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Hotel Management: A Career Full of Opportunities

सिर्फ कुकिंग ही नहीं, होटल मैनेजमेंट में छुपे हैं शानदार करियर और कमाई के बड़े मौके

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Students training in hotel management kitchen and front office in hospitality industry.
Hotel Management Career Opportunities India

आज के दौर में तेजी से बढ़ती Hospitality Industry ने युवाओं के लिए करियर के नए दरवाजे खोल दिए हैं। अगर आपको लोगों से मिलना-जुलना पसंद है, नई जगहों पर काम करने का शौक है और एक ग्लैमरस करियर की तलाश है, तो होटल मैनेजमेंट आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। कम फीस में शुरू होने वाला यह कोर्स आपको देश ही नहीं, विदेशों में भी शानदार नौकरी और मोटी सैलरी का मौका दे सकता है।

क्या है होटल मैनेजमेंट?

होटल मैनेजमेंट एक प्रोफेशनल कोर्स है, जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और अन्य हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े हर पहलू की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें कस्टमर सर्विस से लेकर फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग और फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट तक की बारीकियां सिखाई जाती हैं।

यह कोर्स न केवल स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करता है, बल्कि आपको एक ऐसा प्रोफेशनल बनाता है जो किसी भी परिस्थिति में ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव दे सके।

क्यों बढ़ रही है इस फील्ड की डिमांड?

भारत में टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है। छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज तक नए होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट्स खुल रहे हैं। ऐसे में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि होटल मैनेजमेंट आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय करियर विकल्प बन चुका है।

इस कोर्स के बड़े फायदे

  • जल्दी जॉब मिलने की संभावना
  • देश-विदेश में काम करने के अवसर
  • ग्लैमरस और इंटरैक्टिव वर्क एनवायरनमेंट
  • खुद का होटल या रेस्टोरेंट शुरू करने का मौका

कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं?

होटल मैनेजमेंट में आपकी योग्यता और रुचि के अनुसार कई विकल्प मौजूद हैं:

  • डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट
  • बैचलर डिग्री (BHM / BSc Hospitality)
  • मास्टर डिग्री (MHM / MBA Hospitality)
  • सर्टिफिकेट कोर्स (6 महीने से 1 साल)

क्या-क्या सीखते हैं छात्र?

इस कोर्स की पढ़ाई काफी प्रैक्टिकल होती है, जिससे छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाया जाता है। इसमें सिखाया जाता है:

  • कुकिंग और फूड प्रोडक्शन
  • कस्टमर हैंडलिंग और सर्विस
  • होटल ऑपरेशन मैनेजमेंट
  • कम्युनिकेशन स्किल
  • टीमवर्क और लीडरशिप

करियर के शानदार अवसर

होटल मैनेजमेंट करने के बाद आपके सामने कई करियर ऑप्शन खुल जाते हैं:

  • होटल मैनेजर
  • Chef
  • फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव
  • एयरलाइन कैटरिंग
  • इवेंट मैनेजमेंट
  • क्रूज लाइन जॉब

यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनुभव के साथ आपकी ग्रोथ लगातार होती रहती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौके मिलते हैं।

सैलरी कितनी मिलती है?

शुरुआत में होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को 15,000 से 25,000 रुपये प्रति महीने तक सैलरी मिल सकती है। हालांकि, अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी तेजी से बढ़ती है। बड़े होटल ब्रांड्स या विदेश में काम करने पर आप लाखों रुपये प्रति महीने तक कमा सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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2028 तक पर्यटन क्षेत्र में आएंगी 30 लाख नई नौकरियां! होटल, रेस्टोरेंट और कैफे में सबसे ज्यादा अवसर

भारत में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। आने वाले चार वर्षों में देश का पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य) क्षेत्र रोजगार का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2028 तक इस सेक्टर में करीब 30 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इनमें सबसे अधिक भर्ती होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, रिसॉर्ट और फूड सर्विस से जुड़े संस्थानों में होगी। 2028 तक 1.48 करोड़ लोगों को मिलेगा रोजगार टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल (THSC) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 2024 के 1.18 करोड़ से बढ़कर 2028 तक 1.48 करोड़ होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू पर्यटन में लगातार बढ़ोतरी, होटल उद्योग का विस्तार और खाने-पीने से जुड़ी सेवाओं की बढ़ती मांग इस रोजगार वृद्धि की प्रमुख वजहें होंगी। होटल और फूड सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा भर्ती रिपोर्ट बताती है कि पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में बनने वाली कुल नौकरियों में लगभग 93 प्रतिशत हिस्सेदारी होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, रिसॉर्ट और फूड सर्विस व्यवसायों की होगी। अनुमान है कि 2024 में इस उप-क्षेत्र में करीब 1.10 करोड़ लोग कार्यरत थे, जो 2028 तक बढ़कर 1.38 करोड़ हो जाएंगे। यानी आने वाली नई नौकरियों का बड़ा हिस्सा इसी सेक्टर से आएगा। हर स्तर के उम्मीदवारों के लिए होंगे अवसर इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि रोजगार केवल अनुभवी पेशेवरों तक सीमित नहीं रहेगा। नए उम्मीदवारों से लेकर अनुभवी कर्मचारियों तक, सभी के लिए अवसर उपलब्ध होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, बनने वाली लगभग 30 लाख नई नौकरियों में– करीब 11 लाख पद कुशल (Skilled) कर्मचारियों के लिए होंगे। लगभग 11 लाख पद अर्धकुशल (Semi-skilled) उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध होंगे। वहीं करीब 8 लाख नौकरियां अकुशल (Unskilled) श्रमिकों के लिए होंगी। इससे साफ है कि 10वीं, 12वीं पास युवाओं के साथ-साथ स्किल ट्रेनिंग प्राप्त उम्मीदवारों के लिए भी रोजगार के बेहतर अवसर बनेंगे। इन पदों की रहेगी सबसे ज्यादा मांग हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में कई नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना जताई गई है। होटल सेक्टर में बैंक्वेट मैनेजर और असिस्टेंट शेफ जैसे पदों पर भर्ती बढ़ सकती है। वहीं फूड सर्विस सेक्टर में असिस्टेंट शेफ और बरिस्ता एग्जीक्यूटिव की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। इसके अलावा डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डिजिटल मार्केटिंग और रेवेन्यू मैनेजमेंट से जुड़े पेशेवरों की जरूरत भी तेजी से बढ़ेगी। इन राज्यों में बनेंगे सबसे ज्यादा रोजगार रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में सबसे अधिक रोजगार पैदा करने वाले राज्य होंगे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी इस सेक्टर में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ने की संभावना जताई गई है। लगातार बढ़ेगा पर्यटन उद्योग रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2022 से 2028 के बीच पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र का औसत वार्षिक सकल मूल्य वर्धन (GVA) लगभग 5.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। यही वृद्धि आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन को भी गति देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू पर्यटन, बेहतर होटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के चलते यह सेक्टर भारत के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में शामिल बना रहेगा।  

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OPSC भर्ती 2026: पशु चिकित्सा सहायक सर्जन के 436 पदों पर निकली वैकेंसी, 24 अगस्त तक करें आवेदन

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12वीं के बाद फॉरेंसिक साइंस में बनाएं सुनहरा करियर, जानिए कैसे करें शुरुआत

नई दिल्ली, एजेंसियां। विज्ञान, तकनीक और अपराध जांच में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए फॉरेंसिक साइंस तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प बन रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में 12वीं के बाद इस क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जैसे Coursera, कई उपयोगी कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं।   फॉरेंसिक साइंस क्या है ? फॉरेंसिक साइंस वह विज्ञान है, जिसमें अपराधों की जांच के लिए वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग क्राइम सीन की जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सटीक प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।   इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्रों को 12वीं विज्ञान संकाय (फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी या मैथ्स) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस या संबंधित विषयों में स्नातक किया जा सकता है। आगे एमएससी, विशेष डिप्लोमा या विशेषज्ञता वाले कोर्स करके बेहतर करियर बनाया जा सकता है। इस क्षेत्र में सफलता के लिए वैज्ञानिक सोच, तार्किक विश्लेषण, धैर्य, सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता और आधुनिक तकनीकों की समझ जरूरी मानी जाती है।    केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला कैसे होता है ? अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर प्रवेश कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) के माध्यम से होता है। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) भी अपने कई स्नातक कार्यक्रमों में CUET-UG स्कोर के आधार पर प्रवेश देता है, जबकि कुछ कोर्स के लिए अलग पात्रता और चयन प्रक्रिया लागू हो सकती है।   विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध और वैज्ञानिक जांच की बढ़ती जरूरत को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस आने वाले वर्षों में रोजगार के सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में शामिल होगा। ऐसे में सही कोर्स और प्रशिक्षण के साथ छात्र इस क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।

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North East Frontier Railway apprentice recruitment notification highlighting 6,777 vacancies for 10th pass and ITI-qualified candidates.
Railway Vacancy 2026: रेलवे में 6777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती, 10वीं पास और ITI उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका

Railway Apprentice Recruitment 2026: रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने वर्ष 2026 के लिए 6777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, अकाउंट्स, मेडिकल, पर्सनल सहित कई विभागों में एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप कराई जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 19 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी। चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 20 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 कुल पद कुल रिक्तियां: 6777 यूनिट वाइज वैकेंसी यूनिट पद कटिहार (KIR) एवं तिंधारिया वर्कशॉप 1103 अलीपुरद्वार 651 रंगिया 750 लुमडिंग 1274 टिनसुकिया 860 न्यू बोंगाईगांव वर्कशॉप एवं इंजीनियरिंग वर्कशॉप 881 डिब्रूगढ़ वर्कशॉप 763 मुख्यालय मालीगांव (विभिन्न विभाग) 495 कुल 6777 शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिक) में न्यूनतम 50% अंक। संबंधित ट्रेड में NCVT/SCVT से ITI सर्टिफिकेट अनिवार्य। मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नीशियन (पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी) पदों के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ 12वीं भी आवश्यक है। एससी, एसटी और PwBD उम्मीदवारों को 10वीं में न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट मिलेगी। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 15 वर्ष अधिकतम आयु: 24 वर्ष आरक्षण के अनुसार आयु में छूट: SC/ST: 5 वर्ष OBC: 3 वर्ष PwBD: 10 वर्ष आवश्यक दस्तावेज 10वीं की मार्कशीट ITI फाइनल मार्कशीट NCVT/SCVT ट्रेड सर्टिफिकेट 12वीं की मार्कशीट (जहां लागू हो) पासिंग सर्टिफिकेट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज स्टाइपेंड चयनित अप्रेंटिस उम्मीदवारों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान कम से कम ₹9,600 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया रेलवे इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा आयोजित नहीं करेगा। चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। 10वीं और ITI में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर मेरिट तैयार होगी। समान अंक होने पर अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी। लैब टेक्नीशियन पदों के लिए 10वीं एवं 12वीं (PCB) के अंकों के आधार पर मेरिट बनेगी। मेरिट लिस्ट के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट होगा। इसके बाद अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी। आवेदन शुल्क सामान्य/OBC/EWS उम्मीदवार: ₹100 SC/ST/PwBD/EBC एवं महिला उम्मीदवार: कोई आवेदन शुल्क नहीं भर्ती का संक्षिप्त विवरण भर्ती संस्था: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) पद: अप्रेंटिस कुल पद: 6777 योग्यता: 10वीं + ITI आयु सीमा: 15–24 वर्ष आवेदन प्रारंभ: 20 जुलाई 2026 अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 प्रशिक्षण अवधि: 1 वर्ष न्यूनतम स्टाइपेंड: ₹9,600 प्रतिमाह यदि आप 10वीं पास हैं और संबंधित ट्रेड में ITI कर चुके हैं, तो रेलवे में अनुभव और भविष्य के करियर के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन शुरू होते ही सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर आवेदन करें।  

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