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स्कूल किताबों का महंगा सेट और एनसीईआरटी किताबों की तुलना
प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर महंगाई, 260 रुपये का सेट बिक रहा 3442 में

रांची। प्राइवेट स्कूलों में किताबों का पूरा सेट एनसीईआरटी की वास्तविक कीमत से कई गुना महंगा बिक रहा है। कक्षा-1 की एनसीईआरटी किताब केवल 260 रुपये में उपलब्ध है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में यही किताब पूरे सेट के रूप में 3442 रुपये तक बिक रही है। इस समस्या के पीछे स्कूल और प्रकाशकों के कथित गठजोड़ का हाथ माना जा रहा है।   कारोबार और कमीशन का खेल रांची में स्कूली किताबों का कारोबार इस साल लगभग 120 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें करीब 160 सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल शामिल हैं। इस कारोबार में लगभग 36 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में स्कूलों तक पहुंचते हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में 5-6 गुना महंगी होती हैं और स्कूलों द्वारा इन्हें कोर्स में शामिल करना लगभग अनिवार्य है।   हर साल बढ़ती कीमतें किताबों की कीमत हर साल 10-15% बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, कक्षा-1 के लिए पिछली बार अभिभावकों को लगभग 3500 रुपये खर्च करने पड़ते थे, जबकि इस साल यह बढ़कर 5195 रुपये हो गया। कक्षा-5 में 21 किताबों का सेट 7580 रुपये तक पहुंच गया है।   स्कूल और प्रकाशक की रणनीति किताबों का कंटेंट लगभग वही रहता है, लेकिन प्रकाशक बदल दिए जाते हैं। कुछ अध्याय बदलकर या नया कवर देकर अभिभावकों को नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। कई बार स्कूल नई किताबों की सूची पहले से तय कर देते हैं और अभिभावकों को बताने के लिए यह लिखित या मौखिक रूप में दिया जाता है।   एनसीईआरटी की किताबों का मूल्य • कक्षा-1 : 260 रुपये • कक्षा-2 : 260 रुपये • कक्षा-3 : 650 रुपये • कक्षा-4 : 520 रुपये • कक्षा-5 : 390 रुपये • कक्षा-6 : 975 रुपये • कक्षा-7 : 780 रुपये • कक्षा-8 : 650 रुपये     डीएवी स्कूलों में किताबों का मूल्य   • कक्षा-1 : 517 रुपये • कक्षा-2 : 550 रुपये • कक्षा-3 : 725 रुपये • कक्षा-4 : 815 रुपये • कक्षा-5 : 1009 रुपये • कक्षा-6 : 1208 रुपये • कक्षा-7 : 1314 रुपये • कक्षा-8 : 1620 रुपये     निजी स्कूलों में किताबों का मूल्य • कक्षा-1 : 3442 रुपये • कक्षा-2 : 3490 रुपये • कक्षा-3 : 4193 रुपये • कक्षा-4 : 4189 रुपये • कक्षा-5 : 5042 रुपये • कक्षा-6 : 5807 रुपये • कक्षा-7 : 6007 रुपये • कक्षा-8 : 5340 रुपये

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Students checking RBSE 12th Commerce Result 2026 online with marksheet on computer screen
राजस्थान बोर्ड 12वीं कॉमर्स रिजल्ट 2026 जारी, 93.64% छात्र पास

जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने कक्षा 12वीं कॉमर्स स्ट्रीम का रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है। इस बार कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल पास प्रतिशत 93.64% रहा है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in और rajresults.nic.in पर जाकर अपना परिणाम आसानी से चेक कर सकते हैं। ऐसे करें RBSE 12th Commerce Result 2026 चेक रिजल्ट देखने के लिए इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Senior Secondary Commerce Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर दर्ज करें सबमिट बटन पर क्लिक करें स्क्रीन पर आपका रिजल्ट दिखाई देगा रिजल्ट डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंट निकाल लें इस साल का प्रदर्शन कुल पास प्रतिशत: 93.64% कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों ने इस वर्ष बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे सफलता दर काफी ऊंची रही है पिछले साल कैसा रहा था रिजल्ट? पिछले वर्ष राजस्थान बोर्ड ने 12वीं के सभी स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ जारी किया था। कॉमर्स स्ट्रीम पास प्रतिशत (2025): 99.07% कुल 8,93,616 छात्रों ने 12वीं के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था इनमें से 28,250 छात्र कॉमर्स स्ट्रीम के थे टॉपर: कंगना कोसनानी (99.20%)

surbhi मार्च 31, 2026 0
Students sitting in a government school classroom with poor infrastructure due to lack of funds in Hazaribagh
हजारीबाग के 1457 सरकारी स्कूलों में फंड संकट, नए सत्र से पहले शिक्षा व्यवस्था पर मंडराया खतरा

एडमिशन-रजिस्टर से लेकर साफ-सफाई तक प्रभावित, करीब एक लाख बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी स्कूलों की हालत नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही चिंताजनक हो गई है। जिले के 1457 प्रारंभिक विद्यालयों को अब तक विद्यालय विकास कोष की राशि नहीं मिल पाई है, जिससे स्कूलों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। नए सत्र से पहले बढ़ी परेशानी राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में 1 अप्रैल 2026 से नया सत्र शुरू होना है, लेकिन मार्च खत्म होने को है और अब तक फंड जारी नहीं किया गया है। आमतौर पर हर साल झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा मार्च की शुरुआत में ही यह राशि उपलब्ध करा दी जाती है, ताकि स्कूल समय रहते तैयारी पूरी कर सकें। इस बार देरी से स्कूल प्रबंधन और शिक्षक दोनों चिंतित हैं। एडमिशन और अटेंडेंस रजिस्टर की कमी फंड नहीं मिलने का सबसे बड़ा असर एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ रहा है। स्कूलों में नामांकन और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए जरूरी रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा चॉक, डस्टर जैसी सामान्य शैक्षणिक सामग्री भी स्कूलों में नहीं पहुंच पाई है। कई शिक्षक अपने स्तर पर व्यवस्था कर किसी तरह पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। एक लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर इस वित्तीय संकट का सीधा प्रभाव जिले के करीब एक लाख छात्रों पर पड़ रहा है। बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द फंड नहीं मिला तो सत्र की शुरुआत अव्यवस्थित तरीके से होगी। स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित विद्यालय विकास कोष का एक हिस्सा साफ-सफाई और स्वच्छता पर खर्च किया जाता है, लेकिन फंड के अभाव में स्कूलों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है और पेयजल की देखरेख भी प्रभावित हो रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। छात्रों की संख्या के आधार पर मिलती है राशि सरकारी प्रावधान के अनुसार, स्कूलों को छात्रों की संख्या के आधार पर फंड दिया जाता है- 100 तक छात्र: 25 हजार रुपये 101 से 200 छात्र: 50 हजार रुपये 201 से 300 छात्र: 75 हजार रुपये यह राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के खाते में भेजी जाती है, जहां से स्कूल के विकास कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है। विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल फंड जारी करने में हो रही देरी को लेकर शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जमीनी स्तर पर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। क्या बोले अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि माध्यमिक स्कूलों को फंड मिल चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रारंभिक विद्यालयों के लिए भी जल्द ही राशि जारी कर दी जाएगी, जिससे स्कूलों में जरूरी व्यवस्थाएं बहाल हो सकें।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
NCERT नॉन टीचिंग भर्ती एडमिट कार्ड और उम्मीदवार डाउनलोड करते हुए
एनसीईआरटी नॉन टीचिंग भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें तुरंत डाउनलोड

नई दिल्ली,एजेंसियां। National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने ग्रुप-ए, बी और सी के नॉन-टीचिंग पदों के लिए भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in पर जाकर अपने लॉगिन क्रेडेंशियल की मदद से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए एडमिट कार्ड का प्रिंट और एक वैध फोटो पहचान पत्र साथ ले जाना अनिवार्य है।   परीक्षा तिथि और शिफ्ट डिटेल्स यह भर्ती परीक्षा 24, 25 और 27 मार्च 2026 को अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपने एडमिट कार्ड में दी गई शिफ्ट टाइमिंग और परीक्षा केंद्र की जानकारी ध्यान से जांच लें और समय से पहले पहुंचें।   रिक्तियों का विवरण इस भर्ती अभियान के तहत कुल 173 पद भरे जाएंगे। इनमें ग्रुप-ए के 9 पद, ग्रुप-बी के 26 पद और ग्रुप-सी के 138 पद शामिल हैं। ये पद लेवल 2 से लेकर लेवल 12 तक के विभिन्न वेतनमान में आते हैं।   वेतन और भत्ते चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार सैलरी मिलेगी। लेवल-2 के पदों पर शुरुआती बेसिक वेतन ₹19,900 है, जबकि लेवल-12 तक यह ₹78,800 तक जाता है। इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ता (TA) जैसे लाभ भी दिए जाएंगे।   एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं, “Non-Teaching Recruitment Admit Card 2026” लिंक पर क्लिक करें और अपना रजिस्ट्रेशन नंबर व जन्मतिथि दर्ज करें। लॉगिन के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर प्रिंट निकाल लें।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 19, 2026 0
elhi University campus with students during admission process through CUET showing transparency in UG admissions
DU Admission 2026: CUET के जरिए 70,000+ UG एडमिशन, पारदर्शिता पर उठे सवालों पर यूनिवर्सिटी की सफाई

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने एडमिशन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तार से सफाई दी है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं तय गाइडलाइंस और पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित होती हैं, और किसी भी तरह के भेदभाव के आरोप निराधार हैं।   CUET के जरिए मेरिट-बेस्ड एडमिशन DU के अनुसार, अब ज्यादातर अंडरग्रेजुएट (UG) और कई पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में एडमिशन CUET के स्कोर के आधार पर होता है। इस प्रक्रिया में इंटरव्यू की भूमिका सीमित कर दी गई है, जिससे एडमिशन पूरी तरह मेरिट आधारित हो गया है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है। पिछले शैक्षणिक सत्र में UG कोर्सेज में 70,395 से ज्यादा छात्रों को एडमिशन मिला।   UG एडमिशन 2025-26: कैटेगरी वाइज आंकड़े UR: 32,777 (46.56%)   OBC: 17,971 (25.52%)   SC: 10,517 (14.93%)   ST: 3,251 (4.62%)   EWS: 5,879 (8.35%)   PG एडमिशन 2025-26: संतुलित भागीदारी UR: 4,022 (38.59%)   OBC: 3,115 (29.88%)   SC: 1,488 (14.27%)   ST: 614 (5.89%)   EWS: 1,203 (11.54%)   इन आंकड़ों से यूनिवर्सिटी का दावा है कि सभी वर्गों को समान अवसर दिया गया है।   टीचर भर्ती: 5,000+ नियुक्तियां 2021 से 15 मार्च 2026 के बीच DU में कुल 5,056 शिक्षकों की भर्ती की गई: General: 2,123 (41.99%)   OBC: 1,282 (25.35%)   SC: 717 (14.18%)   ST: 349 (6.90%)   EWS: 422 (8.35%)   PwD: 163 (3.22%)   यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भर्ती प्रक्रिया भी विविधता और नियमों के अनुरूप की गई है। DU ने अपने आधिकारिक आंकड़ों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि एडमिशन और भर्ती दोनों ही प्रक्रियाएं पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित हैं। CUET सिस्टम के आने के बाद एडमिशन प्रक्रिया और अधिक संरचित और भरोसेमंद बनी है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
CBSE Class 12 maths question paper with QR code amid exam paper controversy
CBSE का बड़ा बयान: 12वीं गणित का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली, QR कोड विवाद पर बोर्ड ने दी सफाई

  12वीं कक्षा की गणित परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर उठे विवाद के बीच Central Board of Secondary Education (CBSE) ने स्पष्ट किया है कि 9 मार्च 2026 को आयोजित गणित का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली है और परीक्षा की सुरक्षा में किसी भी तरह की सेंध नहीं लगी है। बोर्ड ने कहा कि प्रश्नपत्रों में सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर शामिल किए जाते हैं, जिनमें QR कोड भी शामिल हैं, जिनकी मदद से किसी भी संदिग्ध स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की जांच की जा सकती है।   QR कोड स्कैन करने पर YouTube वीडियो खुलने से उठा विवाद दरअसल कुछ छात्रों और अभिभावकों ने शिकायत की थी कि गणित के प्रश्नपत्र में छपे एक QR कोड को स्कैन करने पर वह YouTube पर मौजूद एक वीडियो की ओर रीडायरेक्ट हो रहा था। इस घटना के बाद कई लोगों ने प्रश्नपत्र की असलियत और परीक्षा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे।   CBSE ने कहा – प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित CBSE ने अपने बयान में कहा कि परीक्षा में इस्तेमाल किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं और उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं है। बोर्ड के अनुसार, प्रश्नपत्रों में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होती है, जिसमें QR कोड भी शामिल है। इन कोड्स का उपयोग जरूरत पड़ने पर पेपर की सत्यता और स्रोत की जांच के लिए किया जाता है।   भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए कदम CBSE ने यह भी बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Children entering private school under RTE scheme in Hazaribagh for free admission 2026
Hazaribagh: RTE के तहत 279 बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन

  झारखंड के Hazaribagh जिले में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत चालू सत्र 2026-27 के लिए गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिले के 23 निजी स्कूलों में कुल 279 बच्चों का मुफ्त एडमिशन लिया जाएगा। इसके लिए अभिभावक 14 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने नामांकन की तैयारी पूरी कर ली है। आवेदन करने के लिए अभिभावकों को आधिकारिक वेबसाइट rtehazaribagh.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। यह प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू हो चुकी है। सबसे ज्यादा 20-20 सीटों पर नामांकन बरकट्ठा के डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो, चौपारण के सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा, शहरी क्षेत्र के नेशनल पब्लिक स्कूल और इचाक के चैंपियन बेसिक अकैडमी में होगा। वहीं सबसे कम नामांकन डाडी प्रखंड के डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी में सिर्फ 5 सीटों पर किया जाएगा।   RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत निजी स्कूलों को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है।   एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज नामांकन के लिए अभिभावकों को बच्चे के पते के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या बिजली बिल देना होगा। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और दिव्यांग बच्चों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट भी जरूरी होगा।   उम्र सीमा तय नर्सरी और एलकेजी: न्यूनतम उम्र 3 वर्ष 6 माह और अधिकतम 4 वर्ष 6 माह कक्षा 1: उम्र 5 वर्ष 6 माह से अधिक और 7 वर्ष से कम उम्र की गणना 31 मार्च 2026 के आधार पर की जाएगी।   नियमों का सख्ती से पालन जिला शिक्षा अधीक्षक Akash Kumar ने कहा कि जिले में RTE नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया में लापरवाही करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने अलग से टीम गठित की है, जो आवेदन की जांच और चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0