Computer Science Engineering को लंबे समय तक इंजीनियरिंग की सबसे लोकप्रिय ब्रांच माना जाता रहा। हर छात्र का सपना CSE में एडमिशन लेना और बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी पाना होता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। इंजीनियरिंग की दुनिया में एक नई ब्रांच तेजी से उभरकर सामने आई है, जिसने प्लेसमेंट और करियर ग्रोथ के मामले में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह ब्रांच है Electronics and Communication Engineering यानी ECE। क्यों बढ़ रहा है ECE का क्रेज? दुनिया अब सिर्फ ऐप्स और वेबसाइट्स तक सीमित नहीं रह गई है। टेक्नोलॉजी का फोकस तेजी से हार्डवेयर, चिप डिजाइन, स्मार्ट डिवाइसेस और कम्युनिकेशन सिस्टम्स की ओर बढ़ रहा है। आज जिन तकनीकों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें शामिल हैं: 5G और 6G नेटवर्क Artificial Intelligence (AI) Internet of Things (IoT) Semiconductor Technology Robotics और Automation इन सभी सेक्टर्स की नींव इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन पर टिकी हुई है। यही वजह है कि कंपनियां अब ऐसे इंजीनियर्स की तलाश में हैं जो सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और सिस्टम लेवल टेक्नोलॉजी को भी समझते हों। AI ने बढ़ाई CSE छात्रों की चिंता पिछले कुछ वर्षों में AI टूल्स ने कोडिंग इंडस्ट्री को काफी बदल दिया है। कई बेसिक प्रोग्रामिंग और ऑटोमेशन वाले काम अब AI खुद करने लगा है। इसके चलते IT सेक्टर में पहले जैसी बड़े स्तर की हायरिंग में कुछ धीमापन देखने को मिला है। दूसरी तरफ ECE छात्रों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर सेमीकंडक्टर, एम्बेडेड सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइनिंग कंपनियां तेजी से भर्ती कर रही हैं। बड़े कॉलेजों में ECE छात्रों का शानदार प्लेसमेंट अब यह सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों के प्लेसमेंट आंकड़े भी ECE की बढ़ती ताकत को दिखा रहे हैं। Indian Institute of Technology BHU, National Institute of Technology Rourkela और IIIT Hyderabad जैसे संस्थानों में ECE छात्रों को शानदार पैकेज मिले हैं। कई कोर इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन कंपनियां अब करोड़ों के ऑफर तक दे रही हैं। खास बात यह है कि कई कॉलेजों में ECE का एवरेज पैकेज अब CSE के बराबर या उससे भी ज्यादा पहुंच चुका है। ECE छात्रों के लिए कहां हैं मौके? ECE करने वाले छात्रों के लिए करियर के कई नए रास्ते खुल रहे हैं: Semiconductor Industry Chip Design Companies Telecom Sector AI Hardware Development Robotics Embedded Systems Space और Defense Technology भारत सरकार भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर तेजी से फोकस कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों में ECE इंजीनियर्स की मांग और बढ़ सकती है। क्या ECE भविष्य की सबसे मजबूत ब्रांच बन सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला समय सिर्फ सॉफ्टवेयर का नहीं, बल्कि Software + Hardware Integration का होगा। ऐसे में ECE जैसी ब्रांच छात्रों को ज्यादा विविध और भविष्य-केंद्रित अवसर दे सकती है। हालांकि, करियर चुनते समय सिर्फ ट्रेंड नहीं बल्कि अपनी रुचि और स्किल्स को प्राथमिकता देना भी बेहद जरूरी है।
रांची। Central University of Jharkhand ने पीजी एडमिशन 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया 20 मई से शुरू होगी। इस बार छात्रों को बड़ी राहत देते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक ही रजिस्ट्रेशन फीस में तीन अलग-अलग पीजी कोर्स चुनने की सुविधा दी है। इससे छात्रों को अलग-अलग आवेदन फॉर्म भरने और बार-बार शुल्क जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, छात्र एक ही आवेदन फॉर्म के माध्यम से अपनी पसंद के तीन कोर्स का चयन कर सकेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा विकल्प देना और एडमिशन प्रक्रिया को सरल बनाना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बचेगा। CUET PG स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET PG 2026 के स्कोर के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में छात्रों के लिए पहले CUET PG परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही मेरिट सूची तैयार की जाएगी और उसी के अनुसार दाखिला दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र आवेदन कर सकेंगे जिनके पास वैध CUET PG स्कोर होगा। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को संबंधित कोर्स के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड भी पूरा करना होगा। आरक्षित वर्ग को शुल्क में राहत सीयूजे ने आर्थिक रूप से कमजोर और आरक्षित वर्ग के छात्रों को राहत देते हुए आवेदन शुल्क में छूट देने का फैसला लिया है। सामान्य वर्ग की तुलना में एससी, एसटी और अन्य आरक्षित वर्ग के छात्रों को कम रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। विश्वविद्यालय के इस निर्णय को छात्रों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन विश्वविद्यालय की ओर से एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। छात्र CUJ Official Website पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के दौरान छात्रों को जरूरी दस्तावेज, CUET PG स्कोर कार्ड और कैटेगरी सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा। हेल्पडेस्क से मिलेगी सहायता एडमिशन प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या आने पर छात्र विश्वविद्यालय की ओर से जारी हेल्पडेस्क नंबर और ईमेल के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों से समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है ताकि अंतिम समय की परेशानी से बचा जा सके।
Indian Institute of Technology Roorkee ने Joint Entrance Examination – Advanced 2026 के पेपर 1 और पेपर 2 के प्रश्नपत्र जारी कर दिए हैं। परीक्षा खत्म होते ही लाखों छात्र अपने जवाबों का मिलान करने और संभावित स्कोर का अंदाजा लगाने में जुट गए हैं। इस बार भी परीक्षा का स्तर चुनौतीपूर्ण माना गया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मैथ्स सेक्शन को लेकर हो रही है। छात्रों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक मैथ्स काफी लंबा और कैलकुलेटिव रहा, जिसने टाइम मैनेजमेंट को बेहद मुश्किल बना दिया। कैसा रहा JEE Advanced 2026 का पेपर? विशेषज्ञों के अनुसार: फिजिक्स में कॉन्सेप्चुअल और ट्रिकी सवाल पूछे गए केमिस्ट्री का स्तर मिक्स्ड रहा मैथ्स सबसे ज्यादा समय लेने वाला सेक्शन साबित हुआ पेपर 1 की तुलना में पेपर 2 को ज्यादा कठिन माना जा रहा है। जिन छात्रों की कॉन्सेप्ट्स पर मजबूत पकड़ थी, उनके लिए पेपर हल करना संभव था, लेकिन सीमित समय में सवाल पूरे करना बड़ी चुनौती बन गया। जल्द जारी होगी Answer Key क्वेश्चन पेपर जारी होने के बाद अब छात्रों को प्रोविजनल आंसर की का इंतजार है। IIT रुड़की जल्द ही ऑफिशियल वेबसाइट पर Answer Key अपलोड करेगा। इसके बाद छात्रों को ऑब्जेक्शन दर्ज करने का मौका मिलेगा। अगर किसी सवाल या उत्तर को लेकर आपत्ति होती है, तो निर्धारित फीस जमा कर उसे चैलेंज किया जा सकेगा। फाइनल Answer Key के बाद ही रिजल्ट तैयार किया जाएगा। इस बार कितनी जा सकती है कटऑफ? कटऑफ हर साल पेपर के कठिनाई स्तर और परीक्षार्थियों की संख्या पर निर्भर करती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि: मैथ्स कठिन होने की वजह से कुल कटऑफ थोड़ी प्रभावित हो सकती है Subject-wise cutoff भी अहम भूमिका निभाएगी पेपर 2 के कठिन स्तर का असर रैंकिंग पर दिख सकता है IIT में सीट पाने के लिए छात्रों को: कुल कटऑफ पार करनी होगी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में अलग-अलग न्यूनतम अंक भी लाने होंगे रिजल्ट के बाद शुरू होगी JoSAA Counseling रिजल्ट जारी होने के बाद सफल छात्रों को AIR यानी ऑल इंडिया रैंक दी जाएगी। इसके बाद Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी। इसी प्रक्रिया के जरिए तय होगा कि किस छात्र को कौन-सी IIT और कौन-सी ब्रांच मिलेगी। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि छात्र अभी से अपनी पसंदीदा IITs और कोर्सेज की सूची तैयार कर लें। छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के बाद का समय मानसिक दबाव बढ़ा सकता है। ऐसे में: सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट की जानकारी पर भरोसा करें सोशल मीडिया अफवाहों से बचें स्कोर कम आने पर निराश न हों इंजीनियरिंग में IIT के अलावा भी कई बेहतरीन संस्थान और करियर विकल्प मौजूद हैं। JEE Advanced 2026: एग्जाम पैटर्न विषय विवरण परीक्षा का नाम JEE Advanced 2026 आयोजन संस्थान IIT रुड़की परीक्षा मोड कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) कुल पेपर पेपर 1 और पेपर 2 (दोनों अनिवार्य) अवधि प्रत्येक पेपर 3 घंटे भाषा हिंदी और अंग्रेजी विषय फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स प्रश्न प्रकार MCQ, न्यूमेरिकल, मैचिंग मार्किंग स्कीम नेगेटिव मार्किंग लागू
नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा (Combined Medical Services Examination 2026) का पूरा परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया है। मेडिकल क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है। आयोग के अनुसार, UPSC CMS Exam 2026 अगस्त महीने में आयोजित किया जाएगा। परीक्षा दो अलग-अलग प्रश्नपत्रों में होगी, जिनमें मेडिकल साइंस से जुड़े विभिन्न विषय शामिल किए गए हैं। सुबह और दोपहर की शिफ्ट में होंगे पेपर UPSC द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक पहला प्रश्नपत्र (Paper-1) सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित होगा। इस पेपर में जनरल मेडिसिन (General Medicine) और पीडियाट्रिक्स (Pediatrics) से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा के इस भाग में उम्मीदवारों की बेसिक मेडिकल नॉलेज और बाल रोग विषय की समझ का मूल्यांकन किया जाएगा। वहीं दूसरा प्रश्नपत्र (Paper-2) दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसमें सर्जरी (Surgery), गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स (Gynecology & Obstetrics) और प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (Preventive & Social Medicine) से प्रश्न शामिल होंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने और जरूरी दस्तावेज साथ रखने की सलाह दी है। मार्च में शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया UPSC CMS 2026 भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन 11 मार्च 2026 को जारी किया गया था। उसी दिन से आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय दिया गया था। अब परीक्षा तिथि घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) होगी। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को दूसरे चरण यानी पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। दोनों चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी। किन पदों पर होगी भर्ती? इस परीक्षा के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में मेडिकल पदों पर नियुक्ति की जाती है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न पद शामिल हैं। • भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर • केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर • नगर निकायों और सरकारी स्वास्थ्य विभागों में मेडिकल ऑफिसर • इन पदों पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन में स्थायी सरकारी सेवा का अवसर मिलता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा आज, 15 मई 2026 से शुरू हो गई है। यह परीक्षाएं 21 मई तक आयोजित की जाएंगी। परीक्षा का पहला पेपर गणित (मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड और मैथमेटिक्स बेसिक) का है। इस बार देशभर से कुल 6,68,854 छात्र परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शन सुधारने का मिलेगा मौका सीबीएसई द्वारा लागू की गई नई दो-बोर्ड परीक्षा व्यवस्था के तहत छात्रों को अपने अंकों में सुधार का दूसरा अवसर दिया जा रहा है। बोर्ड के अनुसार 5,25,655 छात्र गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों में अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए परीक्षा दे रहे हैं। इसके अलावा 85,285 छात्र कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होंगे, जबकि 57,914 छात्र एक या दो विषयों में सुधार और कंपार्टमेंट दोनों श्रेणियों में परीक्षा देंगे। सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी परीक्षाएं अधिकांश परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित की जाएंगी। कुछ विषयों की परीक्षाएं 12:30 बजे समाप्त होंगी। परीक्षा के लिए बोर्ड ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। जून में जारी होगा फाइनल रिजल्ट सीबीएसई ने 15 अप्रैल को पहली बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित किए थे। उस परीक्षा में 24,71,777 छात्रों ने भाग लिया था, जिनमें से 23,16,008 छात्र सफल हुए थे। इस तरह कुल पास प्रतिशत 93.70 फीसदी रहा था। हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि वह परिणाम अंतिम नहीं था। दूसरी बोर्ड परीक्षा समाप्त होने के बाद ही फाइनल रिजल्ट जारी किया जाएगा और उसी के आधार पर छात्रों को अंतिम मार्कशीट प्रदान की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव सीबीएसई की यह नई दो-बोर्ड परीक्षा प्रणाली छात्रों को तनाव कम करने और बेहतर प्रदर्शन का अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। शिक्षा विशेषज्ञ इसे छात्रों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। National Testing Agency ने NEET-UG 2026 परीक्षा की नई तारीख का एलान कर दिया है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक की आशंका और गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। एनटीए ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए छात्रों को किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी। नई परीक्षा तारीख और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा फैसला NEET-UG परीक्षा इस बार पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार विवादों में रही। कई राज्यों से परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई। मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। शिक्षा मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। मेडिकल प्रवेश के लिए अहम परीक्षा NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए MBBS, BDS समेत कई मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला दिया जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। अब नई तारीख घोषित होने के बाद छात्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। एनटीए ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।
NTA ने जारी किया आधिकारिक शेड्यूल, अफवाहों से बचने की अपील देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम की नई तारीख घोषित कर दी है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 (रविवार) को आयोजित की जाएगी। सरकारी मंजूरी के बाद जारी इस अपडेट के साथ ही लाखों छात्रों की तैयारी की दिशा एक बार फिर तय हो गई है। NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला मिलता है। क्या है नया शेड्यूल? NTA के अनुसार: परीक्षा तिथि: 21 जून 2026 (रविवार) परीक्षा: NEET UG री-एग्जाम उम्मीदवार: देशभर के लाखों छात्र एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है। छात्रों के लिए NTA की सलाह NTA ने अभ्यर्थियों से कहा है कि अब समय कम है, इसलिए: रिवीजन पर विशेष ध्यान दें नियमित मॉक टेस्ट दें पुराने प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें किसी भी अनऑफिशियल सूचना पर भरोसा न करें हेल्पलाइन और संपर्क जानकारी परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए NTA ने हेल्पलाइन और ईमेल जारी किए हैं: ईमेल: neet-ug@nta.ac.in हेल्पलाइन: 011-40759000 हेल्पलाइन: 011-69227700 परीक्षा विवाद और री-एग्जाम का कारण रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा के बाद कुछ अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जिसके चलते जांच प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (Central Bureau of Investigation) को सौंपी गई थी। इसके बाद परीक्षा से जुड़े कई सवाल उठे और री-एग्जाम का निर्णय लिया गया। परीक्षा से जुड़ा पिछला विवरण NEET UG 2026 परीक्षा: आयोजित हुई थी: 3 मई 2026 परीक्षा केंद्र: भारत के 551 शहर और विदेश के 14 शहर कुल रजिस्ट्रेशन: लगभग 22.79 लाख छात्र उपस्थित उम्मीदवार: 22,05,035 छात्रों के लिए अहम संदेश री-एग्जाम की तारीख घोषित होने के बाद अब छात्रों पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय अंतिम चरण की तैयारी का है, जिसमें केवल रिवीजन और प्रैक्टिस पर फोकस करना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है। NTA के अनुसार अब यह परीक्षा रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया था। NTA ने जारी की आधिकारिक सूचना NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को नया रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी और किसी प्रकार की अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाएगी। उच्च स्तरीय बैठक में हुई समीक्षा सूत्रों के मुताबिक परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में परीक्षा के निष्पक्ष आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। 22 लाख से अधिक छात्रों ने दी थी परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में लगभग 22.79 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। पेपर लीक मामले की जांच जारी पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है। एजेंसी ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और NTA के अंदर संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। छात्र अब अपना रिजल्ट CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष कुल 85.20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं परीक्षा में सफल हुए हैं। इस बार भी देशभर से लाखों विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था। रिजल्ट जारी होने के बाद वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया, जिसके चलते छात्रों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बोर्ड ने UMANG ऐप और DigiLocker के जरिए भी मार्कशीट डाउनलोड करने की सुविधा दी है। ऐसे करें CBSE 12वीं का रिजल्ट चेक • आधिकारिक वेबसाइटों पर जाएं - cbse.gov.in, results.cbse.nic.in • CBSE कक्षा 12 के स्कोरकार्ड पीडीएफ लिंक पर क्लिक करें • लॉगिन के लिए पंजीकरण संख्या, रोल नंबर/जन्म तिथि का उपयोग करें • CBSE 12वीं का स्कोरकार्ड पीडीएफ डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा • CBSE कक्षा 12 के स्कोरकार्ड पीडीएफ को सेव करें और इसकी एक हार्ड कॉपी निकाल लें। UMANG ऐप और DigiLocker से भी मिलेगा रिजल्ट CBSE ने छात्रों की सुविधा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी रिजल्ट उपलब्ध कराया है। छात्र Google Play Store से UMANG ऐप डाउनलोड कर मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से लॉगिन कर सकते हैं। इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से भी मार्कशीट डाउनलोड की जा सकती है। इसके लिए छात्रों को स्कूल द्वारा दिए गए एक्सेस कोड और रोल नंबर की आवश्यकता होगी। छात्रों में खुशी का माहौल रिजल्ट जारी होते ही छात्रों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। कई छात्र अब कॉलेज एडमिशन और करियर की अगली तैयारी में जुट गए हैं। CBSE ने छात्रों को सलाह दी है कि वे आधिकारिक वेबसाइट से ही अपना परिणाम देखें और किसी अफवाह पर भरोसा न करें।
18 लाख से ज्यादा छात्रों को रिजल्ट का इंतजार Central Board of Secondary Education यानी CBSE आज Class 12 बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर सकता है। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी तक रिजल्ट की तारीख और समय को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए आज रिजल्ट आने की संभावना जताई जा रही है। बीते दो वर्षों यानी 2024 और 2025 में भी CBSE ने 13 मई को ही 12वीं का रिजल्ट जारी किया था। ऐसे में इस बार भी लाखों छात्रों की नजरें रिजल्ट पर टिकी हुई हैं। DigiLocker और UMANG पर दिखा “Coming Soon” रिपोर्ट्स के मुताबिक DigiLocker और UMANG App पर CBSE Class 12 Result 2026 के लिए “Coming Soon” नोटिफिकेशन दिखाई देने लगा है। इससे यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि रिजल्ट कभी भी जारी किया जा सकता है। इस साल करीब 18 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने CBSE Class 12 बोर्ड परीक्षा दी थी। यहां चेक कर सकेंगे CBSE 12वीं का रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र कई प्लेटफॉर्म पर अपना स्कोरकार्ड देख सकेंगे। आधिकारिक वेबसाइट CBSE Official Website CBSE Results Portal मोबाइल ऐप DigiLocker UMANG अन्य माध्यम SMS सेवा IVRS (Interactive Voice Response System) ऐसे डाउनलोड करें CBSE Class 12 Result 2026 सबसे पहले CBSE Results Portal पर जाएं। “CBSE Class 12 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड ID दर्ज करें। Submit बटन पर क्लिक करें। स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा। स्कोरकार्ड डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। फरवरी से अप्रैल तक हुई थीं परीक्षाएं Central Board of Secondary Education की Class 12 बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गई थीं। परीक्षा समाप्त होने के बाद कॉपियों का मूल्यांकन शुरू किया गया था और अब रिजल्ट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है।
पेपर लीक विवाद पर NTA और सरकार पर उठाए सवाल देशभर में NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अब मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर Khan Sir ने भी सरकार और National Testing Agency (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव दिए। “NTA को भंग कर देना चाहिए” Khan Sir ने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक NTA लगातार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेपर लीक करने वालों को मिले कड़ी सजा Khan Sir ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वजह से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच Khan Sir ने मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच सिर्फ Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। CBI जांच जल्द पूरी करने की मांग Khan Sir ने कहा कि CBI जांच प्रक्रियाएं अक्सर काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने मांग की कि जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि अगर जांच में बहुत ज्यादा समय लगेगा तो प्रभावित छात्र लंबे समय तक असमंजस में रहेंगे। उनका बयान था कि “रिपोर्ट आते-आते कई बच्चे डॉक्टर भी बन जाएंगे।” सुरक्षित और पारदर्शी एजेंसी को मिले जिम्मेदारी उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल ऐसी एजेंसियों को करानी चाहिए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। उनके अनुसार बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है। NTA को बताया “Never Trustable Agency” Khan Sir ने NTA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे “Never Trustable Agency” तक कह दिया। उनका कहना है कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिरी हुई है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने की अपील की, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NTA ने बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया। एजेंसी ने घोषणा की है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीखें जल्द जारी की जाएंगी। CBI करेगी पूरे मामले की जांच परीक्षा को लेकर सामने आए आरोपों और अनियमितताओं की जांच अब Central Bureau of Investigation (CBI) करेगी। एनटीए ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और जरूरी सामग्री जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगी। छात्रों को नहीं करना होगा नया रजिस्ट्रेशन NTA ने छात्रों को राहत देते हुए कहा है कि दोबारा परीक्षा के लिए किसी भी उम्मीदवार को नया रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। एजेंसी ने बताया कि पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस कर दी जाएगी और परीक्षा दोबारा कराने का खर्च एनटीए अपने आंतरिक संसाधनों से वहन करेगा। जल्द जारी होगा नया शेड्यूल NTA ने कहा है कि पुनर्परीक्षा की तारीख, एडमिट कार्ड जारी होने का कार्यक्रम और अन्य जरूरी जानकारी एजेंसी के आधिकारिक माध्यमों से जल्द साझा की जाएगी। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन पर ही भरोसा करें। छात्रों और अभिभावकों में चिंता परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता और असमंजस की स्थिति है। कई छात्र लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। अब दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद उन्हें फिर से तैयारी करनी होगी। हालांकि एजेंसी का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
Central Board of Secondary Education यानी CBSE जल्द ही 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर सकता है। रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। DigiLocker और UMANG ऐप पर “Class XII Results Coming Soon” बैनर एक्टिव होने के बाद रिजल्ट जारी होने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। हालांकि बोर्ड की ओर से रिजल्ट जारी करने की आधिकारिक तारीख और समय का ऐलान अभी नहीं किया गया है, लेकिन छात्रों को सलाह दी गई है कि वे ऑफिशियल वेबसाइट्स पर नजर बनाए रखें। DigiLocker पर मिला बड़ा संकेत DigiLocker ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि Central Board of Secondary Education का रिजल्ट जल्द जारी किया जा सकता है। छात्रों से कहा गया है कि वे अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी तैयार रखें, ताकि रिजल्ट जारी होते ही आसानी से मार्कशीट डाउनलोड की जा सके। रिजल्ट चेक करने के लिए चाहिए होंगी ये डिटेल्स छात्रों को रिजल्ट देखने के लिए नीचे दी गई जानकारी की जरूरत पड़ेगी: रोल नंबर स्कूल नंबर एडमिट कार्ड ID इन प्लेटफॉर्म्स पर देख सकेंगे रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इन आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर अपना स्कोरकार्ड देख सकेंगे: CBSE Official Website CBSE Results Portal DigiLocker UMANG App ऐसे चेक करें CBSE 12वीं रिजल्ट 2026 CBSE Official Website पर जाएं होमपेज पर “CBSE Class 12 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर दर्ज करें स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड ID भरें स्क्रीन पर दिख रहा सिक्योरिटी पिन/कैप्चा दर्ज करें Submit बटन पर क्लिक करें रिजल्ट स्क्रीन पर खुल जाएगा भविष्य के लिए स्कोरकार्ड डाउनलोड कर प्रिंटआउट निकाल लें DigiLocker से ऐसे डाउनलोड करें मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र DigiLocker के जरिए डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए: DigiLocker ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करें Education सेक्शन में जाएं CBSE विकल्प चुनें रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड ID दर्ज करें डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर दिखाई देगी SMS और UMANG ऐप से भी मिलेगा रिजल्ट अगर रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक रहता है, तो छात्र UMANG ऐप और SMS सेवा के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। हर साल बोर्ड इन वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स पर भी रिजल्ट उपलब्ध कराता है, ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।
कैसे एक खगोल वैज्ञानिक का सपना बना भूकंप विज्ञान की बड़ी खोज दुनिया में जब भी कहीं भूकंप आता है, उसकी तीव्रता मापने के लिए सबसे पहले जिस नाम का जिक्र होता है, वह है “रिक्टर स्केल”। इस पैमाने को विकसित करने वाले महान वैज्ञानिक थे Charles Francis Richter। उन्होंने जर्मन वैज्ञानिक Beno Gutenberg के साथ मिलकर 1935 में इस तकनीक को विकसित किया, जिसने भूकंप विज्ञान की दिशा ही बदल दी। आज पूरी दुनिया भूकंप की ताकत को समझने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चार्ल्स रिक्टर कभी खगोल वैज्ञानिक बनना चाहते थे। बचपन से विज्ञान में थी गहरी रुचि चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर का जन्म 26 अप्रैल 1900 को अमेरिका के ओहायो राज्य के ग्रामीण इलाके हैमिल्टन में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए, जिसके बाद उनका परिवार कैलिफोर्निया चला गया। विज्ञान और गणित में उनकी रुचि शुरू से ही काफी गहरी थी। उन्होंने Stanford University से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद California Institute of Technology से सैद्धांतिक भौतिकी में पीएचडी हासिल की। खगोल विज्ञान से सीस्मोलॉजी तक का सफर रिक्टर का सपना अंतरिक्ष और तारों का अध्ययन करने का था, लेकिन किस्मत उन्हें भूकंप विज्ञान यानी सीस्मोलॉजी की दुनिया में ले आई। कैल्टेक की सिस्मोलॉजिकल लैब में काम करते समय उन्होंने भूकंप की तरंगों और उनके पैटर्न का अध्ययन शुरू किया। उस दौर में भूकंप की तीव्रता को “मरकाली स्केल” से समझा जाता था, जिसमें लोगों द्वारा महसूस किए गए झटकों और नुकसान के आधार पर आंकलन किया जाता था। रिक्टर को यह तरीका पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं लगा। वे चाहते थे कि भूकंप को ऊर्जा के आधार पर मापा जाए, ठीक वैसे ही जैसे किसी वस्तु का वजन किया जाता है। यही सोच आगे चलकर रिक्टर स्केल की नींव बनी। 1935 में दुनिया को मिला रिक्टर स्केल साल 1935 में चार्ल्स रिक्टर और बेनो गुटेनबर्ग ने मिलकर “रिक्टर स्केल” विकसित किया। इस स्केल ने पहली बार वैज्ञानिक तरीके से भूकंप की तीव्रता मापने का रास्ता तैयार किया। इस खोज के बाद दुनियाभर में भूकंप मापने की प्रक्रिया अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई। रिक्टर स्केल ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि किसी भूकंप में कितनी ऊर्जा निकलती है और उसका प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है। आपदा प्रबंधन में भी दिया बड़ा योगदान चार्ल्स रिक्टर सिर्फ वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने भूकंप से बचाव के लिए मजबूत बिल्डिंग कोड और आपदा तैयारी पर भी जोर दिया। उन्होंने “Seismicity of the Earth” और “Elementary Seismology” जैसी महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, जो आज भी भूकंप विज्ञान के क्षेत्र में अहम मानी जाती हैं। अपने ही नाम से दूरी बनाते थे रिक्टर दिलचस्प बात यह है कि पूरी दुनिया जिस “रिक्टर स्केल” के नाम से उन्हें याद करती है, खुद चार्ल्स रिक्टर इस नाम से ज्यादा सहज नहीं थे। वे हमेशा अपने सहयोगी बेनो गुटेनबर्ग का जिक्र करते थे और कहते थे कि यह खोज केवल उनकी अकेली मेहनत का परिणाम नहीं थी। विज्ञान की दुनिया में अमर हो गया नाम चार्ल्स रिक्टर का निधन 30 सितंबर 1985 को हुआ, लेकिन उनकी खोज आज भी दुनिया को भूकंप की ताकत समझाने का सबसे बड़ा माध्यम बनी हुई है। उनके सम्मान में Seismological Society of America ने युवा वैज्ञानिकों के लिए “Charles Richter Early Career Award” भी शुरू किया, ताकि नई पीढ़ी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
Union Public Service Commission ने Combined Defence Services Examination (CDS) 1, 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी जारी की है, जिसमें अगले चरण के लिए चयनित उम्मीदवारों के रोल नंबर शामिल हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 451 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। कैसे चेक करें UPSC CDS 1 Result 2026? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना रिजल्ट देख सकते हैं: UPSC Official Website पर जाएं होमपेज पर मौजूद “Examination” सेक्शन में क्लिक करें इसके बाद “Active Examinations” लिंक खोलें अब “CDS Result 2026” लिंक पर क्लिक करें स्क्रीन पर रिजल्ट PDF खुल जाएगी भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें 8,826 उम्मीदवार अगले चरण के लिए चयनित Union Public Service Commission ने CDS-I परीक्षा का आयोजन 12 अप्रैल 2026 को किया था। लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 8,826 उम्मीदवारों को अगले चरण यानी SSB इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। SSB इंटरव्यू का आयोजन Services Selection Board द्वारा किया जाएगा। कैसे होगा अंतिम चयन? मेरिट सूची में शामिल उम्मीदवार अब SSB इंटरव्यू में हिस्सा लेंगे। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में उम्मीदवारों के संयुक्त प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। SSB इंटरव्यू में उम्मीदवारों की पर्सनालिटी, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और कम्युनिकेशन स्किल्स का मूल्यांकन किया जाता है। आगे क्या होगी प्रक्रिया? SSB इंटरव्यू में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। सभी चरण पूरे होने के बाद अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी।
पश्चिम बंगाल बोर्ड ने जारी किया 10वीं का रिजल्ट (WBBSE) ने माध्यमिक यानी 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से परिणाम घोषित किए। इस साल कुल 86.83 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं। करीब 9 लाख से अधिक छात्रों को रिजल्ट का इंतजार था, जो अब खत्म हो गया है। छात्र सुबह 10:15 बजे से आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। अभिरूप भद्रा ने किया टॉप इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में अभिरूप भद्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.71 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। टॉपर्स की सूची में कई छात्रों ने बेहतरीन अंक दर्ज किए हैं। WB Madhyamik Result 2026 टॉपर्स लिस्ट रैंक नाम प्रतिशत 1 अभिरूप भद्रा 99.71% 2 प्रियतोष मुखर्जी 99.43% 3 सौर्य जाना 99.29% 3 अंकन कुमार जाना 99.29% 3 मैनाक मंडल 99.29% 4 अरिजीत कर 99.14% इन वेबसाइट्स पर देखें रिजल्ट छात्र नीचे दी गई आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं: wbresults.nic.in WBBSE Official Website ऐसे करें WB Board 10th Result 2026 चेक सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। “WB Madhyamik Result 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा। मार्कशीट डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रख लें। कब मिलेगी ओरिजिनल मार्कशीट? बोर्ड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रिजल्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद छात्रों को उनकी स्कूलों के माध्यम से ओरिजिनल मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। आगे की पढ़ाई और एडमिशन प्रक्रिया के लिए यह मार्कशीट बेहद जरूरी होगी। फरवरी में हुई थी परीक्षा पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा 2026 का आयोजन 2 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक किया गया था। परीक्षा ऑफलाइन मोड में एक ही शिफ्ट में सुबह 10:45 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई थी। इस वर्ष राज्यभर के 2,682 परीक्षा केंद्रों पर लगभग 9.71 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें 5.44 लाख छात्राएं, 4.26 लाख छात्र और एक ट्रांसजेंडर उम्मीदवार शामिल थे।
National Testing Agency ने CUET UG 2026 को लेकर बड़ा यू-टर्न लिया है। एजेंसी ने परीक्षा शहर, डेट और शिफ्ट बदलने को लेकर जारी अपना फैसला महज 24 घंटे के भीतर बदल दिया है। अब NTA ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार केवल परीक्षा शहर और राज्य में बदलाव के लिए ही आवेदन कर सकेंगे, जबकि परीक्षा की तारीख और शिफ्ट पहले की तरह ही रहेंगी। क्या था NTA का पहला फैसला? NTA ने 5 मई 2026 को नोटिस जारी करते हुए कहा था कि जिन उम्मीदवारों को आवेदन के दौरान चुने गए चार शहरों में से कोई पसंदीदा परीक्षा शहर नहीं मिला है, वे 7 मई रात 11:50 बजे तक री-अलॉकेशन विंडो के जरिए नया विकल्प चुन सकते हैं। एजेंसी ने यह भी कहा था कि “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर खाली स्लॉट आवंटित किए जाएंगे और जिन छात्रों को नया परीक्षा शहर या समय मिलेगा, उन्हें संशोधित एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा। अब क्या बदला? लेकिन 6 मई को जारी नए नोटिस में NTA ने अपने पुराने फैसले में बदलाव कर दिया। अब उम्मीदवार केवल अपनी स्टेट और सिटी बदलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा की तारीख और शिफ्ट में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि आवेदन की अंतिम तारीख पहले की तरह 7 मई ही रखी गई है। परीक्षा पूरे देश में 35 शिफ्ट में आयोजित की जाएगी और इसमें 9222 सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन शामिल हैं। 15 लाख से ज्यादा छात्रों ने किया आवेदन इस साल CUET UG 2026 के लिए 15.68 लाख से अधिक यूनिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को चार परीक्षा शहर चुनने का विकल्प दिया गया था। जब 29 अप्रैल को एडवांस एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी हुई, तब बड़ी संख्या में छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें उनकी पसंद के बजाय दूर के शहरों में सेंटर दिए गए हैं। खासकर दिल्ली और आसपास के छात्रों को आगरा और जयपुर जैसे शहरों में सेंटर मिलने पर विवाद बढ़ गया। इसके बाद NTA ने परीक्षा शहरों में बदलाव करते हुए नई डेटशीट जारी की। कितने छात्रों को मिला पसंद का सेंटर? NTA के अनुसार– 79% उम्मीदवारों को उनकी पहली पसंद का शहर मिला है 96.6% छात्रों को चार विकल्पों में से किसी एक शहर में सेंटर आवंटित हुआ करीब 3.4% यानी लगभग 55 हजार उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्हें उनकी प्राथमिकता के अनुसार सेंटर नहीं मिल पाया अब यही छात्र नए सिरे से परीक्षा शहर बदलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जो उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा तक आवेदन नहीं करेंगे, उन्हें पुराने एडमिट कार्ड के अनुसार ही परीक्षा देनी होगी। इस बार बढ़ सकती है परीक्षा में उपस्थिति Gulshan Kumar Dhamija, जो Guru Gobind Singh Indraprastha University के परीक्षा नियंत्रक हैं, का कहना है कि इस बार सेंटर आवंटन में बदलाव और दूर के शहरों में मिले सेंटरों को संशोधित करने से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। उनके मुताबिक, पहले कई छात्र दूर सेंटर मिलने के कारण परीक्षा छोड़ देते थे, लेकिन इस बार उपस्थिति 80% से बढ़कर 90% से अधिक पहुंच सकती है। 11 मई से शुरू होगी परीक्षा CUET UG 2026 की परीक्षा 11 मई से शुरू होगी और फिलहाल 31 मई तक इसका शेड्यूल तय किया गया है। NTA के पास जरूरत पड़ने पर परीक्षा अवधि 2-3 दिन बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद है। इस बार छात्रों को अधिकतम 5 विषय चुनने की अनुमति दी गई है। 8.69 लाख छात्रों ने 5 विषय चुने 3.63 लाख ने 4 विषय 2.93 लाख छात्रों ने 3 विषयों का चयन किया कुल मिलाकर इस परीक्षा में लगभग 67.56 लाख टेस्ट इंस्टेंस तैयार किए गए हैं।
Bihar Public Service Commission ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर दिया है। BPSC 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2026 के तहत DC, DSP समेत कई प्रशासनिक पदों पर भर्ती निकाली गई है। आयोग ने भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू हो चुकी है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1186 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें 1033 पद विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के लिए हैं, जबकि 153 पद फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर और अन्य विभागीय पदों के लिए निर्धारित किए गए हैं। ऐसे उम्मीदवार जो प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह परीक्षा बेहद अहम मानी जा रही है। आवेदन की अंतिम तारीख ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 31 मई 2026 तय की गई है। उम्मीदवारों को इसी तारीख तक परीक्षा शुल्क भी जमा करना होगा। प्रारंभिक परीक्षा की तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है, लेकिन आयोग जल्द ही इसका शेड्यूल जारी कर सकता है। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। अलग-अलग पदों के लिए पात्रता और आयु सीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में उपलब्ध है। ऐसे करें आवेदन सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर BPSC 72nd Exam 2026 लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन करके बेसिक जानकारी भरें। लॉगिन कर आवेदन फॉर्म पूरा करें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी– प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) मुख्य परीक्षा (Mains) इंटरव्यू प्रीलिम्स परीक्षा केवल क्वालिफाइंग होगी, जबकि अंतिम मेरिट मेंस परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर तैयार की जाएगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को अभी से रणनीतिक तैयारी शुरू करने की सलाह दी जा रही है। BPSC की इस बड़ी भर्ती से बिहार के हजारों युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने का मौका मिलेगा। खासतौर पर DC और DSP जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए प्रतियोगिता काफी कड़ी रहने की उम्मीद है।
NEET परीक्षा पास करना मेडिकल करियर की दिशा में एक बड़ा कदम जरूर है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है–काउंसलिंग प्रक्रिया। हर साल हजारों छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद सिर्फ गलत निर्णय या अधूरी जानकारी के कारण अपनी पसंदीदा MBBS या BDS सीट से चूक जाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि काउंसलिंग का हर चरण कितना महत्वपूर्ण है और इसे रणनीतिक तरीके से कैसे पूरा किया जाए। काउंसलिंग क्या है और क्यों है इतनी अहम? NEET काउंसलिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उम्मीदवारों को उनकी रैंक, कैटेगरी, सीट उपलब्धता और भरी गई पसंद (choice filling) के आधार पर मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया दो स्तरों पर आयोजित होती है– All India Quota (AIQ): कुल सीटों का 15 प्रतिशत State Quota: कुल सीटों का 85 प्रतिशत दोनों ही स्तरों पर भाग लेना छात्रों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे विकल्प बढ़ते हैं। रजिस्ट्रेशन से लेकर चॉइस फिलिंग तक–हर स्टेप मायने रखता है काउंसलिंग की शुरुआत रजिस्ट्रेशन से होती है, जहां उम्मीदवार को अपनी बेसिक जानकारी भरनी होती है। इसके बाद आता है सबसे महत्वपूर्ण चरण–चॉइस फिलिंग। यहीं पर सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए: अधिक से अधिक कॉलेज विकल्प भरें केवल टॉप कॉलेज पर निर्भर न रहें, बैकअप जरूर रखें अपनी रैंक के अनुसार यथार्थवादी विकल्प चुनें एक छोटी सी गलती यहां आपकी सीट छीन सकती है। सीट अलॉटमेंट: कैसे होता है फैसला? सीट आवंटन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होता है, जो आपकी रैंक, कैटेगरी और चॉइस के आधार पर तय होता है। सीट मिलने के बाद आपके पास तीन विकल्प होते हैं: Accept and Freeze: सीट को फाइनल करना Float: बेहतर कॉलेज के लिए अगले राउंड का इंतजार Slide: उसी कॉलेज में बेहतर कोर्स के लिए इंतजार सही विकल्प चुनना आपकी आगे की दिशा तय करता है। इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी कई छात्र कुछ आम गलतियां करते हैं, जिनसे उनका नुकसान हो सकता है: सिर्फ एक काउंसलिंग में भाग लेना कम चॉइस भरना डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में देरी समयसीमा (deadline) को नजरअंदाज करना इनसे बचना ही सफलता की कुंजी है। डॉक्यूमेंट्स पहले से रखें तैयार काउंसलिंग के दौरान किसी भी देरी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें: NEET स्कोरकार्ड एडमिट कार्ड 10वीं और 12वीं की मार्कशीट कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) पासपोर्ट साइज फोटो
ओडिशा के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। Board of Secondary Education Odisha (BSE Odisha) आज यानी 2 मई 2026 को कक्षा 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा का परिणाम शाम 4 बजे जारी करेगा। परीक्षा में शामिल हुए छात्र लंबे समय से अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे, जो अब आधिकारिक वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। कहां देखें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होते ही छात्र निम्नलिखित आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं: bseodisha.ac.in orissaresults.nic.in इसके अलावा छात्र DigiLocker के जरिए भी अपनी डिजिटल मार्कशीट एक्सेस कर सकते हैं। ऐसे करें ऑनलाइन रिजल्ट चेक रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “BSE Odisha 10th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट जरूर लें DigiLocker से ऐसे पाएं डिजिटल मार्कशीट अगर वेबसाइट स्लो हो जाए या ओपन न हो, तो छात्र DigiLocker का विकल्प चुन सकते हैं: DigiLocker ऐप या वेबसाइट खोलें मोबाइल नंबर या आधार के जरिए लॉगिन करें नए यूजर Sign Up करके रजिस्टर करें “Education” या “Boards” सेक्शन में जाएं BSE Odisha चुनें और आवश्यक विवरण भरें सबमिट करते ही डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी पास प्रतिशत और टॉपर्स पर भी रहेगी नजर रिजल्ट के साथ ही इस साल का पास प्रतिशत, टॉपर्स की सूची और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन का व्यापक अंदाजा मिलेगा।
झारखंड के लिए गर्व की बात है कि Indian Institute of Management Ranchi ने पहली बार प्रतिष्ठित QS Executive MBA Ranking 2026 में अपनी जगह बना ली है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब IIM रांची वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है। देश में चौथा स्थान, ग्लोबल और एशिया-पैसिफिक में भी मजबूत उपस्थिति इस रैंकिंग में Indian Institute of Management Ranchi ने भारत के अन्य IIMs के बीच चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर इसे 201+ बैंड में जगह मिली है और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में 33वां स्थान प्राप्त हुआ है। QS Executive MBA Ranking दुनिया की सबसे विश्वसनीय और प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल रैंकिंग्स में से एक मानी जाती है। किन मानकों पर होती है रैंकिंग? QS Executive MBA Ranking में संस्थानों का मूल्यांकन कई अहम मानकों पर किया जाता है, जिनमें प्लेसमेंट पैकेज, अकादमिक प्रतिष्ठा, करियर ग्रोथ, प्रोफेशनल प्रोफाइल और स्टूडेंट डाइवर्सिटी शामिल हैं। सरल शब्दों में, यह रैंकिंग इस बात का आकलन करती है कि किसी संस्थान से पढ़ाई के बाद छात्रों को कितने बेहतर करियर अवसर मिलते हैं और इंडस्ट्री में उनकी वैल्यू कितनी बढ़ती है। करियर ग्रोथ और इंडस्ट्री कनेक्शन बने सफलता की कुंजी IIM रांची ने इस रैंकिंग में सभी पैरामीटर पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, खासकर करियर आउटकम्स में इसकी मजबूती साफ नजर आती है। यहां से पढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को बेहतर सैलरी ग्रोथ, प्रमोशन के अवसर और मजबूत इंडस्ट्री एक्सपोजर मिलता है। संस्थान की सफलता के पीछे उसकी इंडस्ट्री से गहरी साझेदारी और रिसर्च-ओरिएंटेड अप्रोच अहम भूमिका निभाती है। Indian Institute of Management Ranchi अपने छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक बिजनेस परिस्थितियों का अनुभव भी देता है। ग्लोबल कोलैबोरेशन और आधुनिक पाठ्यक्रम के जरिए संस्थान लगातार अपने शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठा रहा है। Executive MBA प्रोग्राम: प्रोफेशनल्स के लिए खास डिजाइन IIM रांची का Executive MBA प्रोग्राम विशेष रूप से कामकाजी पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। यह दो वर्षीय कोर्स है, जिसमें प्रवेश के लिए कम से कम 3 साल का कार्य अनुभव जरूरी होता है। इस कार्यक्रम में फाइनेंस, मार्केटिंग, ऑपरेशंस, स्ट्रेटेजी और ह्यूमन रिसोर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ कई वैकल्पिक विषय भी शामिल हैं, जिससे छात्र अपनी जरूरत और करियर लक्ष्यों के अनुसार पढ़ाई को कस्टमाइज कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।