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IBPS PO Recruitment 2026 notification announcing 6,715 Probationary Officer vacancies with online applications now open.
IBPS PO Recruitment 2026: 6,715 पदों पर निकली बंपर भर्ती, आवेदन शुरू; जानें योग्यता, सैलरी, फीस और पूरी प्रक्रिया

बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सिलेक्शन (IBPS) ने प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO)/मैनेजमेंट ट्रेनी (MT) के 6,715 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 21 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के माध्यम से 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पीओ/एमटी पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। यह भर्ती ऐसे समय आई है जब हाल ही में SBI ने भी पीओ भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था। ऐसे में बैंकिंग उम्मीदवारों के पास एक साथ दो बड़े अवसर मौजूद हैं। किन बैंकों में होगी भर्ती? IBPS PO भर्ती के जरिए कई प्रमुख सरकारी बैंकों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक ऑफ इंडिया पंजाब नेशनल बैंक (PNB) यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक महत्वपूर्ण तिथियां विवरण जानकारी आवेदन शुरू 1 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 21 जुलाई 2026 प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) अगस्त 2026 मुख्य परीक्षा (Mains) अक्टूबर 2026 कुल पद 6715 पद पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रिक्तियों की संख्या अधिक बताई जा रही है। शैक्षणिक योग्यता उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है। इस भर्ती के लिए किसी विशेष अनुभव या अतिरिक्त प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 20 वर्ष अधिकतम आयु: 30 वर्ष निर्धारित पात्रता के अनुसार उम्मीदवार की जन्मतिथि 2 जुलाई 1996 से पहले और 1 जुलाई 2006 के बाद नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में 3 से 10 वर्ष तक की छूट मिलेगी। चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में होगा— प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) मुख्य परीक्षा (Mains) इंटरव्यू इन तीनों चरणों में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा। सैलरी कितनी मिलेगी? चयनित उम्मीदवारों को ₹48,480 से ₹85,920 तक की बेसिक सैलरी मिलेगी। इसके अलावा विभिन्न भत्ते, एचआरए, डीए और अन्य सरकारी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। आवेदन शुल्क श्रेणी शुल्क SC/ST/PwBD ₹175 सामान्य/OBC/EWS एवं अन्य ₹850 ऑनलाइन भुगतान के दौरान लागू बैंक ट्रांजैक्शन शुल्क का भुगतान भी उम्मीदवार को करना होगा। कैसे करें आवेदन? उम्मीदवार निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाकर आवेदन कर सकते हैं— IBPS की आधिकारिक वेबसाइट www.ibps.in पर जाएं। CRP PO/MT भर्ती लिंक पर क्लिक करें। New Registration पर जाकर नया पंजीकरण करें। मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें— पासपोर्ट साइज फोटो हस्ताक्षर बाएं अंगूठे का निशान 10वीं का प्रमाणपत्र लाइव फोटो आवेदन शुल्क का भुगतान करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। क्यों है यह भर्ती खास? IBPS PO भर्ती देश की सबसे प्रतिष्ठित बैंकिंग भर्तियों में से एक मानी जाती है। सरकारी बैंक में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर है। इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Central Bank of India
ग्रेजुएट्स के लिए सुनहरा अवसर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 4500 अप्रेंटिस पदों पर निकली भर्ती

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी बैंक में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रेंटिसशिप भर्ती 2026 के तहत 4,500 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 12 जून 2026 से शुरू हो गई है और इच्छुक उम्मीदवार 22 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल NATS (National Apprenticeship Training Scheme) पोर्टल पर पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए मान्य होगा।   स्नातक डिग्री और निर्धारित आयु सीमा जरूरी   भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। पात्रता निर्धारित करने की कट-ऑफ तिथि 31 मई 2026 तय की गई है।   एक वर्ष की ट्रेनिंग, हर महीने मिलेगा 15 हजार रुपये वजीफा चयनित अभ्यर्थियों को 12 महीने की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें बैंकिंग कार्यों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। प्रशिक्षुओं को हर महीने 15,000 रुपये का वजीफा दिया जाएगा। हालांकि, उन्हें किसी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता नहीं मिलेगा। प्रशिक्षण अवधि में बैंक कर्मचारियों के समान कार्य घंटे होंगे, ओवरटाइम की अनुमति नहीं होगी और प्रत्येक माह केवल एक दिन का अवकाश मिलेगा।   जुलाई के पहले सप्ताह में संभावित परीक्षा भर्ती प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन परीक्षा जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है। आवेदन शुल्क का भुगतान भी 12 जून से 22 जून के बीच ऑनलाइन किया जा सकेगा।   ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार सबसे पहले NATS पोर्टल पर पंजीकरण करें। इसके बाद लॉगिन कर "Central Bank of India Apprentice Recruitment 2026" लिंक पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरें, फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षणिक दस्तावेज अपलोड करें। शुल्क का भुगतान करने के बाद फॉर्म की जांच कर अंतिम रूप से सबमिट करें। आवेदन पत्र का प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी उचित रहेगा।

anjali kumari जून 12, 2026 0
SBI Apprentice Recruitment 2026 notification highlighting 7150 vacancies and extended application deadline
SBI Apprentice Recruitment 2026: 7150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की तारीख बढ़ी, उम्मीदवारों को मिला एक और मौका

बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक State Bank of India (SBI) ने अप्रेंटिस के 7150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब इच्छुक उम्मीदवार 15 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पहले इस भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 8 जून 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया गया है। ऐसे उम्मीदवार जो किसी कारणवश समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे, उनके लिए यह सुनहरा अवसर है। 7150 पदों पर होगी भर्ती SBI द्वारा जारी भर्ती अभियान के तहत विभिन्न श्रेणियों में कुल 7150 पद भरे जाएंगे। श्रेणी पदों की संख्या सामान्य (UR) 3086 ओबीसी (OBC) 1672 एससी (SC) 1107 ईडब्ल्यूएस (EWS) 699 एसटी (ST) 586 कुल पद 7150 शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है। आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। कितना मिलेगा स्टाइपेंड? यह भर्ती स्थायी नौकरी के लिए नहीं बल्कि एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के लिए है। चयनित उम्मीदवारों को बैंकिंग कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। ट्रेनिंग अवधि के दौरान हर महीने ₹15,000 का स्टाइपेंड दिया जाएगा। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार निम्नलिखित आसान स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं— SBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। SBI Careers Portal होमपेज पर मौजूद Careers सेक्शन पर क्लिक करें। Engagement of Apprentices in SBI (Advertisement No. CRPD/APPR/2026) लिंक खोलें। Apply Online पर क्लिक कर नया रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें। आवेदन फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। युवाओं के लिए बड़ा अवसर SBI की अप्रेंटिसशिप भर्ती बैंकिंग क्षेत्र में करियर शुरू करने के इच्छुक युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। इस कार्यक्रम के जरिए उम्मीदवारों को बैंकिंग संचालन, ग्राहक सेवा और वित्तीय प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो भविष्य में रोजगार के नए अवसर खोल सकता है।  

surbhi जून 5, 2026 0
Candidates applying online for Union Bank of India apprentice recruitment 2026 before the last application date.
यूनियन बैंक में 1865 पदों पर भर्ती, आवेदन का आखिरी मौका कल

Union Bank of India ने अप्रेंटिस के 1865 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। बैंक में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह बड़ा मौका माना जा रहा है। इस भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 19 मई 2026 है। इच्छुक उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कैसे करें आवेदन? उम्मीदवार आवेदन के लिए: Union Bank of India Official Website पर जाएं “UBI Apprentice Recruitment 2026” लिंक पर क्लिक करें रजिस्ट्रेशन करें आवेदन फॉर्म भरें जरूरी दस्तावेज अपलोड करें फीस जमा करके फॉर्म सबमिट करें भविष्य के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रखें चयन प्रक्रिया कैसे होगी? भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी: ऑनलाइन परीक्षा सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट होगा, जिसमें: जनरल अवेयरनेस रीजनिंग मैथ्स कंप्यूटर नॉलेज से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी होगी। लोकल लैंग्वेज टेस्ट उम्मीदवार जिस राज्य से आवेदन करेंगे, वहां की स्थानीय भाषा पढ़ना, लिखना और बोलना जरूरी होगा। मेडिकल टेस्ट लिखित परीक्षा और भाषा परीक्षा पास करने के बाद मेडिकल फिटनेस टेस्ट होगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन अंतिम चरण में: ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट आयु प्रमाण जाति प्रमाणपत्र आदि दस्तावेजों की जांच की जाएगी। कितना मिलेगा स्टाइपेंड? यह एक साल का अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम होगा। चयनित उम्मीदवारों को पोस्टिंग के आधार पर हर महीने स्टाइपेंड मिलेगा: ग्रामीण/अर्ध-शहरी शाखाएं: ₹15,000 शहरी शाखाएं: ₹18,000 मेट्रो शहर शाखाएं: ₹20,000 कैटेगरी वाइज वैकेंसी डिटेल कैटेगरी पद UR 823 OBC 447 EWS 175 SC 289 ST 131 कुल पद 1865 उम्मीदवारों के लिए जरूरी सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि उम्मीदवार अंतिम समय का इंतजार न करें और जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन भरते समय सभी दस्तावेज और जानकारी सही तरीके से अपलोड करना बेहद जरूरी है।  

surbhi मई 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0