कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अमित शाह के दो संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपना पसंदीदा चेहरा लगभग तय कर लिया है। शुभेंदु अधिकारी को मिले बड़े संकेत कोलकाता पहुंचने पर अमित शाह का स्वागत करने कई वरिष्ठ बीजेपी नेता एयरपोर्ट पहुंचे थे। इनमें शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी शामिल थे। इस दौरान अमित शाह ने शुभेंदु अधिकारी की पीठ थपथपाकर उन्हें बधाई दी, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा एयरपोर्ट से रवाना होते समय अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी एक ही गाड़ी में साथ गए। बीजेपी के अंदर इसे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शुभेंदु अधिकारी को बढ़त मिलने का संकेत माना जा रहा है। विधायक दल की बैठक में होगा फैसला आज शाम भाजपा विधायक दल की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा। यही नेता पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनेगा। पार्टी ने अमित शाह को केंद्रीय पर्यवेक्षक और बिप्लव कुमार देव को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बंगाल में पहली बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत सरकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी ने 2021 की अपनी सभी सीटें बचाने के साथ 130 नई सीटें भी जीतीं। दूसरी ओर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राज्यपाल द्वारा 17वीं विधानसभा भंग किए जाने के बाद अब सबकी नजरें भाजपा विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जहां बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
पश्चिम बंगाल बोर्ड ने जारी किया 10वीं का रिजल्ट (WBBSE) ने माध्यमिक यानी 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से परिणाम घोषित किए। इस साल कुल 86.83 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं। करीब 9 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार था, जो अब खत्म हो गया है। छात्र सुबह 10:15 बजे से आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। अभिरूप भद्रा ने किया टॉप इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभिरूप भद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.71 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स की सूची में कई छात्रों ने बेहतरीन अंक दर्ज किए हैं। WB Madhyamik Result 2026 टॉपर्स लिस्ट रैंक नाम प्रतिशत 1 अभिरूप भद्रा 99.71% 2 प्रियतोष मुखर्जी 99.43% 3 सौर्य जाना 99.29% 3 अंकन कुमार जाना 99.29% 3 मैनाक मंडल 99.29% 4 अरिजीत कर 99.14% इन वेबसाइट्स पर देखें रिजल्ट छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं: wbresults.nic.in WBBSE Official Website ऐसे करें WB Board 10th Result 2026 चेक सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। “WB Madhyamik Result 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा। मार्कशीट डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें। कब मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट? बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रिजल्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद छात्रों को उनकी स्कूलों के माध्यम से ओरिजिनल मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। आगे की पढ़ाई और एडमिशन प्रक्रिया के लिए यह मार्कशीट बेहद जरूरी होगी। फरवरी में हुई थी परीक्षा पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा 2026 का आयोजन 2 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक किया गया था। परीक्षा ऑफलाइन मोड में एक ही शिफ्ट में सुबह 10:45 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई थी। इस वर्ष राज्यभर के 2,682 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 9.71 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें 5.44 लाख छात्राएं, 4.26 लाख छात्र और एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार शामिल थे।
West Bengal के Paschim Medinipur जिले के सबंग इलाके में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय पार्टी कार्यालय से कथित तौर पर भारी मात्रा में बम बरामद होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. शपथ ग्रहण से पहले सामने आई इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. विष्णुपुर इलाके में मचा हड़कंप जानकारी के मुताबिक, सबंग ब्लॉक के 13 नंबर विष्णुपुर क्षेत्र स्थित All India Trinamool Congress के स्थानीय कार्यालय में विस्फोटक होने की सूचना भाजपा कार्यकर्ताओं को मिली थी. खबर फैलते ही इलाके में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और तनाव का माहौल बन गया. स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय पुलिस और Central Armed Police Forces की टीम मौके पर पहुंची. सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कथित तौर पर डिब्बों में रखे कई ताजा बम बरामद किए गए. बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया घटना की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्ता मौके पर बुलाया गया. पुलिस के अनुसार विस्फोटकों को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए विशेष सावधानी बरती गई. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि: बम वहां कैसे पहुंचे इन्हें किस मकसद से रखा गया था विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप Bharatiya Janata Party ने इस घटना को लेकर टीएमसी पर बड़ा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि चुनाव के बाद राजनीतिक बदले और डर का माहौल बनाने के लिए पार्टी कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था. भाजपा ने कहा कि यह लोकतांत्रिक राजनीति नहीं बल्कि “आतंक फैलाने की कोशिश” है. TMC ने आरोपों को किया खारिज वहीं All India Trinamool Congress ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पार्टी का कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए यह साजिश रची गई है और संभव है कि विस्फोटक बाहर से रखे गए हों. इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद पूरे विष्णुपुर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पुलिस और केंद्रीय बल लगातार गश्त कर रहे हैं. जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के जरिए मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार सामने आ रही हिंसा और विस्फोटक बरामदगी की घटनाओं ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.
Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा नेताओं ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने लगाया बड़ी साजिश का आरोप भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा फैलाने की पहले से तैयारी की गयी थी. मिश्रा ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग नवीन मिश्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति चरम पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में हिंसा और बढ़ सकती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल खत्म होता जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. राजीव कुमार की भूमिका पर भी उठाये सवाल भाजपा नेता ने पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान राज्यसभा सांसद राजीव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये. उन्होंने डीजीपी और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) से मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाये. मिश्रा ने दावा किया कि जिस इलाके में यह हत्या हुई, वह बांग्लादेश सीमा के करीब है और इस घटना में कई बड़े लोगों की संलिप्तता हो सकती है. उन्होंने पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने की मांग की. चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद इलाके में तनाव चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना जिले में तनाव का माहौल है. इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. भाजपा ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति गठित की जाये, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी हो सके और दोषियों की पहचान हो सके. TMC की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. हालांकि, पार्टी पहले भी चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करती रही है और कई घटनाओं को स्थानीय विवाद या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया है. फिलहाल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को अलग-अलग घटनाओं में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक-एक कार्यकर्ता की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद कई इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस के अनुसार, न्यू टाउन इलाके में BJP कार्यकर्ता मधु मंडल की कथित तौर पर पिटाई के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि भल्लीगुड़ी इलाके में BJP का विजय जुलूस निकाला जा रहा था, उसी दौरान किसी बात को लेकर बहस हो गई। आरोप है कि बहस के बाद TMC समर्थकों ने मधु मंडल की बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया। गुस्साए BJP कार्यकर्ताओं ने जवाबी कार्रवाई करते हुए TMC समर्थकों के घरों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर तैनात किया गया। वहीं, दूसरी घटना बीरभूम जिले के नानूर इलाके में सामने आई, जहां TMC कार्यकर्ता अबीर शेख की हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, संतोषपुर गांव में ‘दूसरे गुट’ के साथ कहासुनी के दौरान उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। इस मामले में TMC ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नानूर से TMC के नवनिर्वाचित विधायक बिधान माझी ने दावा किया कि अबीर शेख पार्टी के सक्रिय सदस्य थे और उनकी हत्या BJP से जुड़े लोगों ने की है। हालांकि, BJP की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चुनाव के बाद राज्य में लगातार हो रही हिंसा को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है, वहीं सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को खारिज कर रहा है। फिलहाल, प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती हालात को शांतिपूर्ण बनाए रखना है।
West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य के कई जिलों में हिंसा और उपद्रव की खबरें सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टॉलीगंज में TMC कार्यालय पर कब्जे का आरोप कोलकाता के टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र से अरूप बिश्वास की हार के बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि भाजपा समर्थकों ने उनके पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया और वहां तृणमूल का झंडा हटाकर भगवा झंडा फहरा दिया। इसी तरह डबग्राम-फुलबारी और बहरामपुर से भी हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें सामने आई हैं। तृणमूल का आरोप है कि भाजपा समर्थित लोगों ने पार्टी कार्यालयों और नेताओं के घरों को निशाना बनाया। भवानीपुर में पार्षद कार्यालय पर हमला भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी हालात तनावपूर्ण रहे। वार्ड नंबर 70 के नॉर्दर्न पार्क इलाके में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद असीम कुमार बोस के कार्यालय पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि उपद्रवियों ने कार्यालय का ताला तोड़ा, अंदर घुसकर तोड़फोड़ की और सामान बाहर निकालकर आग लगाने की कोशिश की। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। जिलों में फैली अशांति चुनाव नतीजे सामने आने के बाद उत्तर से दक्षिण बंगाल तक कई इलाकों में झड़पों की खबरें आई हैं। बहरामपुर में तृणमूल पंचायत उप-प्रमुख के घर में तोड़फोड़ और कई कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। चुनाव आयोग और केंद्र की अपील स्थिति को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं केंद्र की ओर से भी शांति बनाए रखने और “बदले की राजनीति” से दूर रहने की अपील की गई है। राजनीतिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था चुनौती राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पैदा हुआ यह तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और नई सरकार कानून-व्यवस्था को कैसे संभालती है।
कोलकाता, एजेंसियां। बंगाल की 293 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। एक सीट (फालता) पर 21 मई को फिर से चुनाव होगा। शुरुआती रुझान में भाजपा 105 और टीएमसी 125 सीटों पर आगे चल रही है। झाड़ग्राम में भाजपा चारों सीटों पर आगे चल रही है। झाड़ग्राम इस चुनाव में काफी चर्चा में रहा। पीएम मोदी ने यहां एक दुकान पर रुककर झालमुड़ी खाई थी। भवानीपुर में ममता आगे भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी आगे हैं। नंदीग्राम से सुवेंदु बनर्जी को बढ़त है। राज्य में ममता बनर्जी 15 साल से सत्ता में हैं। वहीं आरजी कर रेप विक्टिम की मां रत्ना देबनाथ को बढ़त है।
West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। करीब 92 फीसदी मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या फिर Mamata Banerjee एक बार फिर वापसी करेंगी? या Narendra Modi का बंगाल फतह का सपना पूरा होगा? रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 91.78 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में यह करीब 9 फीसदी अधिक है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों इसे अपने पक्ष में बता रही हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में एक पुरानी कहावत है–"ज्यादा वोटिंग का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" क्या SIR बना गेमचेंजर? इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मृतक, पलायन कर चुके और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटने से कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई। ऐसे में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से ऊपर गया। यानी सिर्फ प्रतिशत देखकर नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इतिहास क्या कहता है? 2011 में भारी मतदान के बीच ममता बनर्जी ने लेफ्ट के 34 साल के शासन का अंत किया था। लेकिन 2016 और 2021 में मतदान कम होने के बावजूद टीएमसी सत्ता में लौटी। दूसरी ओर, 1984 में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी। वहीं 1989 में अपेक्षाकृत कम मतदान के बावजूद सत्ता बदल गई। मतलब साफ है–वोटिंग प्रतिशत अकेला पैमाना नहीं है। ममता के लिए क्या है चुनौती? ममता बनर्जी की सरकार को 15 साल पूरे हो चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, लक्ष्मी भंडार, मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं अभी भी टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। खासकर महिला वोटरों में ममता की पकड़ मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी की उम्मीदें क्यों बढ़ीं? बीजेपी पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध, NRC, घुसपैठ और केंद्र की योजनाओं को लेकर आक्रामक अभियान चला रही है। अगर बीजेपी को जीतना है, तो उसे हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण करना होगा। साथ ही, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन करना होगा। मुस्लिम वोट निर्णायक बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यदि यह वोट एकजुट होकर टीएमसी के पक्ष में जाता है, तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है। लेकिन अगर Asaduddin Owaisi या अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। ज्यादा वोटिंग का असली मतलब इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि मतदाता उत्साहित है। वह बदलाव भी चाहता हो सकता है, और मौजूदा सरकार को बचाने के लिए भी निकल सकता है। वोटिंग का उछाल लोकतंत्र के लिए शानदार संकेत है, लेकिन नतीजों की गारंटी नहीं। आखिर बाजी किसके हाथ? फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। ममता बनर्जी के पास मजबूत संगठन, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं बीजेपी के पास मोदी फैक्टर, आक्रामक प्रचार और सत्ता विरोधी माहौल का भरोसा। 4 मई को ही तय होगा कि बंगाल में फिर "दीदी" का जादू चलेगा या "मोदी मैजिक" इतिहास रचेगा। अभी के लिए इतना तय है–बंगाल की लड़ाई बेहद रोमांचक और कांटे की है।
कोलकाता/हुगली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हुगली नदी के तट पर समय बिताया। अपने बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने न सिर्फ लोगों और नाविकों से मुलाकात की, बल्कि उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाया। उन्होंने इस अनुभव की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। हुगली तट पर पीएम मोदी का दौरा और जनता से संवाद पीएम मोदी सुबह हुगली नदी पहुंचे, जहां उन्होंने मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों और स्थानीय नाविकों से बातचीत की। उन्होंने नाविकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम बेहद प्रेरणादायक है। इस दौरान उन्होंने नदी के किनारे खड़े होकर कई तस्वीरें भी लीं, जिसमें उनकी फोटोग्राफी में रुचि देखने को मिली। सोशल मीडिया पर साझा की भावनाएं प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गंगा का बंगाल की संस्कृति और आत्मा में विशेष स्थान है। उन्होंने इसे सभ्यता की शाश्वत चेतना से जोड़ते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर था। विकास और समृद्धि का संदेश पीएम मोदी ने अपने संदेश में पश्चिम बंगाल के विकास और बंगाली समाज की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। चुनावी माहौल में बढ़ी गतिविधि गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। पीएम मोदी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 4 मई को आएंगे नतीजे पूरे चुनावी प्रक्रिया के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, जहां वे लगातार जनता से संवाद कर रहे हैं और पार्टी के प्रचार को मजबूत कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल: West Bengal विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी सरगर्मी चरम पर है। इस बीच Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) भी अपनी खास रणनीति के तहत मैदान में सक्रिय नजर आ रहा है। संघ ने राज्य के 250 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख छोटी-छोटी बैठकें कर मतदाताओं तक पहुंच बनाने का दावा किया है। ‘लोक मत परिष्कार’ के जरिए जनसंपर्क संघ सीधे चुनाव प्रचार नहीं करता, लेकिन ‘लोक मत परिष्कार’ अभियान के तहत उसकी टीमें घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं। चार-पांच स्वयंसेवकों की छोटी टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए लोगों से मिल रही हैं और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। क्या संदेश दे रहे स्वयंसेवक? RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जनसंपर्क के दौरान लोगों से: बिना डर और दबाव के वोट डालने की अपील NOTA पर वोट न देने की सलाह 100% मतदान सुनिश्चित करने का आग्रह साथ ही पर्चों के जरिए राज्य के मुद्दों पर जानकारी दी जा रही है। किन मुद्दों पर फोकस? जनसंपर्क अभियान में कुछ प्रमुख मुद्दों को खास तौर पर उठाया जा रहा है: महिला सुरक्षा भ्रष्टाचार और घोटाले (जैसे शिक्षक भर्ती विवाद) घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन सरकारी नीतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल BJP को अप्रत्यक्ष समर्थन? हालांकि RSS खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है, लेकिन उसकी यह गतिविधि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। राज्य में मुख्य मुकाबला Bharatiya Janata Party (BJP) और All India Trinamool Congress (TMC) के बीच है। प्रचार थमने से पहले आखिरी जोर 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले आज शाम प्रचार थम जाएगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने मतदाताओं तक आखिरी समय में अधिकतम पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सियासत अब ‘झालमुरी’ वीडियो पर गरमा गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोला है और इसे “नौटंकी” करार दिया है। क्या है पूरा मामला? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे झाड़ग्राम की एक साधारण दुकान पर रुककर मशहूर बंगाली स्नैक झालमुरी खरीदते और खाते नजर आए। वीडियो में पीएम दुकानदार को पैसे देने पर जोर देते दिखे, जबकि दुकानदार मना करता रहा। ममता का हमला–‘कैमरे पहले से तैयार थे’ इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि यह “अचानक” कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री बिना कार्यक्रम के अचानक रुके, तो वहां कैमरे पहले से कैसे मौजूद थे? यह सब पहले से प्लान किया गया था।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के पॉकेट में 10 रुपये का नोट! क्या कोई इस पर विश्वास करेगा? यह सिर्फ नौटंकी है।” खान-पान की राजनीति पर भी निशाना ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी पर लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है और किसी पर भी प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक हमले का रूप ले रहे हैं।
आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दबाव में रैली के लिए बुक की गई करीब 200 बसों की बुकिंग रद्द कर दी गई। BJP का आरोप: बस मालिकों को दी गई धमकी BJP के अनुसार, कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से कार्यकर्ताओं को रैली में लाने के लिए 200 बसें बुक की गई थीं पश्चिम बर्धमान जिला भाजपा महासचिव केशव पोद्दार का दावा: बस मालिकों को बुकिंग रद्द करने के लिए मजबूर किया गया एडवांस राशि भी वापस करवाई गई आरोप है कि TMC से जुड़े संगठनों ने बस मालिकों को चेतावनी दी कि BJP समर्थकों को ले जाने पर वाहनों को खड़ा कर दिया जाएगा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा TMC का पलटवार: आरोप बेबुनियाद INTTUC (ट्रांसपोर्ट यूनियन) नेता राजू अहलुवालिया ने आरोपों को बताया निराधार कहा- बसें यूनियन से जुड़ी हैं, किसी पार्टी के लिए बाध्य नहीं BJP अपनी संगठनात्मक कमजोरी छिपाने के लिए आरोप लगा रही है BJP का दावा: रैली पर नहीं पड़ेगा असर आसनसोल नॉर्थ सीट से उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा: कुछ जगह बुकिंग रद्द हुई है लेकिन PM मोदी की लोकप्रियता से भीड़ जरूर जुटेगी चुनावी माहौल में बढ़ी सियासत इस घटना ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है अब नजरें गुरुवार को होने वाली PM मोदी की रैली की भीड़ पर टिकी हैं यह देखना अहम होगा कि इस विवाद का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2021 का नंदीग्राम चुनाव सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में से एक रहा। इस सीट पर बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया था। आइए जानते हैं वे अहम कारण, जिनकी वजह से यह परिणाम सामने आया। 1. रणनीति का बड़ा फर्क: रैली vs संगठन ममता बनर्जी ने अपने कुल खर्च का 89.5% बड़ी रैलियों और जनसभाओं पर लगाया शुभेंदु अधिकारी ने जमीनी संगठन, लोकल नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया नतीजा: लोकल स्तर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई 2. खर्च कम, लेकिन असरदार ममता बनर्जी: ₹21.88 लाख खर्च शुभेंदु अधिकारी: ₹23.62 लाख खर्च शुभेंदु ने ममता से करीब ₹1.74 लाख ज्यादा खर्च किया लेकिन असली फर्क खर्च की रणनीति ने डाला, न कि सिर्फ रकम ने 3. फंडिंग और उपयोग में अंतर ममता के पास कुल ₹40 लाख का फंड, लेकिन उन्होंने सिर्फ 54.7% खर्च किया शुभेंदु के पास ₹21.02 लाख, लेकिन उन्होंने 112% तक खर्च किया (अतिरिक्त संसाधनों के साथ) शुभेंदु ने आक्रामक निवेश मॉडल अपनाया 4. लोकल नेटवर्क और कैडर की ताकत ममता के पास 116 वाहन और 1,400+ कार्यकर्ता शुभेंदु को मिला BJP का मजबूत राष्ट्रीय कैडर और संगठन बूथ स्तर पर बेहतर मैनेजमेंट ने चुनाव का रुख बदला 5. वोट और प्रति वोट खर्च ममता बनर्जी: 41,505 वोट | ₹52.73 प्रति वोट खर्च शुभेंदु अधिकारी: 43,461 वोट | ₹54.36 प्रति वोट खर्च मामूली अंतर, लेकिन निर्णायक जीत 6. अंदरूनी फूट भी बनी वजह TMC में स्थानीय स्तर पर मतभेद शुभेंदु पहले TMC में थे, जिससे उन्हें स्थानीय समीकरणों की गहरी समझ थी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सतह पर भले ही Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) की पकड़ मजबूत दिखती हो, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए आंकड़े चुनावी समीकरण में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ राजनीतिक माहौल तक सीमित नहीं, बल्कि वोटिंग पैटर्न और सीट-दर-सीट मुकाबले को भी प्रभावित कर सकता है। सबसे बड़ा झटका मतदाता सूची में हुए बदलाव से जुड़ा है। SIR प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम हटाए गए हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत हटाव छह जिलों-मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, और उत्तर-दक्षिण 24 परगना-से हुआ है। ये सभी क्षेत्र पारंपरिक रूप से TMC के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। ऐसे में इस बड़े बदलाव ने चुनावी तस्वीर को पहले से ज्यादा अनिश्चित बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषण यह भी बताता है कि TMC का वोट शेयर भले ही अधिक हो, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा कुछ खास क्षेत्रों तक सीमित है, खासकर मुस्लिम बहुल सीटों में। इन सीटों पर भारी जीत का अंतर मिलता है, लेकिन यही “अतिरिक्त वोट” अन्य सीटों पर कोई खास फायदा नहीं दे पाते। इसके उलट Bharatiya Janata Party (BJP) का वोट राज्यभर में अपेक्षाकृत समान रूप से फैला हुआ है, जिससे उसे करीबी मुकाबलों में बढ़त मिल सकती है। आंकड़ों के अनुसार, TMC के पास 114 सीटें ऐसी हैं जहां जीत का अंतर 10 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि BJP के पास केवल 35 सीटें इस श्रेणी में आती हैं। 2024 के आंकड़ों के आधार पर TMC के लगभग 55.8 लाख वोट “वेस्टेड” माने जा रहे हैं, जबकि BJP के लिए यह संख्या काफी कम-करीब 11.9 लाख-है। इसका सीधा मतलब है कि BJP के वोट ज्यादा “इफेक्टिव” साबित हो सकते हैं। हालांकि BJP के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मतुआ समुदाय से जुड़े शरणार्थी वोट बैंक में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से पार्टी को नुकसान हो सकता है, खासकर उन 55 सीटों पर जहां यह समुदाय प्रभावशाली है। लेकिन उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे इलाकों में अपेक्षाकृत कम कटौती BJP के लिए राहत की बात हो सकती है। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि करीब 58 करीबी सीटों पर सिर्फ 1.92 लाख वोटों का झुकाव चुनावी नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है। यानी अब यह चुनाव कुल वोट प्रतिशत से ज्यादा, सीट-दर-सीट मार्जिन का खेल बन गया है। इसके अलावा, राज्य में महिला मतदाताओं के अनुपात में गिरावट (959 से घटकर 950 प्रति 1000 पुरुष) भी एक नया फैक्टर बनकर उभरा है, जो Mamata Banerjee के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुल मिलाकर, एंटी-इंकम्बेंसी, मतदाता सूची में बदलाव और वोटों का असमान वितरण-ये तीनों कारक मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा खुला और दिलचस्प हो गया है। अब देखना होगा कि यह आंकड़ों का गणित वास्तविक चुनावी नतीजों में कितना बदलता है।
पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनावी सरगर्मी के बीच Abhishek Banerjee ने भाजपा और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने चुनावी रैलियों में धर्म की राजनीति को “छलावा” करार देते हुए इसे जनता को गुमराह करने की रणनीति बताया। कोलकाता और उत्तर बंगाल के कई इलाकों-नाटाबाड़ी, जलपाईगुड़ी और कुमारग्राम-में जनसभाओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि “विकास बनाम दमन” की सीधी लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म को केवल राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है। धार्मिक राजनीति पर सवाल Abhishek Banerjee ने प्रधानमंत्री मोदी के कूचबिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे मदनमोहन मंदिर तक दर्शन करने नहीं गए, जिससे उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठता है। बनर्जी ने इसे “राजनीतिक दिखावा” बताया और कहा कि भाजपा का धर्म से वास्तविक जुड़ाव नहीं, बल्कि चुनावी लाभ से है। ‘डबल इंजन सरकार’ पर निशाना तृणमूल नेता ने भाजपा के “डबल इंजन सरकार” के नारे को भी आड़े हाथों लिया। उनका आरोप था कि भाजपा के सांसद और विधायक जनता से कटे हुए हैं और चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया। उन्होंने नारायणी बटालियन, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय और पर्यटन विकास जैसी अधूरी परियोजनाओं का मुद्दा उठाया। राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने सड़क, पुल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक योजनाओं का हवाला दिया। ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘खाद्य साथी’, ‘युवा साथी’ और ‘बांग्लार बाड़ी’ जैसी योजनाओं को आम जनता के लिए लाभकारी बताया। चाय बागान मजदूरों के लिए बड़ा वादा जलपाईगुड़ी की रैली में बनर्जी ने चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी ₹250 से बढ़ाकर ₹300 करने का वादा दोहराया। इसके साथ ही किसानों के लिए सस्ते बीज, कोल्ड स्टोरेज और ₹30,000 करोड़ के कृषि निवेश की घोषणा भी की गई। महंगाई और केंद्र पर आरोप महंगाई को बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने गैस, पेट्रोल, खाद और जरूरी वस्तुओं के बढ़ते दामों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही नागरिकता और अन्य मुद्दों के जरिए लोगों को डराने का आरोप भी लगाया। बनर्जी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि यह चुनाव “पहचान और अधिकार” की लड़ाई है और जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में चौथी बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनेगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। सिलीगुड़ी में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा- “जिस दिन ममता बनर्जी और INDI गठबंधन की सरकार बनेगी, हम पाकिस्तान को उनके घर में घुसकर मारेंगे।” क्या है पूरा मामला? हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया था कि अगर भारत कोई कदम उठाता है, तो लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जा सकता है इस बयान के जवाब में अभिषेक बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा? “मैंने ख्वाजा आसिफ का नाम अपनी लिस्ट में लिख लिया है” “सरकार बनने पर हम उन्हें उनके घर में घुसकर जवाब देंगे” उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए केंद्र सरकार पर निशाना अभिषेक बनर्जी ने कहा- “अमित शाह और राजनाथ सिंह चुप हैं” “जब पाकिस्तान कोलकाता को धमकी देता है, तब कोई जवाब क्यों नहीं?” पाकिस्तान का बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था- भारत “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” की योजना बना सकता है अगर ऐसा हुआ तो “लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जाएगा” भारत की प्रतिक्रिया (पहले) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का जवाब “अभूतपूर्व और निर्णायक” होगा
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। ममता को बताया “सुपर टाइगर” आईएएनएस से बातचीत में पप्पू यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा: “बंगाल की संस्कृति की रक्षा करने वाली, बांग्ला की आवाज-एक ही शेरनी है, ममता दीदी। पूरा बंगाल और बंगाली भावनाएं उनके साथ हैं।” BJP पर तीखा हमला पप्पू यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा: बीजेपी बंगाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा के खिलाफ रही है पार्टी बंगाल में कभी मजबूत स्थिति में नहीं रही “100 जन्म में भी बंगाल की जनता बीजेपी को स्वीकार नहीं करेगी” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की जीत रणनीति और साजिश पर आधारित होती है। चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं बीजेपी राज्य में सत्ता में आने का दावा कर रही है वहीं क्षेत्रीय और विपक्षी दल ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल बता रहे हैं BJP का पलटवार पप्पू यादव के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा: “सुपर टाइगर और शेरनी जैसे जुमलों से जनता प्रभावित नहीं होगी। जिनका खुद का जनाधार नहीं होता, वे दूसरों के सहारे राजनीति करते हैं।” उन्होंने पप्पू यादव के बयान को “हास्यास्पद” और सिर्फ सुर्खियों में रहने की कोशिश बताया।
कोलकाता/तिरुवनंतपुरम: विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल और केरल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो कर चुनावी माहौल गरमा दिया, वहीं केरल में UDF ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो जारी कर कई बड़े वादे किए हैं। भवानीपुर में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे, जो इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा: “इस बार बंगाल में बदलाव तय है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है, वोटरों को कोई गुंडा नहीं रोक सकता।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य सिर्फ जीत नहीं, बल्कि “ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हराना है।” भवानीपुर सीट पर सीधी टक्कर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी भी चुनाव मैदान में हैं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी ने यहां से उतारा है ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से भी उम्मीदवार हैं इस सीट को लेकर मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। चुनावी माहौल तेज दोनों राज्यों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है: बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच सीधी टक्कर केरल में LDF बनाम UDF मुकाबला नेताओं के रोड शो, रैलियां और वादों के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।
कोलकाता: Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी को उनके पद से हटा दिया। आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नरियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का नया प्रधान सचिव बनाया गया है। चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की कोशिश चुनाव आयोग का कहना है कि यह फैसला निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। चुनावी माहौल के बीच प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का फेरबदल राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। चुनावी प्रचार में प्रमुख मुद्दे बंगाल में इस बार चुनाव प्रचार कई बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। इनमें सबसे प्रमुख है ‘बंगाली अस्मिता’ का सवाल। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा पर लगातार बंगाली पहचान पर हमले का आरोप लगाती रही हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता अवैध घुसपैठ और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की रैलियों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। मतुआ समुदाय और वोट बैंक की राजनीति राज्य की लगभग 50 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाला मतुआ समुदाय भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इस समुदाय के समर्थन से भाजपा को कई सीटों पर फायदा मिला था, जबकि तृणमूल कांग्रेस भी इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी है। मतदाता सूची में बड़े बदलाव चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लगभग 63.66 लाख नाम हटाए जाने की खबर ने भी राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इससे राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है। विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में हुए इन बदलावों से कई क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच कोलकाता के धर्मतला में चल रहे धरना मंच से तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे को लेकर बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार में साहस है तो संसद में ऐसा कानून लाकर दिखाए, जिसमें एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को राजनीति में रहने की अनुमति हो। अपने संबोधन में Abhishek Banerjee ने कहा कि बीजेपी लगातार तृणमूल कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। लेकिन अगर पार्टी को वास्तव में इस मुद्दे पर आपत्ति है, तो उसके पास केंद्र में सत्ता है और संसद में बहुमत भी। ऐसे में वह “एक परिवार, एक नेता” का कानून क्यों नहीं लाती? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ऐसा कोई विधेयक संसद में लाया जाता है, तो वह स्वयं उस बिल के समर्थन में मतदान करेंगे और राजनीति से संन्यास लेने में भी पीछे नहीं हटेंगे। अपने राजनीतिक सफर का किया जिक्र अपने भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने अपने राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के बीच जाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया है और हर चुनाव में जनता के फैसले को स्वीकार किया है। वर्ष 2014 में उन्होंने पहली बार डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था और उसके बाद हुए चुनावों में भी उन्हें लाखों वोटों के अंतर से जीत मिली। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी परिवार की वजह से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और समर्थन का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह भी तंज कसा कि जो लोग खुद कभी जनता के बीच जाकर चुनावी परीक्षा नहीं देते, वही आज परिवारवाद पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने Election Commission of India की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के कुछ फैसलों ने राज्य में तनाव का माहौल पैदा किया है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निर्णय दिल्ली के दबाव में लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और उनके ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना था कि जब बीजेपी के बड़े नेता जिस होटल में ठहरते हैं, उसी होटल में चुनाव आयोग के अधिकारी भी रुकते हैं, तो स्वाभाविक रूप से निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होता है। “यह सिर्फ सत्ता का नहीं, न्याय का चुनाव” अपने संबोधन के अंत में Abhishek Banerjee ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव केवल सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि अन्याय और राजनीतिक साजिशों के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव जनता की आवाज उठाने, विरोध दर्ज कराने और लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर है। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल की जनता पूरी मजबूती के साथ एकजुट होगी और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए अपना स्पष्ट जनादेश देगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।