शिक्षा

Manoj Sinha
जम्मू-कश्मीर सरकार ने अलगाववाद का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों पर कार्रवाई की, आठ अधिकारियों को निलंबित किया

श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई दो विवादित पुस्तकों में कथित रूप से अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों का महिमामंडन किए जाने के आरोपों के बाद बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, एक संविदाकर्मी की सेवा समाप्त कर दी है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही दोनों पुस्तकों को तत्काल प्रभाव से स्कूलों से वापस लेने का निर्देश भी जारी किया गया है।   दो पुस्तकों पर उठे थे गंभीर सवाल   विवाद उन दो पुस्तकों को लेकर खड़ा हुआ जिन्हें समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजा गया था। आरोप है कि इन पुस्तकों में कुछ अलगाववादी नेताओं और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया था। मामला सामने आने के बाद सरकार ने पुस्तकों का वितरण तुरंत रोक दिया और उनकी समीक्षा शुरू कर दी।   उच्चस्तरीय जांच के आदेश   सरकार ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही विवादित पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू-कश्मीर में भविष्य की शैक्षणिक प्रकाशन प्रक्रिया से ब्लैकलिस्ट करने का भी निर्णय लिया गया है।   राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज   मामले के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने शिक्षा व्यवस्था में ऐसी सामग्री शामिल होने पर सवाल उठाए। सरकार का कहना है कि स्कूलों में केवल तथ्यात्मक, संतुलित और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सामग्री ही उपलब्ध कराई जाएगी तथा जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
CBSE Class 10 Phase - 2
CBSE Class 10 Phase-2 रिजल्ट कभी भी हो सकता है जारी, लाखों छात्रों की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जल्द ही कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड (Phase-2) परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। हालांकि बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है, लेकिन छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर ही अपडेट देखें और किसी भी फर्जी लिंक या अफवाह से बचें।   6.69 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार   इस वर्ष करीब 6.69 लाख छात्रों ने CBSE की सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है जिन्होंने अपने अंकों में सुधार के लिए परीक्षा दी, जबकि कई छात्रों ने कम्पार्टमेंट श्रेणी के तहत परीक्षा दी थी। Phase-2 परीक्षा 15 से 21 मई के बीच आयोजित की गई थी।   इन वेबसाइटों पर सबसे पहले मिलेगा रिजल्ट   रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड इन आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे: cbseresults.nic.in results.cbse.nic.in cbse.gov.in DigiLocker UMANG App रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि की आवश्यकता होगी।   फर्जी लिंक और अफवाहों से बचने की सलाह   CBSE ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत वेबसाइटों पर वायरल हो रहे रिजल्ट लिंक पर भरोसा न करें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परिणाम केवल आधिकारिक पोर्टल पर ही जारी किए जाएंगे। फिलहाल रिजल्ट की तारीख घोषित नहीं हुई है और छात्र नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Hemant Soren
झारखंड की यूनिवर्सिटियों में बड़ा बदलाव: कुलपतियों के अधिकार सीमित, नियुक्ति और खरीद प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी

रांची। झारखंड सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत कुलपतियों (वीसी) के कई महत्वपूर्ण अधिकार सीमित कर दिए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कुलपति चपरासी तक की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में होने वाली खरीद, टेंडर और आउटसोर्सिंग की पूरी प्रक्रिया भी एक समान नियमों के तहत संचालित होगी।   राज्य सरकार ने 'स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड-2026' का मसौदा तैयार किया है। पहली बार सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल और मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल बनाया गया है। इसका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना, अनियमितताओं पर रोक लगाना और सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसी व्यवस्था लागू करना है।   कुलपतियों के अधिकारों में होगी बड़ी कटौती   वर्तमान व्यवस्था में कुलपतियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त है। वे विश्वविद्यालय मुख्यालय और अंगीभूत कॉलेजों में संविदा पर नियुक्तियां कर सकते हैं तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी भी देते हैं। इसके अलावा सूचीबद्ध एजेंसियों के अलावा अन्य एजेंसियों को भी आउटसोर्सिंग का काम देने और भवन निर्माण, मरम्मत व विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करने का अधिकार उनके पास होता है।   नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नियुक्ति, आउटसोर्सिंग और वित्तीय फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जा सकेंगे।   खरीद और आउटसोर्सिंग के लिए बनेगा डिजिटल सिस्टम नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों की बहाली के लिए मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल लागू किया जाएगा। वहीं कंप्यूटर, लैब उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकें, वाहन या अन्य सामग्री की खरीद के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल होगा।   सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और तकनीकी कर्मचारियों जैसी सभी आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए एजेंसियों का चयन केवल राज्य सरकार के अधिकृत ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल या निर्धारित आउटसोर्सिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। किसी एजेंसी को सीधे काम देने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।   हर खरीद और भुगतान का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड नई व्यवस्था के तहत किसी भी सामग्री की खरीद से पहले उसकी आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति, निविदा, तकनीकी मूल्यांकन, आपूर्ति, गुणवत्ता जांच और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी।   साथ ही संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि सामान या सेवा वास्तव में प्राप्त हुई है। इसके बाद ही भुगतान जारी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी आपूर्ति, बिना काम के भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
AI in Schools
AI in Schools: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, अगले महीने से सभी सरकारी स्कूलों में AI पाठ्यक्रम होगा लागू

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब सरकार ने स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अगले महीने से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पिछले एक वर्ष से इस पाठ्यक्रम पर काम किया जा रहा था और अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।   छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए किया जाएगा तैयार   सरकार का कहना है कि AI पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें भविष्य के रोजगार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है। इसके तहत विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और तकनीक के व्यावहारिक उपयोग से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी।   'ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026' कार्यक्रम में हुआ ऐलान   शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 'ब्राइट माइंड्स पंजाब 2026' कार्यक्रम के दौरान इस पहल की घोषणा की। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों के साथ शिक्षा सुधारों पर चर्चा भी की गई। इस दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी AI शिक्षा को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।   सरकारी स्कूलों में तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा   राज्य सरकार का दावा है कि AI पाठ्यक्रम लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों के छात्र भी आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जुड़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों में नवाचार, डिजिटल कौशल और तकनीकी सोच को बढ़ावा देगी तथा उन्हें भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगी।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
NCERT
जम्मू में नौवीं की NCERT किताबों का संकट बरकरार, सोशल स्टडीज और मैथ्स की पुस्तकें अब भी गायब

श्रीनगर, एजेंसियां।  नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के कई महीने बाद भी जम्मू में नौवीं कक्षा की एनसीईआरटी (NCERT) की सभी किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल दोबारा खुल चुके हैं और पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो गई है, लेकिन सोशल स्टडीज और गणित की कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें अब भी बाजार से नदारद हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।   कुछ विषयों की किताबें उपलब्ध, लेकिन जरूरी पुस्तकें अब भी नहीं जम्मू शहर के विभिन्न बुक स्टोर्स पर पहले की तुलना में स्थिति में सुधार जरूर आया है। नौवीं कक्षा के अधिकांश विषयों की किताबें अब उपलब्ध हैं, लेकिन सोशल स्टडीज पार्ट-1, सोशल स्टडीज पार्ट-2 और मैथ्स पार्ट-2 की पुस्तकें अभी भी अधिकांश दुकानों पर नहीं मिल रही हैं। इन किताबों की कमी के कारण छात्रों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।   सिलेबस में बदलाव बना बड़ी वजह इस वर्ष एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के लगभग सभी विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। नए सिलेबस के अनुरूप नई किताबें जारी की गईं, जिसके चलते अप्रैल और मई में अधिकांश विषयों की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं थीं। हालांकि समय के साथ कई किताबों की आपूर्ति सामान्य हुई है, लेकिन कुछ प्रमुख विषयों की पुस्तकें अब भी पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंच पाई हैं।   खाली हाथ लौट रहे अभिभावक बुक स्टोर्स पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के लिए किताबें खरीदने पहुंच रहे हैं, लेकिन जरूरी किताबें उपलब्ध नहीं होने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कई दुकानदार अभिभावकों का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे हैं ताकि नई खेप आने पर उन्हें सूचना दी जा सके।   शिक्षा सत्र आगे बढ़ने के साथ किताबों की कमी छात्रों की पढ़ाई पर असर डाल रही है। अभिभावकों का कहना है कि समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से बच्चों को नए सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में जल्द से जल्द सभी विषयों की किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग तेज हो गई है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
BPSC topper Suditi Bhushan celebrates her State Tax Assistant Commissioner selection a day after her wedding.
मेहंदी का रंग फीका भी नहीं पड़ा और बन गईं अफसर, शादी के अगले ही दिन BPSC में मिली बड़ी सफलता; जानिए सुदिति भूषण की प्रेरणादायक कहानी

पटना: कहते हैं कि मेहनत और सही समय जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता की कहानी मिसाल बन जाती है। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली सुदिति भूषण ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। शादी के अगले ही दिन उन्हें ऐसी खुशखबरी मिली, जिसने उनके जीवन की नई शुरुआत को और भी यादगार बना दिया। 19 जून 2026 को सुदिति ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी सौरभ श्रीवास्तव के साथ सात फेरे लिए और 20 जून को घोषित 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा के परिणाम में उनका चयन राज्य कर सहायक आयुक्त (State Tax Assistant Commissioner) के प्रतिष्ठित पद पर हो गया। शादी की खुशियों के बीच मिली इस उपलब्धि ने पूरे परिवार और शुभचिंतकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शादी के अगले दिन मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशखबरी शादी के समारोह की रस्में अभी पूरी भी नहीं हुई थीं कि अगले दिन बीपीएससी का परिणाम जारी हो गया। रिजल्ट में सुदिति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य कर सहायक आयुक्त के पद के लिए सफलता हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि उनके पति सौरभ श्रीवास्तव भी प्रशासनिक सेवा में हैं और वर्तमान में कार्यपालक दंडाधिकारी (Executive Magistrate) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह यह दंपति अब प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी एक प्रेरणादायक जोड़ी बन गया है। यह पहली सफलता नहीं, पहले भी पास कर चुकी हैं BPSC सुदिति भूषण की यह उपलब्धि अचानक मिली सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयास का परिणाम है। इससे पहले उन्होंने 64वीं बीपीएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। उस परीक्षा में उन्होंने पूरे बिहार में 486वीं रैंक हासिल की थी, जिसके आधार पर उन्हें अंचल अधिकारी (CO) का पद मिला था। वर्तमान में वह बक्सर जिले में चकबंदी पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। हालांकि, उनका लक्ष्य इससे भी ऊंचा था। उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और लगातार मेहनत करते हुए दूसरे प्रयास में अपनी रैंक में उल्लेखनीय सुधार कर राज्य कर सहायक आयुक्त का पद हासिल किया। पटना के प्रतिष्ठित संस्थानों से की पढ़ाई मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के बड़का डुमरा गांव की रहने वाली सुदिति की शुरुआती शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, पटना से स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद पटना वीमेंस कॉलेज से भूगोल (Geography) ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों से ही उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार तैयारी की और अपनी मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त की। प्रशासनिक और शैक्षणिक माहौल वाले परिवार से हैं सुदिति सुदिति की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके घर का वातावरण शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा रहा, जिसने उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। उनके पिता डॉ. कृष्ण भूषण प्रसाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनकी मां डॉ. निभा श्रीवास्तव आकाशवाणी पटना में उद्घोषिका हैं। उनकी बड़ी बहन मेधा भूषण भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी हैं। वहीं उनके छोटे भाई सत्यम भूषण श्रीवास्तव Banaras Hindu University से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। मेहनत और धैर्य की मिसाल सुदिति भूषण की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। नौकरी के साथ तैयारी करना, पहले से मिली सरकारी नौकरी के बावजूद बेहतर रैंक के लिए प्रयास जारी रखना और जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत अवसर के बीच भी अपनी उपलब्धि हासिल करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है। उनकी सफलता आज हजारों बीपीएससी और सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
CBSE Class 10 Result
CBSE कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जल्द, लाखों छात्रों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 10 की सेकेंड बोर्ड परीक्षा (फेज-2) का परिणाम जल्द जारी कर सकता है। हालांकि बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है। छह लाख से अधिक छात्र अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   जल्द जारी हो सकता है रिजल्ट   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE किसी भी समय सेकेंड बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड CBSE की आधिकारिक वेबसाइट, DigiLocker और UMANG ऐप के माध्यम से देख सकेंगे।   'बेटर मार्क्स रूल' से छात्रों को मिलेगा फायदा   इस वर्ष लागू नई व्यवस्था के तहत यदि किसी छात्र ने दोनों बोर्ड परीक्षाओं में हिस्सा लिया है, तो जिस विषय में अधिक अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार का बेहतर अवसर मिलेगा।   मार्कशीट पर नहीं होगा 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख   CBSE ने स्पष्ट किया है कि सेकेंड बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के पास प्रमाणपत्र या अंतिम मार्कशीट पर 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इससे कक्षा 11 में प्रवेश या आगे की पढ़ाई पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।   अभिभावकों और कर्मचारियों को सलाह   बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे रिजल्ट से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी या सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें। केवल CBSE के आधिकारिक पोर्टल पर जारी सूचना को ही सही माना जाए।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Students exploring career options after Class 12 with information on healthcare, IT, agriculture, hospitality, and vocational courses.
12वीं के बाद क्या करें? बिहार-झारखंड में इन कोर्सेज की बढ़ी डिमांड, शानदार करियर और बेहतर नौकरी के मिल सकते हैं अवसर

नई दिल्ली: 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे बेहतर करियर और अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकें। पहले जहां अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य ग्रेजुएशन को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब बदलते समय के साथ रोजगार का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हेल्थकेयर, आईटी, कृषि, हॉस्पिटैलिटी और स्किल-बेस्ड इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स सामने आए हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इनमें रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और अपने भविष्य को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पैरामेडिकल कोर्स: हेल्थ सेक्टर में बढ़ रही मांग देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बिहार और झारखंड में भी नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डायग्नोस्टिक सेंटर खुलने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। 12वीं (साइंस) के बाद छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) एक्स-रे टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजी ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन फिजियोथेरेपी इन कोर्सों के बाद सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों, लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों में नौकरी के अच्छे अवसर मिलते हैं। 2. आईटी और कंप्यूटर कोर्स: डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अवसर डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण आईटी सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है। अगर आपकी रुचि कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में है, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं— BCA डेटा एनालिटिक्स साइबर सिक्योरिटी वेब डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्लाउड कंप्यूटिंग इन क्षेत्रों में देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। 3. एग्रीकल्चर और फूड टेक्नोलॉजी: कृषि आधारित राज्यों में बेहतर भविष्य बिहार और झारखंड मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य हैं। ऐसे में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में छात्र निम्नलिखित कोर्स कर सकते हैं— B.Sc Agriculture फूड टेक्नोलॉजी डेयरी टेक्नोलॉजी हॉर्टिकल्चर इन कोर्सों के बाद सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री-बिजनेस सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। 4. होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म: सर्विस सेक्टर में बढ़ते अवसर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग लगातार विकसित हो रहा है। होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बनी रहती है। 12वीं के बाद छात्र इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— होटल मैनेजमेंट ट्रैवल एंड टूरिज्म फूड प्रोडक्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट इस क्षेत्र में देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 5. नर्सिंग और हेल्थकेयर: हमेशा बनी रहती है डिमांड हेल्थकेयर ऐसा क्षेत्र है जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता कभी कम नहीं होती। छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— B.Sc Nursing GNM ANM बिहार और झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के खुलने से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। 6. स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स: कम समय में रोजगार की तैयारी हर छात्र लंबी अवधि की पढ़ाई नहीं करना चाहता। ऐसे छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं— इलेक्ट्रिशियन फिटर वेल्डर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग सोलर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स आईटीआई और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के ये कोर्स कम समय में रोजगार योग्य कौशल प्रदान करते हैं और उद्योगों में इनकी अच्छी मांग रहती है। कोर्स चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? विशेषज्ञों के अनुसार केवल ट्रेंड देखकर कोर्स का चयन नहीं करना चाहिए। छात्रों को अपनी रुचि, योग्यता, भविष्य में रोजगार की संभावनाएं, कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। सही कोर्स का चुनाव न केवल बेहतर नौकरी दिला सकता है, बल्कि लंबे समय में सफल करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
JSSC
झारखंड: 455 स्टेनोग्राफर भर्ती पदों पर लगा ब्रेक, JSSC ने रद्द किया विज्ञापन

रांची। झारखंड में सचिवालय स्टेनोग्राफर भर्ती का इंतजार कर रहे एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। करीब दो साल से लंबित 455 पदों पर प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा अधियाचना (रिक्विजिशन) वापस लेने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने भर्ती का विज्ञापन निरस्त करने की घोषणा की है।   दो साल से चल रही थी भर्ती प्रक्रिया यह भर्ती 454 नियमित और एक बैकलॉग सहित कुल 455 पदों के लिए निकाली गई थी। वर्ष 2024 में जेएसएससी ने विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थी परीक्षा तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन परीक्षा आयोजित होने से पहले ही पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त कर दी गई।   सरकार ने वापस ली अधियाचना जेएसएससी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 23 जून 2026 को आयोग को पत्र भेजकर इस भर्ती से संबंधित अधियाचना वापस ले ली। चूंकि किसी भी सरकारी भर्ती की प्रक्रिया विभाग से प्राप्त अधियाचना के आधार पर ही संचालित होती है, इसलिए अधियाचना वापस लेने के बाद आयोग के पास भर्ती जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचा। इसी कारण विज्ञापन को निरस्त कर दिया गया।   रद्द करने की वजह अब भी स्पष्ट नहीं भर्ती रद्द करने के पीछे क्या कारण रहे, इस बारे में सरकार या आयोग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। जेएसएससी ने अपने नोटिस में केवल इतना कहा है कि सरकार द्वारा अधियाचना वापस लिए जाने के कारण भर्ती विज्ञापन रद्द किया जा रहा है। ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और वे सरकार से इस फैसले पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।   अभ्यर्थियों में बढ़ी निराशा करीब दो वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे और परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार भविष्य में इन पदों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करती है या नहीं। फिलहाल भर्ती रद्द होने से हजारों युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Parliamentary Committee Meeting
NEET-UG सुधारों पर आज संसदीय समिति की अहम बैठक, NTA अधिकारियों से होगी पूछताछ

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और सुधारों को लेकर आज 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), उच्च शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है। समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा करेगी।   री-एग्जाम और परीक्षा प्रणाली की होगी समीक्षा   समिति 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम के संचालन, पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कमियों की समीक्षा करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुधार लागू किए जा सकते हैं।   NTA अधिकारियों से मांगा जाएगा जवाब   बैठक में NTA अधिकारियों से परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों की शिकायतों पर जवाब मांगा जाएगा। समिति यह जानना चाहती है कि एजेंसी ने पिछले विवादों के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं।   के. राधाकृष्णन पेश करेंगे सुधार रिपोर्ट   पूर्व ISRO प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, अपनी सिफारिशें भी प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हैं।   बड़े फैसलों की उम्मीद   शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के संचालन, NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों को भविष्य में अधिक भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
CBSE Language Update
CBSE ने तीन-भाषा नीति पर जारी किए नए दिशा-निर्देश, मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों को बड़ी राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान कक्षा 10 (2026 बोर्ड बैच) के छात्रों पर नया नियम लागू नहीं होगा, ताकि उनकी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो सके।   छात्रों को क्या राहत मिली?   CBSE ने कहा है कि जो छात्र अभी कक्षा 10 में हैं, उन्हें बीच सत्र में भाषा बदलने या तीसरी भाषा का नया नियम अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।   कक्षा 7 से 9 के लिए भी मिली राहत   बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान छात्रों को भी सत्र के बीच में अपनी भाषा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी मौजूदा भाषा व्यवस्था जारी रख सकेंगे और उन्हें तत्काल बदलाव नहीं करना होगा।   नई नीति का उद्देश्य   CBSE के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी दक्षता विकसित करना है। नई व्यवस्था के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी छात्र को नुकसान न हो।   स्कूलों को दिए गए निर्देश   बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों से कहा है कि वे नई भाषा नीति को लागू करते समय छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी छात्र को बीच सत्र में भाषा बदलने के लिए मजबूर न करें। विस्तृत क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश स्कूलों को अलग से उपलब्ध कराए गए हैं।

abhishek singh जून 30, 2026 0
DU UG Admission 2026
DU UG Admission 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले को लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातक (UG) दाखिला प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। विश्वविद्यालय के कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS-UG 2026) पोर्टल पर 29 जून की रात 8:30 बजे तक 65,343 छात्रों ने पंजीकरण करा लिया। शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से साफ है कि छात्र समय रहते अपनी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं।   CUET-UG स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला दिल्ली विश्वविद्यालय में इस वर्ष भी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET-UG 2026 के अंकों के आधार पर होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल रजिस्ट्रेशन करना पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवारों को निर्धारित समय के भीतर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के साथ-साथ कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकताएं भी भरनी होंगी।   कॉलेज और कोर्स की प्राथमिकता होगी अहम प्रवेश प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण पसंदीदा कॉलेज और पाठ्यक्रम का चयन होगा। विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपनी रुचि, CUET स्कोर और पिछले वर्षों के कटऑफ ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकताएं तय करें। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेजों और लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में हर साल कड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है, इसलिए सही विकल्प भरना दाखिले की संभावना बढ़ा सकता है।   समय रहते पूरा करें आवेदन विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को अंतिम तिथि का इंतजार न करने की सलाह दी है। अंतिम दिनों में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी अभ्यर्थियों से समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।   रजिस्ट्रेशन और प्राथमिकता भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय CUET-UG 2026 के अंकों के आधार पर सीट आवंटन की विभिन्न सूची जारी करेगा। सीट मिलने वाले छात्रों को निर्धारित समय के भीतर सीट स्वीकार करनी होगी, दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा और संबंधित कॉलेज में प्रवेश शुल्क जमा कर दाखिले की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

anjali kumari जून 30, 2026 0
MAHA TET Exam
महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले की SIT जांच के आदेश, 6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा स्थगित

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (MAHA TET) 2026 के कथित पेपर लीक मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पेपर लीक की आशंका के चलते 28 जून को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई, जिससे राज्यभर के 6 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए।   मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश   मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने ठाणे पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।   पेपर लीक का कैसे हुआ खुलासा?   पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ लोग प्रश्नपत्र बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद भिवंडी में छापेमारी की गई, जहां से कथित तौर पर मूल प्रश्नपत्रों की प्रतियां बरामद हुईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र को करीब ₹1.5 करोड़ में बेचने की साजिश रची गई थी।   तीन आरोपी हिरासत में, और गिरफ्तारियां संभव   अब तक पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। SIT पूरे नेटवर्क की जांच करेगी।   नई परीक्षा तिथि जल्द होगी घोषित   महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने कहा है कि परीक्षा फिलहाल स्थगित की गई है। अभ्यर्थियों को नई परीक्षा तिथि की जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। परिषद ने छात्रों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है।   अभ्यर्थियों में नाराजगी   अचानक परीक्षा स्थगित होने से लाखों अभ्यर्थियों में नाराजगी है। कई उम्मीदवारों ने कहा कि वे महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और अंतिम समय में परीक्षा रद्द होने से उन्हें मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला हैं।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Kolhan University
कोल्हान यूनिवर्सिटी में UG के लिए 15 हजार आवेदन, PG नामांकन भी शुरू

चाईबासा। चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2025-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया जोरों पर है। स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए अब तक चांसलर पोर्टल पर 14,948 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। वहीं स्नातकोत्तर (PG) में भी 24 जून से ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों का उत्साह दिखने लगा है और अब तक 68 आवेदन प्राप्त हुए हैं।   PG नामांकन का पूरा शेड्यूल जारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीजी प्रथम सेमेस्टर के नामांकन के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके अनुसार — ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि — 11 जुलाई 2026 प्रथम मेधा सूची प्रकाशन — 15 जुलाई 2026 चयनित छात्रों का नामांकन — 15 से 24 जुलाई 2026 कक्षाओं का आरंभ — 10 अगस्त 2026   अंतिम तिथि का इंतजार न करें विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र-छात्राओं से विशेष अपील की है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार न करें। अंतिम दिनों में पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और तकनीकी समस्याओं की संभावना रहती है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। पात्र एवं इच्छुक विद्यार्थी समय रहते चांसलर पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन पूरा कर लें। कोल्हान विश्वविद्यालय पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस बार नामांकन में बड़ी संख्या में आवेदन आना विश्वविद्यालय के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
CBSE Decision
CBSE का बड़ा ऐलान: 10वीं तक पुराने भाषा नियमों से ही पढ़ाई करेंगे मौजूदा छात्र

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई भाषा नीति को लेकर कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, तीन-भाषा नीति के तहत जिन छात्रों ने दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुना है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। यानी नई भाषा नीति मौजूदा छात्रों पर पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं होगी।   भविष्य के छात्रों पर लागू होंगे नए नियम जानकारी के मुताबिक, नई व्यवस्था केवल उन विद्यार्थियों पर लागू होगी जो भविष्य में कक्षा 6 में प्रवेश लेंगे। ऐसे छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इससे पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई और विषय चयन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।   विद्यार्थियों और अभिभावकों को मिली राहत इस फैसले से उन छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने पहले से विदेशी भाषाओं के साथ अपना शैक्षणिक संयोजन तय कर लिया है। यदि नई नीति तत्काल लागू होती, तो उन्हें बीच सत्र में विषय बदलने जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था।   आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार हालांकि, इस संबंध में अभी तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। बोर्ड की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद नई भाषा नीति के क्रियान्वयन और इसके विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट होंगे।   फिलहाल, कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थी अपने मौजूदा भाषा संयोजन के साथ बिना किसी बदलाव के कक्षा 10 तक पढ़ाई जारी रख सकेंगे, जबकि नई भाषा नीति का प्रभाव आगामी शैक्षणिक सत्रों में कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर दिखाई देगा।

abhishek singh जून 26, 2026 0
JPSC
जेपीएससी ने जारी की फाइनल आंसर-की, 6 सवाल रद्द; 125 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड सिविल सेवा (बैकलॉग) प्रारंभिक परीक्षा-2023 की संशोधित आंसर-की जारी कर दी है। अभ्यर्थियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों और विषय विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद आयोग ने अंतिम आंसर-की अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। संशोधित आंसर-की में कुल छह प्रश्नों को ड्रॉप किया गया है।   आयोग के अनुसार, 10 मई 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की प्रोविजनल आंसर-की पर अभ्यर्थियों से 2 जून से 5 जून तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। निर्धारित अवधि में प्राप्त आपत्तियों की विषय विशेषज्ञों से जांच कराई गई। विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर उत्तरों में आवश्यक संशोधन करते हुए अंतिम आंसर-की प्रकाशित की गई है।   जुलाई में होगी मुख्य परीक्षा जेपीएससी ने बताया कि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (बैकलॉग) मुख्य लिखित परीक्षा 25, 26 और 27 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह भर्ती प्रक्रिया वाणिज्य कर विभाग में स्टेट टैक्स ऑफिसर के सात बैकलॉग पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है।   पीटी परीक्षा का परिणाम भी घोषित आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया है। घोषित परिणाम के अनुसार कुल 125 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की है और वे मुख्य परीक्षा में शामिल होने के पात्र होंगे। मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा रही है। सफल अभ्यर्थी 27 जून से 2 जुलाई 2026 की शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है।   वेबसाइट पर उपलब्ध है पूरी जानकारी जेपीएससी ने अभ्यर्थियों से कहा है कि वे संशोधित आंसर-की, परिणाम और मुख्य परीक्षा से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। आयोग का मानना है कि आपत्तियों की निष्पक्ष समीक्षा और विशेषज्ञों की राय के आधार पर अंतिम आंसर-की जारी करने से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

abhishek singh जून 25, 2026 0
Candidates preparing for BPSC Auditor Exam 2026 as admit card and exam schedule are announced
BPSC Auditor Exam 2026: बिहार ऑडिटर भर्ती परीक्षा की तारीख घोषित, 5 जुलाई को होगा एग्जाम, 28 जून से डाउनलोड करें एडमिट कार्ड

पटना: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Bihar Public Service Commission ने ऑडिटर भर्ती परीक्षा 2026 की तारीख आधिकारिक रूप से घोषित कर दी है। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत ऑडिटर के 102 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का इंतजार अब खत्म हो गया है। आयोग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, विज्ञापन संख्या 09/2026 के तहत आयोजित होने वाली प्रारंभिक परीक्षा 5 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। 5 जुलाई को होगी परीक्षा BPSC के कार्यक्रम के अनुसार ऑडिटर भर्ती की प्रारंभिक (ऑब्जेक्टिव) परीक्षा: परीक्षा तिथि: 5 जुलाई 2026 (रविवार) समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक परीक्षा अवधि: 2 घंटे कुल पद: 102 उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा की तैयारी को अंतिम चरण में पहुंचाएं और महत्वपूर्ण विषयों का दोहराव शुरू कर दें। 28 जून से डाउनलोड होंगे एडमिट कार्ड आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के लिए ई-एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया 28 जून 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार BPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन कर अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। 2 जुलाई से मिलेगी परीक्षा केंद्र की जानकारी BPSC ने बताया है कि परीक्षा केंद्र से जुड़ी विस्तृत जानकारी 2 जुलाई 2026 से उम्मीदवारों के डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। अभ्यर्थी अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स के माध्यम से परीक्षा केंद्र का पूरा विवरण देख सकेंगे। परीक्षा के दिन इन नियमों का रखें ध्यान आयोग ने उम्मीदवारों को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं: ई-एडमिट कार्ड की अतिरिक्त प्रति साथ लेकर जाएं। अतिरिक्त कॉपी पर परीक्षा के दौरान निर्धारित स्थान पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद फोटो और QR Bar Code स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है या नहीं, इसकी जांच जरूर करें। किसी भी तकनीकी समस्या या त्रुटि की स्थिति में तुरंत आयोग से संपर्क करें। भर्ती क्यों है खास? यह भर्ती पंचायती राज विभाग में ऑडिटर के 102 पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है, क्योंकि ऑडिटर पद वित्तीय निरीक्षण और लेखा परीक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों वाला पद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड, पहचान पत्र और परीक्षा केंद्र संबंधी सभी जानकारियां समय पर जांच लें, ताकि अंतिम समय में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।  

surbhi जून 25, 2026 0
NCERT Class 9
NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ ‘आपातकाल’ अध्याय

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया है। नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बदलाव को स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण तत्कालीन सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा था। इसके बाद जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया गया। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।   जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को प्रमुखता एनसीईआरटी ने आपातकाल विरोधी आंदोलन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से शामिल किया है। पुस्तक के अनुसार, उनके नेतृत्व में बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में छात्रों और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।   लोकतंत्र की चुनौतियों पर भी चर्चा नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के अलावा फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। साथ ही ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया खंड जोड़ा गया है, जिससे छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकें।   लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया की भूमिका पर जोर पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जवाबदेही और भूमिका को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 2024 के आम चुनाव, मतदाताओं की भागीदारी, पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण और स्थानीय लोकतंत्र के सफल उदाहरणों को भी शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की व्यापक और व्यावहारिक समझ मिल सके।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Students checking Delhi University PG admission seat allotment and accepting seats online through the CSAS portal.
DU PG Admission 2026: सीट एक्सेप्ट करने का तरीका, जानें पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

DU PG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में प्रवेश का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए अहम अपडेट है। विश्वविद्यालय ने CSAS-PG (Common Seat Allocation System) के तहत पीजी एडमिशन की दूसरी सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी कर दी है। CUET PG 2026 के स्कोर के आधार पर दाखिले दिए जा रहे हैं। जिन उम्मीदवारों को दूसरे राउंड में सीट आवंटित हुई है, उन्हें तय समय सीमा के भीतर सीट स्वीकार करनी होगी और फीस जमा करनी होगी। निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर सीट रद्द हो सकती है। कब तक करनी होगी सीट एक्सेप्ट? दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार, दूसरे राउंड में सीट पाने वाले उम्मीदवारों को 24 जून 2026 तक अपनी सीट स्वीकार करनी होगी। वहीं, सीट कन्फर्म करने के लिए फीस जमा करने की अंतिम तिथि 27 जून 2026 निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर लें। DU PG Admission 2026: ऐसे करें सीट एक्सेप्ट यदि आपको दूसरी अलॉटमेंट लिस्ट में सीट मिली है, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें: स्टेप 1: दिल्ली यूनिवर्सिटी के CSAS-PG पोर्टल पर जाएं। स्टेप 2: अपने CUET PG आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें। स्टेप 3: होमपेज पर दिखाई दे रहे Second Seat Allocation List 2026 लिंक पर क्लिक करें। स्टेप 4: स्क्रीन पर आपका सीट अलॉटमेंट स्टेटस दिखाई देगा। स्टेप 5: यदि सीट आवंटित हुई है, तो Seat Acceptance विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 6: अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। दूसरे राउंड में कितने छात्रों को मिली सीट? दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक, पीजी एडमिशन के दूसरे चरण में कुल 2,964 नए सीट अलॉटमेंट किए गए हैं। पहले राउंड में सीट पाने वाले 3,399 छात्रों ने अपनी सीट फ्रीज की थी। 2,448 उम्मीदवारों ने अपग्रेड का विकल्प चुना। 2,303 छात्रों ने न तो फ्रीज और न ही अपग्रेड का विकल्प चुना। इससे पहले पहले राउंड में कुल 11,548 सीटें आवंटित की गई थीं। इनमें से 10,393 छात्रों ने सीट स्वीकार की थी, जबकि 8,150 उम्मीदवारों ने फीस जमा कर अपनी एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर ली थी। छात्रों के लिए जरूरी सलाह यदि आपको दूसरी सूची में सीट मिली है, तो समय सीमा समाप्त होने से पहले सीट स्वीकार करें और फीस जमा करना न भूलें। किसी भी देरी की स्थिति में आपका एडमिशन प्रभावित हो सकता है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Students discuss the NEET UG 2026 re-exam after facing a challenging Physics section.
NEET UG Re-Exam 2026: फिजिक्स ने बढ़ाई छात्रों की टेंशन, बायोलॉजी से अच्छे स्कोर की उम्मीद; जानिए कैसा रहा पूरा पेपर

नई दिल्ली: NEET UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। परीक्षा खत्म होने के बाद देशभर के छात्रों और विषय विशेषज्ञों की शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि इस बार का पेपर कुल मिलाकर मॉडरेट से थोड़ा कठिन था, जबकि फिजिक्स सेक्शन ने सबसे ज्यादा चुनौती पेश की। दिल्ली के एक अभ्यर्थी ने बताया कि पूरा पेपर संतुलित था, लेकिन फिजिक्स के प्रश्न लंबे और पिछली परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन थे। वहीं बायोलॉजी का स्तर आसान से मध्यम रहा और कैमिस्ट्री को छात्रों ने औसत कठिनाई वाला बताया। एक अन्य छात्र ने कहा कि यह उनका पहला प्रयास था और उन्हें लगभग 500 अंक मिलने की उम्मीद है। उन्होंने परीक्षा केंद्र पर की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से परीक्षा देने वाले एक अभ्यर्थी के अनुसार, पेपर का अनुभव अच्छा रहा, हालांकि फिजिक्स सेक्शन अपेक्षाकृत कठिन था। वहीं चेन्नई के छात्र तरुण ने भी माना कि री-एग्जाम पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। फिजिक्स बना सबसे कठिन सेक्शन छात्रों के अनुसार फिजिक्स में कॉन्सेप्ट आधारित और न्यूमेरिकल प्रश्नों की संख्या अधिक थी। कई सवालों को हल करने में ज्यादा समय लगा, जिससे टाइम मैनेजमेंट प्रभावित हुआ। इसी वजह से अधिकांश अभ्यर्थियों ने फिजिक्स को सबसे कठिन सेक्शन बताया। बायोलॉजी ने दी राहत बायोलॉजी सेक्शन को छात्रों ने आसान से मध्यम स्तर का बताया। इसमें अधिकतर प्रश्न NCERT आधारित और सीधे पूछे गए थे। जिन छात्रों की बायोलॉजी पर मजबूत पकड़ है, उन्हें अच्छे अंक मिलने की संभावना जताई जा रही है। कैमिस्ट्री रही संतुलित कैमिस्ट्री सेक्शन का स्तर मध्यम रहा। इसमें थ्योरी और एप्लिकेशन आधारित प्रश्नों का संतुलन देखने को मिला। हालांकि कुछ छात्रों ने कहा कि सेक्शन लंबा था, जिसके कारण समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा। कुल मिलाकर छात्रों की राय के अनुसार NEET UG Re-Exam 2026 में फिजिक्स सबसे मुश्किल, कैमिस्ट्री मध्यम और बायोलॉजी अपेक्षाकृत आसान रही।  

surbhi जून 22, 2026 0
JAC Special Exam
JAC का बड़ा फैसला: झारखंड में पहली बार मैट्रिक-इंटर के लिए होगी विशेष परीक्षा

रांची। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) ने राज्य में पहली बार मैट्रिक और इंटरमीडिएट विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। यह परीक्षा उन छात्रों के लिए होगी, जो राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के कारण नियमित बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे। इसके साथ ही वर्ष 2026 की कंपार्टमेंटल, इंप्रूवमेंट और विशेष परीक्षा को लेकर भी परिषद ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।   JAC वेबसाइट से ऑनलाइन करें आवेदन परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक विद्यार्थी JAC की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पूर्व में जारी यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिए स्वीकार किए जाएंगे। इंप्रूवमेंट परीक्षा में विषयों की कोई सीमा नहीं रखी गई है। विद्यार्थी चाहें तो सभी विषयों की परीक्षा दे सकते हैं या केवल उन विषयों का चयन कर सकते हैं, जिनमें वे अपने अंक सुधारना चाहते हैं।   खेल प्रतियोगिता के कारण मिली विशेष परीक्षा की सुविधा इस वर्ष मैट्रिक और इंटर की कुछ परीक्षाओं के दौरान राष्ट्रीय स्तर की अंडर-17 और अंडर-19 फुटबॉल एवं हॉकी प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं। इनमें चयनित कई छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर JAC ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए पहली बार विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।   हजारों छात्रों को मिलेगा लाभ वर्ष 2026 की मैट्रिक परीक्षा में करीब 20 हजार विद्यार्थी असफल हुए थे, जबकि लगभग 1,800 छात्र आवेदन करने के बावजूद परीक्षा नहीं दे सके। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में करीब 26 हजार विद्यार्थी असफल रहे, जिनमें विज्ञान संकाय के लगभग 15 हजार छात्र शामिल हैं।   आवेदन की अंतिम तिथि मैट्रिक के छात्र 22 जून से 3 जुलाई तक बिना विलंब शुल्क और 4 से 10 जुलाई तक विलंब शुल्क के साथ आवेदन कर सकते हैं। वहीं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए आवेदन 25 जून से 7 जुलाई तक बिना विलंब शुल्क तथा 8 से 13 जुलाई तक विलंब शुल्क के साथ स्वीकार किए जाएंगे। यह पहल हजारों विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक प्रगति सुधारने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।

abhishek singh जून 22, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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