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Parliament Security Alert Halts Vehicle Entry in Delhi

संसद परिसर में बजी खतरे की घंटी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, गाड़ियों की एंट्री रोकी

surbhi मार्च 16, 2026 0
Security alert at Parliament House in Delhi as vehicles were stopped and CISF investigated a triggered alarm.
Parliament Security Alert in Delhi

 

नई दिल्ली: राजधानी में स्थित Parliament House परिसर में सोमवार दोपहर अचानक खतरे का सायरन बजने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सायरन बजते ही प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोक दी गई।

सूत्रों के मुताबिक यह घटना संसद भवन के विजय चौक एंट्रेंस गेट पर हुई, जहां एक कार परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। सुरक्षा प्रणाली वाहन के पास को स्कैन नहीं कर पाई, जिसके कारण एंट्री गेट पर लगा अलार्म सक्रिय हो गया।

 

सुरक्षा प्रोटोकॉल तुरंत हुआ सक्रिय

अलार्म बजते ही वहां तैनात सुरक्षाकर्मी तुरंत अपनी-अपनी पोजीशन पर पहुंच गए और संदिग्ध वाहन को आगे बढ़ने से रोक दिया। सुरक्षा के लिहाज से प्रवेश द्वार पर लगे बैरियर को सक्रिय करते हुए पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

 

CISF ने संभाला मोर्चा

घटना के बाद Central Industrial Security Force (CISF) के जवानों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए वाहन और उसके पास की जांच शुरू कर दी। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर पूरे इलाके को घेरकर स्थिति पर नजर बनाए रखी।

 

तकनीकी खराबी या अन्य कारण, जांच जारी

प्राथमिक जानकारी के अनुसार बैरियर में अचानक असामान्य हलचल दर्ज होने के कारण सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हुई। फिलहाल जांच की जा रही है कि यह अलार्म तकनीकी खराबी की वजह से बजा या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

हालांकि कुछ देर की जांच के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई और विजय चौक प्रवेश द्वार पर वाहनों की आवाजाही फिर से सामान्य कर दी गई। सुरक्षा एजेंसियां एहतियात के तौर पर पूरे संसद परिसर पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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India successfully tests Vayu Astra-1 suicide drone capable of striking targets 100 km away at high altitude
14 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘वायु अस्त्र-1’ का कमाल, 100 KM दूर लक्ष्य तबाह करने वाला ड्रोन टेस्ट सफल

भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पुणे स्थित रक्षा कंपनी Nibe Limited ने अपने अत्याधुनिक ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण राजस्थान के Pokhran और उत्तराखंड के Joshimath के मलारी क्षेत्र में किया गया। कंपनी के अनुसार, ‘वायु अस्त्र-1’ ने रेगिस्तानी और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। यह ड्रोन 100 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है और रात के अंधेरे में भी लक्ष्य को पहचानकर निशाना साध सकता है। 100 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर सटीक हमला निबे लिमिटेड ने बताया कि ‘वायु अस्त्र-1’ ने अपने परीक्षण के दौरान 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को एक ही प्रयास में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। कंपनी के मुताबिक, इसकी संभावित सीईपी (Circular Error Probable) एक मीटर से भी कम रही, जो इसे बेहद सटीक हथियार बनाती है। ड्रोन में “अटैक एबॉर्ट” और “री-अटैक” जैसी आधुनिक क्षमताएं भी दी गई हैं। यानी मिशन के दौरान लक्ष्य बदलने या दोबारा हमला करने का विकल्प भी मौजूद है। 14 हजार फीट ऊंचाई पर भी शानदार प्रदर्शन उत्तराखंड के मलारी क्षेत्र में हुए परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ को 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ाया गया। कंपनी का दावा है कि ड्रोन ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरते हुए सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम तापमान और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच यह प्रदर्शन भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सटीक हमलों के लिए। रात में भी टैंक को बना सकता है निशाना कंपनी के अनुसार, यह लोइटरिंग म्यूनिशन बख्तरबंद वाहनों और टैंकों पर रात में भी हमला करने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने इन्फ्रारेड (IR) कैमरे की मदद से लक्ष्य को ट्रैक किया और दो मीटर के भीतर सटीक हमला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता आधुनिक युद्ध में भारतीय सेना को बड़ी बढ़त दे सकती है। क्या है ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’? लोइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में “सुसाइड ड्रोन” या “आत्मघाती ड्रोन” कहा जाता है। यह ड्रोन कुछ समय तक हवा में मंडराता रहता है और जैसे ही लक्ष्य मिलता है, सीधे उस पर हमला कर देता है। ‘वायु अस्त्र-1’ इजरायली तकनीक आधारित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम से प्रेरित बताया जा रहा है। इसे दुश्मन के ठिकानों, टैंकों और रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। बिना सरकारी खर्च के हुआ परीक्षण कंपनी ने बताया कि यह परीक्षण “नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट” (NCNC) मॉडल के तहत किया गया। रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया में इस मॉडल का मतलब होता है कि सरकार परीक्षण के लिए कोई भुगतान नहीं करती और उत्पाद खरीदने की बाध्यता भी नहीं होती। अगर परीक्षण सफल साबित होते हैं और सेना संतुष्ट होती है, तभी आगे खरीद प्रक्रिया शुरू की जाती है। कंट्रोल ट्रांसफर तकनीक का भी प्रदर्शन निबे लिमिटेड ने बताया कि परीक्षण के दौरान ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) से 70 किलोमीटर दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को नियंत्रण सौंपने की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक लंबी दूरी के युद्ध अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे ड्रोन को अलग-अलग स्थानों से नियंत्रित किया जा सकता है। रिकवरी क्षमता भी दिखाई कंपनी के अनुसार, मिशन पूरा होने के बाद इस सिस्टम ने रिकवरी क्षमता भी प्रदर्शित की। यानी जरूरत पड़ने पर इसे अगली उड़ानों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का भी सफल परीक्षण इससे पहले 20 मई को निबे लिमिटेड ने अपने ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ के सफल परीक्षण की घोषणा की थी। ओडिशा के Chandipur स्थित अंतरिम परीक्षण रेंज (ITR) में हुए परीक्षणों में सिस्टम ने सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। कंपनी को जनवरी 2026 में भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट विंडो के तहत इस सिस्टम के विकास और आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिला था। इस परियोजना के तहत 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले विशेष रॉकेट भी विकसित किए जा रहे हैं।  

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Rajya Sabha Election 2026: 10 राज्यों की 24 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को होगी वोटिंग

Election Commission of India ने जून और जुलाई 2026 में खाली होने वाली राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु की दो राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव कराने का भी ऐलान किया गया है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 10 राज्यों में राज्यसभा के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। वोटों की गिनती भी उसी दिन होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 1 जून को जारी होगा नोटिफिकेशन चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए 1 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून तय की गई है। इन सीटों पर चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। किन राज्यों में कितनी सीटों पर चुनाव? राज्यसभा की 24 सीटों के लिए जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें कई बड़े राज्य शामिल हैं। सीटों का विवरण इस प्रकार है: Andhra Pradesh – 4 सीट Gujarat – 4 सीट Karnataka – 4 सीट Madhya Pradesh – 3 सीट Rajasthan – 3 सीट Jharkhand – 2 सीट Manipur – 1 सीट Meghalaya – 1 सीट Arunachal Pradesh – 1 सीट Mizoram – 1 सीट इन सभी सीटों के लिए संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करेंगे। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में उपचुनाव चुनाव आयोग ने राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की भी घोषणा की है। ये सीटें सदस्यों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। महाराष्ट्र सीट Sunetra Pawar के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की एक राज्यसभा सीट खाली हुई है। विधायक बनने के बाद उन्होंने 6 मई को राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 4 जुलाई 2028 तक था। तमिलनाडु सीट वहीं, C. V. Shanmugam ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम सीट से विधायक चुने जाने के बाद 7 मई को राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी थी। उनका कार्यकाल 29 जून 2028 तक था। इन दोनों सीटों के लिए भी 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग की तैयारी चुनाव आयोग ने कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जाएंगी। आयोग की ओर से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और पूरी चुनाव प्रक्रिया की करीबी निगरानी की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन राज्यसभा चुनावों का असर संसद के ऊपरी सदन में विभिन्न दलों की ताकत पर पड़ सकता है। खासतौर पर गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है।  

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ED officials conduct raids in Kolkata and Murshidabad over alleged extortion racket linked to ex-IPS officer
बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, पूर्व IPS अफसर से जुड़े कथित उगाही रैकेट की जांच तेज

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया। ईडी ने कथित उगाही रैकेट से जुड़े मामले में कोलकाता और मुर्शिदाबाद समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक कारोबारी के घर, एक होटल और कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा जांच एजेंसी की एक टीम मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास के घर भी पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी देखी गई, ताकि तलाशी अभियान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईडी ने इस मामले में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। जांच के दायरे में एमडी अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और मुर्शिदाबाद स्थित अन्य संदिग्ध ठिकाने भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित उगाही नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संपर्कों से भी जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद कार्रवाई ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर शुक्रवार को यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और उगाही से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि यह मामला कथित उगाही और अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसमें अपराधियों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है, उनकी तरफ से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? ईडी की टीमें फिलहाल सभी स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।  

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