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Mayon eruption triggers mass evacuation in Philippines

Philippines Volcano Eruption: ‘मायोन’ ज्वालामुखी का तांडव, 6 किमी दायरा सील–हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

surbhi मई 4, 2026 0
Mayon Volcano erupting with lava and ash cloud as evacuations underway in Philippines
Mayon Volcano Eruption Philippines 2026

मनीला, 4 मई: Philippines के अल्बे प्रांत में स्थित मशहूर Mayon Volcano एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। रविवार (3 मई) को ज्वालामुखी में तेज गतिविधि दर्ज की गई, जिसके बाद हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

6 किलोमीटर का इलाका पूरी तरह सील

प्रशासन ने ज्वालामुखी के आसपास 6 किलोमीटर के दायरे को ‘डेंजर जोन’ घोषित कर दिया है। लोगों को इस क्षेत्र में जाने से सख्त मना किया गया है। अधिकारियों ने लावा बहने, भूस्खलन और अचानक विस्फोट की चेतावनी जारी की है।

ज्वालामुखी की सक्रियता को देखते हुए अलर्ट लेवल बढ़ाकर 3 कर दिया गया है, जो संभावित बड़े विस्फोट के खतरे का संकेत है।

हजारों लोग राहत शिविरों में

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। कई गांवों को खाली करा लिया गया है। प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का काम कर रहा है।

आसमान में राख के गुबार, विजिबिलिटी घटी

ज्वालामुखी से निकल रही राख और गैस के कारण आसपास के इलाकों में घना धुंध जैसा माहौल बन गया है।

  • सड़कों पर विजिबिलिटी कम हो गई है
  • ट्रांसपोर्ट सेवाएं प्रभावित हुई हैं
  • लोगों को मास्क पहनने और घरों में रहने की सलाह दी गई है

किस तरह के विस्फोट हो रहे हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, Mayon Volcano में फिलहाल ‘स्ट्रोम्बोलियन’ प्रकार के विस्फोट हो रहे हैं।
इसमें:

  • रुक-रुककर लावा निकलता है
  • गैस और राख के गुबार उठते हैं
  • छोटे लेकिन लगातार धमाके होते रहते हैं

हालांकि ये मध्यम स्तर के विस्फोट हैं, लेकिन स्थिति तेजी से गंभीर भी हो सकती है।

पर्यटन स्थल भी है मायोन ज्वालामुखी

करीब 2,462 मीटर ऊंचा यह ज्वालामुखी अपनी परफेक्ट शंकु (cone) आकृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और एक बड़ा पर्यटन आकर्षण भी है। लेकिन इसकी सक्रियता के कारण इसे फिलीपींस का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी भी माना जाता है।

प्रशासन अलर्ट मोड में

सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • राहत और बचाव टीमों की तैनाती
  • मेडिकल सुविधाएं बढ़ाई गईं
  • लोगों को लगातार अलर्ट संदेश जारी
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Chinese and Iranian foreign ministers meeting in Beijing to discuss Middle East ceasefire and regional tensions
युद्ध के बाद पहली बार चीन-ईरान की बड़ी बैठक, युद्धविराम पर हुई अहम चर्चा

Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच चीन और ईरान के विदेश मंत्रियों की पहली अहम मुलाकात हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग पहुंचकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति, युद्धविराम और शांति प्रक्रिया को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. वांग यी ने कहा- व्यापक युद्धविराम जरूरी बीजिंग में हुई बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि दो महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष को अब रोका जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए व्यापक युद्धविराम बेहद जरूरी है. वांग यी ने कहा कि दुश्मनी का दोबारा शुरू होना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और सभी पक्षों को बातचीत और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए. युद्ध शुरू होने के बाद पहली उच्चस्तरीय मुलाकात 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ईरान और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है. चीन लंबे समय से ईरान का महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक साझेदार रहा है. ऐसे में इस मुलाकात को मिडिल ईस्ट संकट के बीच बेहद अहम माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाये रखने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिये हैं. चीन ने शांति वार्ता पर दिया जोर न्यूज एजेंसी AP के अनुसार, बैठक के दौरान चीनी पक्ष ने स्पष्ट कहा कि बातचीत और समझौते के जरिए ही इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है. चीन ने कहा कि युद्धविराम को मजबूत करना और सभी पक्षों को संवाद की प्रक्रिया में शामिल रखना बेहद जरूरी है, ताकि मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध टाला जा सके. अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते की चर्चा इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गयी हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश 14 सूत्रीय समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को लंबे समय तक रोकने की मांग की है. अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान कम से कम 20 वर्षों तक परमाणु संवर्धन गतिविधियों को बंद रखे. वहीं ईरान कथित तौर पर पांच वर्षों तक कार्यक्रम सीमित रखने के प्रस्ताव पर सहमत होने की बात कर रहा है. हालांकि अब तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. वैश्विक शक्तियां लगातार युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रही हैं, क्योंकि इस संघर्ष का असर तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.  

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ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- समझौता नहीं किया तो होगी भीषण बमबारी

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चीन-पाकिस्तान की ‘स्टील्थ डील’: J-35A फाइटर जेट खरीदने की तैयारी, क्या भारत के लिए बढ़ेगा खतरा?

चीन और पाकिस्तान के बीच एक अहम रक्षा सौदे की खबर सामने आई है, जिसने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान चीन से 40 J-35A स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में है। यह चीन का पांचवीं पीढ़ी (5th Generation) का लड़ाकू विमान है, जिसे खास तौर पर एक्सपोर्ट के लिए तैयार किया गया है। क्या है J-35A की खासियत? J-35A को “स्टील्थ” यानी रडार से बचने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यह विमान दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना हमला करने में सक्षम माना जाता है। चीन ने इसे उन देशों के लिए डिजाइन किया है, जो पश्चिमी देशों के महंगे फाइटर जेट–जैसे F-35 Lightning II–नहीं खरीद सकते। पाकिस्तान को 40 जेट, ट्रेनिंग भी शामिल रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील के तहत पाकिस्तान को 40 J-35A फाइटर जेट मिल सकते हैं। इसके साथ ही चीनी विशेषज्ञ पाकिस्तानी पायलटों को ट्रेनिंग भी देंगे। डिलीवरी 2026 के अंत तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। भारत के लिए क्यों चिंता? पाकिस्तान इस विमान को भारत के Rafale लड़ाकू विमान के मुकाबले के रूप में देख रहा है। जहां राफेल 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक ओमनीरोल फाइटर जेट है, वहीं J-35A एक स्टील्थ प्लेटफॉर्म है, जो रडार से बचने में ज्यादा सक्षम माना जाता है। राफेल: लंबी दूरी की Meteor Missile से लैस, बेहतरीन डॉगफाइट क्षमता J-35A: PL-15 और PL-10 मिसाइलों के साथ, स्टील्थ और इंटरनल वेपन बे पर फोकस शक्ति संतुलन पर असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील पूरी होती है, तो दक्षिण एशिया में हवाई शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है। फिलहाल भारत के पास पांचवीं पीढ़ी का कोई ऑपरेशनल फाइटर जेट नहीं है, जबकि पाकिस्तान इस तकनीक तक पहुंच बना सकता है। चीन की रणनीति क्या है? चीन J-35A के जरिए वैश्विक हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। यह विमान कम लागत वाला विकल्प माना जा रहा है, जो अमेरिकी F-35 जैसे महंगे जेट को चुनौती दे सकता है। क्या सच में बड़ा खतरा? हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल स्टील्थ तकनीक ही सब कुछ नहीं होती। राफेल जैसे विमान अपनी एडवांस्ड एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियार क्षमता के कारण बेहद प्रभावी हैं। ऐसे में असली संतुलन तकनीक, ट्रेनिंग और रणनीति पर निर्भर करेगा।  

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People shielding from extreme heat in Karachi as temperature crosses 44°C during deadly heatwave
पाकिस्तान में भीषण गर्मी का कहर: कराची में लू से 10 लोगों की मौत, तापमान 44°C के पार

पाकिस्तान इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां सिंध प्रांत समेत कई इलाकों में तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। खासकर कराची में हीटवेव ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बढ़ती गर्मी और लू के कारण अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। लू का कहर और मौतों का आंकड़ा एधी वेलफेयर ट्रस्ट के अनुसार, सोमवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों से पांच लोगों के शव बरामद किए गए। इसके अलावा, लू लगने के गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती पांच अन्य लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। संस्था के अधिकारी फैसल एधी ने बताया कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा तापमान पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (PMD) के मुताबिक, कराची में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जो साल 2018 के बाद का सबसे ज्यादा तापमान है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की संभावना कम है और हीटवेव का असर जारी रह सकता है। पहले ही जारी की गई थी चेतावनी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मौसम विभाग ने 2 मई को ही कराची और सिंध के कई जिलों के लिए लू की चेतावनी जारी कर दी थी। विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें गर्मी के साथ-साथ कराची के कई इलाकों में हो रही लंबी बिजली कटौती ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बिना बिजली के लोगों को न तो कूलिंग की सुविधा मिल पा रही है और न ही पानी की नियमित आपूर्ति, जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार और प्रशासन की अपील सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने इन मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है और लोगों से अपील की है कि वे केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों और राहत सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा जाए। जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण एशिया में हीटवेव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हर साल तापमान के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। जनजीवन पर व्यापक असर भीषण गर्मी के चलते कराची में सड़कें दोपहर के समय लगभग सूनी हो जाती हैं, बाजारों में भीड़ कम हो गई है और कामकाज प्रभावित हो रहा है। मजदूरों और दिहाड़ी काम करने वालों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जिन्हें रोजी-रोटी के लिए इस खतरनाक मौसम में भी बाहर निकलना पड़ रहा है। कराची समेत पूरे सिंध प्रांत में गर्मी का यह कहर आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है, अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए।  

surbhi मई 6, 2026 0
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