़ाव OpenAI और SB Energy जैसी परियोजनाओं से भी है, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इस साल सॉफ्टबैंक के शेयरों में 80 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। KIOXIA ने भी टोयोटा को छोड़ा पीछे सिर्फ सॉफ्टबैंक ही नहीं, बल्कि KIOXIA Holdings के शेयरों में भी लगभग 11 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। इस उछाल के बाद KIOXIA का मार्केट कैप करीब 249.82 अरब डॉलर पहुंच गया, जो टोयोटा के 247.56 अरब डॉलर के मार्केट कैप से अधिक है। इस तरह जापान की दो तकनीकी कंपनियां मार्केट वैल्यू के मामले में टोयोटा से आगे निकल गई हैं। क्यों पिछड़ रही है टोयोटा? हालांकि टोयोटा आज भी दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल है, लेकिन निवेशकों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। मुख्य कारण: AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों में बढ़ता निवेश टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेज ग्रोथ की उम्मीद चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि वहीं इस साल टोयोटा के शेयरों में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों का झुकाव अब AI की ओर वैश्विक बाजारों में इस समय AI सबसे बड़ा निवेश विषय बना हुआ है। अमेरिका, जापान और चीन समेत दुनिया भर के निवेशक उन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, चिप निर्माण और क्लाउड टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं। इसी वजह से सॉफ्टबैंक जैसी कंपनियों को जबरदस्त फायदा मिल रहा है, जबकि पारंपरिक उद्योगों की कंपनियां निवेशकों का उतना ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। दुनिया की वैल्यूएबल कंपनियों में जापान की स्थिति मार्केट कैप के आधार पर वैश्विक रैंकिंग में सॉफ्टबैंक अब दुनिया की 48वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। हालिया तेजी के बाद उसकी रैंकिंग में 13 स्थानों का सुधार हुआ है। दूसरी ओर टोयोटा 70वें स्थान पर खिसक गई है। वैश्विक स्तर पर: टॉप 10 में 8 कंपनियां अमेरिका की हैं। टॉप 100 में चीन की 11 कंपनियां शामिल हैं। जापान की 4 कंपनियों को जगह मिली है। भारत की कोई भी कंपनी अभी टॉप 100 वैल्यूएबल कंपनियों की सूची में शामिल नहीं है। क्या संकेत देता है यह बदलाव? टोयोटा का शीर्ष स्थान गंवाना केवल एक कंपनी की रैंकिंग बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक निवेश ट्रेंड में आए बड़े बदलाव का संकेत भी है। निवेशक अब पारंपरिक ऑटोमोबाइल उद्योग से ज्यादा AI, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों पर दांव लगा रहे हैं। यदि यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में तकनीकी कंपनियों का दबदबा और बढ़ सकता है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Budget and mid-range smartphones displayed in a store as rising component costs push prices higher
बजट से बाहर क्यों हो रहे हैं बजट स्मार्टफोन? AI बूम, महंगी चिप्स और बढ़ती लागत ने बढ़ाई कीमतें

Samsung, Xiaomi, Vivo और Realme समेत कई कंपनियों ने बढ़ाए दाम भारत में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे सीमित बजट वाले ग्राहकों की परेशानी बढ़ गई है। जिन स्मार्टफोन्स को कुछ समय पहले तक 18,000 से 20,000 रुपये के बीच खरीदा जा सकता था, वे अब 25,000 रुपये या उससे अधिक की कीमत में उपलब्ध हैं। बाजार में बढ़ती कीमतों का असर केवल एक या दो ब्रांड तक सीमित नहीं है। Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo, Realme और Nothing जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने कई लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में इजाफा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे वैश्विक तकनीकी बदलाव, AI सेक्टर की बढ़ती मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। AI क्रांति का असर स्मार्टफोन बाजार पर स्मार्टफोन महंगे होने की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर का तेजी से विस्तार माना जा रहा है। दुनिया भर में AI आधारित सर्वर, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स की मांग बढ़ रही है। इन तकनीकों को बड़ी मात्रा में उन्नत मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है। इसी कारण Samsung, Micron और SK Hynix जैसे बड़े मेमोरी चिप निर्माताओं ने अपना ध्यान AI सेक्टर की ओर अधिक केंद्रित कर दिया है। नतीजतन स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हुई है और उनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार कई मामलों में इन चिप्स की कीमतें 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। यही वजह है कि कुछ विश्लेषक इस बढ़ती लागत को “AI टैक्स” तक कहने लगे हैं, क्योंकि AI की बढ़ती मांग का बोझ आखिरकार स्मार्टफोन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बजट और मिड-रेंज ग्राहकों पर सबसे ज्यादा मार भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफोन बाजारों में से एक है और यहां सबसे अधिक बिक्री बजट तथा मिड-रेंज सेगमेंट में होती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Xiaomi के कुछ मॉडलों की कीमतों में लगभग 32 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। Samsung के कुछ फोन करीब 36 प्रतिशत, Vivo के लगभग 40 प्रतिशत और Realme के कुछ मॉडल 50 प्रतिशत से अधिक महंगे हो चुके हैं। इसके साथ ही कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर्स में भी कमी देखने को मिल रही है। इसका परिणाम यह है कि ग्राहक अब नया स्मार्टफोन खरीदने से पहले पहले की तुलना में अधिक सोच-विचार कर रहे हैं। लोग पुराने फोन को ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे महंगे होते स्मार्टफोन का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जहां कई लोग हर एक या दो साल में नया स्मार्टफोन खरीद लेते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने पुराने फोन को रिपेयर करवाकर अधिक समय तक इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। 2026 की शुरुआती बाजार रिपोर्ट्स में स्मार्टफोन बिक्री में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि ग्राहक अब खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। यदि पुराना फोन संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है, तो लोग नया डिवाइस खरीदने की जल्दबाजी नहीं कर रहे। बढ़ती शिपिंग लागत और वैश्विक तनाव भी जिम्मेदार स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के पीछे केवल मेमोरी चिप्स की कमी ही जिम्मेदार नहीं है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती शिपिंग लागत और विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की लागत बढ़ा दी है। कंपनियों को अब कच्चा माल और तैयार उत्पाद विभिन्न देशों तक पहुंचाने में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कई इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स की सीमित उपलब्धता ने भी उत्पादन लागत बढ़ाई है। इन अतिरिक्त खर्चों का बड़ा हिस्सा अब सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट क्यों है अपेक्षाकृत सुरक्षित? दिलचस्प रूप से बढ़ती कीमतों का असर प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार पर अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहा है। Apple के iPhone और Samsung Galaxy S-Series जैसे फ्लैगशिप डिवाइस खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर कीमत को लेकर कम संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन अधिक मजबूत और स्थिर मानी जाती है, जिससे वे लागत बढ़ने के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल पाती हैं। यही कारण है कि बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में कीमतों का दबाव ज्यादा दिखाई दे रहा है, जबकि प्रीमियम श्रेणी फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। आगे और बढ़ सकते हैं दाम उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI सेक्टर में मेमोरी चिप्स की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। विशेष रूप से बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को इसका सबसे अधिक असर झेलना पड़ सकता है। ऐसे में यदि कोई उपभोक्ता निकट भविष्य में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहा है, तो अत्यधिक इंतजार करना उसके लिए फायदे का सौदा नहीं भी हो सकता, क्योंकि बाजार में कीमतों के और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Taiwan stock market surges past India as AI and semiconductor stocks drive growth.
भारत को पीछे छोड़ दुनिया का 5वां सबसे बड़ा शेयर बाजार बना ताइवान, AI और चिप सेक्टर ने बदली तस्वीर

दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का दर्जा अब भारत के पास नहीं रहा। ताइवान ने बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) के मामले में भारत को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। भारत से आगे निकला ताइवान हालिया आंकड़ों के अनुसार, ताइवान के शेयर बाजार का कुल मूल्य लगभग 4.95 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है, जबकि भारत का बाजार पूंजीकरण 4.92 ट्रिलियन डॉलर के आसपास रह गया। इसके साथ ही ताइवान अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है, जबकि ताइवान की जनसंख्या करीब 2.3 करोड़ है। भारत में सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या भी ताइवान की तुलना में कहीं अधिक है। AI बूम बना ताइवान की सबसे बड़ी ताकत ताइवान की इस छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर उद्योग और AI से जुड़ी बढ़ती वैश्विक मांग है। विशेष रूप से Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माण कंपनी है और AI क्रांति का प्रमुख लाभार्थी मानी जा रही है। कंपनी के बनाए चिप्स का उपयोग NVIDIA, Apple, Advanced Micro Devices और Qualcomm जैसी दिग्गज कंपनियां करती हैं। AI आधारित तकनीकों की मांग बढ़ने के साथ TSMC के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है, जिससे ताइवान के पूरे शेयर बाजार का मूल्य बढ़ गया। भारत के सामने अलग तरह की चुनौतियां जहां ताइवान को AI और चिप सेक्टर का फायदा मिला, वहीं भारत फिलहाल कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, कॉरपोरेट मुनाफे की धीमी वृद्धि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों की कमी है जो वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर या सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाती हों। इसी वजह से AI थीम पर निवेश करने वाले विदेशी फंड ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई चिंता भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी भी बाजार पूंजीकरण पर असर डाल रही है। निवेशकों की चिंता के प्रमुख कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये में कमजोरी कॉरपोरेट आय में सुस्ती कुछ सेक्टरों में ऊंचा वैल्यूएशन भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव और महंगे होते कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। फिर भी मजबूत बनी हुई है भारत की कहानी विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान का भारत से आगे निकलना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता पर सवाल नहीं उठाता। भारत में अभी भी लाखों निवेशक हर महीने SIP के जरिए निवेश कर रहे हैं और घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था बैंकिंग, आईटी सेवाओं, विनिर्माण, उपभोक्ता खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों पर आधारित है, जबकि ताइवान का बाजार मुख्य रूप से तकनीक और चिप निर्माण पर केंद्रित है। वैश्विक निवेश का नया ट्रेंड ताइवान की सफलता यह दिखाती है कि फिलहाल दुनिया भर की पूंजी AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यदि भारत भी चिप निर्माण और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी उपस्थिति मजबूत करता है, तो वैश्विक निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित कर सकता है। फिलहाल ताइवान की बढ़त यह संकेत देती है कि वैश्विक बाजारों में AI आधारित उद्योग सबसे बड़ा निवेश आकर्षण बन चुके हैं।  

surbhi मई 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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