ED Raid

ED officials conduct raids in Kolkata and Murshidabad over alleged extortion racket linked to ex-IPS officer
बंगाल में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी, पूर्व IPS अफसर से जुड़े कथित उगाही रैकेट की जांच तेज

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया। ईडी ने कथित उगाही रैकेट से जुड़े मामले में कोलकाता और मुर्शिदाबाद समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक कारोबारी के घर, एक होटल और कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा जांच एजेंसी की एक टीम मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास के घर भी पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी देखी गई, ताकि तलाशी अभियान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईडी ने इस मामले में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। जांच के दायरे में एमडी अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और मुर्शिदाबाद स्थित अन्य संदिग्ध ठिकाने भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित उगाही नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संपर्कों से भी जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद कार्रवाई ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर शुक्रवार को यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और उगाही से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि यह मामला कथित उगाही और अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसमें अपराधियों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है, उनकी तरफ से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? ईडी की टीमें फिलहाल सभी स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।  

surbhi मई 22, 2026 0
ED officials conduct action against AAP leader Deepak Singla in alleged bank fraud and money laundering case.
AAP नेता दीपक सिंगला गिरफ्तार, केजरीवाल और आतिशी ने बताया राजनीतिक साजिश

नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।  

surbhi मई 19, 2026 0
ED officials conduct raids in Delhi and Goa in bank fraud and investment scam investigations.
ED की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली-गोवा में छापेमारी, AAP नेता दीपक सिंगला और बाबाजी फाइनेंस ग्रुप जांच के घेरे में

Enforcement Directorate ने दिल्ली और गोवा समेत कई स्थानों पर दो अलग-अलग मामलों में बड़ी छापेमारी की है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई बैंक फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में की गई है। पहले मामले में ईडी ने Deepak Singla के ठिकानों पर छापेमारी की। दीपक सिंगला Aam Aadmi Party की ओर से विश्वास नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार रह चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में की जा रही है, जिसके तहत दिल्ली और गोवा स्थित कई परिसरों की तलाशी ली गई। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी वर्ष 2024 में इसी मामले से जुड़ी जांच के दौरान ईडी ने सिंगला के ठिकानों पर छापेमारी की थी। हालांकि इस कार्रवाई पर उनकी ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 180 करोड़ की कथित ठगी मामले में भी कार्रवाई ईडी की दूसरी कार्रवाई दिल्ली के सुभाष नगर स्थित ‘बाबाजी फाइनेंस ग्रुप’ से जुड़े मामले में हुई। जांच एजेंसी ने समूह से जुड़े राम सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, बाबाजी फाइनेंस ग्रुप पर निवेश के नाम पर आम लोगों से करीब 180 करोड़ रुपये की कथित ठगी और धन की हेराफेरी करने का आरोप है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया और बाद में रकम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही एजेंसी ईडी दोनों मामलों में वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल धन का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।  

surbhi मई 18, 2026 0
ED officials conduct raid at Punjab minister Sanjeev Arora’s residence in Chandigarh amid money laundering probe
ED Raid: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी का छापा, दिल्ली-NCR तक कार्रवाई

ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई शुरू की. ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर भी पहुंची, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया. पीएमएलए के तहत हुई कार्रवाई ईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत की गई है. जांच एजेंसी ने पंजाब के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी समेत कुल पांच परिसरों पर तलाशी ली है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निवेश और कथित अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि ईडी ने अभी तक मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहला मौका नहीं है जब संजीव अरोड़ा ईडी की जांच के दायरे में आए हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापेमारी की थी. उस समय संजीव अरोड़ा ने कहा था कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है. 2024 में भी हुई थी रेड ईडी ने साल 2024 में भी लुधियाना पश्चिम से विधायक रहे संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा था. उस दौरान जांच औद्योगिक जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई थी. उस समय अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे. राजनीतिक में बढ़ी हलचल ताजा कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Enforcement Directorate investigates ghost bank accounts linked to Ashok Kharat money laundering case
खरात मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED का शिकंजा तेज, 70 करोड़ के ‘घोस्ट अकाउंट’ नेटवर्क का खुलासा

कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी की पड़ताल में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 70 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन और सैकड़ों ‘घोस्ट’ (फर्जी) बैंक अकाउंट्स का नेटवर्क सामने आया है। रूपाली चाकणकर के परिजनों को समन इस मामले में ED ने रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर और उनके बेटे तन्मय को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों को अगले सप्ताह एजेंसी के सामने पेश होना होगा संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन को लेकर पूछताछ की जाएगी प्रतिभा चाकणकर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनके नाम पर खोले गए खाते फर्जी हैं और उनके जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। ‘घोस्ट अकाउंट’ नेटवर्क कैसे काम करता था? जांच में समता नागरी सहकारी पतसंस्था के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 134 से अधिक संदिग्ध फर्जी या ‘प्रॉक्सी’ अकाउंट एक ही मोबाइल नंबर से कई खाते संचालित अधिकांश खातों में अशोक खरात को नॉमिनी दिखाया गया ED के अनुसार, इन खातों को खोलने के लिए लोगों के आधार और पैन जैसे KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। 70 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध ट्रांजेक्शन एजेंसी ने 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की पहचान की है। करीब 100 अकाउंट्स जांच के दायरे में 40 अकाउंट्स को FD की तरह इस्तेमाल किया गया 35.53 करोड़ रुपये जमा और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए इन खातों को कोड नंबर देकर फंड की आवाजाही को नियंत्रित किया जाता था, जिससे यह एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘लेयरिंग’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का शक ED का मानना है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल ‘लेयरिंग’ तकनीक के लिए किया गया, जिसमें पैसों को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाया जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर लोगों से दस्तावेज जुटाकर उनका दुरुपयोग किया गया। बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल एजेंसी ने पतसंस्था के निदेशक संदीप ओमप्रकाश कोयते को भी तलब किया है। जांच का फोकस इस बात पर है कि: एक ही मोबाइल नंबर से इतने खाते कैसे खोले गए? एक ही नॉमिनी होने के बावजूद सिस्टम ने अलर्ट क्यों नहीं किया? सहयोगी ने कबूला रोल जांच में एक अहम खुलासा तब हुआ जब खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके ने माना कि उसने खरात के निर्देश पर कई बार इन खातों में नकदी जमा कराई। नासिक तक फैला नेटवर्क मामले की जांच अब जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था तक पहुंच गई है, जहां 34 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान हुई है। आगे की कार्रवाई ED आने वाले दिनों में: और संदिग्ध खाताधारकों से पूछताछ करेगी मनी ट्रेल को ट्रैक करेगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी

surbhi मई 2, 2026 0
Enforcement Directorate officials conducting raids in Panchkula municipal scam linked locations and seizing documents
पंचकूला नगर निगम घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, 145 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में 12 ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम पंचकूला से जुड़े कथित 145 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। 12 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई ईडी ने बुधवार को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और पटियाला जिले के राजपुरा में कुल 12 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बिक्री-खरीद समझौते और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत बरामद किए। 145 करोड़ रुपये के गबन का आरोप ईडी के मुताबिक, यह मामला पंचकूला नगर निगम के करीब 145 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत इस घोटाले को अंजाम दिया। फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खाते जांच में सामने आया है कि नगर निगम पंचकूला के नाम पर फर्जी और जाली दस्तावेजों के जरिए अनधिकृत बैंक खाते खोले गए। इसके बाद असली खातों से सरकारी धन को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया। रियल एस्टेट में लगाया गया पैसा ईडी के अनुसार, गबन की गई रकम को कई कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए घुमाया गया। बाद में यह पैसा निजी लोगों और रियल एस्टेट फर्मों तक पहुंचाया गया। नगर निगम को धोखा देने के लिए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें भी जारी की गईं। ACB की FIR के बाद शुरू हुई जांच यह जांच पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच में और खुलासों की संभावना ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
ED raids I-PAC offices in Delhi, Bengaluru, Hyderabad over alleged coal scam linked to TMC
I-PAC के ठिकानों पर ED की रेड: कोयला घोटाले से जुड़ा मामला, TMC से कनेक्शन

नई दिल्ली/कोलकाता/बेंगलुरु/हैदराबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद स्थित कंपनी के दफ्तरों में की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी कथित कोयला चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। 2,742 करोड़ के घोटाले से जुड़ा मामला ED की यह कार्रवाई करीब 2,742 करोड़ रुपए के कोयला घोटाले से संबंधित बताई जा रही है। इस मामले में CBI ने 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की। डायरेक्टर और को-फाउंडर भी जांच के दायरे में छापेमारी के दायरे में कंपनी के को-फाउंडर और डायरेक्टर ऋषि राज सिंह के ठिकाने भी शामिल हैं। इसके अलावा डायरेक्टर प्रतीक जैन पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। ED ने हाल ही में दोनों को बयान दर्ज कराने के लिए समन भी भेजा था। हालांकि, सिंह और जैन ने इन समन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, यह कहते हुए कि वे इस समय पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई इससे पहले जनवरी में ED ने कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। उस दौरान कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और सॉल्टलेक स्थित ऑफिस में जांच की गई थी। ममता बनर्जी भी पहुंची थीं मौके पर जनवरी में हुई कार्रवाई के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला था। छापेमारी सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई बाद में कोलकाता पुलिस कमिश्नर मौके पर पहुंचे कुछ ही देर बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचीं बताया जाता है कि ममता बनर्जी कुछ समय वहां रुकीं और बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक फाइल भी देखी गई। इसके बाद वे I-PAC के दफ्तर भी गईं। TMC के लिए चुनावी रणनीति संभालती है I-PAC I-PAC फिलहाल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट का काम कर रही है। कंपनी डेटा-आधारित चुनावी रणनीति, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में विशेषज्ञ मानी जाती है। I-PAC का इतिहास I-PAC की शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी पहले इसका नाम Citizens for Accountable Governance (CAG) था बाद में इसे I-PAC नाम दिया गया प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद कंपनी की कमान पूरी तरह प्रतीक जैन के पास आ गई आगे क्या? ED की यह कार्रवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और इसके राजनीतिक निहितार्थ पर सभी की नजर रहेगी।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
कोयला घोटाला जांच I-PAC कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी
प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC पर ED रेड, जानें क्या है पूरा कोयला घोटाला

पटना,एजेंसियां। प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला दरअसल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से कथित अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और उससे कमाए गए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ED ने यह जांच 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ था, जिस पर ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कोयला चोरी कराने के आरोप हैं।   जांच में क्या आया सामने ? जांच में यह आरोप सामने आया कि ECL के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयला अवैध रूप से निकाला गया और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों व कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI और ED की कार्रवाई में कई जगह छापे पड़े, दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, और कई आरोपियों के नाम सामने आए। ED के मुताबिक अब तक इस केस में 2,742.32 करोड़ रुपये तक की “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित रकम) चिन्हित की गई है। एजेंसी ने पहले भी कई संपत्तियां अटैच की हैं और इस मामले में गिरफ्तारी व चार्जशीट की कार्रवाई हो चुकी है।   I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ताजा मोड़ तब आया जब ED ने दावा किया कि कोयला तस्करी से जुड़ी काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित ट्रांसफर की बात सामने आई, जिसे गोवा में 2021-22 के दौरान I-PAC के ऑपरेशंस से जोड़ा गया। इसी कड़ी में ED ने I-PAC से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोप और कोर्ट में साबित अपराध—दोनों अलग बातें हैं, इसलिए अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। फिलहाल, यह मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, हवाला और चुनावी मैनेजमेंट नेटवर्क तक फैलता दिख रहा है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
कोयला तस्करी मामला I-PAC ठिकानों पर ED की छापेमारी
कोयला तस्करी केस में I-PAC पर ED का शिकंजा, कई शहरों में रेड

कोलकाता,एजेंसियां। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला तस्करी मामले में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में की गई। बेंगलुरु में कंपनी के को-फाउंडर ऋषिराज सिंह के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। इससे पहले जनवरी में भी ED ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर रेड की थी।   क्या है पूरा मामला? ED की जांच 2020 में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज़ क्षेत्र से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की जा रही थी। इसमें ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप है। जांच में अनुप माजी को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है।   ED का दावा है कि अवैध कोयला खनन और तस्करी के जरिए करीब ₹2,742.32 करोड़ के कोयले की हेराफेरी हुई। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों ने अपराध से अर्जित रकम (POC) को अलग-अलग माध्यमों से आगे पहुंचाया। जांच में हवाला नेटवर्क के भी अहम सुराग मिले हैं।   I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ED के मुताबिक, हवाला के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन का संबंध I-PAC से सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि कथित कोयला तस्करी से जुड़े करीब ₹20 करोड़ के हवाला फंड I-PAC तक पहुंचे। हालांकि, कंपनी ने सभी आरोपों पर कहा है कि उसने जांच में पूरा सहयोग दिया है और आगे भी कानून का सम्मान करते हुए सहयोग करती रहेगी।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0