इस सप्ताह ग्रहों की चाल करियर, कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग और फाइनेंशियल प्लानिंग पर गहरा असर डाल सकती है। Astrology के अनुसार 18 मई से चंद्रमा मिथुन, फिर कर्क और सप्ताह के अंत तक सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे अलग-अलग राशियों पर करियर और आर्थिक मामलों में अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है। जहां वृष और कर्क राशि वालों को भाग्य का साथ मिल सकता है, वहीं सिंह राशि वालों के करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। मेष राशि इस सप्ताह आपके अंदर कॉन्फिडेंस बना रहेगा। नेटवर्किंग और टीमवर्क से फायदा हो सकता है। मीडिया, सेल्स और ऑनलाइन काम से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा। 20 मई के बाद वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। सप्ताहांत में सीनियर्स से तारीफ मिलने के योग हैं। वृषभ राशि यह सप्ताह आर्थिक स्थिरता और प्रैक्टिकल फैसलों के लिए अच्छा रहेगा। सेविंग्स और फाइनेंशियल प्लानिंग पर फोकस बढ़ेगा। काम के सिलसिले में ट्रैवल के योग बन सकते हैं। परिवार और काम के बीच संतुलन बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। मिथुन राशि Communication और नेटवर्किंग इस सप्ताह आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। इंटरव्यू, मीटिंग और प्रेजेंटेशन में सफलता मिलने के संकेत हैं। सोशल कॉन्टैक्ट्स से आर्थिक अवसर मिल सकते हैं। हालांकि सप्ताह के बीच में खर्चों को लेकर सतर्क रहना जरूरी होगा। कर्क राशि सप्ताह की शुरुआत थोड़ी मानसिक उलझन के साथ हो सकती है। खर्च और करियर को लेकर चिंता बढ़ सकती है। 20 मई के बाद स्थिति बेहतर होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। टीमवर्क से फायदा मिलेगा और फाइनेंशियल फैसलों में स्थिरता आएगी। सिंह राशि यह सप्ताह आपके लिए करियर ग्रोथ लेकर आ सकता है। नेटवर्किंग और प्रोफेशनल बातचीत से लाभ होगा। 23 मई के बाद आपका आत्मविश्वास और लीडरशिप क्वालिटी मजबूत होगी। सीनियर्स से पहचान मिलने और करियर में बड़ा अवसर मिलने के योग हैं। कन्या राशि काम का दबाव ज्यादा रह सकता है लेकिन प्रोफेशनल पहचान मजबूत होगी। नेटवर्किंग और सोशल कॉन्टैक्ट्स से फायदा मिलेगा। सप्ताह के अंत में मानसिक तनाव से बचने के लिए आराम और संतुलन जरूरी रहेगा। तुला राशि ट्रैवल, नेटवर्किंग और नई सीख इस सप्ताह करियर में मदद कर सकती है। शिक्षण, मीडिया और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों को फायदा हो सकता है। सप्ताह के बीच में काम का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन अंत तक सहयोग मिलने लगेगा। वृश्चिक राशि फाइनेंस, टैक्स और जिम्मेदारियों को लेकर तनाव रह सकता है। जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। 20 मई के बाद वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और करियर में प्रगति के संकेत मजबूत होंगे। धनु राशि पार्टनरशिप और टीमवर्क इस सप्ताह आपकी सफलता की कुंजी बनेंगे। बिजनेस और प्रोफेशनल चर्चाओं में फायदा होगा। सप्ताहांत तक आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर फैसलों में स्पष्टता मिलेगी। मकर राशि काम का दबाव और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। खर्चों पर कंट्रोल रखना जरूरी होगा। 20 मई के बाद साझेदारी और टीमवर्क से फायदा होगा। ओवरथिंकिंग से बचना बेहतर रहेगा। कुंभ राशि रचनात्मकता और कम्युनिकेशन इस सप्ताह आपको आगे बढ़ाएंगे। लेखन, डिजाइन और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा। काम का दबाव बीच में बढ़ सकता है, लेकिन सप्ताहांत में सहयोग से राहत मिलेगी। मीन राशि करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। 20 मई के बाद आत्मविश्वास और क्रिएटिविटी बढ़ेगी। काम में सराहना मिलने के योग हैं, हालांकि सप्ताह के अंत तक व्यस्तता बढ़ सकती है।
बदल रही है नौकरी और सफलता की परिभाषा एक समय था जब प्रमोशन को करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता था। ऊंचा पद, ज्यादा वेतन और जिम्मेदारी सफलता की पहचान समझे जाते थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। बढ़ते तनाव, डिजिटल दबाव और बिगड़ते वर्क-लाइफ बैलेंस के बीच कई कर्मचारी प्रमोशन लेने से भी बचने लगे हैं। आज बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स यह सोचने लगे हैं कि क्या ज्यादा पद और सैलरी वास्तव में मानसिक शांति और निजी जिंदगी की कीमत पर सही है। कर्मचारियों की संतुष्टि में आई बड़ी गिरावट Gallup की State of the Global Workplace 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में वैश्विक कर्मचारी जुड़ाव (Employee Engagement) घटकर सिर्फ 20 प्रतिशत रह गया। यह 2020 के बाद सबसे निचला स्तर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों में बढ़ती थकान और असंतोष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की उत्पादकता का नुकसान हुआ। प्रमोशन अब इनाम नहीं, बोझ जैसा क्यों लग रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद कर्मचारियों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब लोग केवल पद और वेतन नहीं, बल्कि मानसिक शांति, लचीलापन और निजी समय को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। Instahyre के को-फाउंडर सरबोजित मलिक के मुताबिक आज के कर्मचारी काम में अर्थ, स्वतंत्रता और संतुलन चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रमोशन की खुशी कुछ समय के लिए रहती है, लेकिन उसके साथ आने वाला तनाव लंबे समय तक बना रहता है। डिजिटल वर्क कल्चर ने बढ़ाया दबाव वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्य संस्कृति के बाद कर्मचारियों पर “हमेशा उपलब्ध रहने” का दबाव काफी बढ़ गया है। सीनियर पदों पर देर रात कॉल, लगातार ईमेल और निजी जीवन में काम का दखल आम हो गया है। Biz Staffing Comrade Pvt Ltd के मैनेजिंग पार्टनर पुनीत अरोड़ा के अनुसार आज प्रमोशन का मतलब कई लोगों के लिए ज्यादा काम और कम निजी समय बन गया है। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी अब मानसिक स्वास्थ्य और परिवार के समय को प्राथमिकता देते हुए नेतृत्व वाली भूमिकाएं तक ठुकरा रहे हैं। कंपनियों को बदलनी होगी सोच? विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को करियर ग्रोथ की पारंपरिक सोच बदलनी होगी। केवल लंबे घंटे काम करने और लगातार उपलब्ध रहने को सफलता मानना अब कर्मचारियों को स्वीकार नहीं है। अब कर्मचारी ऐसे प्रमोशन चाहते हैं जिनमें– बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान लचीलापन सपोर्टिव कार्य संस्कृति वास्तविक नेतृत्व स्वतंत्रता जैसी सुविधाएं भी शामिल हों। भविष्य में कैसी होगी करियर ग्रोथ? कॉर्पोरेट दुनिया में अब सफलता की परिभाषा बदल रही है। कर्मचारी अब सिर्फ बड़ी सैलरी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता भी चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वही कंपनियां सफल होंगी जो कर्मचारियों को केवल पद नहीं, बल्कि संतुलित और स्वस्थ कार्य वातावरण भी देंगी। अब सवाल यह नहीं रह गया कि लोग आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या करियर ग्रोथ बिना थकान और मानसिक दबाव के संभव है।
डिजिटल युग में तेजी से हो रहे बदलावों ने करियर के पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)–एक ऐसी तकनीक जो न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। आज कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो AI को समझते हों और उसे प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। अगर आप भी अपने करियर को भविष्य के हिसाब से तैयार करना चाहते हैं, तो AI से जुड़ी कुछ अहम स्किल्स सीखना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। AI क्यों बन गया है करियर का सबसे बड़ा ट्रेंड? AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा। हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन, ई-कॉमर्स और मार्केटिंग जैसे हर सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियां अपने काम को तेज, सटीक और ऑटोमेटेड बनाने के लिए AI पर निर्भर होती जा रही हैं। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और उन्हें आकर्षक सैलरी पैकेज भी मिल रहे हैं। ये 6 AI स्किल्स बना सकती हैं आपका करियर 1. मशीन लर्निंग (Machine Learning) AI की नींव मानी जाने वाली यह स्किल कंप्यूटर को डेटा के आधार पर खुद सीखने और निर्णय लेने की क्षमता देती है। इस फील्ड में काम करने वाले डेटा साइंटिस्ट और AI इंजीनियर की डिमांड काफी ज्यादा है। 2. डेटा एनालिसिस (Data Analysis) AI का पूरा खेल डेटा पर टिका है। डेटा को समझना, उसका विश्लेषण करना और उससे सही निष्कर्ष निकालना एक जरूरी स्किल है। Python, SQL और Excel जैसे टूल्स इसमें आपकी मदद करते हैं। 3. प्रोग्रामिंग स्किल्स AI में करियर बनाने के लिए कोडिंग का ज्ञान बेहद जरूरी है। खासतौर पर Python, Java और R जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं इस फील्ड में अहम भूमिका निभाती हैं। 4. डीप लर्निंग (Deep Learning) यह AI का एडवांस्ड हिस्सा है, जिसमें Neural Networks के जरिए मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और समझने की क्षमता दी जाती है। इसका इस्तेमाल फेस रिकग्निशन, रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में होता है। 5. क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) AI मॉडल्स को रन करने के लिए हाई कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जो AWS, Google Cloud और Microsoft Azure जैसे प्लेटफॉर्म्स से मिलती है। इस स्किल के जरिए आप बड़े स्तर पर काम कर सकते हैं। 6. कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप अपनी सोच को स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकें और समस्याओं का समाधान निकाल सकें। टीमवर्क और क्रिएटिविटी आज हर कंपनी की प्राथमिकता है। AI फील्ड में कितनी है कमाई? AI सेक्टर में सैलरी पैकेज काफी आकर्षक होते हैं। एक शुरुआती प्रोफेशनल सालाना 6 से 10 लाख रुपये तक कमा सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप के जरिए भी कमाई के बड़े अवसर मौजूद हैं।
आज के दौर में तेजी से बढ़ती Hospitality Industry ने युवाओं के लिए करियर के नए दरवाजे खोल दिए हैं। अगर आपको लोगों से मिलना-जुलना पसंद है, नई जगहों पर काम करने का शौक है और एक ग्लैमरस करियर की तलाश है, तो होटल मैनेजमेंट आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। कम फीस में शुरू होने वाला यह कोर्स आपको देश ही नहीं, विदेशों में भी शानदार नौकरी और मोटी सैलरी का मौका दे सकता है। क्या है होटल मैनेजमेंट? होटल मैनेजमेंट एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और अन्य हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े हर पहलू की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें कस्टमर सर्विस से लेकर फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग और फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट तक की बारीकियां सिखाई जाती हैं। यह कोर्स न केवल स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करता है, बल्कि आपको एक ऐसा प्रोफेशनल बनाता है जो किसी भी परिस्थिति में ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव दे सके। क्यों बढ़ रही है इस फील्ड की डिमांड? भारत में टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है। छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज तक नए होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट्स खुल रहे हैं। ऐसे में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि होटल मैनेजमेंट आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय करियर विकल्प बन चुका है। इस कोर्स के बड़े फायदे जल्दी जॉब मिलने की संभावना देश-विदेश में काम करने के अवसर ग्लैमरस और इंटरैक्टिव वर्क एनवायरनमेंट खुद का होटल या रेस्टोरेंट शुरू करने का मौका कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं? होटल मैनेजमेंट में आपकी योग्यता और रुचि के अनुसार कई विकल्प मौजूद हैं: डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट बैचलर डिग्री (BHM / BSc Hospitality) मास्टर डिग्री (MHM / MBA Hospitality) सर्टिफिकेट कोर्स (6 महीने से 1 साल) क्या-क्या सीखते हैं छात्र? इस कोर्स की पढ़ाई काफी प्रैक्टिकल होती है, जिससे छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाया जाता है। इसमें सिखाया जाता है: कुकिंग और फूड प्रोडक्शन कस्टमर हैंडलिंग और सर्विस होटल ऑपरेशन मैनेजमेंट कम्युनिकेशन स्किल टीमवर्क और लीडरशिप करियर के शानदार अवसर होटल मैनेजमेंट करने के बाद आपके सामने कई करियर ऑप्शन खुल जाते हैं: होटल मैनेजर Chef फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव एयरलाइन कैटरिंग इवेंट मैनेजमेंट क्रूज लाइन जॉब यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनुभव के साथ आपकी ग्रोथ लगातार होती रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौके मिलते हैं। सैलरी कितनी मिलती है? शुरुआत में होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को 15,000 से 25,000 रुपये प्रति महीने तक सैलरी मिल सकती है। हालांकि, अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी तेजी से बढ़ती है। बड़े होटल ब्रांड्स या विदेश में काम करने पर आप लाखों रुपये प्रति महीने तक कमा सकते हैं।
वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, समृद्धि, प्रेम और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। 26 मार्च 2026 को शुक्र का मेष राशि में गोचर होने जा रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ और लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक उन्नति और सफलता के बन रहे योग इस गोचर के दौरान कई जातकों के लिए आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। करियर में तरक्की, व्यापार में विस्तार और निवेश से लाभ के संकेत मिल रहे हैं। वहीं, प्रेम संबंध और दांपत्य जीवन में भी मधुरता बढ़ने की संभावना है। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इन 4 राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव मिथुन मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय खुशियों से भरा रहेगा। पारिवारिक विवाद सुलझने के संकेत हैं और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। इंटरव्यू और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने की प्रबल संभावना है। संतान पक्ष से भी सुखद समाचार मिल सकता है। कर्क कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर बेहद शुभ रहेगा। विरोधियों पर विजय मिलने के योग हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। पारिवारिक संपत्ति विवाद सुलझ सकते हैं और घर में मांगलिक कार्यों की संभावना है। संतान सुख के योग भी बन रहे हैं। सिंह सिंह राशि के जातकों के लिए भाग्य का साथ मिलेगा। लंबे समय से चल रहे विवाद खत्म हो सकते हैं। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। परीक्षा, इंटरव्यू या प्रतियोगिता में सफलता के संकेत हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। मकर मकर राशि के लोगों के लिए यह समय सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। पारिवारिक मतभेद खत्म होंगे और रिश्ते मजबूत होंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मेहनत का फल मिलेगा और करियर में सफलता के योग बनेंगे। संतान से जुड़ी खुशखबरी मिल सकती है। ज्योतिषीय महत्व शुक्र गोचर को जीवन में सुख-सुविधाओं, प्रेम और आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। इस गोचर के प्रभाव से जहां कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलेगा, वहीं अन्य राशियों को भी जीवन में छोटे-बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।