Enforcement Directorate ने दिल्ली और गोवा समेत कई स्थानों पर दो अलग-अलग मामलों में बड़ी छापेमारी की है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई बैंक फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में की गई है। पहले मामले में ईडी ने Deepak Singla के ठिकानों पर छापेमारी की। दीपक सिंगला Aam Aadmi Party की ओर से विश्वास नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार रह चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में की जा रही है, जिसके तहत दिल्ली और गोवा स्थित कई परिसरों की तलाशी ली गई। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी वर्ष 2024 में इसी मामले से जुड़ी जांच के दौरान ईडी ने सिंगला के ठिकानों पर छापेमारी की थी। हालांकि इस कार्रवाई पर उनकी ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 180 करोड़ की कथित ठगी मामले में भी कार्रवाई ईडी की दूसरी कार्रवाई दिल्ली के सुभाष नगर स्थित ‘बाबाजी फाइनेंस ग्रुप’ से जुड़े मामले में हुई। जांच एजेंसी ने समूह से जुड़े राम सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, बाबाजी फाइनेंस ग्रुप पर निवेश के नाम पर आम लोगों से करीब 180 करोड़ रुपये की कथित ठगी और धन की हेराफेरी करने का आरोप है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया और बाद में रकम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही एजेंसी ईडी दोनों मामलों में वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल धन का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।
नई दिल्ली/कोलकाता/बेंगलुरु/हैदराबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद स्थित कंपनी के दफ्तरों में की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी कथित कोयला चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। 2,742 करोड़ के घोटाले से जुड़ा मामला ED की यह कार्रवाई करीब 2,742 करोड़ रुपए के कोयला घोटाले से संबंधित बताई जा रही है। इस मामले में CBI ने 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की। डायरेक्टर और को-फाउंडर भी जांच के दायरे में छापेमारी के दायरे में कंपनी के को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह के ठिकाने भी शामिल हैं। इसके अलावा डायरेक्टर प्रतीक जैन पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। ED ने हाल ही में दोनों को बयान दर्ज कराने के लिए समन भी भेजा था। हालांकि, सिंह और जैन ने इन समन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, यह कहते हुए कि वे इस समय पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई इससे पहले जनवरी में ED ने कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। उस दौरान कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और सॉल्टलेक स्थित ऑफिस में जांच की गई थी। ममता बनर्जी भी पहुंची थीं मौके पर जनवरी में हुई कार्रवाई के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला था। छापेमारी सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई बाद में कोलकाता पुलिस कमिश्नर मौके पर पहुंचे कुछ ही देर बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचीं बताया जाता है कि ममता बनर्जी कुछ समय वहां रुकीं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक फाइल भी देखी गई। इसके बाद वे I-PAC के दफ्तर भी गईं। TMC के लिए चुनावी रणनीति संभालती है I-PAC I-PAC फिलहाल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट का काम कर रही है। कंपनी डेटा-आधारित चुनावी रणनीति, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में विशेषज्ञ मानी जाती है। I-PAC का इतिहास I-PAC की शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी पहले इसका नाम Citizens for Accountable Governance (CAG) था बाद में इसे I-PAC नाम दिया गया प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद कंपनी की कमान पूरी तरह प्रतीक जैन के पास आ गई आगे क्या? ED की यह कार्रवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और इसके राजनीतिक निहितार्थ पर सभी की नजर रहेगी।
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज विधानसभा में 2026-27 का ₹1,03,700 करोड़ का बजट पेश किया। यह पिछले साल के ₹1 लाख करोड़ बजट से बड़ा है। इस बार बजट का फोकस “विकसित दिल्ली, हरित दिल्ली” विज़न पर रखा गया है, जिसमें 21% हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए तय किया गया है। बड़ी घोषणाएं होली-दीवाली पर फ्री LPG सिलेंडर: ₹260 करोड़ का प्रावधान महिला सुरक्षा: ₹50 करोड़ + CCTV के लिए ₹225 करोड़ क्लास 9 की लड़कियों को फ्री साइकिल: ₹90 करोड़ मेधावी छात्रों को लैपटॉप ANMOL योजना: नवजातों के 56 मुफ्त ब्लड टेस्ट (₹25 करोड़) महिलाओं को 1000 फ्री ई-ऑटो परमिट, ट्रांसजेंडर के लिए 100 Gig Workers Welfare Board का गठन जल्द स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस नया मेडिकल कॉलेज, UG/PG सीटें बढ़ेंगी (₹50 करोड़) नए स्कूल और विस्तार के लिए ₹475 करोड़ AI और टेक सीखने के लिए छात्रों के exposure visits (₹18.5 करोड़) MCD को ₹11,666 करोड़, सड़क सुधार के लिए ₹1,000 करोड़ 750 किमी सड़कें होंगी री-डेवलप ट्रांस-यमुना विकास के लिए ₹300 करोड़ नया इंटीग्रेटेड सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स ग्रीन बजट पर जोर कुल बजट का 21% पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और साफ-सफाई पर फोकस
राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें मां-बेटी की कहानी सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली है। मां को छोड़कर नहीं भागी बेटी पालम के साधनगर इलाके में लगी इस आग में 70 वर्षीय लाडो कश्यप और उनकी बेटी हिमांशी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जब आग तेजी से फैल रही थी, तब हिमांशी अपनी मां को बचाने के लिए आखिरी समय तक उनके साथ डटी रही। परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, लाडो तेज़ी से भागने में असमर्थ थीं। ऐसे में हिमांशी चाहती तो खुद को बचा सकती थी, लेकिन उसने मां को अकेला छोड़ने से इनकार कर दिया। बाथरूम में छिपकर बचने की कोशिश दोनों मां-बेटी ने आग से बचने के लिए बाथरूम में शरण ली, लेकिन घर में रखे कॉस्मेटिक सामान और प्लास्टिक के कारण आग तेजी से फैल गई। दम घुटने और आग की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बाद में दोनों के शव एक साथ मिले, जिसने इस त्रासदी को और भी मार्मिक बना दिया। 9 लोगों की गई जान इस हादसे में कश्यप परिवार के कुल 9 लोगों की मौत हुई। मृतकों में परिवार के कई सदस्य शामिल हैं, जबकि दो लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे परिवार के उजड़ जाने की कहानी बन गया है। रेस्क्यू में देरी पर उठे सवाल इस घटना के बाद राहत और बचाव कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लैडर समय पर काम नहीं कर पाई, जिससे तीसरी मंजिल पर फंसे लोगों तक मदद पहुंचने में देरी हुई। अब इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सियासी विवाद भी शुरू हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बहस तक की स्थिति बन गई। एक दर्दनाक सीख यह हादसा न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपदा के समय एक परिवार किन हालातों से गुजरता है। मां को बचाने के लिए बेटी का आखिरी सांस तक साथ निभाना, इस घटना को बेहद भावुक और हृदयविदारक बना देता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के पालम इलाके के साध नगर में बुधवार सुबह एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से तीन बच्चों समेत सात लोगों की मौत हो गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 30 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। कैसे फैली आग? शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कॉस्मेटिक की दुकान में लगी और तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। इमारत में धुएं के गुबार और फायर फैलने के कारण अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए। कुछ लोग इमारत से नीचे कूद गए। इमारत में कई कपड़े और कॉस्मेटिक स्टोर के साथ दूसरी और तीसरी मंजिल पर रिहायशी फ्लैट भी हैं। मौत और घायल: दमकलकर्मियों ने सात घायल व्यक्तियों (जिनमें तीन बच्चे शामिल थे) को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हादसे में तीन बच्चों सहित कुल सात लोगों की मौत हुई। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। प्रशासनिक कार्रवाई: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की जानकारी मिलने पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी दुख जताया और प्रभावित लोगों को आवश्यक मदद मुहैया कराने का भरोसा दिया। दमकल विभाग और पुलिस घटना स्थल पर बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, और प्रशासन पूरी तरह से स्थिति पर नजर रखे हुए है।
नई दिल्ली: राजधानी में स्थित Parliament House परिसर में सोमवार दोपहर अचानक खतरे का सायरन बजने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सायरन बजते ही प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। सूत्रों के मुताबिक यह घटना संसद भवन के विजय चौक एंट्रेंस गेट पर हुई, जहां एक कार परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। सुरक्षा प्रणाली वाहन के पास को स्कैन नहीं कर पाई, जिसके कारण एंट्री गेट पर लगा अलार्म सक्रिय हो गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल तुरंत हुआ सक्रिय अलार्म बजते ही वहां तैनात सुरक्षाकर्मी तुरंत अपनी-अपनी पोजीशन पर पहुंच गए और संदिग्ध वाहन को आगे बढ़ने से रोक दिया। सुरक्षा के लिहाज से प्रवेश द्वार पर लगे बैरियर को सक्रिय करते हुए पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। CISF ने संभाला मोर्चा घटना के बाद Central Industrial Security Force (CISF) के जवानों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए वाहन और उसके पास की जांच शुरू कर दी। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को घेरकर स्थिति पर नजर बनाए रखी। तकनीकी खराबी या अन्य कारण, जांच जारी प्राथमिक जानकारी के अनुसार बैरियर में अचानक असामान्य हलचल दर्ज होने के कारण सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हुई। फिलहाल जांच की जा रही है कि यह अलार्म तकनीकी खराबी की वजह से बजा या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। हालांकि कुछ देर की जांच के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई और विजय चौक प्रवेश द्वार पर वाहनों की आवाजाही फिर से सामान्य कर दी गई। सुरक्षा एजेंसियां एहतियात के तौर पर पूरे संसद परिसर पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।