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Trump Disputed India Tariff Figures

भारत के टैरिफ आंकड़ों पर अपने ही मंत्री से भिड़े ट्रंप, बोले- मुझे झूठे नंबर मत दिखाइए

Deepshikha जून 25, 2026 0
US President Donald Trump speaks during a meeting amid debate over India’s tariff policies and trade relations.
Trump Questioned India Tariff Data During Trade Talks

 

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बीच भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर तीखी बहस होने का दावा किया गया है। एक नई किताब में किए गए खुलासे के अनुसार, ट्रंप अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से संतुष्ट नहीं थे और उनका मानना था कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर घोषित आंकड़ों से कहीं अधिक शुल्क वसूलता है।

नई किताब में हुआ खुलासा

यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब "Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump" में किया गया है। किताब के अनुसार, ट्रंप भारत की टैरिफ नीति को लेकर लंबे समय से संदेह जताते रहे थे और कई बार अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों को खारिज कर चुके थे।

सरकारी आंकड़ों को बताया ‘बकवास’

रिपोर्ट के मुताबिक, एक बैठक के दौरान वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के आधिकारिक आंकड़े ट्रंप के सामने रखे। इन आंकड़ों में भारत द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क का विवरण दिया गया था।

ट्रंप इन आंकड़ों से सहमत नहीं हुए। किताब में दावा किया गया है कि उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें “गलत और भ्रामक जानकारी” दी जा रही है। ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 175 प्रतिशत या उससे भी अधिक टैरिफ लगाता है, जबकि आधिकारिक आंकड़े इससे काफी कम थे।

भारत को कहा गया था ‘टैरिफ का महाराजा’

किताब के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भारत को दुनिया के सबसे ऊंचे आयात शुल्क लगाने वाले देशों में गिनते थे। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कथित तौर पर भारत को “टैरिफ का महाराजा” तक कहा था।

व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक, भारत कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक शुल्क लगाता रहा है, जबकि कुछ ऑटोमोबाइल उत्पादों पर यह दर 100 प्रतिशत से अधिक भी रही है।

टैरिफ विवाद से बढ़ा व्यापारिक तनाव

भारत की टैरिफ नीति को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच ट्रंप प्रशासन ने अपने तथाकथित “लिबरेशन डे” अभियान के तहत भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया। बाद में रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर भी भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए गए।

इन कदमों के बाद भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गया।

व्यापार वार्ता पर भी पड़ा असर

टैरिफ विवाद का असर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर भी देखने को मिला। कई प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडलीय दौरों को स्थगित करना पड़ा और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की गति धीमी पड़ गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर में व्यापारिक मतभेदों ने रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित किया था, हालांकि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश करते रहे।

फरवरी 2026 में बनी समझौते की रूपरेखा

लंबी बातचीत के बाद फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमत हुए। समझौते के तहत कई उत्पादों पर शुल्क कम करने और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी।

इसके साथ ही अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने की घोषणा की। फिलहाल दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगे की बातचीत कर रहे हैं।

क्या है इस खुलासे का महत्व?

किताब में किए गए दावे यह संकेत देते हैं कि ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत की व्यापार नीति को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर भी मतभेद और असहमति मौजूद थी। यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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39 सेकंड में आए दो भीषण भूकंप, वेनेजुएला में तबाही का मंजर; 10 हजार से 1 लाख मौतों की आशंका

  काराकस: वेनेजुएला में बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। महज 39 सेकंड के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के झटकों ने राजधानी काराकस समेत देश के कई हिस्सों को हिला दिया। भूकंप के बाद सड़कों में गहरी दरारें पड़ गईं, कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और हजारों लोग दहशत में घरों तथा कार्यालयों से बाहर निकल आए। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआती आकलन में चेतावनी दी है कि इस आपदा में मृतकों की संख्या 10 हजार से लेकर 1 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर हताहतों के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। 39 सेकंड के भीतर आए दो बड़े झटके यूएसजीएस के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसका केंद्र सैन फेलिप क्षेत्र के पास स्थित था। यह झटका भारतीय समयानुसार देर रात महसूस किया गया। इसके ठीक 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र यूमारे क्षेत्र के निकट था। विशेषज्ञों ने इस घटना को "अर्थक्वेक डबलट" यानी एक-दूसरे से जुड़े दो बड़े भूकंपों की दुर्लभ घटना बताया है। दोनों भूकंपों के केंद्रों के बीच लगभग 45 किलोमीटर की दूरी थी और उनकी गहराई भी अलग-अलग दर्ज की गई। राजधानी काराकस में मची अफरा-तफरी भूकंप के तेज झटकों का असर राजधानी काराकस में भी देखने को मिला। कंपन महसूस होते ही लोग अपने घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई सेकंड तक धरती जोर-जोर से हिलती रही, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। सड़कों में दरारें, इमारतों को भारी नुकसान सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में भूकंप की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। कई सड़कों पर लंबी दरारें पड़ गई हैं, जबकि कई इमारतों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। काराकस की एक बहुमंजिला इमारत की छत पर बने स्विमिंग पूल का पानी भूकंप के झटकों से बाहर छलकता हुआ दिखाई दिया। वहीं, एक हवाई अड्डे के टर्मिनल में मौजूद यात्री कंपन महसूस होते ही सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। 1967 के भूकंप से भी ज्यादा डरावना अनुभव 80 वर्षीय मारिया रोमेरो ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्होंने 1967 का विनाशकारी भूकंप भी देखा था, लेकिन इस बार का अनुभव उससे भी अधिक भयावह था। उन्होंने कहा, "यह भूकंप बेहद डरावना था। पुलिस की मदद से हमें इमारत से बाहर निकाला गया। मैंने अपने जीवन में ऐसा कंपन पहले कभी महसूस नहीं किया।" भारी जनहानि की आशंका यूएसजीएस ने अपने प्रारंभिक विश्लेषण में कहा है कि भूकंप का प्रभाव बड़े क्षेत्र में महसूस किया गया है और व्यापक नुकसान की संभावना है। संस्था ने चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है और कई क्षेत्रों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संरचनात्मक क्षति अधिक हुई है तो जनहानि का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। सरकार ने शुरू किया नुकसान का आकलन वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जल्द ही देश को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार भूकंप के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों की आशंका बनी हुई है। राहत एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न लौटने की अपील की गई है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने का काम कर रहे हैं।  

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French woman and her five children rescued in Pakistan after allegedly living in isolation for nearly a decade.
पाकिस्तान में 10 साल तक कथित कैद में रही फ्रांसीसी महिला और पांच बच्चों को मिली आजादी, बेटे की बहादुरी से खुला राज

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फ्रांसीसी महिला और उसके पांच बच्चे कथित तौर पर लगभग एक दशक तक अलग-थलग और कैद जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर रहे। परिवार को तब राहत मिली, जब महिला के एक बेटे ने किसी तरह घर से बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी क्षेत्र बारा का है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार को लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काटकर रखा गया था और महिला के पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। बेटे ने पुलिस तक पहुंचाई जानकारी अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के एक बच्चे ने साहस दिखाते हुए घर से बाहर निकलकर पुलिस को अपनी स्थिति के बारे में बताया। सूचना मिलने के बाद 18 जून को पुलिस ने संबंधित घर पर छापा मारा। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो 54 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक सिल्वी यास्मीना और उनके पांच बच्चे एक छोटे और जर्जर कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिवार की हालत बेहद खराब थी और कुछ सदस्यों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। रेस्क्यू के बाद सभी को तत्काल पेशावर स्थित महिला आश्रय गृह में भेजा गया, जहां उन्हें चिकित्सा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला ने लगाए गंभीर आरोप जांच के दौरान सिल्वी यास्मीना ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को वर्षों तक स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार नहीं मिला। महिला के अनुसार, परिवार को लगातार भय और दबाव में रखा गया तथा पति द्वारा नियमित रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें लगने लगा था कि उनका और उनके बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है। महिला ने कहा कि परिवार को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग कर दिया गया था। बच्चों की पढ़ाई भी हुई प्रभावित पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के सदस्यों को अन्य लोगों से मिलने-जुलने की अनुमति नहीं थी। महिला ने बताया कि 2014 में ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान आने के बाद परिवार पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जानकारी के मुताबिक, परिवार के दो बड़े बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट गई, जबकि पाकिस्तान में जन्मे तीन छोटे बच्चों का कभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में हुई थी शादी पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, सिल्वी यास्मीना और उनके पति की मुलाकात ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2003 में विवाह किया था और कुछ वर्षों तक वहीं रहे। बाद में 2014 में परिवार अपने दो बड़े बच्चों के साथ पाकिस्तान आ गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पाकिस्तान आने के बाद परिवार किन परिस्थितियों में रह रहा था और कथित उत्पीड़न कब से शुरू हुआ। पति हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न सबूत जुटाए जा रहे हैं तथा मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। इस बीच, फ्रांसीसी दूतावास को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। महिला और उनके बच्चों ने फ्रांस लौटने की इच्छा जताई है। संबंधित अधिकारियों के बीच उनकी वापसी को लेकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मानवाधिकारों को लेकर उठे सवाल इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लंबे समय तक घरेलू हिंसा और सामाजिक अलगाव का एक गंभीर मामला माना जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir attends a diplomatic event amid reports of an alleged Mossad threat during Switzerland visit.

आसिम मुनीर की हत्या की साजिश का दावा, पाकिस्तान ने बताया 'काल्पनिक कहानी'; मोसाद पर लगे आरोपों से मचा हड़कंप

Damaged buildings and residents outside homes after a powerful earthquake struck Venezuela and Caracas.

7.1 तीव्रता के भूकंप से दहला वेनेजुएला, कराकास तक महसूस हुए झटके; सुनामी अलर्ट बाद में वापस

Iranian officials discuss nuclear policy as Tehran links IAEA inspections to a final agreement with the United States.

ईरान ने परमाणु निरीक्षण पर रखी बड़ी शर्त, बोला- अंतिम समझौते से पहले नहीं मिलेगी पहुंच

Iranian President Masoud Pezeshkian invites PM Narendra Modi to attend Ayatollah Ali Khamenei’s state funeral ceremonies.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे पीएम मोदी? ईरान के राष्ट्रपति ने भेजा विशेष निमंत्रण

  तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता रहे Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा है। भारत सरकार की ओर से अब तक इस निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 5 से 9 जुलाई तक होंगे अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार से संबंधित धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों का आयोजन तेहरान, कोम और मशहद सहित कई प्रमुख शहरों में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और कोम में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी, जबकि अंतिम और सबसे बड़ा कार्यक्रम 9 जुलाई को मशहद में रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है। तीन दशक तक ईरान की राजनीति के केंद्र में रहे खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली नेता रहे। उनकी अगुवाई में ईरान ने कई क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त सैन्य हमले के दौरान उनकी मृत्यु हुई थी। इसके बाद से देश में राजनीतिक संक्रमण और नई नेतृत्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएं जारी हैं। भारत-ईरान संबंधों पर टिकी निगाहें विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो यह भारत और ईरान के संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जाएगा। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से रणनीतिक सहयोग रहा है। अंतिम निर्णय भारत सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम और कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदला क्षेत्रीय माहौल इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए अंतरिम समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होता दिखाई दे रहा है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही भी फिर से शुरू हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लागू कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का लाइसेंस जारी किया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। पीएम मोदी की मौजूदगी पर बनी रहेगी नजर अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के इस विशेष निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों में भारत और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों में से एक माना जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
US President Donald Trump speaks during a meeting amid debate over India’s tariff policies and trade relations.

भारत के टैरिफ आंकड़ों पर अपने ही मंत्री से भिड़े ट्रंप, बोले- मुझे झूठे नंबर मत दिखाइए

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anjali kumari जून 24, 2026 0

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