पेपर लीक विवाद पर NTA और सरकार पर उठाए सवाल देशभर में NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर अब मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर Khan Sir ने भी सरकार और National Testing Agency (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव दिए। “NTA को भंग कर देना चाहिए” Khan Sir ने कहा कि सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक NTA लगातार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेपर लीक करने वालों को मिले कड़ी सजा Khan Sir ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वजह से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो जांच Khan Sir ने मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच सिर्फ Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। CBI जांच जल्द पूरी करने की मांग Khan Sir ने कहा कि CBI जांच प्रक्रियाएं अक्सर काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने मांग की कि जांच तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि अगर जांच में बहुत ज्यादा समय लगेगा तो प्रभावित छात्र लंबे समय तक असमंजस में रहेंगे। उनका बयान था कि “रिपोर्ट आते-आते कई बच्चे डॉक्टर भी बन जाएंगे।” सुरक्षित और पारदर्शी एजेंसी को मिले जिम्मेदारी उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं केवल ऐसी एजेंसियों को करानी चाहिए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। उनके अनुसार बार-बार पेपर लीक और परीक्षा विवादों के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर होता जा रहा है। NTA को बताया “Never Trustable Agency” Khan Sir ने NTA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे “Never Trustable Agency” तक कह दिया। उनका कहना है कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिरी हुई है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने की अपील की, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। एजेंसी ने कहा कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया। अब परीक्षा दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। इस बीच बिहार और राजस्थान से सामने आए खुलासों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक MBBS छात्र को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। बिहार में सक्रिय था सॉल्वर गैंग Bihar के Nalanda जिले में पुलिस ने NEET परीक्षा से पहले एक संगठित सॉल्वर गैंग का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पास कराने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपये तक की डील करता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य आरोपी विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS छात्र अवधेश कुमार है। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गाड़ी चेकिंग के दौरान खुला पूरा नेटवर्क 3 मई की रात पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान स्कॉर्पियो-एन और ब्रेजा जैसी दो लग्जरी गाड़ियों को रोका गया। तलाशी के दौरान पुलिस को कई संदिग्ध दस्तावेज, पहचान पत्र और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली। इसके बाद तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य आरोपी अवधेश कुमार के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम चैट, कॉन्टैक्ट और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत मिले। इसके बाद पुलिस ने Muzaffarpur, Jamui और Aurangabad समेत कई जिलों में छापेमारी की। 50-60 लाख रुपये में तय होती थी डील पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह असली उम्मीदवार की जगह सॉल्वर बैठाने की तैयारी करता था। इसके लिए पहले 1.5 से 2 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे, जबकि पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक उज्ज्वल राज उर्फ राजा बाबू, अवधेश कुमार और अमन कुमार सिंह इस नेटवर्क के प्रमुख सदस्य थे। डॉक्टर का बेटा समेत कई आरोपी गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में Sitamarhi के डॉक्टर नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज भी शामिल है। इसके अलावा मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार समेत कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े कई लोग अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। राजस्थान से भी मिले पेपर लीक के संकेत Rajasthan में भी NEET पेपर लीक को लेकर बड़े संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों को कुछ छात्रों के पास हाथ से लिखे गए सवाल मिले, जो कथित तौर पर असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। Rajasthan Special Operations Group (SOG) ने Dehradun, Sikar और Jhunjhunu में कार्रवाई करते हुए 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल छात्रों तक पहुंच गए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि कथित क्वेश्चन बैंक केरल के एक मेडिकल छात्र के जरिए राजस्थान तक कैसे पहुंचा। NTA ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला? NTA के अनुसार 8 मई से ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। एजेंसी ने कहा कि लाखों छात्रों के हित और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए री-एग्जाम जरूरी था। छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा NTA ने साफ किया है कि छात्रों को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों को ही बरकरार रखा जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। साथ ही परीक्षा शुल्क वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। एजेंसी जल्द ही नई परीक्षा तिथि और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जारी करेगी।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है, वहीं अब राजस्थान से सामने आए एक नए खुलासे ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। जांच में एक ऐसा “गेस पेपर” सामने आया है, जिसके करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। राजस्थान SOG को छात्रों के मोबाइल में मिला PDF Rajasthan Special Operations Group (SOG) की जांच के दौरान कुछ छात्रों के मोबाइल फोन से एक PDF दस्तावेज बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि यह करीब 150 पेज का दस्तावेज था, जिसमें 400 से ज्यादा सवाल शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस PDF में कुल करीब 410 सवाल थे और इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे NEET UG 2026 परीक्षा में देखने को मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह PDF परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही WhatsApp के जरिए शेयर किया जा रहा था। आखिर इतने सवाल कैसे हुए मैच? आमतौर पर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन यहां मामला अलग बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर सवालों का मेल होना संदेह पैदा करता है। इसी वजह से अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह सिर्फ गेस पेपर था या फिर किसी संगठित नेटवर्क के जरिए असली प्रश्नपत्र से जुड़े इनपुट पहले ही लीक किए गए थे। ADGP विशाल बंसल ने क्या कहा? Vishal Bansal ने कहा कि मामला सामान्य पेपर लीक जैसा नहीं दिख रहा है। उनके मुताबिक आमतौर पर पेपर लीक करने वाले लोग प्रश्नों को सीमित लोगों तक रखते हैं ताकि आर्थिक फायदा उठाया जा सके, लेकिन इस मामले में सवालों वाला PDF बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुका था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। NTA ने रद्द की परीक्षा विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा भी कर दी गई है। केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। सुरक्षा के बावजूद कैसे हुआ लीक? NTA का दावा है कि परीक्षा के दौरान हाई-लेवल सिक्योरिटी का इस्तेमाल किया गया था। इसमें GPS ट्रैकिंग, AI आधारित CCTV निगरानी और बायोमेट्रिक जांच जैसी तकनीकों को शामिल किया गया था। इसके बावजूद सवालों के कथित लीक और गेस पेपर से बड़े स्तर पर मैच होने के बाद एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा में चूक आखिर कहां हुई।
NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। अब मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई है और जांच पूरी होने के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। दिल्ली से लेकर केरल तक छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिल्ली में NSUI का प्रदर्शन, केरल में पुलिस से झड़प दिल्ली में National Students' Union of India (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं Thiruvananthapuram में Students' Federation of India (SFI) ने कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर परिसर में घुस गए, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। नासिक से पेपर लीक का आरोपी गिरफ्तार पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। महाराष्ट्र के Nashik से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान शुभम खैरनार के रूप में हुई है। नासिक क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर यह कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने कहा कि “NEET अब परीक्षा नहीं, बल्कि नीलामी बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के सपनों के लिए मौजूदा व्यवस्था सबसे बड़ा खतरा बन गई है। वहीं Arvind Kejriwal ने दावा किया कि देश में पेपर लीक एक संगठित नेटवर्क के तहत हो रहा है। उन्होंने छात्रों से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने की अपील की। तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल Tejashwi Yadav ने कहा कि NEET परीक्षा रद्द होने से करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार हो रही पेपर लीक घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दिखाती हैं। NTA महानिदेशक बोले- सभी दोषियों को जेल भेजेंगे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक Abhishek Singh ने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष होगी और छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे सामने आया पेपर लीक का मामला अभिषेक सिंह के मुताबिक 7 मई की रात एजेंसी को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न व्हाट्सएप पर साझा किए गए थे। जांच में पाया गया कि 3 मई की परीक्षा से पहले कुछ मोबाइल फोन पर प्रश्नपत्र की पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं। जांच के दौरान कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए, जिसके बाद पेपर लीक की आशंका मजबूत हो गई। अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि 1 और 2 मई को ये फाइलें किन-किन लोगों तक पहुंची थीं और पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
ओडिशा के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। Board of Secondary Education Odisha (BSE Odisha) आज यानी 2 मई 2026 को कक्षा 10वीं (मैट्रिक) परीक्षा का परिणाम शाम 4 बजे जारी करेगा। परीक्षा में शामिल हुए छात्र लंबे समय से अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे, जो अब आधिकारिक वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। कहां देखें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होते ही छात्र निम्नलिखित आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं: bseodisha.ac.in orissaresults.nic.in इसके अलावा छात्र DigiLocker के जरिए भी अपनी डिजिटल मार्कशीट एक्सेस कर सकते हैं। ऐसे करें ऑनलाइन रिजल्ट चेक रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं “BSE Odisha 10th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट जरूर लें DigiLocker से ऐसे पाएं डिजिटल मार्कशीट अगर वेबसाइट स्लो हो जाए या ओपन न हो, तो छात्र DigiLocker का विकल्प चुन सकते हैं: DigiLocker ऐप या वेबसाइट खोलें मोबाइल नंबर या आधार के जरिए लॉगिन करें नए यूजर Sign Up करके रजिस्टर करें “Education” या “Boards” सेक्शन में जाएं BSE Odisha चुनें और आवश्यक विवरण भरें सबमिट करते ही डिजिटल मार्कशीट स्क्रीन पर आ जाएगी पास प्रतिशत और टॉपर्स पर भी रहेगी नजर रिजल्ट के साथ ही इस साल का पास प्रतिशत, टॉपर्स की सूची और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े भी जारी किए जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन का व्यापक अंदाजा मिलेगा।
देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक JEE Main के सेशन 2 का रिजल्ट आज, 20 अप्रैल 2026 को जारी किया जा सकता है। National Testing Agency (NTA) किसी भी समय परिणाम घोषित कर सकता है, जिससे लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म होने वाला है। इस बार परीक्षा 2 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की गई थी, जबकि प्रोविजनल आंसर की 11 अप्रैल को जारी की गई थी। अब सभी की नजरें रिजल्ट पर टिकी हैं, जो आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। कहां और कैसे चेक करें रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही उम्मीदवार jeemain.nta.nic.in पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। चेक करने के आसान स्टेप्स: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं “JEE Main Session 2 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें Application Number और Date of Birth दर्ज करें Submit पर क्लिक करें स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, इसे डाउनलोड और प्रिंट कर लें परीक्षा से जुड़े अहम अपडेट JEE Main Session 2 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चली थी। परीक्षा शहर की जानकारी 22 मार्च को जारी हुई थी, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से तीन दिन पहले उपलब्ध कराए गए थे। अब अगला लक्ष्य: JEE Advanced 2026 JEE Main में सफल उम्मीदवारों के लिए अगला कदम JEE Advanced है, जो देश के प्रतिष्ठित IITs में प्रवेश का रास्ता खोलता है। महत्वपूर्ण तारीखें: आवेदन शुरू: 23 अप्रैल 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 2 मई 2026 फीस जमा करने की आखिरी तारीख: 4 मई 2026 एडमिट कार्ड जारी: 11 मई 2026 परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 रिजल्ट: 1 जून 2026 आगे की रणनीति क्या हो? जिन छात्रों का JEE Main में अच्छा स्कोर है, उनके लिए अब समय बेहद महत्वपूर्ण है। Advanced परीक्षा का स्तर अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए: कॉन्सेप्ट क्लियर रखें पिछले वर्षों के पेपर्स हल करें टाइम मैनेजमेंट पर ध्यान दें
रांची। झारखंड विशेष सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 5 से 7 मई के बीच होगी। रांची के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में होने वाली यह परीक्षा सीबीटी मोड में ली जाएगी। जेएसएसी ने 3,451 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। अभ्यर्थियों को परीक्षा तिथि की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर भेज दी जायेगी। 2 दिन पहले डाउनलोड होंगे एडमिट कार्डः अभ्यर्थी परीक्षा से 2 दिन पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आवेदन संख्या और जन्मतिथि लगेगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया है कि वे परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड की 2 अतिरिक्त फोटोकॉपी और 2 पासपोर्ट साइज फोटो लेकर जाएं। परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग या किसी प्रकार की गड़बड़ी करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। अभ्यर्थियों के लिए निर्देश जारीः आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू गये हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम-2023 के तहत कार्रवाई की जायेगी। आयोग ने यह भी कहा कि परीक्षा से जुड़ी अपडेट पाने के लिए अभ्यर्थी वेबसाइट देखते रहें।
रांची। झारखंड बोर्ड (JAC) 10वीं रिजल्ट को लेकर छात्रों के बीच बड़ा कन्फ्यूजन सामने आया है। बीते दिन यानी 17 अप्रैल को कक्षा 9वीं के फाइनल एग्जाम का रिजल्ट आया। वहीं मैट्रिक के छात्रों का दावा है कि रात को अचानक रिजल्ट वेबसाइट पर लाइव दिखने लगा, और कुछ ही घंटों बाद सुबह उसका लिंक हटा दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मार्कशीट के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहे हैं। छात्रों ने क्या कहा ? छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने आधिकारिक वेबसाइट jacresults.com खोली तो वहां 10वीं रिजल्ट का लिंक सक्रिय मिला। लिंक पर क्लिक करने पर पूरी मार्कशीट दिखाई दी, जिसमें छात्र का नाम, रोल नंबर, माता-पिता का नाम और विषयवार अंक भी शामिल थे। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने अपना रिजल्ट डाउनलोड भी कर लिया और उसके स्क्रीनशॉट साझा किए। अब सवाल उठ रहा है कि क्या रिजल्ट गलती से जारी हो गया था या यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी थी। बोर्ड की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संभावित कारणों पर चर्चा इस पूरे मामले को लेकर कई संभावनाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यह तकनीकी गलती हो सकती है या वेबसाइट टेस्टिंग के दौरान लिंक गलती से लाइव हो गया होगा। यह भी संभावना जताई जा रही है कि डेटा वेरिफिकेशन का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। जल्द आ सकता है आधिकारिक अपडेट मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्मीद है कि बोर्ड जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेगा। यदि यह तकनीकी त्रुटि है तो रिजल्ट दोबारा सही तरीके से जारी किया जा सकता है। फिलहाल छात्रों को धैर्य रखने की अपील की जा रही है।
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education ने कक्षा 10वीं की सेकेंड बोर्ड परीक्षा (CBSE 10th May Exam 2026) के लिए List of Candidates (LOC) सबमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, स्कूल अब छात्रों का डेटा आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर जमा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया उन छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो मई 2026 में आयोजित होने वाली सेकेंड बोर्ड परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। बोर्ड ने साफ किया है कि LOC सबमिशन विंडो 20 अप्रैल 2026 तक ही खुली रहेगी। परीक्षा और फीस से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें सीबीएसई द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक: पहले और दूसरे चरण के लिए परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 16 अप्रैल से 20 अप्रैल 2026 तीसरे चरण के लिए शुल्क जमा करने की तिथि: 21 और 22 अप्रैल 2026 स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, ताकि छात्रों की परीक्षा में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए जारी गाइडलाइंस बोर्ड ने इस बार परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं: जिन छात्रों का नाम पहले फेज की LOC में शामिल नहीं हुआ था, वे अब सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं और परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं। जिन छात्रों का नाम पहले ही दर्ज है, उन्हें केवल परीक्षा शुल्क जमा करना होगा। जो छात्र सेकेंड परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते, वे अपना नाम वापस ले सकते हैं। गणित विषय में बदलाव की सुविधा भी दी गई है। छात्र Mathematics Standard से Mathematics Basic और इसके उलट बदलाव कर सकते हैं। अन्य विषयों में किसी प्रकार का बदलाव मान्य नहीं होगा। किन छात्रों को मिलेगा मौका बोर्ड के अनुसार, जो छात्र मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण हो चुके हैं और अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं, वे तीन विषयों में से किसी भी दो विषयों की पुनः परीक्षा दे सकते हैं, जिनमें विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाएं शामिल हैं। हालांकि, Essential Repeat (ER) कैटेगरी में आने वाले छात्र इस सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। CBSE 10वीं रिजल्ट का प्रदर्शन इस वर्ष कक्षा 10वीं का परिणाम काफी बेहतर रहा है। कुल 23,16,008 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है और ओवरऑल पास प्रतिशत 93.70 दर्ज किया गया है। लड़कियों का पास प्रतिशत: 94.99 लड़कों का पास प्रतिशत: 92.69 क्षेत्रीय प्रदर्शन में त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा सबसे आगे रहे, जहां पास प्रतिशत 99.79 दर्ज किया गया।
उच्च शिक्षा के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में गिनी जाने वाली Jawaharlal Nehru University (JNU) में एडमिशन अब पूरी तरह एंट्रेंस एग्जाम आधारित और पारदर्शी हो गया है। सही परीक्षा का चयन और अच्छा स्कोर हासिल करके छात्र यहां आसानी से दाखिला पा सकते हैं। NIRF रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन JNU न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अकादमिक गुणवत्ता और रिसर्च के लिए जानी जाती है। वर्ष 2025 की NIRF रैंकिंग में इसे देश की बेस्ट यूनिवर्सिटी की सूची में दूसरा स्थान मिला है, जो इसकी उत्कृष्टता को दर्शाता है। JNU में उपलब्ध प्रमुख कोर्स यहां कई लोकप्रिय अंडरग्रेजुएट और प्रोफेशनल कोर्स ऑफर किए जाते हैं: BA (Hons) इन फॉरेन लैंग्वेज BSc (आयुर्वेद बायोलॉजी) इंटरनेशनल रिलेशंस (IR) BTech (ड्यूल डिग्री प्रोग्राम) UG कोर्स में एडमिशन कैसे मिलता है? JNU के अधिकतर UG कोर्स में अब एडमिशन Common University Entrance Test (CUET UG) के जरिए होता है। फॉरेन लैंग्वेज और BSc जैसे कोर्स के लिए CUET स्कोर जरूरी कुछ सर्टिफिकेट कोर्स में भी CUET मान्य BTech के लिए Joint Entrance Examination Main (JEE Main) स्कोर जरूरी PG और अन्य कोर्स के लिए पोस्टग्रेजुएट और टेक्निकल कोर्स में एडमिशन के लिए अलग-अलग एग्जाम होते हैं: CUET PG GAT-B CCMT काउंसलिंग एडमिशन की पूरी प्रक्रिया अपने कोर्स के अनुसार सही एग्जाम (CUET/JEE Main) चुनें एग्जाम दें और रिजल्ट का इंतजार करें रिजल्ट के बाद JNU पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लें मेरिट लिस्ट जारी होगी सीट अलॉट होने पर डॉक्यूमेंट्स जमा कर एडमिशन कन्फर्म करें एक नहीं, कई मेरिट लिस्ट JNU एडमिशन प्रक्रिया में केवल एक मेरिट लिस्ट नहीं होती। अलग-अलग चरणों में कई मेरिट लिस्ट जारी की जाती हैं, जिससे छात्रों को एडमिशन पाने के कई मौके मिलते हैं। क्यों खास है JNU? उच्च गुणवत्ता की शिक्षा रिसर्च और इंटरनेशनल एक्सपोजर कम फीस में बेहतरीन सुविधाएं देश-विदेश में मजबूत पहचान
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल एडमिशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे हजारों NEET अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। कोर्ट ने साफ किया है कि धोखाधड़ी (फ्रॉड) के कारण खाली हुई MBBS सीट अब खाली नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि उसे मेरिट के आधार पर अगले योग्य उम्मीदवार को दिया जाएगा। क्या था मामला? मामला NEET UG 2022 से जुड़ा है एक छात्र ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए MBBS में एडमिशन ले लिया जांच में फ्रॉड सामने आने पर उसका एडमिशन रद्द कर दिया गया इससे एक सीट खाली हो गई, लेकिन मेरिट में अगले छात्र को समय पर सीट नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा- MBBS सीट एक राष्ट्रीय संसाधन (National Resource) है इसे खाली छोड़ना गलत है फ्रॉड से खाली हुई सीट तुरंत अगले योग्य कैंडिडेट को दी जानी चाहिए कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक देरी या लापरवाही के कारण सीट खाली रखना पूरी प्रक्रिया के खिलाफ है। NMC को झटका नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने इस फैसले को चुनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने NMC की अपील खारिज कर दी और छात्र के एडमिशन को बरकरार रखा छात्रों के लिए क्या बदलेगा? अब किसी भी फ्रॉड से आपका हक नहीं छीना जाएगा मेरिट लिस्ट में आगे आने वाले छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा एडमिशन प्रक्रिया बनेगी ज्यादा फेयर और ट्रांसपेरेंट
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जल्द जारी होने वाला है। परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्र-छात्राएं अब अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कब जारी होगा CBSE 10th Result 2026? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE कक्षा 10वीं का रिजल्ट अप्रैल 2026 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में जारी किया जा सकता है। परीक्षा का आयोजन: 17 फरवरी से 11 मार्च 2026 कुल छात्र: लगभग 45 लाख कहां चेक करें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इन वेबसाइट्स पर अपना परिणाम देख सकते हैं: cbseresults.nic.in results.cbse.nic.in cbse.nic.in इसके अलावा, छात्र DigiLocker (digilocker.gov.in) के जरिए भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। रिजल्ट कैसे डाउनलोड करें? रिजल्ट देखने के लिए ये आसान स्टेप्स फॉलो करें: CBSE की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं “CBSE Class 10 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें सबमिट पर क्लिक करें आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा इसे डाउनलोड करें और प्रिंटआउट निकाल लें पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना अनिवार्य है इससे कम अंक होने पर छात्र को फेल माना जाएगा जरूरी बातें रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट स्लो हो सकती है, ऐसे में धैर्य रखें DigiLocker पर भी रिजल्ट उपलब्ध रहेगा मार्कशीट का प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने एडमिशन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तार से सफाई दी है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं तय गाइडलाइंस और पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित होती हैं, और किसी भी तरह के भेदभाव के आरोप निराधार हैं। CUET के जरिए मेरिट-बेस्ड एडमिशन DU के अनुसार, अब ज्यादातर अंडरग्रेजुएट (UG) और कई पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में एडमिशन CUET के स्कोर के आधार पर होता है। इस प्रक्रिया में इंटरव्यू की भूमिका सीमित कर दी गई है, जिससे एडमिशन पूरी तरह मेरिट आधारित हो गया है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है। पिछले शैक्षणिक सत्र में UG कोर्सेज में 70,395 से ज्यादा छात्रों को एडमिशन मिला। UG एडमिशन 2025-26: कैटेगरी वाइज आंकड़े UR: 32,777 (46.56%) OBC: 17,971 (25.52%) SC: 10,517 (14.93%) ST: 3,251 (4.62%) EWS: 5,879 (8.35%) PG एडमिशन 2025-26: संतुलित भागीदारी UR: 4,022 (38.59%) OBC: 3,115 (29.88%) SC: 1,488 (14.27%) ST: 614 (5.89%) EWS: 1,203 (11.54%) इन आंकड़ों से यूनिवर्सिटी का दावा है कि सभी वर्गों को समान अवसर दिया गया है। टीचर भर्ती: 5,000+ नियुक्तियां 2021 से 15 मार्च 2026 के बीच DU में कुल 5,056 शिक्षकों की भर्ती की गई: General: 2,123 (41.99%) OBC: 1,282 (25.35%) SC: 717 (14.18%) ST: 349 (6.90%) EWS: 422 (8.35%) PwD: 163 (3.22%) यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भर्ती प्रक्रिया भी विविधता और नियमों के अनुरूप की गई है। DU ने अपने आधिकारिक आंकड़ों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि एडमिशन और भर्ती दोनों ही प्रक्रियाएं पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित हैं। CUET सिस्टम के आने के बाद एडमिशन प्रक्रिया और अधिक संरचित और भरोसेमंद बनी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।