पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान जारी है। दक्षिण 24 परगना जिले की 144-फलता सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराई जा रही है। पिछली वोटिंग के दौरान ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने मतदान रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया था। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा ले रहे हैं। वोटों की गिनती 24 मई को होगी। वोटरों ने कहा- इस बार माहौल शांतिपूर्ण मतदाता देबाशीष घोष ने कहा कि इस बार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और लोग बिना किसी डर के वोट डाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पिछली बार लोगों को घर-घर जाकर तय समय पर वोट डालने के लिए कहा जा रहा था और इलाके में डर का माहौल था, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से मतदाता खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी ने जीत का किया दावा भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि इलाके में मतदान शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा माहौल है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करेगी। पांडा ने कहा कि लोग आराम से वोट डाल रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनकी पार्टी डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल करेगी। उन्होंने टीएमसी नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें पहले ही हार का अंदाजा हो गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, इस बार हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के आठ जवान तैनात किए गए हैं। पिछली वोटिंग में प्रत्येक बूथ पर केवल चार जवान मौजूद थे। फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 35 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की गई हैं। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीम भी बनाई गई हैं। टीएमसी उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था। हालांकि पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक वाम दलों का प्रभाव रहा है, इसलिए मुकाबले में वामपंथी दलों की भूमिका को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले मतदान में क्या हुआ था? 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों से ईवीएम पर इत्र और चिपकने वाला टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था।
देश के चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रशासनिक कामकाज फिर से रफ्तार पकड़ने जा रहा है. भारत निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लागू आदर्श आचार संहिता (MCC) तत्काल प्रभाव से हटा दी गयी है. 15 मार्च से लागू पाबंदियों के खत्म होने के बाद अब नयी सरकारें और प्रशासन विकास योजनाओं, सरकारी परियोजनाओं और नीतिगत फैसलों पर तेजी से काम कर सकेंगे. किन राज्यों में खत्म हुई आचार संहिता? निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर जानकारी दी कि निम्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अब आचार संहिता लागू नहीं रहेगी: Assam Kerala Tamil Nadu West Bengal Puducherry इसके अलावा गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की उन विधानसभा सीटों पर भी प्रतिबंध समाप्त कर दिये गये हैं, जहां उपचुनाव कराए गये थे. पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर अभी जारी रहेगी सख्ती हालांकि पश्चिम बंगाल में एक सीट पर अब भी चुनावी पाबंदियां लागू रहेंगी. Falta विधानसभा सीट पर चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान (Re-polling) के आदेश दिये हैं. जब तक वहां मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उस क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी. यानी फालता सीट पर प्रशासन अभी कोई नई सरकारी घोषणा या परियोजना शुरू नहीं कर सकेगा. 15 मार्च से थमा हुआ था विकास कार्य इन राज्यों में 15 मार्च से चुनाव आचार संहिता लागू थी. इसके कारण सरकारें नई योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास या बड़े प्रशासनिक फैसले नहीं ले पा रही थीं. विधानसभा चुनाव तीन चरणों – 9 अप्रैल, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल – को संपन्न हुए थे. 4 मई को नतीजे घोषित होने के बाद अब राजनीतिक तस्वीर साफ हो चुकी है. अब क्या बदलेगा? आचार संहिता हटने के बाद अब: रुकी हुई सरकारी योजनाओं को मंजूरी मिल सकेगी विकास परियोजनाओं पर काम तेज होगा नई नीतियों और घोषणाओं का रास्ता खुलेगा प्रशासनिक नियुक्तियों और बजट खर्च में तेजी आयेगी नई सरकारों के गठन के साथ अब इन राज्यों में शासन और विकास का नया चरण शुरू होने जा रहा है.
SIR Impact on Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हार और जीत के कारणों को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गयी है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बड़ी हार के पीछे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को एक अहम फैक्टर माना जा रहा है. चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण में यह दावा किया जा रहा है कि जिन सीटों पर मतदाता सूची से सबसे ज्यादा नाम हटाये गये, वहां भाजपा को भारी फायदा मिला. मतदाता सूची में बड़े बदलाव और बदला चुनावी गणित चुनाव आयोग की ओर से चलायी गयी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट और कथित फर्जी मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ा, जहां तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता था. बताया जा रहा है कि बंगाल की 177 ऐसी विधानसभा सीटें थीं, जहां हटाये गये मतदाताओं की संख्या 2021 में टीएमसी की जीत के अंतर से अधिक थी. इन सीटों में से 140 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की. इससे यह चर्चा तेज हो गयी है कि मतदाता सूची में बदलाव ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया. 15 हजार से ज्यादा नाम हटे, कई मंत्री हारे विश्लेषण के मुताबिक, करीब 50 सीटों पर 15 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाये गये थे. इन्हीं सीटों पर टीएमसी के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. भाजपा ने इन इलाकों में आक्रामक प्रचार और बूथ स्तर पर मजबूत रणनीति अपनायी, जिसका फायदा उसे चुनाव में मिला. SIR प्रक्रिया से कैसे बदला समीकरण? निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया में डिजिटल वेरिफिकेशन, आधार लिंकिंग और रिकॉर्ड मिलान के जरिए मतदाता सूची को अपडेट किया गया. इसके तहत मृत और पलायन कर चुके मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे कथित फर्जी मतदान की संभावना कम हुई और चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के चुनावी नेटवर्क पर बड़ा झटका बताया. ममता बनर्जी ने पहले ही जतायी थी आशंका चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे. पार्टी का आरोप था कि उनके समर्थकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाये जा रहे हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बताया था. अब चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गयी है. भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची की सफाई से वास्तविक जनमत सामने आया, जबकि टीएमसी इसे अपने वोट बैंक को कमजोर करने की रणनीति बता रही है. भाजपा को मिला बड़ा फायदा राज्य में भाजपा ने 207 सीटों तक पहुंचकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया, सत्ताविरोधी माहौल और बूथ स्तर की मजबूत रणनीति ने भाजपा को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. फिलहाल बंगाल की राजनीति में SIR प्रक्रिया सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है.
हैदराबाद, एजेंसियां। सनराइजर्स हैदराबाद ने पंजाब किंग्स को 33 रन से हराकर IPL 2026 पॉइंट्स टेबल में टॉप स्थान हासिल कर लिया। वहीं, पंजाब को इस सीजन में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम पहले स्थान से खिसककर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में पंजाब ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। इसके बाद हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में 236 रन के टारगेट का पीछा करते हुए पंजाब की टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। हैदराबाद की ओर से 2 फिफ्टी लगी पहले बैटिंग करने उतरी हैदराबाद के लिए हेनरिक क्लासन और ईशान किशन ने अर्धशतक लगाए। क्लासन ने 43 बॉल पर 69 और ईशान ने 32 बॉल पर 55 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 88 रन की साझेदारी हुई। क्लासन और नीतीश रेड्डी (29*) के बीच चौथे विकेट के लिए 63 रन की साझेदारी हुई। इसके अलावा अभिषेक शर्मा (35) और ट्रैविस हेड (38) ने 55 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की। पंजाब के लिए लॉकी फर्ग्यूसन, विजयकुमार वैशाख, युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला। काम ना आया कोनोली का शतक पंजाब का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टीम ने फील्डिंग के दौरान 3 कैच छोड़े, जबकि टारगेट का पीछा करते समय लगातार विकेट गंवाती रही। पंजाब के लिए कूपर कोनोली के अलावा कोई बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। कोनोली ने 59 बॉल पर नाबाद 107 रन बनाए। उनके अलावा मार्कस स्टोयनिस ने 28 और सूर्यांश शेडगे ने 25 रन का योगदान दिया। हैदराबाद के लिए पैट कमिंस और शिवांग कुमार ने 2-2 विकेट लिए। नीतीश रेड्डी, ईशान मलिंगा और साकिब हुसैन को 1-1 विकेट मिला। पैट कमिंस प्लेयर ऑफ द् मैच चुने गये।
नई दिल्ली: राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर अभी निष्पक्ष तरीके से लोकसभा चुनाव कराए जाएं, तो BJP 140 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी। उनके इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता’ राहुल गांधी ने दावा किया कि BJP के मौजूदा 240 सांसदों में से “हर छठा सांसद” कथित रूप से वोट चोरी के जरिए जीतकर आया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि BJP की अपनी भाषा में ऐसे सांसदों को “घुसपैठिया” कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यही तर्क लागू किया जाए, तो हरियाणा की पूरी सरकार को भी “घुसपैठिया” कहा जा सकता है। ‘एक्स’ पर पोस्ट कर साधा निशाना राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में हेरफेर कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थाओं को “जेब में रखने” और चुनावी प्रक्रिया को “तोड़-मरोड़” कर परिणाम प्रभावित किए जा रहे हैं। असम और बंगाल के नतीजों के बाद बयान राहुल गांधी का यह बयान असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में BJP की जीत के बाद आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में भी चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। राजनीतिक माहौल गरम राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। BJP की ओर से अभी इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग (EC) ने नई विधानसभा के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। 4 मई को आए चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, करीब 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) 80 सीटों पर सिमट गई। नतीजों के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 8 मई को BJP विधायक दल की बैठक सूत्रों के मुताबिक, 8 मई को BJP विधायक दल की अहम बैठक हो सकती है, जिसमें नेता का चयन किया जाएगा। इस बैठक के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता पहुंचने की भी संभावना है, जो पार्टी के पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रह सकते हैं। राज्यपाल को भेजा गया नोटिफिकेशन चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना राज्यपाल को भेज दी गई है। इसके साथ ही विजयी दल को सरकार गठन का दावा पेश करने का अधिकार मिल गया है। 7 मई को खत्म होगा विधानसभा का कार्यकाल पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसी बीच निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और वोटों की लूट हुई है। ममता बनर्जी ने कहा कि “हम असल मायने में नहीं हारे हैं, ऐसे में इस्तीफे का सवाल नहीं उठता।” 9 मई को हो सकता है शपथग्रहण सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथग्रहण 9 मई को हो सकता है। यह दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का है, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इस तारीख की पुष्टि के संकेत दिए हैं। अन्य राज्यों में भी प्रक्रिया शुरू चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी की है। इन अधिसूचनाओं के बाद सभी राज्यों में विजयी दल सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं। फिलहाल, बंगाल में सबकी नजर BJP विधायक दल की बैठक और मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान पर टिकी है, जो राज्य की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत शनिवार को राज्य के 15 बूथों पर पुनर्मतदान (री-पोल) कराया जा रहा है। इनमें डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। EVM खराबी का आरोप, वोटर्स परेशान डायमंड हार्बर के रॉयनगर प्राइमरी स्कूल स्थित बूथ नंबर 243 पर मतदाताओं ने EVM में खराबी की शिकायत की। एक वोटर ने कहा कि मशीन ठीक से काम नहीं कर रही लोगों को आधे घंटे से ज्यादा समय तक लाइन में इंतजार करना पड़ा तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को जल्द सामान्य करने का दावा किया गया है। क्यों कराना पड़ा री-पोल? दरअसल, 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान इन बूथों पर: EVM से छेड़छाड़ के आरोप राजनीतिक दलों के बीच झड़प मतदान प्रक्रिया में बाधा जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। दक्षिण 24 परगना के सभी बूथ प्रभावित ये सभी 15 बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं, जिसे चुनाव के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल इस बार पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है: पहले चरण (23 अप्रैल): 93.19% वोटिंग दूसरे चरण (29 अप्रैल): 92.48% वोटिंग कुल 294 सीटों पर औसत मतदान: 92.84% इतने बड़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। TMC का BJP पर आरोप री-पोल के बीच शशि पांजा ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि BJP ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की ज्यादा जगहों पर री-पोल कराकर बंगाल की छवि खराब करने की साजिश रची गई TMC ने उकसावे के बावजूद संयम बनाए रखा पांजा ने यह भी दावा किया कि बीजेपी चुनावी तौर पर कमजोर स्थिति में है, इसलिए इस तरह की रणनीति अपना रही है। 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले री-पोल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक पहले सियासी घमासान अब अदालत तक पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर शनिवार को विशेष सुनवाई होनी है, जिससे 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले सस्पेंस और बढ़ गया है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की जड़ चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े हाईकोर्ट के निर्देश हैं। अदालत ने हाल ही में मतगणना केंद्रों की सुरक्षा, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती और कुछ याचिकाओं (जैसे पुनर्मतदान) पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। इससे पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने निर्देश दिया था कि हर काउंटिंग सेंटर पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। TMC ने इस फैसले का विरोध किया और इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। TMC की दलील क्या है? TMC का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस तरह के निर्देशों से मतगणना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी का आरोप है कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं न्यायिक हस्तक्षेप से प्रशासनिक प्रक्रिया जटिल हो सकती है इससे चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है इन्हीं तर्कों के आधार पर पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्यों अहम? शनिवार को होने वाली सुनवाई कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है, तो TMC को बड़ी राहत मिलेगी अगर रोक नहीं लगती, तो हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ही मतगणना होगी यह मामला चुनाव के दौरान अदालत की भूमिका को लेकर एक नई नजीर भी पेश कर सकता है क्या रुक सकती है मतगणना? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मतगणना (4 मई) पर रोक लगने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। आमतौर पर अदालतें चुनाव प्रक्रिया में अंतिम चरण में दखल देने से बचती हैं, जब तक कि कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी समस्या न हो। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि: मतगणना तय समय पर होगी सुप्रीम कोर्ट केवल प्रक्रिया या निर्देशों में बदलाव कर सकता है विपक्ष का क्या कहना है? अन्य राजनीतिक दल, खासकर बीजेपी, TMC के इस कदम को हार के डर से उठाया गया कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम से पहले कानूनी विवाद खड़ा करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा और हिंसा पर पहले से सख्ती गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव बाद हिंसा को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। राज्य में सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, ताकि मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना (4 मई) को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। राज्य में अक्सर चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए इस बार भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। “राज्य के हर कोने में कानून का राज रहेगा” चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उपद्रव या अवैध गतिविधि को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि मतगणना के दौरान और उसके बाद भी पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। 700 CAPF कंपनियों की तैनाती, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 700 कंपनियों को राज्यभर में तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती सिर्फ काउंटिंग डे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नतीजों के बाद भी संवेदनशील इलाकों में बलों की मौजूदगी बनी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में बांटा गया है: पहला घेरा: काउंटिंग सेंटर के बाहरी इलाके में, जहां भारी संख्या में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। दूसरा घेरा: सेंटर के प्रवेश द्वार पर, जहां पहचान और जांच की कड़ी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तीसरा घेरा: काउंटिंग हॉल के अंदर, जहां केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, ‘वल्नरेबल’ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या हिंसक गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। QR कोड आधारित डिजिटल एंट्री सिस्टम इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाते हुए काउंटिंग सेंटर्स में प्रवेश के लिए QR-Coded Photo ID अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस डिजिटल पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम फर्जी पहचान या अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 24/7 कमांड हब और हाई-टेक निगरानी चुनाव आयोग ने राज्यभर में अत्याधुनिक कमांड हब स्थापित किए हैं, जहां से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। सभी मतगणना केंद्रों को CCTV कैमरों से जोड़ा गया है और उनकी लाइव फीड सीधे आयोग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या सामने आने पर तुरंत एक्शन लेने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी तैनात की गई है। आम जनता के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था आयोग ने नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 345 0008 और ईमेल wbfreeandfairpolls@gmail.com जारी किया है। कोई भी व्यक्ति हिंसा या गड़बड़ी की सूचना दे सकता है शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है हाईकोर्ट की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरा नागरिक और पुलिस प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेगा। कोर्ट ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। पोस्ट-पोल हिंसा रोकने पर विशेष फोकस पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील जिलों में फ्लैग मार्च लगातार ड्रोन और CCTV निगरानी स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम चुनाव आयोग की यह व्यापक और सख्त तैयारी इस बात का संकेत है कि इस बार किसी भी कीमत पर शांति भंग नहीं होने दी जाएगी। आयोग का उद्देश्य सिर्फ मतगणना कराना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जहां हर नागरिक बिना डर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।
कोलकाता में गरमाया सियासी माहौल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इसे “धांधली” के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर “आतंकियों जैसा व्यवहार” कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। BJP पर “इलेक्शन रिगिंग” का आरोप कोलकाता में TMC पार्षद असीम बोस से मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा चुनाव में गड़बड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल डराने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन प्रवेश कर रहे हैं और लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी तरह की एक घटना देर रात TMC पार्षद असीम बोस के घर पर हुई, जिसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचीं। चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर्स पर विवादित बयान ममता बनर्जी ने Election Commission of India के ऑब्जर्वर्स पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार निष्पक्षता के विपरीत दिखाई दे रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने ममता के आरोपों को चुनावी माहौल बिगाड़ने वाला बताया है, जबकि TMC ने अपने रुख का बचाव किया है। चुनाव के माहौल में ममता बनर्जी के इन आरोपों ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और भाजपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग पर कार्रवाई का दबाव यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे। निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। इस बार लक्ष्य साफ है फर्जी मतदान (प्रॉक्सी वोटिंग) और चुनावी हिंसा पर पूरी तरह रोक लगाना। इसके लिए पारंपरिक सुरक्षा के साथ आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। 100 मीटर की ‘लक्ष्मण रेखा’ और डबल वेरिफिकेशन हर मतदान केंद्र के चारों ओर 100 मीटर का नो-एंट्री ज़ोन बनाया जाएगा। इस क्षेत्र में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा। सीमा पर दो वेरिफिकेशन डेस्क लगाए जाएंगे, जहां बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच करेंगे। दोहरी जांच के बाद ही किसी को बूथ तक जाने की अनुमति होगी, जिससे दबाव में वोटिंग और फर्जी पहचान के मामलों पर रोक लगेगी। AI और बॉडी कैम से निगरानी चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर Artificial Intelligence का उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे किसी भी असामान्य भीड़ या संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पहचानकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय बलों और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को बॉडी-वॉर्न कैमरों से लैस किया जाएगा, जिससे हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। आसपास के सरकारी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी केंद्रीय स्तर पर होगी। ASD लिस्ट और वोटर पर्चियों पर सख्ती अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत (ASD) मतदाताओं की सूची को अपडेट किया गया है। अगर कोई संदिग्ध मतदाता वोट डालने आता है, तो उसकी पहचान की कई स्तरों पर जांच होगी। साथ ही, BLO को घर-घर जाकर वोटर पर्चियां बांटने का निर्देश दिया गया है। अंतिम 72 घंटे: ‘स्पेशल 100’ प्लान मतदान से पहले के आखिरी 72 घंटों के लिए विशेष सुरक्षा योजना लागू की गई है। इसमें त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और जागरूकता अभियान शामिल हैं, ताकि चुनावी अपराधों को रोका जा सके और मतदाता सुरक्षित माहौल में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
कोलकाता/नई दिल्ली: Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद मतदाता इस बार भी वोट डाल सकेंगे, भले ही फैसला मतदान से ठीक पहले क्यों न आया हो।क्या है पूरा मामला? West Bengal में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान: करीब 90 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए लंबित सूची में 50 लाख नाम शामिल इनमें से 27 लाख नाम हटाए जा चुके हैं बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है पहले नियम यह था कि अगर किसी का नाम बाद में सूची में जुड़ भी जाए, तो वह फ्रीज हो चुकी वोटर लिस्ट के कारण वोट नहीं डाल सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? Supreme Court of India ने स्पष्ट किया: अगर ट्रिब्यूनल चुनाव से 2 दिन पहले भी फैसला देता है, तो भी वोट देने का अधिकार मिलेगा जरूरत पड़ने पर पूरक (Supplementary) वोटर लिस्ट जारी की जाएगी चुनाव आयोग को इस फैसले को लागू करना होगा यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया, जो कोर्ट को “पूर्ण न्याय” के लिए विशेष अधिकार देता है।चुनाव पर क्या होगा असर? पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल यानी 21 और 27 अप्रैल तक जिन मामलों का निपटारा होगा, उन मतदाताओं को वोट देने का मौका मिलेगा। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं Mamata Banerjee सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया TMC सांसद काकली घोष दस्तीदार ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया CPM नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि यह आम लोगों की कानूनी लड़ाई की जीत है क्यों है यह फैसला अहम? यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि: इससे लाखों लोगों का मताधिकार सुरक्षित हुआ चुनाव प्रक्रिया में न्याय और समानता सुनिश्चित करने की कोशिश हुई कोर्ट ने दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह कानूनी तकनीकी अड़चनों को दरकिनार कर सकता है सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे उन लोगों को भी वोट देने का मौका मिलेगा, जो अब तक सिस्टम की वजह से बाहर हो रहे थे। इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तनाव बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि उनकी गाड़ी की तलाशी लेने की कोशिश क्यों की गई, जबकि अन्य नेताओं के साथ ऐसा नहीं हो रहा। एयरपोर्ट जाते वक्त तलाशी की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे जाते समय केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उनकी कार की तलाशी लेने की कोशिश की। इस पर उन्होंने कहा, “मैंने कहा तलाशी लो, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सिर्फ तृणमूल के नेताओं को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?” ‘PM मोदी और अमित शाह की गाड़ी क्यों नहीं चेक?’ इस्लामपुर में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने सवाल उठाया: नरेंद्र मोदी की गाड़ी की तलाशी क्यों नहीं? अमित शाह के काफिले की जांच क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि अगर जांच हो रही है, तो सभी दलों के नेताओं पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। ‘मैं कोई चोर नहीं हूं’ मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “अगर आपमें हिम्मत है तो रोज मेरी गाड़ी की तलाशी लीजिए। मैं कोई चोर नहीं हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह सरकार से वेतन के रूप में एक भी पैसा नहीं लेतीं। चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने फ्लाइंग सर्विलांस टीमों को निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री को छोड़कर पार्टी के अन्य नेताओं और उनके परिवार के वाहनों की जांच की जाए। इनमें अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। बढ़ता राजनीतिक टकराव बंगाल में दो चरणों में होने वाले मतदान से पहले यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा रहा है। एक तरफ TMC चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्ती को जरूरी बता रहा है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह विवाद आगे और तूल पकड़ता है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर से बुलेटप्रूफ गाड़ियां मंगवाई गई हैं, जिन्हें दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर समेत आसपास के इलाकों में रूट मार्च करते देखा गया। रूट मार्च से बढ़ा भरोसा बुधवार को केंद्रीय बलों ने इन बुलेटप्रूफ वाहनों के साथ भवानीपुर, पद्दोपुकुर, चक्रबेरिया, शरत बोस रोड और हाजरा इलाके में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान माइक के जरिए लोगों से अपील की गई कि 23 और 29 अप्रैल को बिना किसी डर के मतदान करें और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करें। हिंसा की स्थिति से निपटने की तैयारी चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन बुलेटप्रूफ गाड़ियों का इस्तेमाल मतदान के दौरान किसी भी संभावित हिंसक स्थिति—जैसे गोलीबारी, बमबाजी या पथराव—से निपटने के लिए किया जाएगा। गाड़ियों में एक साथ 8 कमांडो सवार हो सकते हैं जरूरत पड़ने पर धुआं छोड़कर भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा वीआईपी या आम लोगों को आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा लोगों में उत्सुकता भवानीपुर में इन खास गाड़ियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए। कई लोगों ने इनकी तस्वीरें भी लीं। खाकी रंग की ये गाड़ियां पूरी तरह बुलेटप्रूफ हैं और आमतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं। आयोग का संदेश चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस और केंद्रीय बल तुरंत कार्रवाई करेंगे, ताकि मतदाता निर्भीक होकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद निर्मल दत्त को वोटरों को कथित रूप से धमकाने और चुनाव को प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। बुधवार को उन्हें विधाननगर कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। शिकायत के बाद हुई कार्रवाई मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब भाजपा प्रत्याशी शरदबत मुखर्जी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्मल दत्त वोटरों को डराकर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने विधाननगर पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की थी। शिकायत के आधार पर विधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस ने दत्ताबाद इलाके से निर्मल दत्त को गिरफ्तार किया। सुजीत बोस के करीबी बताए जाते हैं निर्मल दत्त को राज्य मंत्री सुजीत बोस का करीबी माना जाता है, जो विधाननगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दत्त की पत्नी भी विधाननगर नगर निगम के वार्ड संख्या 38 से तृणमूल कांग्रेस की पार्षद हैं। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में इस्लामपुर में एक रैली के दौरान चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि तृणमूल के एक नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनकी जगह सौ अन्य नेता खड़े हो जाएंगे। वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को सॉल्टलेक में हुई एक बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमा गया। इस वीडियो में निर्मल दत्त कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर किसी ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि एक मोबाइल ऐप के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किसने किसे वोट दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पहले भी लग चुके हैं आरोप यह पहली बार नहीं है जब निर्मल दत्त विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर सॉल्टलेक के दत्ताबाद इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लग चुका है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
देश में प्रस्तावित महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर करीब 500 सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने केंद्र सरकार को एक संयुक्त पत्र लिखा है। 495 हस्ताक्षरों वाले इस पत्र में संसद के विशेष सत्र और विधेयक की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ‘जल्दबाज़ी में बुलाया गया विशेष सत्र’ पत्र में कहा गया है कि 16–18 अप्रैल 2026 के लिए बुलाया गया विशेष सत्र जल्दबाज़ी में आयोजित किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार: कई राज्यों में चुनाव जारी हैं आचार संहिता लागू है ऐसे समय में महत्वपूर्ण विधेयक लाना उचित नहीं ‘पर्याप्त समय नहीं दिया गया’ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि: महिला समूहों और संगठनों को सुझाव देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला व्यापक चर्चा और परामर्श के बिना बिल लाया जा रहा है ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग पत्र में सरकार से मांग की गई है कि: प्रस्तावित विधेयकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा किया जाए परिसीमन और जनगणना से अलग रखने की अपील हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुझाव दिया कि: महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाए सत्र का फोकस केवल Nari Shakti Vandan Adhiniyam में आवश्यक संशोधनों तक सीमित हो निर्वाचन आयोग की भूमिका पर चिंता पत्र में Election Commission of India की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए, खासकर: आरक्षित सीटों की पहचान पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता कौन? इस पत्र पर कई प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें शामिल हैं: Romila Thapar Nandini Sundar Yogendra Yadav Amu Joseph Anjana Prakash Kalpana Kannabiran क्या है मुद्दे की अहमियत? महिला आरक्षण बिल को देश की राजनीति में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, लेकिन इस पत्र से साफ है कि: प्रक्रिया और समय को लेकर असहमति है पारदर्शिता और व्यापक चर्चा की मांग तेज हो गई है अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस बिल पर आगे व्यापक सहमति बन पाती है।
Bihar Politics: बिहार विधान परिषद की भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार इस सीट पर 12 मई को मतदान और 14 मई को मतगणना होगी। क्यों खाली हुई सीट? यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। पहले इस पर जदयू नेता राधा चरण साह का कब्जा था विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक था चुनाव का पूरा शेड्यूल 16 अप्रैल: अधिसूचना जारी 23 अप्रैल: नामांकन की अंतिम तिथि 24 अप्रैल: नामांकन पत्रों की जांच 27 अप्रैल: नाम वापसी की आखिरी तारीख 12 मई: मतदान 14 मई: मतगणना आचार संहिता लागू, बढ़ी सियासी हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। NDA बनाम विपक्ष, मुकाबला रोचक यह सीट पहले जदयू (NDA) के पास थी NDA फिर से जीत का दावा कर रहा है वहीं विपक्ष इस मौके को भुनाने की तैयारी में है 27 वोट से जीते थे राधा चरण साह 2025 के विधानसभा चुनाव में राधा चरण साह ने: संदेश सीट से जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की राजद के दीपू सिंह को सिर्फ 27 वोटों से हराया उन्हें कुल 80,598 वोट मिले यह मुकाबला काफी चर्चित रहा था।
नई दिल्ली/गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी: केरल, असम और पुडुचेरी की सभी विधानसभा सीटों पर आज (गुरुवार, 9 अप्रैल) मतदान जारी है। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग एक ही चरण में हो रही है। इन राज्यों में कुल 296 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं और नतीजे 4 मई को घोषित होंगे। कहां कितनी सीटों पर मतदान? असम: 126 सीटें केरल: 140 सीटें पुडुचेरी: 30 सीटें असम: 722 उम्मीदवार मैदान में कुल 722 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर करीब 2.50 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे 31,490 मतदान केंद्र बनाए गए शाम 5 बजे तक वोटिंग जारी बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में, कांग्रेस भी जोरदार मुकाबले में केरल: 883 उम्मीदवार, कड़ी सुरक्षा 883 उम्मीदवार चुनावी मैदान में करीब 2.71 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे 30,495 मतदान केंद्र स्थापित 1.46 लाख चुनाव कर्मी तैनात सुरक्षा के लिए 76,000 पुलिस और केंद्रीय बल मौजूद PM मोदी की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम, केरल और पुडुचेरी के लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। युवाओं और महिलाओं से खासतौर पर आगे आने को कहा लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आग्रह नेताओं ने डाला वोट केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने पथानामथिट्टा में मतदान किया मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने धर्मदम सीट पर वोट डाला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। मालदा जिले के वैष्णव नगर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे केंद्र की सत्ता से भी भाजपा को हटाने का संकल्प ले चुकी हैं। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि वह पहले पश्चिम बंगाल से भाजपा को बाहर करेंगी और इसके बाद दिल्ली की सत्ता से भी उसे उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने इसे जनता के सामने किया गया वादा बताते हुए कहा कि देश की मौजूदा नीतियां जनता को नुकसान पहुंचा रही हैं और बदलाव की आवश्यकता है। निर्वाचन आयोग और केंद्र पर तीखा हमला सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव कर विकास कार्यों को बाधित किया है। उनके अनुसार, यह कदम निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मालदा घटना पर सख्त रुख हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राज्य की छवि के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। विपक्षी दलों पर मिलीभगत का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पार्टियां अंदरखाने एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं और राज्य के विकास में बाधा डाल रही हैं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे इन दलों को चुनाव में जवाब दें। चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी घमासान पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।