कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। ममता को बताया “सुपर टाइगर” आईएएनएस से बातचीत में पप्पू यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा: “बंगाल की संस्कृति की रक्षा करने वाली, बांग्ला की आवाज-एक ही शेरनी है, ममता दीदी। पूरा बंगाल और बंगाली भावनाएं उनके साथ हैं।” BJP पर तीखा हमला पप्पू यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा: बीजेपी बंगाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा के खिलाफ रही है पार्टी बंगाल में कभी मजबूत स्थिति में नहीं रही “100 जन्म में भी बंगाल की जनता बीजेपी को स्वीकार नहीं करेगी” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की जीत रणनीति और साजिश पर आधारित होती है। चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं बीजेपी राज्य में सत्ता में आने का दावा कर रही है वहीं क्षेत्रीय और विपक्षी दल ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल बता रहे हैं BJP का पलटवार पप्पू यादव के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा: “सुपर टाइगर और शेरनी जैसे जुमलों से जनता प्रभावित नहीं होगी। जिनका खुद का जनाधार नहीं होता, वे दूसरों के सहारे राजनीति करते हैं।” उन्होंने पप्पू यादव के बयान को “हास्यास्पद” और सिर्फ सुर्खियों में रहने की कोशिश बताया।
कोलकाता/तिरुवनंतपुरम: विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल और केरल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो कर चुनावी माहौल गरमा दिया, वहीं केरल में UDF ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो जारी कर कई बड़े वादे किए हैं। भवानीपुर में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे, जो इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा: “इस बार बंगाल में बदलाव तय है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है, वोटरों को कोई गुंडा नहीं रोक सकता।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य सिर्फ जीत नहीं, बल्कि “ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हराना है।” भवानीपुर सीट पर सीधी टक्कर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी भी चुनाव मैदान में हैं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी ने यहां से उतारा है ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से भी उम्मीदवार हैं इस सीट को लेकर मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। चुनावी माहौल तेज दोनों राज्यों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है: बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच सीधी टक्कर केरल में LDF बनाम UDF मुकाबला नेताओं के रोड शो, रैलियां और वादों के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।
कोलकाता: Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी को उनके पद से हटा दिया। आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नरियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग का नया प्रधान सचिव बनाया गया है। चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की कोशिश चुनाव आयोग का कहना है कि यह फैसला निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। चुनावी माहौल के बीच प्रशासनिक स्तर पर इस तरह का फेरबदल राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। चुनावी प्रचार में प्रमुख मुद्दे बंगाल में इस बार चुनाव प्रचार कई बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। इनमें सबसे प्रमुख है ‘बंगाली अस्मिता’ का सवाल। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा पर लगातार बंगाली पहचान पर हमले का आरोप लगाती रही हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता अवैध घुसपैठ और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल की रैलियों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। मतुआ समुदाय और वोट बैंक की राजनीति राज्य की लगभग 50 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाला मतुआ समुदाय भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इस समुदाय के समर्थन से भाजपा को कई सीटों पर फायदा मिला था, जबकि तृणमूल कांग्रेस भी इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी है। मतदाता सूची में बड़े बदलाव चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद लगभग 63.66 लाख नाम हटाए जाने की खबर ने भी राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इससे राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है। विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में हुए इन बदलावों से कई क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, जिससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच कोलकाता के धर्मतला में चल रहे धरना मंच से तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे को लेकर बीजेपी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार में साहस है तो संसद में ऐसा कानून लाकर दिखाए, जिसमें एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति को राजनीति में रहने की अनुमति हो। अपने संबोधन में Abhishek Banerjee ने कहा कि बीजेपी लगातार तृणमूल कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाती रही है। लेकिन अगर पार्टी को वास्तव में इस मुद्दे पर आपत्ति है, तो उसके पास केंद्र में सत्ता है और संसद में बहुमत भी। ऐसे में वह “एक परिवार, एक नेता” का कानून क्यों नहीं लाती? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ऐसा कोई विधेयक संसद में लाया जाता है, तो वह स्वयं उस बिल के समर्थन में मतदान करेंगे और राजनीति से संन्यास लेने में भी पीछे नहीं हटेंगे। अपने राजनीतिक सफर का किया जिक्र अपने भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने अपने राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के बीच जाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया है और हर चुनाव में जनता के फैसले को स्वीकार किया है। वर्ष 2014 में उन्होंने पहली बार डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था और उसके बाद हुए चुनावों में भी उन्हें लाखों वोटों के अंतर से जीत मिली। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी परिवार की वजह से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और समर्थन का परिणाम है। साथ ही उन्होंने यह भी तंज कसा कि जो लोग खुद कभी जनता के बीच जाकर चुनावी परीक्षा नहीं देते, वही आज परिवारवाद पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठाए सवाल भाषण के दौरान Abhishek Banerjee ने Election Commission of India की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के कुछ फैसलों ने राज्य में तनाव का माहौल पैदा किया है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ निर्णय दिल्ली के दबाव में लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और उनके ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना था कि जब बीजेपी के बड़े नेता जिस होटल में ठहरते हैं, उसी होटल में चुनाव आयोग के अधिकारी भी रुकते हैं, तो स्वाभाविक रूप से निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होता है। “यह सिर्फ सत्ता का नहीं, न्याय का चुनाव” अपने संबोधन के अंत में Abhishek Banerjee ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव केवल सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि अन्याय और राजनीतिक साजिशों के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव जनता की आवाज उठाने, विरोध दर्ज कराने और लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर है। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल की जनता पूरी मजबूती के साथ एकजुट होगी और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए अपना स्पष्ट जनादेश देगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का धरना शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। वह पूरी रात कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरनास्थल पर ही मौजूद रहीं। ममता बनर्जी ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में 6 मार्च दोपहर 2 बजे से धरना शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाना पश्चिम बंगाल को बांटने की साजिश है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कई योजनाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि बंगाल कई सामाजिक योजनाओं को लागू करने में आगे रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में ‘बंगालर युवा साथी’ और ‘भूमिहीन खेत मजदूर’ जैसी योजनाओं की घोषणा की थी, जिन्हें अप्रैल से लागू किया जाना था। लेकिन अब सरकार ने इन्हें तुरंत लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। ममता ने कहा कि रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। धरना स्थल पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद हैं। सुबह से ही समर्थक धरना स्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे हैं। SIR के बाद लाखों नाम हटाए गए 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद करीब 63.66 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (मामले पर न्यायिक निर्णय या जांच प्रक्रिया अभी चल रही है) श्रेणी में रखा गया है, जिनकी पात्रता की जांच आने वाले हफ्तों में की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बदलावों का असर राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज