दुनिया

China calls for peace amid US Iran tensions with diplomats discussing Middle East crisis
मिडिल ईस्ट संकट: ट्रंप-ईरान टकराव के बीच चीन ने शांति के लिए बढ़ाया हाथ

बीजिंग/मिडिल ईस्ट: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच जहां दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, वहीं चीन ने युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बहरीन के साथ मिलकर शांति पहल चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़यानी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि: चीन युद्ध खत्म कराने और स्थिरता लाने के लिए तैयार है बहरीन के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास किए जाएंगे चीन का साफ संदेश: ‘आक्रामकता का विरोध’ वांग यी ने स्पष्ट किया कि: चीन किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ है क्षेत्र में संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है चीन-पाकिस्तान की 5 सूत्रीय योजना चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक पांच सूत्रीय पहल भी पेश की है, जिसमें शामिल हैं: नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमले रोकना युद्धविराम लागू करना होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना समुद्री व्यापार और आवाजाही को सामान्य करना क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करना संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर चीन ने कहा कि: युद्धविराम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जरूरत है UN सिक्योरिटी काउंसिल को तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए बहरीन की चिंता बहरीन ने भी माना कि: खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर खतरे में है हॉर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही प्रभावित हो रही है बहरीन ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। ‘ग्लोबल साउथ’ पर फोकस चीन ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा कि वह: पाकिस्तान के साथ मिलकर शांति बहाल करने में योगदान देगा खासकर छोटे और विकासशील देशों (Global South) के हितों की रक्षा करेगा

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Viral video shows US F-15 chasing alleged Iranian drone amid Middle East conflict and explosion visuals
सस्ते ईरानी ड्रोन ने अमेरिकी F-15 को दिया चकमा?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को ईरानी ड्रोन का पीछा करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि कम कीमत वाला ईरानी ड्रोन अमेरिकी जेट को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि, इस वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में? आसमान में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के कथित शाहेद ड्रोन का पीछा इसके बाद जमीन पर जोरदार धमाका और धुएं का गुबार सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का दावा है कि अमेरिकी जेट ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। एरबिल में तेल प्लांट पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना इराक के एरबिल शहर में एक ब्रिटिश कंपनी के मोटर ऑयल प्लांट पर हुए हमले से जुड़ी हो सकती है। प्लांट में भीषण आग लगी आसमान में काला धुआं फैल गया सुबह के समय तीन ड्रोन से हमला किए जाने की बात बताया जा रहा है कि यह प्लांट एक ब्रिटिश ब्रांड का था, जिसे सरदार ग्रुप संचालित करता है। आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक अमेरिका, ब्रिटेन या किसी सहयोगी देश की ओर से इस हमले या वायरल वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावों की सत्यता पर सवाल बने हुए हैं। इराक में बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर इराक पर भी साफ दिख रहा है: अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच टकराव बढ़ा कई सैन्य ठिकानों पर हमले इराक सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में इराक ने कुछ समूहों को आत्मरक्षा की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अमेरिकी हितों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या संकेत देता है यह मामला? यदि वायरल दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य चुनौती बन सकते हैं पारंपरिक फाइटर जेट्स के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और डोनाल्ड ट्रंप
होर्मुज पर नाटो की ‘ना’ से भड़के ट्रंप, यूक्रेन पर उतार सकते हैं गुस्सा

वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाते हुए संकेत दिया है कि यदि नाटो देश होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए अमेरिका का साथ नहीं देते, तो यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस बयान ने न सिर्फ यूरोप में बेचैनी बढ़ा दी है, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समीकरणों को भी नया मोड़ दे दिया है।   होर्मुज स्ट्रेट इस समय वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस जलमार्ग पर प्रभावी दबाव बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ गया है। ट्रंप चाहते हैं कि नाटो देश अमेरिका के नेतृत्व में एक सैन्य या नौसैनिक अभियान का हिस्सा बनें, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इसे “हमारा युद्ध नहीं” कहकर दूरी बना ली है।   यूक्रेन बन सकता है दबाव की राजनीति का शिकार यूरोपीय देशों की इस हिचकिचाहट से नाराज ट्रंप अब यूक्रेन को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। यूक्रेन फरवरी 2022 से रूस के खिलाफ लगातार युद्ध लड़ रहा है और उसकी सैन्य क्षमता काफी हद तक पश्चिमी हथियारों और वित्तीय सहायता पर निर्भर रही है। यदि अमेरिका हथियारों की आपूर्ति या समर्थन कम करता है, तो इसका सीधा असर यूक्रेन की युद्ध क्षमता पर पड़ेगा।   ऐसी स्थिति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। पश्चिमी मोर्चे पर कमजोरी आने का मतलब यह होगा कि रूस को सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर फायदा मिल सकता है।   नाटो के भीतर बढ़ी बेचैनी रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की चेतावनी के बाद नाटो के भीतर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों के साथ एक संयुक्त बयान जारी करने की कोशिश की है, ताकि होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही के समर्थन का संकेत दिया जा सके। माना जा रहा है कि यह कदम ट्रंप को शांत करने और यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।   ट्रंप पहले भी नाटो को लेकर तीखी टिप्पणी कर चुके हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका सहयोगियों की सुरक्षा करता है, लेकिन बदले में समान प्रतिबद्धता नहीं मिलती। हालांकि अमेरिका का नाटो से बाहर निकलना आसान नहीं है, लेकिन यूक्रेन की मदद रोकना ट्रंप के हाथ में एक प्रभावी राजनीतिक हथियार जरूर बन सकता है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Donald Trump addressing nation on Iran war claiming victory and warning of major military action soon
ट्रम्प का बड़ा दावा: ईरान जंग में जीत, 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी

अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में “जीत” मिल चुकी है और जल्द ही हालात पूरी तरह उनके नियंत्रण में होंगे। ट्रम्प के दावे क्या हैं? ट्रम्प ने कहा: ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म हो चुकी है ईरानी नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो गई है यह अभियान अपने अंतिम लक्ष्य के करीब है 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ‘स्टोन एज’ वाली सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” (पाषाण काल) में पहुंचा देगा। उनके इस बयान को अब तक का सबसे सख्त रुख माना जा रहा है। ईरान में सत्ता परिवर्तन का दावा ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान का पलटवार ट्रम्प के बयान के बाद ईरान की सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने कहा कि युद्ध जारी रहेगा अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया जाएगा आने वाले समय में और बड़े हमलों की चेतावनी दी गई बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
कतर का बड़ा फैसला: पाकिस्तानियों के लिए ‘वीजा ऑन अराइवल’ बंद, भारतीयों को राहत जारी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल (VoA) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले से कतर जाने वाले पाकिस्तानियों को अब पहले से वीजा लेना अनिवार्य हो गया है। पाकिस्तान को क्यों लगा झटका? कतर में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अपने नागरिकों को जारी एडवाइजरी में कहा है कि: बिना पूर्व वीजा के कतर पहुंचने पर एंट्री रोकी जा सकती है एयरपोर्ट पर यात्रियों को वापस भेजा भी जा सकता है मौजूदा हालात को देखते हुए यह सुविधा फिलहाल निलंबित है विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक संतुलन की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है। भारत को मिल रही राहत जहां पाकिस्तान के लिए नियम सख्त हुए हैं, वहीं भारत के साथ कतर के मजबूत संबंधों का असर साफ दिख रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए: वीजा ऑन अराइवल सुविधा जारी 30 दिन का फ्री वीजा मिल रहा है जरूरत पड़ने पर वीजा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है यह फैसला ऐसे समय में भी बरकरार है जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। भारतीय यात्रियों के लिए जरूरी शर्तें कतर जाने वाले भारतीयों को कुछ नियमों का पालन करना होगा: पासपोर्ट कम से कम 6 महीने वैध हो रिटर्न या आगे की यात्रा का टिकट होना जरूरी होटल बुकिंग या रहने की व्यवस्था का प्रमाण हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य क्षेत्रीय तनाव का असर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों की नीतियों पर भी दिखने लगा है। कतर का यह फैसला सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों से जुड़ा माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन और ईरान युद्ध के दृश्य
ईरान पर जीत या सियासी जुमला? ट्रंप के दावों की खुली पोल

वाशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 34वें दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम लगभग 20 मिनट का संबोधन दिया। इस भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका युद्ध में बढ़त बना चुका है और ईरान की सैन्य, राजनीतिक और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, कई विश्लेषकों और हालिया घटनाक्रमों के आधार पर ट्रंप के इन दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।   ईरानी सेना और युद्ध क्षमता पर दावे ट्रंप ने कहा कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि हकीकत यह है कि ईरान अब भी सक्रिय सैन्य जवाब दे रहा है। इजरायल पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमले इस बात का संकेत हैं कि उसकी हमला करने की क्षमता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव भी बरकरार बताया जा रहा है।   सत्ता परिवर्तन और कट्टर नेतृत्व का मुद्दा ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नया नेतृत्व कम कट्टर है। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा नेतृत्व पहले से अधिक आक्रामक माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की अपेक्षाओं के उलट, ईरान की रणनीति और कठोर हो सकती है।   परमाणु क्षमता खत्म होने का दावा संदिग्ध ट्रंप ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल हवाई हमलों से किसी देश के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना बेहद कठिन है, खासकर तब जब संवर्धित यूरेनियम और गुप्त सुविधाओं का सवाल हो। इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।   तेल, होर्मुज और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता ईरान के तेल ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमले की चेतावनी ने वैश्विक बाज़ारों को चिंतित कर दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।   अमेरिकी अर्थव्यवस्था और युद्ध की समयसीमा पर सवाल ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत और महंगाई को नियंत्रित बताया, लेकिन युद्ध के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, “दो से तीन हफ्तों में युद्ध खत्म” करने का ट्रंप का दावा भी संदेह के घेरे में है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Injured Iranian diplomat Kamal Kharrazi after airstrike with damaged area amid US Israel Iran conflict
US-Israel-Iran War: हमले में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री घायल, पत्नी की मौत

मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 34वां दिन है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि उनकी पत्नी की मौत हो गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी नूरन्यूज के मुताबिक, हमले के बाद खराजी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। कौन हैं कमाल खराजी? कमाल खराजी ईरान के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ रहे हैं: 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अंतरराष्ट्रीय मामलों में ईरान की रणनीति तय करने में अहम भूमिका जंग का 34वां दिन, अमेरिका का सख्त रुख इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “ऑपरेशन फ्यूरी” जारी रहेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया और संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई अभी जारी रहेगी। बढ़ता तनाव और लगातार हमले मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं: कई शहरों में हवाई हमले जारी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आ रही हैं खराजी और उनकी पत्नी पर हुआ हमला इस संघर्ष के और गंभीर होने का संकेत माना जा रहा है। वैश्विक चिंता बढ़ी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमले से हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिकी जनता के नाम खुला पत्र, युद्धविराम पर चुप्पी

तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया। इस पत्र में उन्होंने युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि इससे कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की ओर से सीजफायर की मांग की गई है। “ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया” अपने पत्र में पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने “कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया” और देश लंबे समय से “हमलों और कब्ज़े” का सामना करता रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है। ट्रंप के दावे से अलग संदेश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के “नए शासन” ने युद्धविराम की अपील की है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह अपील किसने की। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए सख्त कार्रवाई की बात भी कही। संवाद बनाम टकराव की अपील पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र के अंत में कहा कि दुनिया के सामने आज सबसे बड़ा विकल्प “टकराव और संवाद” के बीच है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज लिया गया फैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा। बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पत्र सीधे अमेरिकी सरकार की बजाय वहां के नागरिकों को संबोधित कर एक कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश है। इसमें शांति और संवाद की बात तो की गई है, लेकिन औपचारिक रूप से युद्धविराम का प्रस्ताव नहीं रखा गया।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
NASA Artemis II Mission SLS Rocket Orion Capsule
₹7.71 लाख करोड़ खर्च, फिर भी चांद पर नहीं उतरेंगे NASA के अंतरिक्ष यात्री, जानिए क्यों ?

नई दिल्ली,एजेंसियां। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का Artemis II मिशन एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इस मिशन पर करीब 93 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग ₹7.71 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर कदम नहीं रखेंगे। इसकी वजह मिशन का असली उद्देश्य है।   NASA का Artemis II मिशन दरअसल चांद पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि वहां भविष्य में इंसानी मिशन भेजने की तैयारी का अहम चरण है। इस 10 दिन के मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर परिक्रमा करेंगे और फिर पृथ्वी पर लौट आएंगे। इस दौरान SLS रॉकेट, Orion कैप्सूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और ऑनबोर्ड टेक्नोलॉजी की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जाएगी।   क्यों जरूरी है यह मिशन? NASA का मानना है कि चांद पर इंसानों को सुरक्षित उतारने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अंतरिक्ष यान, क्रू सिस्टम और वापसी की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित हो। इसलिए Artemis II को एक क्रिटिकल टेस्ट मिशन माना जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य है—क्रू को सुरक्षित भेजना और वापस लाना।   आगे क्या होगा?   Artemis कार्यक्रम एक लंबी योजना का हिस्सा है। Artemis I में बिना इंसानों के सिस्टम टेस्ट किया गया था। Artemis II में इंसानी क्रू के साथ फ्लाइट हो रही है। Artemis III और IV के जरिए भविष्य में चांद पर लैंडिंग और वहां बेस तैयार करने का रास्ता साफ किया जाएगा।   इस मिशन पर भारी खर्च इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें सिर्फ एक उड़ान नहीं, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों की नींव तैयार की जा रही है। यानी अभी चांद पर कदम नहीं, लेकिन यह मिशन आने वाले ऐतिहासिक मून लैंडिंग मिशनों की सबसे बड़ी तैयारी जरूर है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
Strong earthquake hits Indonesia sea region causing damage and minor tsunami waves along coast
इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की हल्की लहरें; एक महिला की मौत

जकार्ता/मोलूका सागर, गुरुवार: इंडोनेशिया में गुरुवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। भूकंप का केंद्र मोलूका सागर में जमीन से लगभग 35 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है। तेज झटकों के बाद कुछ तटीय क्षेत्रों में सुनामी की छोटी लहरें भी दर्ज की गईं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप के झटके उत्तरी सुलावेसी और उत्तर मलुकु क्षेत्रों में 10 से 20 सेकंड तक महसूस किए गए। इस प्राकृतिक आपदा में एक महिला की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सुनामी की छोटी लहरें उठीं, बड़ा खतरा टला इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने बताया कि भूकंप के करीब आधे घंटे के भीतर कई स्थानों पर सुनामी की हल्की लहरें उठीं। बिटुंग में करीब 8 इंच पश्चिम हलमाहेरा में लगभग 1 फुट फिलीपींस में करीब 2 इंच हालांकि, प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने स्पष्ट किया कि दूर-दराज के इलाकों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। कई इलाकों में नुकसान, राहत-बचाव जारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, टेरनेट शहर और आसपास के क्षेत्रों में हल्का नुकसान हुआ है। बटांग दुआ द्वीप में एक चर्च क्षतिग्रस्त दक्षिण टेरनेट में दो घरों को नुकसान बिटुंग में नुकसान का आकलन जारी भूकंप के बाद समुद्र के भीतर दो और झटके भी महसूस किए गए, लेकिन उनसे किसी सुनामी खतरे की पुष्टि नहीं हुई। प्रशासन ने जारी किया अलर्ट इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की अनुमति के बिना समुद्र के पास न जाएं। खोज और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का मतलब भूकंप की ताकत रिक्टर स्केल पर मापी जाती है, जिससे उसके प्रभाव और संभावित नुकसान का अंदाजा लगाया जाता है: 8 या उससे अधिक: बेहद विनाशकारी, भारी तबाही की आशंका 7 से 7.9: शक्तिशाली भूकंप, बड़े क्षेत्र में नुकसान संभव 6 से 6.9: मजबूत झटके, संरचनात्मक क्षति की संभावना 5 से 5.9: मध्यम भूकंप, कमजोर इमारतों को नुकसान 2 या कम: आमतौर पर महसूस नहीं होते

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
NASA Artemis II rocket launch with four astronauts heading toward Moon mission after decades
54 साल बाद चंद्र मिशन पर इंसान: NASA का Artemis-II लॉन्च, जानिए क्यों है ऐतिहासिक

वॉशिंगटन/फ्लोरिडा: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 50 से ज्यादा साल बाद इंसानों को चंद्रमा की दिशा में भेजते हुए Artemis-II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन कैनेडी स्पेस सेंटर से चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ रवाना हुआ और इसे अपोलो-17 (1972) के बाद सबसे बड़ा मानव चंद्र मिशन माना जा रहा है। क्या है Artemis-II मिशन? Artemis-II NASA का पहला मानवयुक्त (Crewed) डीप स्पेस मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से बाहर निकलकर चंद्रमा के पास तक जाएंगे। यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा और इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की वापसी की तैयारी करना है। मिशन में कौन-कौन शामिल? इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: रीड वाइजमैन (कमांडर) विक्टर ग्लोवर (पायलट) क्रिस्टिना कोच (मिशन विशेषज्ञ) जेरेमी हैनसन (कनाडा) खास बात: विक्टर ग्लोवर – डीप स्पेस में जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टिना कोच – इस मिशन की पहली महिला जेरेमी हैनसन – चंद्र क्षेत्र में जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी चंद्रमा तक कैसे पहुंचेगा मिशन? पहले 24–25 घंटे पृथ्वी में परीक्षण फिर “ट्रांसलूनर इंजेक्शन” के जरिए चंद्रमा की ओर रवाना दूरी: लगभग 3.9 लाख किमी (2,44,000 मील) चंद्रमा तक पहुंचने में समय: करीब 3 दिन चंद्रमा पर लैंडिंग क्यों नहीं? Artemis-II मिशन चंद्रमा पर उतरेगा नहीं। वजह: Orion स्पेसक्राफ्ट सिर्फ यात्रा के लिए बना है लैंडिंग के लिए अलग मॉड्यूल की जरूरत होती है यह मिशन केवल चंद्रमा की परिक्रमा (Flyby) करेगा और फिर पृथ्वी पर लौट आएगा। कितना खास है यह मिशन? इंसानों की 54 साल बाद डीप स्पेस में वापसी Apollo-13 का दूरी रिकॉर्ड टूट सकता है अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 2.5 लाख मील दूर तक जा सकते हैं चंद्रमा के “फार साइड” (दूर वाले हिस्से) का अवलोकन मिशन का मुख्य उद्देश्य Artemis-II का मकसद सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी है: लाइफ-सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण नेविगेशन और सुरक्षा तकनीक की जांच अंतरिक्ष में मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरें लेना भविष्य की योजना NASA का लक्ष्य: 2028 तक इंसानों को चंद्रमा पर उतारना भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी बेस (Moon Base) बनाना Artemis-II इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आगे आने वाले Artemis-III और Artemis-IV मिशनों की नींव तैयार करेगा। कितना महंगा है मिशन? एक लॉन्च की लागत: लगभग 4 बिलियन डॉलर (₹37,000+ करोड़) इसमें कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और निजी कंपनियों का योगदान

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
NASA moon mission
54 साल बाद फिर चांद की ओर इंसान, आज लॉन्च होगा NASA का Artemis II मिशन

वॉशिंगटन/फ्लोरिडा,एजेंसियां। अंतरिक्ष इतिहास का एक नया अध्याय आज लिखे जाने जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का Artemis II मिशन 54 साल बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा की दिशा में भेजने वाला पहला मानव मिशन बनने जा रहा है। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा और इसे चांद पर भविष्य में मानव वापसी की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। NASA के अनुसार, लॉन्च 1 अप्रैल 2026 को लक्षित है और यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा।   क्या है Artemis II? Artemis II, NASA के Artemis कार्यक्रम का पहला क्रूड (मानवयुक्त) मिशन है। इससे पहले Artemis I 2022 में बिना अंतरिक्ष यात्रियों के भेजा गया था। इस बार चार अंतरिक्ष यात्री Orion अंतरिक्ष यान में सवार होकर चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे और फिर पृथ्वी पर लौटेंगे। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की लैंडिंग और आगे Mars मिशनों की तैयारी का अहम हिस्सा है।   कौन-कौन जा रहे हैं?   इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं— रीड वाइजमैन (कमांडर) विक्टर ग्लोवर (पायलट) क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट) जेरेमी हैनसेन (कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी) यह दल कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विविधता और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दोनों शामिल हैं।   क्या होगा मिशन का रूट? लॉन्च के बाद अंतरिक्ष यात्री पहले पृथ्वी की ऊंची और असमान कक्षा में लगभग 25 घंटे बिताएंगे। इसके बाद Orion कैप्सूल चंद्रमा की ओर बढ़ेगा। मिशन फ्री-रिटर्न ट्राजेक्टरी पर आधारित है, यानी अंतरिक्ष यान चंद्रमा और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करते हुए चांद के चारों ओर घूमकर वापस लौटेगा। मिशन के छठे दिन यह यान चंद्रमा से आगे बढ़ते हुए पृथ्वी से अपनी सबसे अधिक दूरी पर पहुंचेगा। NASA के मुताबिक, यह दूरी अपोलो युग के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकती है।   कितने दिन में लौटेगा? पूरा मिशन करीब 10 दिनों का होगा। अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की फ्लाईबाई के बाद पृथ्वी की ओर लौटेंगे और मिशन का समापन प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ होगा। इस दौरान Orion के हीट शील्ड पर भी खास नजर रहेगी, क्योंकि यह वापसी का सबसे अहम सुरक्षा हिस्सा है।   क्यों है इतना खास? Artemis II सिर्फ एक अंतरिक्ष उड़ान नहीं, बल्कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण की नई शुरुआत है। यह मिशन आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर पहली महिला, पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और अंतरराष्ट्रीय दल के साथ भविष्य के मानव मिशनों की राह आसान करेगा। यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर आज इस ऐतिहासिक लॉन्च पर टिकी है।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
Japan deploys 1,000 km range missiles near China amid rising tensions
चीन-जापान तनाव बढ़ा: जापान ने 1,000 KM रेंज की मिसाइलें तैनात कीं

एशिया में सुरक्षा संतुलन को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। जापान ने चीन के करीब अपने दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में लंबी दूरी की मिसाइलें तैनात कर दी हैं। इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बड़ा और अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान ने क्यूशू द्वीप के दक्षिणी हिस्से कुमामोटो में अपग्रेडेड Type-12 मिसाइलें तैनात की हैं। इन मिसाइलों की मारक क्षमता करीब 1,000 किलोमीटर तक है, जो पहले की 200 किलोमीटर रेंज से काफी ज्यादा है। खास बात यह है कि इन मिसाइलों की पहुंच अब चीन की मुख्य भूमि तक हो सकती है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने इस तैनाती की पुष्टि करते हुए कहा कि देश मौजूदा समय में "गंभीर और जटिल सुरक्षा माहौल" का सामना कर रहा है। ऐसे में रक्षा क्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम जापान की डिटरेंस (प्रतिरोधक) और काउंटर-अटैक क्षमता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। बताया जा रहा है कि Type-12 मिसाइल को मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने डिजाइन और अपग्रेड किया है। यह जमीन से जहाज पर हमला करने वाली मिसाइल है, जिसे आधुनिक तकनीक से और ज्यादा प्रभावी बनाया गया है। भविष्य में इसकी रेंज को बढ़ाकर 2,000 किलोमीटर तक करने की योजना पर भी काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तैनाती से जापान को “स्टैंडऑफ अटैक क्षमता” मिलती है, यानी वह दूर से ही दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है। यह जापान की पारंपरिक “सिर्फ आत्मरक्षा” नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो उसके शांतिवादी संविधान के तहत लंबे समय से लागू रही है। दरअसल, पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में जापान लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है। दोनों देशों के बीच पहले से ही विवादित द्वीपों को लेकर तनाव बना हुआ है, और इस नई तैनाती के बाद रिश्तों में और तल्खी आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरण को बदल सकता है, और आने वाले समय में चीन-जापान के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Israel-Iran conflict Day 33: Lebanese commander killed and drone attack on Kuwait airport
Israel-Iran War Day 33: लेबनान में ईरानी कमांडर ढेर का दावा, कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक

अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष: मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 33वां दिन है। क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों पक्षों के दावों-प्रत्यारोपों के बीच कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। लेबनान में ईरानी कमांडर मारा गया: इजरायल का दावा इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने लेबनान में ईरानी कुद्स फोर्स के कमांडर हुसैन महमूद मर्शाद अल-जौहरी को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि अल-जौहरी सीरिया-लेबनान क्षेत्र में इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन संभाल रहे थे। इस कार्रवाई का वीडियो भी इजरायल की ओर से जारी किया गया है। नेतन्याहू का बड़ा आरोप इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दो बार हत्या की कोशिश की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तेहरान में फार्मा प्लांट पर हमले का दावा ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने तेहरान स्थित ‘टोफिघ दारू’ फार्मास्युटिकल प्लांट पर हमला किया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से देश की मेडिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईंधन डिपो पर ड्रोन हमला किया गया, जिसके पीछे ईरान और उसके सहयोगी गुटों का हाथ बताया जा रहा है। हमले में ईंधन टैंकों को भारी नुकसान हुआ और आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। UN शांति सैनिकों की मौत पर IDF का इनकार दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UNIFIL) की मौत के मामले में इजरायली सेना ने अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। IDF ने कहा कि 31 मार्च की घटना की जांच में उनकी भूमिका नहीं पाई गई है। होर्मुज स्ट्रेट पर UAE का रुख इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी सक्रिय होता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में बढ़ता तनाव लगातार हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और सख्त बयानों के चलते मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। कई  ह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Florida airport to be renamed after President Donald Trump
फ्लोरिडा एयरपोर्ट का नाम ट्रम्प के नाम पर रखने का फैसला, विपक्ष ने उठाए सवाल

अमेरिका के फ्लोरिडा में पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने इस संबंध में एक बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके तहत अब एयरपोर्ट का नया नाम ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ होगा। FAA की मंजूरी के बाद लागू होगा नाम फ्लोरिडा सरकार के फैसले के बाद अब इस प्रस्ताव को फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद फ्लाइट चार्ट, नेविगेशन सिस्टम और एयरपोर्ट साइनेज में बदलाव किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 जुलाई से यह नया नाम लागू हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो ट्रम्प ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर किसी एयरपोर्ट का नाम रखा जाएगा। एयरपोर्ट कोड बदलने का भी प्रस्ताव आमतौर पर एयरपोर्ट का IATA/ICAO कोड नहीं बदला जाता, लेकिन इस मामले में कोड बदलने का प्रस्ताव भी सामने आया है। अमेरिकी सांसद ब्रायन मस्ट ने PBI को बदलकर ‘DJT’ करने का सुझाव दिया है, जो ट्रम्प के नाम के शुरुआती अक्षर हैं। नाम बदलने की प्रक्रिया जटिल अमेरिका में किसी एयरपोर्ट का नाम बदलना एक बहु-स्तरीय प्रक्रिया होती है, जिसमें स्थानीय निकाय, राज्य सरकार और फेडरल एजेंसियों की मंजूरी शामिल होती है। FAA द्वारा आधिकारिक अपडेट के बाद ही सभी सिस्टम में नया नाम लागू होता है। ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई परियोजनाएं और संस्थान प्रस्तावित या विकसित किए जा रहे हैं। इनमें नेवी के वॉरशिप, निवेशकों के लिए वीजा प्रोग्राम, सरकारी वेबसाइट्स, बच्चों के लिए सेविंग स्कीम और प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। करेंसी पर सिग्नेचर की तैयारी रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करेंसी नोटों पर लाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि देश की आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर यह बदलाव किया जा सकता है। नए 100 डॉलर के नोटों पर ट्रम्प और वित्त मंत्री के हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। फ्लोरिडा में प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी की योजना ट्रम्प फ्लोरिडा के मियामी में अपनी प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी भी बनवाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिए जमीन और फंडिंग को लेकर पहल शुरू हो चुकी है। ट्रम्प का वर्तमान निवास वेस्ट पाम बीच स्थित मार-ए-लागो एस्टेट है, जो इस एयरपोर्ट के करीब ही स्थित है। विपक्ष ने जताई आपत्ति एयरपोर्ट का नाम बदलने के फैसले पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। डेमोक्रेटिक नेता फेंट्रिस ड्रिस्केल ने कहा कि इससे टैक्सपेयर्स पर करीब 50 लाख डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को आम लोगों की आर्थिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि इस तरह के फैसलों पर खर्च करना चाहिए।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Mojtaba Khamenei
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को लेकर अफवाहों पर रूस ने दी सफाई

तेहरान, एजेंसियां। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को लगभग एक महीने हो गए हैं, लेकिन अब तक उन्हें सार्वजनिक रूप से देखा नहीं गया। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अफवाहें और अटकलें तेज हो गई थीं। हाल ही में, रूस के राजदूत एलेक्सी डेडोव ने इस पर स्पष्ट जानकारी दी कि मुज्तबा खामेनेई ईरान में ही हैं, हालांकि किसी विशेष कारण से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं।   पिता की जगह संभाली सत्ता मुज्तबा खामेनेई ने अपने पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह ली है, जिनकी 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमलों के दौरान मृत्यु हो गई थी। अमेरिका ने यह दावा किया था कि नए सुप्रीम लीडर घायल हैं। वहीं, रूस के राजदूत ने कहा कि यह अटकलें सही नहीं हैं और खामेनेई देश में ही हैं।   अफवाहों पर विराम कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर मॉस्को इलाज के लिए ले जाया गया था। रूस और ईरान के बीच घनिष्ठ संबंध हैं, और पिछले साल दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए थे।   जनता की प्रतिक्रिया और प्रभाव खामेनेई की गैरमौजूदगी के दौरान, हजारों लोग सड़कों पर उतरकर उनके प्रति वफादारी जताते नजर आए। हालांकि, लगातार गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े किए कि युद्ध के समय देश का संचालन वास्तव में किसके हाथ में है। 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई अपने पिता के शासनकाल में पर्दे के पीछे प्रभावशाली रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे। अब सुप्रीम लीडर बनने के बाद भी उनकी गैरमौजूदगी चिंता और चर्चा का विषय बनी हुई है।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
UAE aligns with US on Hormuz Strait, preparing against Iran
होर्मुज पर अमेरिका के साथ आया UAE, ईरान के खिलाफ बड़े कदम की तैयारी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब अमेरिका-ईरान संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर UAE ने बड़ा ऐलान किया है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए गठबंधन की पहल UAE के राजनयिकों ने अमेरिका के साथ-साथ यूरोप और एशिया की सैन्य शक्तियों से अपील की है कि वे मिलकर एक वैश्विक गठबंधन बनाएं, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सके। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। जंग में कूदने को तैयार UAE रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई में भी हिस्सा ले सकता है। अगर ऐसा होता है, तो UAE फारस की खाड़ी का पहला देश होगा जो सीधे इस युद्ध में शामिल होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहयोगी देशों से अधिक समर्थन की मांग की थी और कहा था कि तेल आपूर्ति की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव की तैयारी UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव को रूस और चीन जैसे देश वीटो कर सकते हैं, जिससे इसकी राह मुश्किल हो सकती है। प्रस्ताव न पास होने पर भी मदद रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर UNSC में प्रस्ताव पास नहीं होता है, तब भी UAE सैन्य सहयोग देने को तैयार है। इसमें समुद्री माइंस हटाने (माइन क्लीयरेंस) और अन्य रणनीतिक सहायता शामिल हो सकती है। रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण का सुझाव UAE ने अमेरिका को यह भी सुझाव दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट के रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण करे, जिनमें अबू मूसा द्वीप भी शामिल है। इस द्वीप पर पिछले करीब 50 वर्षों से ईरान का कब्जा है, जबकि UAE भी इस पर दावा करता है। वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने को लेकर सहमति बन रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान की कार्रवाइयों की आलोचना की। बढ़ सकता है तनाव UAE के इस रुख से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। अगर खाड़ी देश सीधे युद्ध में शामिल होते हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
US-Iran tensions escalate: Donald Trump and Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi statements
अमेरिका पर भरोसा खत्म: ईरान; ट्रम्प बोले- 2-3 हफ्तों में खत्म हो सकता है युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे के खिलाफ सख्त होते जा रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव खराब रहे हैं, इसलिए अब किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस डील से पीछे हट चुका है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ट्रम्प का दावा- जल्द खत्म होगी जंग वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और ऑपरेशन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारा मकसद था, जो अब पूरा हो चुका है। समझौता होने पर युद्ध और जल्दी खत्म हो सकता है।” जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जमीनी हमला किया गया तो ईरान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान जमीनी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी स्थिति का जवाब देने में सक्षम है। मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था पर असर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अनुमान है कि: क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है करीब 18 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कड़े बयानों से साफ है कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान का सख्त रुख संकेत देता है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
US Iran conflict escalation with Marco Rubio statement on final phase of military operation
US-Iran युद्ध अंतिम चरण में, ‘फिनिश लाइन दिख रही है’: मार्को रुबियो

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल कर रहा है और अब ऑपरेशन अपने अंतिम पड़ाव में है। रुबियो ने कहा, “हम अपने हर लक्ष्य पर तय समय से आगे चल रहे हैं। अब हमें फिनिश लाइन साफ दिखाई दे रही है।” उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को आधुनिक दौर का बेहद कुशल सैन्य अभियान बताते हुए कहा कि इसे इतिहास में इसकी टैक्टिकल क्षमता के लिए याद किया जाएगा। सैन्य लक्ष्यों को किया स्पष्ट रुबियो ने उन अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका के लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की वायुसेना, नौसेना, मिसाइल फैक्ट्रियों और लॉन्च सिस्टम को निष्क्रिय करना था, जिसमें अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है। ईरान पर सख्त टिप्पणी विदेश मंत्री ने ईरान की तुलना उत्तर कोरिया से करते हुए कहा कि वह ऐसे रास्ते पर था, जहां उसकी मिसाइलें सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपनी जनता के संसाधनों का इस्तेमाल विकास के बजाय हथियारों और आतंकवाद पर किया, जिससे देश की हालत खराब हो गई है। कूटनीति पर भी दिया जवाब युद्ध को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्तों को पूरी तरह अपनाया था। “राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा बातचीत को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन ईरान को बातचीत के नाम पर समय बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती,” उन्होंने कहा। रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान के पास 60% संवर्धित यूरेनियम रखने का कोई उचित कारण नहीं है और यह सीधे तौर पर परमाणु हथियार कार्यक्रम की ओर इशारा करता है। होर्मुज और NATO पर सख्त रुख रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र बताते हुए कहा कि वहां वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। साथ ही NATO पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए गठबंधन के तहत अपने यूरोपीय ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो यह व्यवस्था एकतरफा बनकर रह जाएगी।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Rising US Iran tensions with tech companies under threat and geopolitical conflict illustration
ईरान की 18 अमेरिकी कंपनियों को धमकी, US ने कहा-हर हमले का देंगे जवाब

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका की 18 बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिसके बाद व्हाइट हाउस ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले भी ईरान के हमलों को रोकने में सक्षम रही है और आगे भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है, जो अमेरिकी रक्षा क्षमता को दर्शाता है। टेक कंपनियां निशाने पर IRGC ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को जारी बयान में कहा कि अगर ईरानी नेताओं की हत्या जारी रहती है तो अमेरिका की प्रमुख टेक और कॉर्पोरेट कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि ये कंपनियां अमेरिका और इजरायल की सैन्य व खुफिया गतिविधियों में सहयोग कर रही हैं। ईरान ने जिन कंपनियों को निशाने पर बताया है, उनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा, इंटेल, आईबीएम, सिस्को, ओरेकल, डेल, एनवीडिया, टेस्ला, जेपी मॉर्गन, जनरल इलेक्ट्रिक, बोइंग सहित कुल 18 कंपनियां शामिल हैं। कर्मचारियों को चेतावनी IRGC ने इन कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों को भी चेतावनी दी है। बयान में कहा गया है कि यदि वे अपनी सुरक्षा चाहते हैं तो तुरंत अपने कार्यस्थल छोड़ दें। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपने अधिकारियों की हत्या का बदला इन कंपनियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर लेगा। खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुका है। अब कॉर्पोरेट ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी ने क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साइबर हमलों और आर्थिक मोर्चे पर टकराव तेज हो सकता है। अमेरिका का सख्त रुख अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपने नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि किसी भी हमले का जवाब कड़े तरीके से दिया जाएगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव का असर वैश्विक बाजारों और टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Russian An-26 military transport aircraft crash
क्रीमिया में रूस का सैन्य विमान An-26 क्रैश, 29 लोगों की मौत

रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान An-26 मंगलवार को क्रीमिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 29 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 23 यात्री और 6 क्रू मेंबर शामिल थे। दुर्घटना के बाद किसी के भी जीवित बचने की खबर नहीं है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, विमान से पहले संपर्क टूट गया था। इसके कुछ समय बाद पता चला कि विमान चट्टान से टकराकर क्रैश हो गया। हादसे के कारणों की जांच जारी है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। जांच जारी, तकनीकी खराबी की आशंका रूसी अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के पीछे असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल तकनीकी खामी को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। An-26 विमान की खासियत An-26 सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे एंटोनोव कंपनी ने विकसित किया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान के परिवहन के लिए किया जाता है। यह विमान अपनी खास क्षमता के लिए जाना जाता है, जिसमें छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भरने की क्षमता शामिल है। यही कारण है कि इसका उपयोग दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। इसके पीछे मौजूद बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। पुराना डिजाइन, उठते रहे हैं सवाल करीब 50 साल पुराने डिजाइन वाले इस विमान की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पहले भी इस तरह के विमानों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। हालांकि, आज भी कई देशों की वायुसेनाएं इसका उपयोग कर रही हैं, लेकिन धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0

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