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Khan Sir Slams NTA Over NEET Row

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर भड़के Khan Sir, सरकार को दिए 5 बड़े सुझाव

surbhi मई 13, 2026 0
Khan Sir speaking on NEET UG 2026 cancellation and demanding major exam system reforms

पेपर लीक विवाद पर NTA और सरकार पर उठाए सवाल

देशभर में NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अब मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर Khan Sir ने भी सरकार और National Testing Agency (NTA) पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव दिए।

“NTA को भंग कर देना चाहिए”

Khan Sir ने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक NTA लगातार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है।

उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पेपर लीक करने वालों को मिले कड़ी सजा

Khan Sir ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वजह से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे।

रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच

Khan Sir ने मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच सिर्फ Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपना काफी नहीं है।

उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

CBI जांच जल्द पूरी करने की मांग

Khan Sir ने कहा कि CBI जांच प्रक्रियाएं अक्सर काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने मांग की कि जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए।

उन्होंने कहा कि अगर जांच में बहुत ज्यादा समय लगेगा तो प्रभावित छात्र लंबे समय तक असमंजस में रहेंगे। उनका बयान था कि “रिपोर्ट आते-आते कई बच्चे डॉक्टर भी बन जाएंगे।”

सुरक्षित और पारदर्शी एजेंसी को मिले जिम्मेदारी

उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल ऐसी एजेंसियों को करानी चाहिए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें।

उनके अनुसार बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है।

NTA को बताया “Never Trustable Agency”

Khan Sir ने NTA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे “Never Trustable Agency” तक कह दिया। उनका कहना है कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिरी हुई है।

उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने की अपील की, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कोल्हान यूनिवर्सिटी में UG के लिए 15 हजार आवेदन, PG नामांकन भी शुरू

चाईबासा। चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2025-27 के लिए नामांकन प्रक्रिया जोरों पर है। स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए अब तक चांसलर पोर्टल पर 14,948 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। वहीं स्नातकोत्तर (PG) में भी 24 जून से ऑनलाइन नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रों का उत्साह दिखने लगा है और अब तक 68 आवेदन प्राप्त हुए हैं।   PG नामांकन का पूरा शेड्यूल जारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीजी प्रथम सेमेस्टर के नामांकन के लिए विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके अनुसार — ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि — 11 जुलाई 2026 प्रथम मेधा सूची प्रकाशन — 15 जुलाई 2026 चयनित छात्रों का नामांकन — 15 से 24 जुलाई 2026 कक्षाओं का आरंभ — 10 अगस्त 2026   अंतिम तिथि का इंतजार न करें विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र-छात्राओं से विशेष अपील की है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार न करें। अंतिम दिनों में पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक और तकनीकी समस्याओं की संभावना रहती है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। पात्र एवं इच्छुक विद्यार्थी समय रहते चांसलर पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन पूरा कर लें। कोल्हान विश्वविद्यालय पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इस बार नामांकन में बड़ी संख्या में आवेदन आना विश्वविद्यालय के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान को दर्शाता है।

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NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ ‘आपातकाल’ अध्याय

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया है। नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस बदलाव को स्कूली शिक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण तत्कालीन सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा था। इसके बाद जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल लागू किया गया। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।   जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को प्रमुखता एनसीईआरटी ने आपातकाल विरोधी आंदोलन में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से शामिल किया है। पुस्तक के अनुसार, उनके नेतृत्व में बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में छात्रों और नागरिकों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।   लोकतंत्र की चुनौतियों पर भी चर्चा नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के अलावा फेक न्यूज, गलत सूचना, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। साथ ही ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नामक नया खंड जोड़ा गया है, जिससे छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकें।   लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया की भूमिका पर जोर पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जवाबदेही और भूमिका को रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 2024 के आम चुनाव, मतदाताओं की भागीदारी, पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण और स्थानीय लोकतंत्र के सफल उदाहरणों को भी शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र की व्यापक और व्यावहारिक समझ मिल सके।

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NEET-UG 2026 री-एग्जाम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न, NTA ने पेपर लीक के वायरल दावों को बताया फर्जी

नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित पेपर लीक के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि परीक्षा पूरी सुरक्षा और निगरानी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुई तथा पेपर लीक होने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को फर्जी करार देते हुए छात्रों और अभिभावकों से अफवाहों से बचने की अपील की है।   फर्जी वीडियो फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई एनटीए ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पूरी तरह मनगढ़ंत है और इसका उद्देश्य छात्रों को गुमराह करना है। एजेंसी ने बताया कि I4C और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से इस फर्जी सामग्री को तैयार और प्रसारित करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एनटीए ने अभ्यर्थियों से केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ही जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी है।   20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा एनटीए के अनुसार, देशभर के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने री-एग्जाम दिया। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की गई और सभी केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।   जल्द जारी होंगे परिणाम एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि अब तक पेपर लीक की कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई है और मूल्यांकन कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। एजेंसी का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले परिणाम घोषित करना है, ताकि अभ्यर्थियों को जल्द राहत मिल सके। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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