शिक्षा

NCERT Gets Deemed University Status

NCERT बना ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’: सरकार का बड़ा फैसला, अब चला सकेगा डिग्री कोर्स

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
NCERT building with students and education symbols representing new deemed university status in India
NCERT Deemed University Status India Education Reform

केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दे दिया है। इस फैसले के बाद अब NCERT न केवल शोध और पाठ्यक्रम निर्माण तक सीमित रहेगा, बल्कि खुद भी डिग्री और उच्च शिक्षा कार्यक्रम संचालित कर सकेगा।

क्या है सरकार का फैसला?

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, NCERT को UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत ‘Deemed to be University’ घोषित किया गया है।

इसका मतलब है कि अब NCERT को विश्वविद्यालय जैसी शैक्षणिक स्वायत्तता मिल गई है।

अब NCERT क्या-क्या कर सकेगा?

इस नए दर्जे के बाद NCERT के अधिकार काफी बढ़ जाएंगे:

  • डिप्लोमा, अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स शुरू कर सकेगा
  • पीएचडी और शोध आधारित कार्यक्रम चला सकेगा
  • स्पेशलाइज्ड एजुकेशन प्रोग्राम डिजाइन कर सकेगा
  • देश-विदेश में ऑफ-कैंपस और ऑफशोर सेंटर खोल सकेगा (UGC गाइडलाइन के तहत)

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है:

  • शिक्षक शिक्षा (Teacher Training) को बेहतर बनाना
  • शिक्षा में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना
  • एक मजबूत और आधुनिक शिक्षा ढांचा तैयार करना

छात्रों और शिक्षा प्रणाली पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से:

  • शिक्षक बनने की पढ़ाई और अधिक गुणवत्ता वाली होगी
  • शिक्षा क्षेत्र में नए कोर्स और रिसर्च के अवसर बढ़ेंगे
  • NCERT का रोल सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा

हालांकि, यह भी देखना होगा कि नए कोर्स और कैंपस कैसे और कब शुरू किए जाते हैं।

निष्कर्ष

NCERT को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलना भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल शिक्षक शिक्षा मजबूत होगी, बल्कि छात्रों को भी नए अवसर मिलेंगे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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CBSE Board 10th Result 2026: कब आएगा रिजल्ट और कैसे करें चेक?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द जारी होने वाला है। परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र-छात्राएं अब अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कब जारी होगा CBSE 10th Result 2026? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE कक्षा 10वीं का रिजल्ट अप्रैल 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी किया जा सकता है। परीक्षा का आयोजन: 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 कुल छात्र: लगभग 45 लाख कहां चेक करें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इन वेबसाइट्स पर अपना परिणाम देख सकते हैं: cbseresults.nic.in results.cbse.nic.in cbse.nic.in इसके अलावा, छात्र DigiLocker (digilocker.gov.in) के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। रिजल्ट कैसे डाउनलोड करें? रिजल्ट देखने के लिए ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: CBSE की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं “CBSE Class 10 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें सबमिट पर क्लिक करें आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा इसे डाउनलोड करें और प्रिंटआउट निकाल लें पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना अनिवार्य है इससे कम अंक होने पर छात्र को फेल माना जाएगा जरूरी बातें रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट स्लो हो सकती है, ऐसे में धैर्य रखें DigiLocker पर भी रिजल्ट उपलब्ध रहेगा मार्कशीट का प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें  

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नई दिल्ली,एजेंसियां। देशभर के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने के करीब है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जल्द ही कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और बोर्ड से जुड़े संकेतों के आधार पर माना जा रहा है कि CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 लगभग 14 अप्रैल के आसपास जारी हो सकता है। हालांकि, CBSE ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है, इसलिए छात्रों को सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट और बोर्ड की सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए।   इस बार 10वीं और 12वीं के परिणाम एक साथ आने की संभावना कम मानी जा रही है। वजह साफ है—कक्षा 10वीं की परीक्षाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षा प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चलने की जानकारी बोर्ड से जुड़े शेड्यूल में दिखाई दे रही है। ऐसे में मूल्यांकन और रिजल्ट प्रोसेस अलग-अलग चरणों में होने की संभावना है। यही कारण है कि बोर्ड पहले 10वीं का परिणाम जारी कर सकता है, ताकि छात्र समय पर अपने अगले शैक्षणिक विकल्प चुन सकें।   ऐसे चेक करें CBSE 10वीं रिजल्ट 2026 छात्र अपना रिजल्ट जारी होने के बाद CBSE की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in  और रिजल्ट पोर्टल results.cbse.nic.in  पर जाकर देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, जन्म तिथि, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड में दी गई जरूरी जानकारी भरनी होगी। सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट भी किया जा सकेगा।   DigiLocker से भी मिलेगी डिजिटल मार्कशीट CBSE छात्रों के लिए DigiLocker एक अहम विकल्प बना हुआ है। बोर्ड की DigiLocker सेवा के अनुसार, छात्र 6 अंकों के एक्सेस कोड की मदद से अपना अकाउंट एक्टिवेट कर सकते हैं और रिजल्ट जारी होने के बाद वहीं अपनी डिजिटल मार्कशीट और प्रमाणपत्र देख सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर OTP के जरिए वेरिफाई करना होता है। डॉक्यूमेंट बाद में “Issued Documents” सेक्शन में उपलब्ध होते हैं।   छात्रों के लिए जरूरी सलाह छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फर्जी रिजल्ट डेट्स या अनऑफिशियल लिंक से बचें। बोर्ड की वेबसाइट, स्कूल और DigiLocker जैसे आधिकारिक माध्यमों पर ही नजर रखें। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 14 अप्रैल की तारीख संभावित है, अंतिम नहीं। जैसे ही CBSE आधिकारिक घोषणा करेगा, रिजल्ट लिंक सक्रिय कर दिया जाएगा।

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रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से JEE Main के दूसरे सत्र की परीक्षा 2 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इसके एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं, जिन्हें छात्र NTA की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। कब कौन सा पेपर JEE Main के शेड्यूल के अनुसार पेपर वन (बीई-बीटेक) 2, 4, 5, 6 और 8 अप्रैल को होगा। वहीं पेपर टूए (बीआर्क), पेपर टूबी (बी प्लानिंग) और दोनों का संयुक्त पेपर 7 अप्रैल को होगी।   13 भाषाओं  में परीक्षा छात्रों के लिए अच्छी बात यह है कि परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 13 क्षेत्रीय भाषाओं में ली जा रही है। इससे अलग-अलग राज्यों के छात्रों को अपनी भाषा में परीक्षा देने में आसानी होगी।   एनसीईआरटी से करें मजबूत तैयारी विशेषज्ञों का कहना है कि JEE Main का पूरा सिलेबस 11वीं और 12वीं की NCERT किताबों पर आधारित होता है। इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे बेसिक्स मजबूत करने के लिए NCERT पर खास ध्यान दें।   बीई-बीटेक में 75 सवाल, 300 अंक का पेपर पेपर वन (बीई-बीटेक) तीन घंटे का होगा। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से कुल 75 सवाल पूछे जाएंगे। हर विषय से 25-25 प्रश्न होंगे। इनमें 20 बहुविकल्पीय और 5 संख्यात्मक सवाल होंगे। पूरा पेपर 300 अंकों का होगा और हर सही जवाब पर 4 अंक मिलेंगे।   बीआर्क और बी प्लानिंग का पैटर्न पेपर टूए (बीआर्क) में गणित, सामान्य योग्यता और ड्राइंग से कुल 77 प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं पेपर टूबी (बी प्लानिंग) में गणित, सामान्य योग्यता और प्लानिंग से 100 प्रश्न होंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि ड्राइंग को छोड़कर बाकी सभी पेपर कंप्यूटर आधारित होंगे।   ऑनलाइन होगी परीक्षा, समय का रखें खास ध्यान पूरी परीक्षा ऑनलाइन मोड में ली जाएगी, इसलिए छात्रों को समय प्रबंधन और स्क्रीन पर सवाल हल करने की आदत जरूरी है।

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