1559 – इटली के जेनोआ क्षेत्र से यहूदियों को निकाला गया। 1679 – मुगल शासक अकबर ने जजिया कर समाप्त किया। 1745 - ऑस्ट्रिया और बवेरिया ने शांति संधि पर हस्ताक्षर किया। 1767 - यीशु की सोसायटी का स्पैनिश साम्राज्य और नेपल्स के साम्राज्य में दमन किया गया। 1787 - न्यायपालिका के एक चार्टर ने आपराधिक और नागरिक अधिकार क्षेत्र के पहले न्यू साउथ वेल्स न्यायालयों की स्थापना के लिए अधिकार प्रदान करने पर हस्ताक्षर किए। 1792 - सिक्का कानून पारित कर दिया गया , संयुक्त राज्य मिंट की स्थापना हुई। 1801 - कोपेनहेगन (द्वितीय गठबंधन युद्ध) की पहली लड़ाई: एडमिरल सर हाइड पार्कर के तहत यूनाइटेड किंगडम की रॉयल नेवी शाही डैनो-नार्वे नेवी को एक युद्धविराम स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया। 1849- ब्रिटिश पंजाब की स्थापना हुई। 1860 - ट्यूरिन में पहली इटली की संसद की बैठक शुरू हुई। 1902 – लॉसएंजिल्स में पहला मोशन पिक्चर थियेटर खुला। 1905 – मिस्र की राजधानी काहिरा और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर के बीच रेल यातायात शुरु हुआ। 1921 – प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने नये 'सापेक्षता के सिद्धांत' विषय पर न्यूयार्क शहर में व्याख्यान दिया। 1942 – कांग्रेस ने क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव को खारिज किया। 1945 – सोवियत संघ और ब्राजील के बीच राजनयिक संबंध बहाल हुये। 1970 – 'असम पुनर्गठन अधिनियम' के तहत भारत के उत्तर-पूर्व में मेघालय को स्वायत्तशासी राज्य का दर्जा हासिल हुआ। 1982 – अर्जेंटीना ने दक्षिणी अटलांटिक महासागर में स्थित फॉकलैंड द्वीप समूह पर हमला कर दिया। 1984 – स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा, मिशन सोयूज़ टी-11 के तहत अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। 1997 – सुमिता सिन्हा ने अपने उपर से 3200 किलोग्राम भार के ट्रक को पार करने की अनुमति देकर रिकार्ड स्थापित किया। 1989 - फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के नेता यासर अराफात फिलिस्तीन के राष्ट्रपति निर्वाचित। 1999 - मास्को में स्वतंत्र राष्ट्रों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) की शिखर बैठक सम्पन्न। 2001 - नेपाल में माओवादी विद्रोहियों द्वारा 35 पुलिस अधिकारियों की हत्या। 2007 - सोलोमन द्वीप में शक्तिशाली सुनामी आयी। 2008 - कर्नाटक में तीन चरणों में विधान सभा चुनाव कराने की घोषणा। 2008 - रामराव समिति ने रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा तकनीकी आयोग गठित करने की सिफारिश की। 2008 - नेपाल में सत्तारूढ़ पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने चुनाव से पहले भड़की हिंसा की जांच के लिए 10 सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए। 2008 - अमेरिका में हावर्ड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हावर्ड बिजनेस स्कूल ने सुश्री अंजली रैना को मुंबई स्थित अपने भारत अनुसंधान केन्द्र का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया। 2011- भारतीय क्रिकेट टीम ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर आईसीसी विश्व कप, 2011 की ट्रॉफी अपने नाम की। 2013 – पाकिस्तान के पेशावर में बिजली संयंत्र पर हुए हमले में सात लोग मारे गए। 2013 – बर्मा के यांगून में एक मस्जिद के भीतर लगी भीषण आग में 13 बच्चों की मौत हो गई। 2015 – केन्या के गारिसा यूनिवर्सिटी में बंदूकधारियों के हमले में 140 लोग मारे गए। 2017- अमरीकी गायक और गीतकार बॉब डिलन ने साहित्य के लिए प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार स्वीकार कर लिया । 2017- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में देश की सबसे लम्बी, चेनानी-नाशरी सड़क सुरंग राष्ट्र को समर्पित किया। 2019 - पाक में नाबालिग हिंदू बहनों के जबरन धर्मातरण की जांच के लिए आयोग गठित। 2020 - भारत सरकार ने कोविड-19 की स्थिति के बारे में जानने और लोगों को सतर्क करने के लिए आरोग्य सेतु ऐप शुरू किया। 2021 - भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट सभी मुद्दों को तेजी से सुलझाने पर सहमति बनी। 2021 - ताइवान में भीषण ट्रेन हादसा हुआ जिसमें 48 लोगों की मौत व लगभग 118 व्यक्ति घायल हुए। 2022 - भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग तथा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 2022 - भारत और तुर्कमेनिस्तान आपसी व्यापार और ऊर्जा सहयोग बढाने पर सहमत हुए। 2023 - भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत ऊर्जा स्रोतों में बदलाव पर जी20 कार्य समूह (ETWG) की दूसरी बैठक गांधीनगर में शुरू हुई। 2023 - रूस में सैन्य मामलों के ब्लागर की विस्फोट में मौत हुई व 19 लोग घायल हुए। 2023 - पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में द्वितीय जी-20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक का उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। 2023 - ISRO ने दोबारा उपयोग में लाए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान की स्वतः लैंडिंग मिशन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 2 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 1881 - वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर - एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त थे। 1891 – गोवा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी टी. बी. कुन्हा का जन्म हुआ। 1902 - बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ शास्त्रीय गायक । 1935 - ए. वी. रामा राव - भारतीय रसायनशास्त्री और आविष्कारक। 1942 - रोशन सेठ हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता । 1952 - दीपक पाराशर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता । 1969 - अजय देवगन - भारतीय बॉलीवुड फिल्मों के मशहूर अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं। 1981 - कपिल शर्मा एक भारतीय हास्य अभिनेता हैं। 1984 - दीप सिद्धू - हिन्दी फ़िल्मों के एक भारतीय अभिनेता हैं। 2 अप्रॅल को हुए निधन 1720 – पेशवा बालाजी विश्वनाथ का निधन हुआ। 1825 - बन्धुल, एक प्रसिद्ध बर्मी (बर्मा) सेनापति था। 1907 - राधाकृष्ण दास - हिंदी, बांग्ला, उर्दू, गुजराती आदि भाषाओं के अच्छे जानकार तथा साहित्यकार थे। 1933 - रणजी, भारतीय क्रिकेट का जादूगर कहा जाता है और उन्हें भारत का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी माना जाता है का गुजरात के जामनगर में निधन हुआ। 2005 – पिछले 400 सालों में पोप बनने वाले पहले गैर इतालवी नागरिक पोप जॉन पॉल द्वितीय का निधन हुआ। 2020 - भाई निर्मल सिंह खालसा एक प्रख्यात गुरबाणी गायक थे। 2021 - वैलेन्टिन अफोनिन, रूसी फुटबॉल डिफेंडर का 81 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2022 - चिली के फुटबॉल स्ट्राइकर लियोनेल सांचेज़ का 85 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2023 - पूर्व भारतीय क्रिकेटर सलीम अज़ीज़ दुर्रानी (88) का गुजरात के जामनगर में कैंसर से निधन हुआ। 2 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव भगवान अजितनाथ जी मोक्ष कल्याणक (जैन , चैत्र शुक्ल पंचमी)। गुरु श्री हरगोविन्द जी ज्योति ज्योत (प्राचीनमतानुसार)। महान संत श्री अमर शहीद कंवरराम साहब की 140वीं जयंती (सिंधी समाज)। अभिनेता श्री अजय देवगन जन्म दिवस। क्रिकेटर रणजी (कुमार रणजीत सिंह) स्मृति दिवस। आर्मी वॉर कॉलेज (एडब्ल्यूसी) महू जयन्ती (55वीं)। विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।