Bengal BJP Government

Mamata Banerjee leads TMC protest campaign against BJP government in Kolkata
अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हमले के विरोध में सड़क पर उतरेगी TMC, 2 जून को धरने पर बैठेंगी ममता

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ते टकराव के बीच तृणमूल कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन का एलान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों के विरोध में टीएमसी अब सीधे सड़क पर उतरने जा रही है। इस अभियान की अगुवाई खुद पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी। तृणमूल कांग्रेस के कार्यक्रम के तहत 2 जून को ममता बनर्जी कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित रानी रासमणि रोड पर एक दिवसीय धरने पर बैठेंगी। सत्ता परिवर्तन के बाद इसे उनका पहला बड़ा जनआंदोलन और शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। राज्यभर में विरोध मार्च का आयोजन धरने से पहले पार्टी ने पूरे राज्य में विरोध कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। सोमवार को विभिन्न नगर पालिका क्षेत्रों और ग्रामीण ब्लॉकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। हॉकर्स पर कार्रवाई को भी बनाएगी मुद्दा पार्टी केवल अपने नेताओं पर हुए कथित हमलों तक ही आंदोलन को सीमित नहीं रखना चाहती। हाल में दमदम स्टेशन और कोलकाता के कुछ अन्य इलाकों में अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए अभियान को भी टीएमसी ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है। पार्टी का आरोप है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए छोटे दुकानदारों और फुटपाथ कारोबारियों को हटाया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। ममता बनर्जी अपने धरने के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकती हैं। नेताओं की मौजूदगी पर रहेगी नजर यह धरना ऐसे समय हो रहा है जब हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर राजनीतिक हलचल और कई नेताओं के पार्टी से दूरी बनाने की चर्चाएं तेज रही हैं। पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों, सांसदों और जिला स्तर के नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होने का निर्देश दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह धरना केवल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता दिखाने का भी अवसर होगा। कार्यक्रम में नेताओं की मौजूदगी को पार्टी की अंदरूनी ताकत के पैमाने के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा ने आरोपों को किया खारिज भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के खिलाफ जो विरोध देखने को मिला, वह किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा नहीं था। भाजपा का दावा है कि यह स्थानीय लोगों की नाराजगी का परिणाम था। राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच अब सभी की नजरें 2 जून के धरने पर टिकी हैं, जहां ममता बनर्जी भाजपा सरकार के खिलाफ अपने अगले राजनीतिक अभियान का संदेश दे सकती हैं।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Swapan Dasgupta takes oath as cabinet minister in West Bengal BJP government expansion
शुभेंदु कैबिनेट में शामिल हुए स्वपन दासगुप्ता, पत्रकारिता से सत्ता के केंद्र तक का सफर

  पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा। सोमवार को कोलकाता के लोक भवन में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में लंबा अनुभव रखने वाले दासगुप्ता को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। शिक्षा और शोध से शुरू हुआ सफर 3 अक्टूबर 1955 को कोलकाता में जन्मे स्वपन दासगुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की। वह ऑक्सफोर्ड और वॉरविक विश्वविद्यालय में भी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पत्रकारिता की दुनिया में बनाई अलग पहचान स्वपन दासगुप्ता देश के प्रमुख अंग्रेजी पत्रकारों और स्तंभकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने द स्टेट्समैन, द टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। राजनीति, समाज और सार्वजनिक नीति पर उनके लेख और विश्लेषण लंबे समय से प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। राजनीति में चुनौतियों के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी स्वपन दासगुप्ता का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2016 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें हुगली जिले की तारकेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बावजूद वह भाजपा के बौद्धिक और रणनीतिक चेहरों में शामिल रहे। पार्टी की नीतियों और बंगाल में संगठन विस्तार की रणनीति में उनकी सक्रिय भूमिका बनी रही। भाजपा के लिए क्यों अहम हैं स्वपन दासगुप्ता? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्वपन दासगुप्ता को कैबिनेट में शामिल करना भाजपा की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है। उनकी पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक विद्वान, लेखक और नीति विशेषज्ञ के रूप में भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनके शामिल होने से भाजपा को बंगाल के शिक्षित और बौद्धिक वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अहम मंत्रालय मिलने की संभावना मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्वपन दासगुप्ता को शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृति या किसी अन्य नीति-निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विभागों के बंटवारे के बाद उनकी भूमिका और अधिक स्पष्ट होगी। स्वपन दासगुप्ता की कैबिनेट में एंट्री को भाजपा सरकार के उस प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए प्रशासनिक अनुभव, बौद्धिक नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
West Bengal Chief Minister and newly inducted ministers during cabinet expansion oath ceremony
बंगाल मंत्रिमंडल में कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना का दबदबा, तीन जिलों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

  पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य की राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की तस्वीर साफ हो गई है। सोमवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 35 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मंत्रिपरिषद में कुल 41 पद भर चुके हैं, जबकि तीन पद अभी खाली हैं। जिलावार प्रतिनिधित्व के विश्लेषण से पता चलता है कि कोलकाता, पूर्व मेदिनीपुर और उत्तर 24 परगना को मंत्रिमंडल में सबसे अधिक स्थान मिला है। इन तीनों जिलों से चार-चार मंत्री बनाए गए हैं, जिससे सरकार में इन क्षेत्रों की भागीदारी सबसे ज्यादा हो गई है। इन जिलों को मिला सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व कोलकाता से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। राजधानी होने के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से इस जिले को विशेष महत्व मिला है। पूर्व मेदिनीपुर, जो मुख्यमंत्री का गृह जिला भी है, से चार नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें कैबिनेट और राज्य मंत्री दोनों स्तर के चेहरे शामिल हैं। उत्तर 24 परगना से भी चार नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। यह जिला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से राज्य के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रों में गिना जाता है। कई जिलों को मिला संतुलित प्रतिनिधित्व अलीपुरदुआर को तीन मंत्री पद मिले हैं। वहीं दक्षिण 24 परगना, बांकुड़ा, बीरभूम, कूचबिहार, पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान, हुगली, झारग्राम, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग और मुर्शिदाबाद से दो-दो नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा, पुरुलिया और मालदा को एक-एक मंत्री पद मिला है। तीन जिलों को नहीं मिला मंत्रिमंडल में स्थान मंत्रिमंडल विस्तार में नदिया, दक्षिण दिनाजपुर और कलिम्पोंग को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इन जिलों से भाजपा के विधायक होने के बावजूद किसी नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि भविष्य में खाली पड़े पदों या संगठनात्मक जिम्मेदारियों के जरिए इन जिलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा सकती है। अभी तीन पद खाली 294 सदस्यीय विधानसभा में नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान में 41 पद भरे गए हैं। मंत्रिपरिषद में 13 कैबिनेट मंत्री, तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। अब सभी की नजर विभागों के बंटवारे पर है। इससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार के भीतर किस क्षेत्र और नेता को कितनी अहम जिम्मेदारी सौंपी जाती है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Suvendu Adhikari with BJP leaders amid discussions over West Bengal cabinet formation and deputy CM posts
शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट को लेकर चर्चाएं तेज, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल बन सकते हैं डिप्टी सीएम!

Suvendu Adhikari Cabinet List Viral: पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. इसी बीच उनके संभावित मंत्रिमंडल को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. वायरल हो रही एक कथित कैबिनेट लिस्ट में कई बड़े भाजपा नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाए जाने की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी वायरल सूची के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि उन्हें पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ पश्चिमांचल उन्नयन मामलों की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है. दिलीप घोष ने इस बार खड़गपुर सदर सीट से जीत दर्ज की है. वहीं भाजपा की फायरब्रांड नेता अग्निमित्रा पॉल को भी डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है. संभावित सूची में उनके पास उद्योग, वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग जाने की बात कही जा रही है. अग्निमित्रा पॉल आसनसोल दक्षिण सीट से लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं. स्पीकर पद के लिए राहुल सिन्हा का नाम चर्चा में सोशल मीडिया पर वायरल सूची में भाजपा नेता राहुल सिन्हा को विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर बनाए जाने की संभावना जताई गई है. वहीं तापस रॉय को डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है. हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल सिन्हा को हाल ही में राज्यसभा भेजा गया है, ऐसे में उनके स्पीकर बनने की संभावना कम नजर आती है. कई नए चेहरों को मिल सकता है मौका सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस बार अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल तैयार करना चाहती है. उत्तर बंगाल, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल से कई नेताओं को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. महिला नेताओं और युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा भव्य शपथ ग्रहण शुभेंदु अधिकारी शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं. भाजपा इसे बंगाल की राजनीति में “नए युग की शुरुआत” के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, अब तक भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में वायरल हो रही सूची की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Heavy security deployment and traffic restrictions in Kolkata ahead of PM Modi’s visit and oath ceremony
PM Modi Kolkata Visit: शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता में हाई अलर्ट, 16 घंटे तक  भारी वाहनों की एंट्री बंद

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोलकाता में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है. प्रधानमंत्री Narendra Modi के 9 मई के दौरे और Brigade Parade Ground में होने वाले भव्य समारोह को देखते हुए Kolkata Police ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. 16 घंटे तक भारी वाहनों पर रोक कोलकाता पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक शहर में भारी और मालवाहक वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी. हालांकि एलपीजी, ऑक्सीजन, दूध, दवा, फल-सब्जी और मछली जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट दी गई है. कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट ब्रिगेड परेड ग्राउंड और Victoria Memorial के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इस वजह से कई अहम मार्गों पर ट्रैफिक बंद या डायवर्ट रहेगा. इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा: एस्प्लेनेड खिदिरपुर रोड हॉस्पिटल रोड क्वींसवे एजेसी बोस रोड कैथेड्रल रोड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इन रास्तों से बचें और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें. नो-पार्किंग जोन घोषित विक्टोरिया मेमोरियल और ब्रिगेड ग्राउंड के आसपास कई इलाकों को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया है. नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी. बस और ट्राम सेवाएं भी प्रभावित मध्य कोलकाता और ब्रिगेड इलाके की ओर जाने वाली कई बस और ट्राम सेवाओं के रूट बदले जा सकते हैं. यात्रियों को देरी और ट्रैफिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है. पुलिस ने लोगों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी है. 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना प्रशासन को उम्मीद है कि शपथ ग्रहण समारोह में करीब 10 लाख लोग शामिल हो सकते हैं. इसे देखते हुए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है. करीब 4 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और स्नाइपर्स के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है. ब्रिगेड ग्राउंड बना ‘नो-फ्लाई जोन’ सुरक्षा कारणों से ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है. निजी ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. नागरिकों के लिए पुलिस की अपील कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें. रियल-टाइम जानकारी के लिए पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर नजर रखने की सलाह दी गई है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0