disaster news

Mayon Volcano erupting with lava and ash cloud as evacuations underway in Philippines
Philippines Volcano Eruption: ‘मायोन’ ज्वालामुखी का तांडव, 6 किमी दायरा सील–हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

मनीला, 4 मई: Philippines के अल्बे प्रांत में स्थित मशहूर Mayon Volcano एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। रविवार (3 मई) को ज्वालामुखी में तेज गतिविधि दर्ज की गई, जिसके बाद हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। 6 किलोमीटर का इलाका पूरी तरह सील प्रशासन ने ज्वालामुखी के आसपास 6 किलोमीटर के दायरे को ‘डेंजर जोन’ घोषित कर दिया है। लोगों को इस क्षेत्र में जाने से सख्त मना किया गया है। अधिकारियों ने लावा बहने, भूस्खलन और अचानक विस्फोट की चेतावनी जारी की है। ज्वालामुखी की सक्रियता को देखते हुए अलर्ट लेवल बढ़ाकर 3 कर दिया गया है, जो संभावित बड़े विस्फोट के खतरे का संकेत है। हजारों लोग राहत शिविरों में रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। कई गांवों को खाली करा लिया गया है। प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का काम कर रहा है। आसमान में राख के गुबार, विजिबिलिटी घटी ज्वालामुखी से निकल रही राख और गैस के कारण आसपास के इलाकों में घना धुंध जैसा माहौल बन गया है। सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो गई है ट्रांसपोर्ट सेवाएं प्रभावित हुई हैं लोगों को मास्क पहनने और घरों में रहने की सलाह दी गई है किस तरह के विस्फोट हो रहे हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, Mayon Volcano में फिलहाल ‘स्ट्रोम्बोलियन’ प्रकार के विस्फोट हो रहे हैं। इसमें: रुक-रुककर लावा निकलता है गैस और राख के गुबार उठते हैं छोटे लेकिन लगातार धमाके होते रहते हैं हालांकि ये मध्यम स्तर के विस्फोट हैं, लेकिन स्थिति तेजी से गंभीर भी हो सकती है। पर्यटन स्थल भी है मायोन ज्वालामुखी करीब 2,462 मीटर ऊंचा यह ज्वालामुखी अपनी परफेक्ट शंकु (cone) आकृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और एक बड़ा पर्यटन आकर्षण भी है। लेकिन इसकी सक्रियता के कारण इसे फिलीपींस का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी भी माना जाता है। प्रशासन अलर्ट मोड में सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राहत और बचाव टीमों की तैनाती मेडिकल सुविधाएं बढ़ाई गईं लोगों को लगातार अलर्ट संदेश जारी

surbhi मई 4, 2026 0
Rescue teams at firecracker factory blast site in Virudhunagar with debris and injured workers
तमिलनाडु में भीषण विस्फोट: विरुधुनगर की पटाखा फैक्ट्री में 23 की मौत, रेस्क्यू के दौरान दूसरा धमाका; 13 बचावकर्मी घायल

Tamil Nadu के Virudhunagar जिले में रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हो गया। इस दुर्घटना में 23 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राहत और बचाव कार्य के दौरान भी एक और धमाका हुआ, जिसमें 13 पुलिस, फायर और रेस्क्यू टीम के सदस्य घायल हो गए। हादसा कैसे हुआ? प्रारंभिक जांच के अनुसार: फैक्ट्री के उस हिस्से में विस्फोट हुआ जहां मजदूर बारूद और ज्वलनशील सामग्री के साथ काम कर रहे थे धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया आसपास के इलाके में भी इसकी गूंज सुनाई दी घटना के समय फैक्ट्री में करीब 30 मजदूर मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। मौत और घायलों का आंकड़ा इस हादसे में: 23 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है मृतकों में 16 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं 6 घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें ICU में भर्ती कराया गया है अधिकारियों का कहना है कि घायलों की हालत को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। रेस्क्यू के दौरान दूसरा विस्फोट हादसे के बाद जब राहत और बचाव कार्य चल रहा था, उसी दौरान: फैक्ट्री परिसर में एक और विस्फोट हो गया इस धमाके में 13 बचावकर्मी घायल हो गए सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया इससे साफ है कि स्थिति कितनी खतरनाक बनी हुई थी और रेस्क्यू टीम को भी जोखिम उठाना पड़ा। प्रशासन की कार्रवाई घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आ गया: पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है पूरे मामले की निगरानी के लिए एक वरिष्ठ IAS अधिकारी को तैनात किया गया है फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की भी जांच की जा रही है पीएम मोदी और सीएम स्टालिन ने जताया शोक प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। वहीं M. K. Stalin ने भी गहरी संवेदना जताई और: मंत्रियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए जिला प्रशासन को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा चिंताजनक बात यह है कि: 13 अप्रैल को भी इसी जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था उस हादसे में 2 मजदूरों की मौत हुई थी लगातार हो रही ऐसी घटनाएं सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती हैं। हादसे की संभावित वजह विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हादसों के पीछे आमतौर पर ये कारण होते हैं: ज्वलनशील पदार्थों के साथ लापरवाही सुरक्षा नियमों का पालन न होना भीड़भाड़ और सीमित जगह में काम पर्याप्त प्रशिक्षण और निगरानी की कमी

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Rescue teams and damaged buildings in Kabul after strong earthquake causes deaths and widespread panic
अफगानिस्तान में भूकंप से तबाही, काबुल में 8 की मौत; उत्तर भारत तक महसूस हुए झटके

अफगानिस्तान में शुक्रवार देर रात आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में राजधानी काबुल में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई इलाकों में दहशत का माहौल बन गया। भूकंप के झटके न सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान में, बल्कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए। 5.8 से 6.3 के बीच रही तीव्रता रिपोर्ट्स के मुताबिक भूकंप की तीव्रता अलग-अलग एजेंसियों ने अलग बताई है। कुछ संस्थानों ने इसे 5.8 से 5.9 के बीच बताया वहीं पाकिस्तान के अधिकारियों के अनुसार तीव्रता 6.3 दर्ज की गई हिंदूकुश पर्वतमाला में था केंद्र ‘यूरो-मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर’ और ‘यूएस जियोलॉजिकल सर्वे’ के अनुसार, भूकंप का केंद्र हिंदूकुश पर्वतमाला में था। यह अफगानिस्तान के कुंदुज शहर से लगभग 150 किमी पूर्व स्थित था भूकंप की गहराई 150 से 180 किलोमीटर के बीच बताई गई पाकिस्तान के कई शहरों में झटके भूकंप के झटके पाकिस्तान के कई इलाकों में महसूस किए गए, जिनमें शामिल हैं: इस्लामाबाद पेशावर स्वात चित्राल शांगला हालांकि, पाकिस्तान में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। उत्तर भारत में भी हिली धरती भारत में भी इस भूकंप का असर देखने को मिला। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में झटके महसूस किए गए झटके शुक्रवार रात करीब 9:45 बजे आए हालांकि, भारत में किसी नुकसान की सूचना नहीं है क्यों दूर-दूर तक महसूस हुए झटके? भूकंप की गहराई ज्यादा (150+ किमी) होने के कारण इसके झटके बड़े क्षेत्र में फैल गए, जिससे कई देशों में लोग इसे महसूस कर सके।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0