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BA English Graduate Shares Amazon Job Roadmap

सिर्फ BA English के दम पर Amazon में मिली नौकरी, Influencer ने शेयर किया पूरा रोडमैप

surbhi जून 20, 2026 0
Content creator Tanishka shares how a BA English degree helped her secure a job at Amazon.
BA English Graduate Gets Amazon Job

How To Get Job In Amazon: आज के दौर में Amazon, Google और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों में नौकरी पाना लाखों युवाओं का सपना होता है। हालांकि, आम धारणा यह है कि ऐसी कंपनियों में जगह बनाने के लिए टेक्निकल बैकग्राउंड या इंजीनियरिंग डिग्री होना जरूरी है। लेकिन एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की कहानी इस सोच को चुनौती देती है।

इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर तनिष्का ने बताया कि उन्होंने केवल BA English की डिग्री के साथ Amazon में नौकरी हासिल की। उनका कहना है कि सही रणनीति, लगातार मेहनत और जरूरी स्किल्स पर फोकस करके नॉन-टेक बैकग्राउंड वाले उम्मीदवार भी बड़ी कंपनियों में अपनी जगह बना सकते हैं।

मेहनत और सही स्किल्स से हासिल की सफलता

तनिष्का ने बताया कि उनके पास कोई टेक्निकल डिग्री नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने खुद को लगातार बेहतर बनाया और Amazon जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी पाने का लक्ष्य हासिल किया। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर युवाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए हैं।

Amazon में नौकरी पाने के लिए तनिष्का के 7 महत्वपूर्ण टिप्स

1. कम्युनिकेशन स्किल्स को बनाएं मजबूत

सिर्फ अच्छे अंक ही सफलता की गारंटी नहीं होते। बोलने और लिखने की क्षमता को बेहतर बनाना भी बेहद जरूरी है। इंटरव्यू और प्रोफेशनल माहौल में स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखना महत्वपूर्ण होता है।

2. इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट्स से लें अनुभव

पढ़ाई के साथ-साथ इंटर्नशिप और विभिन्न प्रोजेक्ट्स में हिस्सा लेने से प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है। इससे रिज्यूमे मजबूत होता है और कंपनियों के सामने आपकी प्रोफाइल अधिक प्रभावशाली बनती है।

3. हर नौकरी के लिए अलग रिज्यूमे तैयार करें

एक ही रिज्यूमे सभी कंपनियों में भेजने के बजाय, जॉब प्रोफाइल के अनुसार उसमें बदलाव करें। संबंधित स्किल्स और अनुभव को प्रमुखता देना चयन की संभावना बढ़ा सकता है।

4. खुद को कम योग्य समझकर आवेदन करना न छोड़ें

अगर आप किसी नौकरी की सभी योग्यताओं को पूरा नहीं करते हैं, तब भी आवेदन करने से पीछे न हटें। आत्मविश्वास बनाए रखें और अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश करें।

5. इंटरव्यू की तैयारी पर विशेष ध्यान दें

बिहेवियरल सवालों का अभ्यास करें, मॉक इंटरव्यू दें और कंपनी के बारे में अच्छी तरह रिसर्च करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।

6. नॉन-टेक स्किल्स को अपनी ताकत बनाएं

कम्युनिकेशन, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसी स्किल्स हर कॉर्पोरेट भूमिका में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन क्षमताओं को सही तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है।

7. रिजेक्शन को सीखने का अवसर समझें

हर असफलता आपको कुछ नया सिखाती है। कमजोरियों को पहचानकर उनमें सुधार करें और लगातार प्रयास जारी रखें।

सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं तनिष्का

तनिष्का इंस्टाग्राम पर "thatchicgirll" नाम से कंटेंट शेयर करती हैं। उनके अकाउंट पर लाइफस्टाइल, फैशन, ऑफिस लाइफ और करियर से जुड़े वीडियो देखने को मिलते हैं। उनके कई वीडियो लाखों व्यूज हासिल कर चुके हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 1.04 लाख फॉलोअर्स हैं।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि केवल डिग्री नहीं, बल्कि सही स्किल्स, निरंतर सीखने की इच्छा और मेहनत भी करियर में बड़ी सफलता दिला सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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'4 साल की इंजीनियरिंग समय की बर्बादी?' अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़े निवेशक श्रीनि राजू के बयान से छिड़ी नई बहस

भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को लंबे समय से बेहतर करियर और स्थिर भविष्य का रास्ता माना जाता रहा है। हर साल लाखों छात्र IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला पाने का सपना देखते हैं। लेकिन हाल ही में प्रसिद्ध उद्यमी और प्राइवेट इक्विटी निवेशक श्रीनि राजू के एक बयान ने डिग्री बनाम स्किल्स की बहस को फिर से तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में चार साल की इंजीनियरिंग डिग्री छात्रों को नौकरी के लिए उतना तैयार नहीं करती, जितना व्यावहारिक कौशल और लगातार सीखने की क्षमता करती है। कौन हैं श्रीनि राजू? चिंतलपति श्रीनिवास राजू भारतीय आईटी उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट इक्विटी निवेश के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने NIT कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की Utah State University से सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग डिग्री पर क्या बोले श्रीनि राजू? 'रॉ टॉक्स विद वीके' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान श्रीनि राजू ने कहा कि आज के समय में कई छात्र वर्षों तक डिग्री हासिल करने में समय लगाते हैं, लेकिन उनके पास वास्तविक नौकरी के लिए जरूरी प्रैक्टिकल स्किल्स की कमी होती है। उनका मानना है कि सिर्फ B.Tech की डिग्री किसी व्यक्ति के जॉब-रेडी होने का पैमाना नहीं हो सकती। 12वीं पास और B.Tech ग्रेजुएट्स पर कंपनी का प्रयोग श्रीनि राजू ने अपनी कंपनी के एक पुराने प्रयोग का जिक्र करते हुए बताया कि एक समूह में 30 इंटरमीडिएट (12वीं पास) छात्रों को और दूसरे समूह में 30 B.Tech ग्रेजुएट्स को रखा गया। दोनों समूहों को एक जैसी ट्रेनिंग एक साल तक दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दोनों की उत्पादकता का मूल्यांकन किया गया। उनके अनुसार, परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा। इसी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या चार साल की डिग्री हमेशा व्यावहारिक दुनिया में अतिरिक्त लाभ देती है। शिक्षा व्यवस्था में क्या कमी है? श्रीनि राजू का मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अभी भी किताबी ज्ञान पर आधारित है। कई संस्थानों में छात्रों को वह सिखाया जाता है जो पाठ्यक्रम में लिखा है, जबकि उद्योग की बदलती जरूरतें और वास्तविक कार्य अनुभव उससे अलग हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षा को बेकार नहीं मानते, बल्कि शिक्षा और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर देते हैं। आज के जॉब मार्केट में क्या सबसे ज्यादा जरूरी है? श्रीनि राजू के अनुसार, बदलते रोजगार बाजार में सिर्फ डिग्री या सर्टिफिकेट काफी नहीं हैं। छात्रों को इन क्षमताओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए: प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स लगातार सीखने की क्षमता स्वयं से नई चीजें सीखने की आदत प्रैक्टिकल नॉलेज और इंडस्ट्री एक्सपोजर बदलती तकनीकों के साथ खुद को अपडेट रखना IIT-JEE में असफल होने वालों को क्या सलाह दी? उन्होंने छात्रों से कहा कि अगर वे IIT-JEE जैसी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते हैं, तो इसे जीवन का अंत न समझें। मेहनत और सही कौशल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। डिग्री बनाम स्किल्स: क्या है सच्चाई? विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्री और स्किल्स दोनों का अपना महत्व है। डिग्री बुनियादी ज्ञान और अवसरों के दरवाजे खोलती है, जबकि व्यावहारिक कौशल किसी व्यक्ति को वास्तविक कार्यक्षेत्र में सफल बनाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच संतुलन बनाना ही सबसे बेहतर रास्ता माना जाता है।  

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रांची यूनिवर्सिटी में 43,530 सीटों पर एडमिशन शुरू

रांची। रांची विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2026-30 के स्नातक और 2026-29 के वोकेशनल पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों में कुल 43,530 सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। इच्छुक छात्र-छात्राएं 12 जून से 29 जून तक चांसलर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।   कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि इस बार विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी प्राथमिकता शैक्षणिक सत्र को नियमित करना, समय पर परीक्षा और परिणाम जारी करना तथा छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।   24 कॉलेजों में होगा नामांकन, मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेरिट सूची जारी की जाएगी। दस्तावेज सत्यापन के बाद नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी। इस वर्ष मारवाड़ी कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज, डोरंडा कॉलेज, केओ कॉलेज गुमला, एसएसएम कॉलेज, बीएस कॉलेज लोहरदगा, बिरसा कॉलेज खूंटी और अन्य कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें उपलब्ध हैं।   एनईपी के तहत बड़ा बदलाव, 'लाइफ साइंस' विषय की शुरुआत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत इस बार बॉटनी और जूलॉजी विषयों को मिलाकर 'लाइफ साइंस' विषय बनाया गया है। कुलपति ने बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बदलाव से सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की गई है और सभी कॉलेजों में पूर्व निर्धारित क्षमता के अनुसार ही नामांकन होगा।   सेशन नियमित करने और परीक्षा व्यवस्था सुधारने पर जोर डॉ. सरोज शर्मा ने स्वीकार किया कि विश्वविद्यालय लंबे समय से शैक्षणिक सत्र में देरी की समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबित परीक्षाओं के परिणाम तेजी से जारी किए जा रहे हैं और परीक्षा, मूल्यांकन तथा रिजल्ट प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।   छात्र संघ चुनाव, प्लेसमेंट और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा कुलपति ने बताया कि लॉ इंस्टीट्यूट में कानूनी विवाद समाप्त होने के बाद अब वहां भी नामांकन का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव कराने के भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। साथ ही प्लेसमेंट सेल को मजबूत किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिल सकें। पूर्व छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ने, उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाने तथा स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की भी योजना तैयार की गई है।   कुलपति ने विश्वास जताया कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित सत्र, समय पर परीक्षा, बेहतर प्लेसमेंट और प्रशासनिक सुधारों के जरिए रांची विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा।

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