वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
लंदन: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में रविवार को हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ-साथ बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की सेना पर आम नागरिकों के अधिकारों के दमन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के आरोप लगाए। लंदन कश्मीर मिलियन मार्च में उमड़ी भीड़ जानकारी के अनुसार, लंदन में आयोजित "कश्मीर मिलियन मार्च" संसद परिसर (Parliament Square) से शुरू होकर पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला गया। आयोजकों का दावा है कि मार्च में करीब 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाई और गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आजादी के समर्थन में नारे लगाए और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया। बलोच और पश्तून समुदाय ने भी जताई एकजुटता इस मार्च में बलोच और पश्तून समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना उनके क्षेत्रों में भी नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—तीनों क्षेत्रों में आम लोगों को दमन और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान सेना पर गंभीर आरोप प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने टट्टापानी, सेंहसा और कोटली जैसे इलाकों में आम लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में रहने वाले कश्मीरी अब इन घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए और क्षेत्र के लोगों को उनके अधिकार देने चाहिए। गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक नेताओं की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि सभी गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हिरासत में लिए गए युवाओं के शव उनके परिजनों को सौंपने और गिरफ्तार नागरिकों की रिहाई की भी मांग की। PoK में जारी है विरोध प्रदर्शन लंदन में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है और इसके बाद अनेक राजनीतिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके विरोध में विदेशों में रहने वाले कश्मीरी, बलोच और पश्तून समुदाय भी अब खुलकर आवाज उठा रहे हैं.
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा का सबसे अहम चरण सोमवार से शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जुटने की संभावना जताई गई है। प्रशासन का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में एक करोड़ से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दी गई है, ताकि 1989 में देश के पहले सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना दोबारा न हो। सुबह से शुरू हुई अंतिम यात्रा दो दिनों तक तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखे गए अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह करीब 6 बजे अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। आयोजकों के अनुसार यह यात्रा पूरे शहर में 10 से 12 घंटे तक चलेगी। पिछले दो दिनों से हजारों लोग मस्जिद पहुंचकर खामेनेई और उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। सोमवार को सबसे बड़ी भीड़ उमड़ने की संभावना के चलते पूरे तेहरान में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 1989 जैसी त्रासदी दोहराने से बचने की तैयारी ईरानी प्रशासन इस बार विशेष सतर्कता बरत रहा है। वर्ष 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में करीब एक करोड़ लोग पहुंचे थे। उस दौरान भीड़ बेकाबू हो गई थी, जिसमें 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इतना ही नहीं, भीड़ शव वाहन तक पहुंच गई थी, जिससे कफन फट गया और पार्थिव शरीर जमीन पर गिर गया था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। कंक्रीट बैरियर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने अंतिम दर्शन स्थल पर ताबूत और श्रद्धालुओं के बीच बड़े-बड़े कंक्रीट बैरियर लगाए थे। अंतिम यात्रा के दौरान भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरे बनाए गए हैं और लोगों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। कई शहरों में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा के बाद मंगलवार को धार्मिक शहर क़ोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद बुधवार को इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में भी विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोजतबा खामेनेई अब भी सार्वजनिक रूप से नहीं आए रविवार को अली खामेनेई के तीन बेटे पहली बार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दिखाई दिए, लेकिन उनके उत्तराधिकारी बनाए गए मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में मोजतबा भी घायल हुए थे। हालांकि उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। युद्ध के बाद एकजुटता दिखाने का प्रयास अली खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ईरान की राष्ट्रीय एकजुटता और राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ईरानी नेतृत्व इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि देश अब भी एकजुट और मजबूत है।
Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
Super Typhoon Bavi: अमेरिका के प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ रहा सुपर टाइफून 'बावी' (Bavi) बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। तूफान को लेकर गुआम (Guam) और उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह (Northern Mariana Islands) में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तूफान सीधे रोटा (Rota) द्वीप से टकराता है, तो कई सप्ताह या महीनों तक बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है। 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं जॉइंट टाइफून वार्निंग सेंटर (JTWC) के अनुसार, सुपर टाइफून बावी में लगातार 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जबकि हवा के झोंकों की गति 333 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही है। इसकी ताकत कैटेगरी-5 हरिकेन के बराबर बताई जा रही है, जिसे अत्यंत विनाशकारी माना जाता है। राष्ट्रीय मौसम सेवा ने जारी की गंभीर चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने कहा है कि सोमवार सुबह तूफान के गुजरने के दौरान उसके आईवॉल (Eyewall) वाले इलाकों में अत्यधिक तेज हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरें और खतरनाक तूफानी ज्वार (Storm Surge) देखने को मिल सकते हैं। एजेंसी ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। गुआम और उत्तरी मारियाना में दिखने लगा असर रविवार से ही गुआम और उत्तरी मारियाना द्वीपों में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर दिखाई देने लगा। संभावित खतरे को देखते हुए लोगों ने अपने घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सुरक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 2.1 लाख आबादी वाले इन द्वीपों पर सड़कें लगभग खाली नजर आईं। पुलिस लगातार गश्त कर लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रही है। रोटा द्वीप के पास से गुजरेगा तूफान मौसम विभाग के अनुसार, सुपर टाइफून बावी सोमवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 8 बजे उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह के सबसे दक्षिणी द्वीप रोटा के बेहद करीब से गुजर सकता है। इस दौरान भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरों का गंभीर खतरा बना रहेगा। लंबे समय तक बिजली गुल रहने की आशंका विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तूफान सीधे रोटा द्वीप से टकराता है तो बिजली आपूर्ति को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में कई इलाकों में हफ्तों या महीनों तक बिजली बाधित रहने की संभावना है। इस आशंका को देखते हुए लोग भोजन, पानी, ईंधन और अन्य जरूरी सामान का भंडारण कर रहे हैं। सुरक्षा तैयारियों में जुटे लोग तूफान की चेतावनी के बाद स्थानीय निवासी अपने घरों और दुकानों की खिड़कियों पर प्लाईवुड लगा रहे हैं ताकि तेज हवाओं से नुकसान कम हो सके। प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को भी अलर्ट पर रखा है। हालांकि, प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद गुआम के तालोफोफो बे (Talofofo Bay) में कुछ सर्फर ऊंची लहरों का आनंद लेते भी दिखाई दिए, जिसे अधिकारियों ने बेहद जोखिम भरा कदम बताया है। प्रशासन की अपील स्थानीय प्रशासन और मौसम एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक निर्देशों का पालन करें, समुद्र तटों से दूर रहें और तूफान के पूरी तरह गुजरने तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। अधिकारियों का कहना है कि अगले 24 घंटे हालात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन राजधानी तेहरान में लाखों लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरे समारोह के दौरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखे नारे लगे और शोकसभा प्रतिरोध तथा राष्ट्रीय एकजुटता के प्रदर्शन में बदलती नजर आई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने बताया कि अंतिम नमाज के दौरान मौजूद लोगों ने अमेरिका और इजरायल को खामेनेई की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए "दुश्मनों से प्रतिशोध" और "शहीद नेता के खून का बदला" जैसे नारे लगाए। तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब रविवार को अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के लिए सार्वजनिक अंतिम नमाज अदा की गई। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला और उसके आसपास के इलाकों में लाखों लोगों की भीड़ जमा हुई। शनिवार से ही खामेनेई का पार्थिव शरीर आम लोगों के अंतिम दर्शन और आधिकारिक श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था। ईरान के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया। हालांकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर सहमति बनी थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने दिया एकजुटता का संदेश सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अपने संदेश में कहा कि ईरानी जनता अपने दिवंगत नेता को विदाई देते हुए उनके आदर्शों और सिद्धांतों पर आगे बढ़ने का संकल्प ले रही है। संदेश में कहा गया कि, "पिछले कुछ दिनों से ईरान को देखिए, यही वह देश है जिसे कुछ ही दिनों में हराने का दावा किया गया था।" परिषद ने इसे राष्ट्रीय एकता, धैर्य और प्रतिरोध की भावना का प्रतीक बताया। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई समारोह से रहे दूर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और इजरायल से मिली कथित धमकियों के चलते वह तेहरान में चल रहे छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। संसद अध्यक्ष बोले- देश नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि पूरे देश के लोग अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि ईरान की जनता अपने नेतृत्व और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि देशभर में लोगों ने एक स्वर में अपने नेता को श्रद्धांजलि दी और उन्हें शहीद के रूप में याद किया। फिलहाल अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम जारी हैं और 9 जुलाई को खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका के पास न सभ्यता है, न इतिहास और न ही सम्मान। ईरान ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को मारा जा सकता है, लेकिन उसके विचारों और आदर्शों को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। ट्रंप के बयान पर ईरान का तीखा जवाब आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ट्रंप के बयान की आलोचना की। दूतावास ने कहा कि अमेरिका खामेनेई के निधन के बाद ईरान में उमड़े शोक और भावनाओं को कभी नहीं समझ सकता। पोस्ट में कहा गया कि "लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन आदर्शों को नहीं। आपने अयातुल्ला खामेनेई को मार दिया, लेकिन वास्तव में आपने केवल एक इत्र की बोतल तोड़ी है, जिसकी खुशबू अब हर जगह फैल चुकी है।" दूतावास ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके पास न तो सभ्यता है, न इतिहास और न ही सम्मान। ट्रंप ने क्या कहा था? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया Axios को दिए एक इंटरव्यू में खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं और यह भीड़ शायद "दिखावटी आंसू" बहा रही है। ट्रंप ने दावा किया था कि यदि अमेरिका चाहे तो ईरान के बचे हुए शीर्ष नेताओं को "एक ही गोली" में खत्म कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं किया जाएगा क्योंकि अमेरिका तेहरान के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखना चाहता है। पहले भी दी थी चेतावनी खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ईरान ने अमेरिका और इजरायल को सख्त चेतावनी दी थी। खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर अली अब्दोल्लाही ने कहा था कि यदि ईरान की संप्रभुता पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो सशस्त्र बल उसका "कड़ा और निर्णायक" जवाब देंगे। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़ अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर फिलहाल तेहरान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया एक सप्ताह तक चलेगी, जिसके तहत तेहरान, क़ोम, नजफ़ और कर्बला में शोक जुलूस निकाले जा रहे हैं। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। धार्मिक और राजनीतिक संदेश ईरानी सरकार इस अंतिम संस्कार को केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकजुटता और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है। अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोग पारंपरिक शिया रीति-रिवाजों के अनुसार मातम मनाते और नारे लगाते नजर आए। आयोजन स्थल पर काले शोक ध्वज और ईरानी राष्ट्रीय ध्वज के बीच पूरे कार्यक्रम को धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: लाल सागर (Red Sea) में यमन के तट के पास रविवार को एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया। इस घटना की पुष्टि ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने की है। फिलहाल हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यमन के होदेइदा तट के पास हुआ हमला ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, हमला यमन के तटीय शहर होदेइदा से लगभग 30 समुद्री मील (करीब 55 किलोमीटर) दक्षिण-पश्चिम में हुआ। होदेइदा पर वर्तमान में ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के चालक दल ने अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा निशाना बनाए जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दी। जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर दोबारा हमले करने की चेतावनी दी थी। फिलहाल इस घटना को लेकर हूती संगठन की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पहले भी निशाने पर रहे हैं जहाज गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले कई वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबी दूरी तय करनी शुरू कर दी थी, जिससे वैश्विक व्यापार और शिपिंग लागत पर असर पड़ा। सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ीं लाल सागर और अदन की खाड़ी में हाल के दिनों में सोमाली समुद्री डाकुओं की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। 1 जुलाई को यमन के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह बलहाफ से करीब 76 समुद्री मील (140 किलोमीटर) दक्षिण में एक संदिग्ध समुद्री डकैती की घटना सामने आई थी। उस दौरान चार हथियारबंद हमलावरों ने एक छोटी नाव के जरिए एक जहाज के ब्रिज पर हमला किया था, जिससे मामूली नुकसान हुआ था। जांच जारी यूकेएमटीओ और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ताजा हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह शामिल था। लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान आयोजित कार्यक्रम में एक कवि के भड़काऊ बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। राजधानी तेहरान में लाखों लोगों की मौजूदगी में कवि मोहम्मद रसूली ने अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए तीखी टिप्पणी की और भीड़ से अमेरिका व इजरायल विरोधी नारे लगवाए। ट्रंप को लेकर दिया विवादित बयान समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अंतिम संस्कार कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए कवि मोहम्मद रसूली ने भीड़ से पूछा कि "दुनिया का सबसे दुष्ट व्यक्ति अब तक जीवित क्यों है?" उन्होंने यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदर्भ देते हुए की। कार्यक्रम के दौरान भीड़ ने अमेरिका और इजरायल विरोधी नारे भी लगाए। कार्यक्रम में कुछ लोगों के हाथों में ऐसे पोस्टर और बैनर भी देखे गए जिनमें ट्रंप के खिलाफ हिंसक संदेश लिखे होने की बात सामने आई है। तेहरान में उमड़ी बड़ी भीड़ रविवार को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में पहले दिन की तुलना में अधिक संख्या में लोग पहुंचे। काले कपड़े पहने हजारों-लाखों समर्थक काले झंडे और बैनर लेकर श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है। उनकी पार्थिव देह को ईरान के विभिन्न शहरों में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जा रहा है। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। राजनीतिक महत्व भी रखता है आयोजन विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ईरान की मौजूदा राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था के समर्थन को प्रदर्शित करने का भी अवसर बन गया है। नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व को लेकर भी इस दौरान समर्थन जुटाने की कोशिशें देखी जा रही हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता पर असर रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम संस्कार कार्यक्रम के चलते ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ताओं को फिलहाल स्थगित रखा गया है। दोनों देशों के बीच भविष्य की बातचीत अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद आगे बढ़ सकती है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी अशांति और कथित सैन्य कार्रवाई के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए कहा है कि क्षेत्र में खाने-पीने की वस्तुओं और दवाओं की भारी कमी हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारत से मदद की गुहार वायरल वीडियो में सरदार अमन खान यह कहते नजर आ रहे हैं कि “हमें भारत की मदद चाहिए, राशन और दवाओं की गंभीर कमी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद इलाके में हालात बिगड़ गए हैं और आम नागरिक संकट का सामना कर रहे हैं। LOC खोलने की मांग, लोगों में आक्रोश रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित एक रैली में खान ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) की ओर जाने की बात भी उठाई। भीड़ ने कथित तौर पर इस पर समर्थन जताते हुए “उधर बढ़ें” के नारे लगाए। उन्होंने पुंछ और डोडा सेक्टर में LOC खोलने की मांग करते हुए कहा कि लोगों के पास हालात बिगड़ने पर भारत जाने का विकल्प होना चाहिए। PoK में प्रदर्शन और नाकेबंदी से बिगड़े हालात जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से PoK में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के बाद क्षेत्र में कथित तौर पर आर्थिक नाकेबंदी और सख्ती बढ़ाई गई है, जिससे स्थानीय लोगों को खाद्य सामग्री और जरूरी दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन अब आज़ादी की मांग में बदले स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जो आंदोलन पहले सुधारों की मांग तक सीमित था, वह अब पाकिस्तान के नियंत्रण से आजादी की खुली मांग में बदलता दिख रहा है। कई रैलियों में “PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है” जैसे नारे भी लगाए गए हैं। स्थिति पर बढ़ी अंतरराष्ट्रीय नजर विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में बढ़ता राजनीतिक संकट स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच गहरी खाई को दर्शाता है। वहीं पाकिस्तान प्रशासन द्वारा JAAC पर प्रतिबंध और सख्त कार्रवाई से तनाव और बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है।
किन्शासा, एजेंसियां। अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में एक दर्दनाक नाव हादसे में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब राज्य स्तरीय परीक्षा देकर लौट रहे छात्रों और अन्य यात्रियों से भरी एक लकड़ी की नाव कसाई और संकुरु नदियों के संगम के पास पलट गई। स्थानीय प्रशासन के अनुसार अब तक 20 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों के लापता होने की आशंका है। परीक्षा देकर लौट रहे थे छात्र अधिकारियों के मुताबिक, नाव में बड़ी संख्या में छात्र सवार थे जो परीक्षा समाप्त होने के बाद अपने घर लौट रहे थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया। अब तक करीब 80 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि नाव में 200 से अधिक लोग सवार थे, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। अधिक यात्रियों और सुरक्षा की कमी बनी हादसे की वजह प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि नाव में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था। कांगो में नदी मार्ग प्रमुख परिवहन साधन है, लेकिन नावों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ओवरलोडिंग के कारण इस तरह की दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। स्थानीय नागरिक संगठनों ने प्रशासन से नाव संचालन के नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। लापता लोगों की तलाश जारी बचाव दल नदी में लापता यात्रियों की तलाश में जुटा हुआ है। प्रशासन ने आसपास के इलाकों में राहत और चिकित्सा टीमों को तैनात कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि खोज अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता।
मॉस्को, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर एक और बड़ा हमला किया है। शनिवार देर रात यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख तेल टर्मिनल और आसपास के बंदरगाह क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद तेल टर्मिनल में आग लग गई और इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया। 72 ड्रोन मार गिराने का रूस का दावा रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले के दौरान 72 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इसके बावजूद सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और वायसोत्स्क बंदरगाह क्षेत्र में नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रूस की ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बना रहा यूक्रेन विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन लगातार रूस की तेल और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बना रहा है, ताकि युद्ध के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। हाल के महीनों में रूस के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और बंदरगाहों पर ऐसे हमले हो चुके हैं। युद्ध के बीच बढ़ा तनाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। रूस ने भी यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमले आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक तीखा बना सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड और हॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (4 जुलाई) के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए जश्न की खास झलक साझा की है। एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर देर रात का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उनके घर के बाहर आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगाता नजर आ रहा है। वीडियो में शांत माहौल के बीच रोशनी से सजा आसमान अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के उत्साह को बयां करता दिख रहा है। इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा प्रियंका ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, "बिस्तर से 4 जुलाई की शुभकामनाएं"। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फैंस भी उन्हें अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दे रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी अमेरिका में 4 जुलाई को बड़े उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है और प्रियंका भी इस जश्न का हिस्सा बनीं। प्रियंका चोपड़ा का अमेरिका से जुड़ाव काफी पुराना है। किशोरावस्था के दौरान उन्होंने मैसाचुसेट्स, आयोवा और न्यूयॉर्क के स्कूलों में पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में हॉलीवुड में भी सफल करियर स्थापित किया। साल 2018 में उन्होंने अमेरिकी सिंगर और अभिनेता निक जोनास से शादी की। वर्तमान में प्रियंका अपने पति निक जोनास और बेटी मालती मैरी के साथ अमेरिका में रहती हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा जल्द ही निर्देशक एस.एस. राजामौली की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'वाराणसी' से भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। इस फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों में काफी उत्साह है। हाल ही में फिल्म की शूटिंग को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया था। ऐसे में प्रियंका एक बार फिर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।
तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह की शुरुआत से पहले जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचीं। उन्होंने अन्य प्रतिनिधियों के साथ खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लिए आयोजित सलात-अल-जनाज़ा (अंतिम संस्कार की नमाज़) में हिस्सा लिया। महबूबा मुफ्ती के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद सहित कई भारतीय शिया समुदाय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए दुआ की। 4 जुलाई से शुरू हुए अंतिम संस्कार के कार्यक्रम अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े छह दिवसीय कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू हो गए हैं। ईरानी सरकार के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 9 जुलाई तक जारी रहेंगे। इसके बाद खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान में करोड़ों लोगों के पहुंचने की संभावना है। राजधानी समेत पूरे ईरान में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह खामेनेई के पोस्टर व बैनर लगाए गए हैं। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे तेहरान खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच रहे हैं। भारत की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल समारोह में हिस्सा ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में क्यों नहीं हुए शामिल? ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, पूर्व निर्धारित विदेशी दौरों और आधिकारिक कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बन सके। उनकी जगह भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को ईरान भेजा है। 36 वर्षों तक रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनकी मृत्यु 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा और क्षेत्र में सैन्य संघर्ष छिड़ गया। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा और कई देशों में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोम और मशहद में भी होंगे विशेष कार्यक्रम ईरानी प्रशासन के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े विशेष धार्मिक कार्यक्रम 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा मशहद पहुंचेगी, जहां 9 जुलाई को खामेनेई को दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि छह दिनों तक चलने वाले शोक कार्यक्रमों में देशभर से करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं।
तेहरान: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेता भावुक नजर आए। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भी श्रद्धांजलि के दौरान भावुक हो गए। तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में खामेनेई का ताबूत अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसे ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से सजाया गया था। श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग और वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। विदाई सभा में उमड़ा जनसैलाब श्रद्धांजलि समारोह में गालिबाफ और अराघची समेत कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता और सैन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रार्थना के दौरान गालिबाफ हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिए और अंतिम विदाई देते समय भावुक हो गए। अराघची, जो हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में ईरान का प्रमुख चेहरा रहे हैं, भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान गहरे शोक में दिखाई दिए। गालिबाफ की जनता से अपील श्रद्धांजलि सभा के दौरान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता की उपस्थिति दुनिया को यह संदेश देगी कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता की विरासत के साथ खड़ा है। छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम सरकारी कार्यक्रम के अनुसार खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े आयोजन छह दिनों तक जारी रहेंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि इन कार्यक्रमों में 1.5 से 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसे देखते हुए तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। तेहरान से मशहद तक निकलेगा अंतिम यात्रा का काफिला कार्यक्रम के तहत: तेहरान की सड़कों पर अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा। 9 जुलाई को पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर मशहद ले जाया जाएगा। वहीं इमाम रज़ा दरगाह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इसके अलावा पड़ोसी देश इराक के शिया धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान बड़ी भीड़ और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए पूरे देश में हाई सिक्योरिटी अलर्ट लागू किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों और जुलूस मार्गों पर विशेष निगरानी रख रही हैं।
काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।
वॉशिंगटन: अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक अनोखी ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 408 किलोग्राम वजनी एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा, जिसे अब से 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इस टाइम कैप्सूल का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका की संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, समाज और जीवनशैली का दस्तावेज सुरक्षित रखना है। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि भविष्य में इसे आसानी से खोजा जा सके। क्या है टाइम कैप्सूल? टाइम कैप्सूल एक विशेष रूप से सीलबंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी समय की महत्वपूर्ण वस्तुएं, दस्तावेज और सांस्कृतिक प्रतीक सुरक्षित रखे जाते हैं। इसे वर्षों या सदियों बाद खोला जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियां उस दौर के इतिहास और जीवन को समझ सकें। क्या-क्या रखा गया है कैप्सूल में? इस विशेष कैप्सूल में अमेरिका के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों द्वारा चुनी गई कई अनूठी वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से— व्हेल की हड्डी दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी भविष्यवाणियां ऐतिहासिक दस्तावेज अमेरिकी समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाली कई अन्य वस्तुएं 250 साल तक सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई विशेष तकनीक वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कैप्सूल में रखी वस्तुएं ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित रहें। इसके लिए कई वर्षों के शोध के बाद विशेष तकनीक विकसित की गई। कैप्सूल की प्रमुख विशेषताएं: सिलेंडर आकार में बनाया गया है, ताकि कोनों से पानी रिसने की संभावना न रहे। इसे इंडियम धातु से पूरी तरह सील किया गया है, जो सूक्ष्म दरारों को भी बंद कर देती है। अंदर 35 प्रतिशत नियंत्रित नमी रखी गई है, जिससे कागज और अन्य सामग्री सुरक्षित बनी रहे। इसे जमीन के लगभग 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। पानी और जंग से कैसे रहेगा सुरक्षित? कैप्सूल के ऊपर एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर लगाया जाएगा, जिससे दोनों परतों के बीच हवा का कुशन बनेगा। यह संरचना भूजल, नमी और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला के अनुसार, "अगर इस टाइम कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया लगभग छह फीट पानी में डूब चुका होगा।" टाइम कैप्सूल दफनाने का उद्देश्य क्या है? इस परियोजना का उद्देश्य केवल इतिहास को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि वर्ष 2026 के अमेरिका की वास्तविक तस्वीर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। संग्रहालयों की वस्तुएं समय के साथ बदली या स्थानांतरित हो सकती हैं, लेकिन टाइम कैप्सूल को तय समय से पहले नहीं खोला जाता। इससे भविष्य के लोग बिना किसी बदलाव के उस दौर की झलक देख सकेंगे। दुनिया के चर्चित टाइम कैप्सूल क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन (अमेरिका): 1936 में बनाया गया यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में माना जाता है। इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल (न्यूयॉर्क): 1939 में दफनाया गया था और इसे 6939 में खोलने की योजना है। भारत का 'कलपात्र': 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास टाइम कैप्सूल दफन कराया था। 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे बाहर निकाल लिया गया। पहले खुले टाइम कैप्सूल में क्या मिला था? मैसाचुसेट्स (2015): 220 साल पुराने कैप्सूल से चांदी और तांबे के सिक्के, अखबार, पदक और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले। नॉर्वे (2012): 100 साल पुराने पैकेट में स्थानीय इतिहास से जुड़े दस्तावेज और अखबार मिले। बोस्टन (2014): 1901 के टाइम कैप्सूल से पुराने अखबार, तस्वीरें और खेल संबंधी पत्रिकाएं बरामद हुईं। यह नया अमेरिकी टाइम कैप्सूल भविष्य की पीढ़ियों के लिए वर्ष 2026 के अमेरिका का एक ऐतिहासिक संदेश और समय की अमूल्य धरोहर बनकर सुरक्षित रहेगा।
तेल अवीव: इजराइल ने अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों को निशाना बनाने की योजना बनाई जा रही थी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को "पूरी तरह झूठा" और "फेक न्यूज" करार दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि रिपोर्ट का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में क्या कहा गया था? अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कुछ वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि इजराइल कथित तौर पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को निशाना बनाने की योजना बना सकता था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेता ईरान की ओर से युद्धविराम और शांति वार्ता में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। अमेरिका की चिंता का दावा रिपोर्ट में कहा गया था कि अप्रैल में चल रही वार्ताओं के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि ईरानी वार्ताकारों पर हमला हुआ तो शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है और क्षेत्र में संघर्ष दोबारा तेज हो सकता है। इसी कारण अमेरिका ने कथित तौर पर क्षेत्र के कुछ देशों के माध्यम से ईरान को संभावित खतरे के प्रति सतर्क करने का प्रयास किया था। संघर्ष और खुफिया सहयोग को लेकर भी दावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी तथा इस अभियान में अमेरिकी खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ट्रंप-नेतन्याहू संबंधों का भी जिक्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल के करीबी संबंधों के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 के दौरान लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच कुछ मतभेद उभर सकते हैं। इजराइल ने किया स्पष्ट इनकार इजराइली सरकार ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और इसका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल इस मामले पर अमेरिका या ईरान की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक कैंप पर कथित आत्मघाती हमले का दावा किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके आत्मघाती हमलावर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार, सेना या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। BLA ने क्या दावा किया? BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच के नाम से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन की मजीद ब्रिगेड ने ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि आत्मघाती हमलावर पहले सुरक्षा कैंप के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और इसके बाद विस्फोट किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जिवानी क्यों है महत्वपूर्ण? जिवानी, ग्वादर जिले का एक रणनीतिक तटीय क्षेत्र है। यह अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जाता है। वायरल वीडियो पर नहीं हुई पुष्टि हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Bahotblch नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हमले का है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है। पाकिस्तान की ओर से नहीं आया बयान हमले के दावे के बावजूद पाकिस्तान सरकार, सेना या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए हताहतों की संख्या और घटना के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।